काकतीय वंश : दक्षिण भारत की शक्ति
➣ काकतीय वंश के राजाओं का शासन आधुनिक समय के प्रसिद्ध शहर हैदराबाद के पूर्वी भाग तेलंगाना में था।
➣ कल्याणी के चालुक्य वंश के उत्कर्ष काल में काकतीय वंश के राजा चालुक्यों के सामन्तों के रूप में अपने राज्य का शासन करते थे।
➣ काकतीय लोग अपने को चोल करिकाल का वंशज मानते थे। इस वंश का प्रथम ज्ञात शासक बेत प्रथम (1000-1030 ई.) था
➣ कालांतर में उसने राजेन्द्र चोल के आक्रमण से उत्पन्न अव्यवस्था का लाभ उठाकर नलगोंड (हैदराबाद) में अपने लिये एक स्वतंत्र राज्य स्थापित कर दिया।
➣ उसका पुत्र तथा उत्तराधिकारी प्रोलराज प्रथम (1030-1075 ई.) वातापी के पश्चिमी चालुक्यों का सामंत था।
➣ उसने चालुक्य नरेश सोमेश्वर प्रथम की आरे से युद्धों में भाग लिया तथा पर्याप्त ख्याति अर्जित कर ली। उसकी सेवाओं से प्रसन्न होकर सोमेश्वर ने अंमकोंड विषय (वारंगल में हनुमकुंड) का उसे स्थायी सामंत बना दिया।
➣ उसके उत्तराधिकारी बेत द्वितीय (1075-1090 ई.) ने चालुक्य नरेश विक्रमादित्य से कुछ और प्रदेश प्राप्त किया तथा अपन राजधानी अंमकोंड में स्थापित किया।
➣ कालांतर में क्रमश: प्रोलराज द्वितीय (1110-1158 ई.), रुद्रदेव प्रथम (1158-1195 ई.), महादेव (1195-1198 ई.) व गणपतिदेव (1199-1261 ई.) ने शासन किया।
गणपतिदेव (1199-1261 ई.) : साम्राज्य विस्तार
➣ गणपति अपने वंश का सर्वाधिक शक्तिशाली राजा था। उसने आंध्र, नेल्लोर, कांची, कर्नूल को जीतकर अपने राज्य का विस्तार किया तथा 60 वर्षों तक शासन करता रहा।
➣ वह एक सफल प्रशासक था, तथा उसने व्यापार और कृषि का विकास करने पर बहुत ज़ोर दिया। मोटु पटली, जो कि अब कृष्णा ज़िले में है, गणपतिदेव के राज्य का समुद्री बंदरगाह था।
➣ वारंगल शहर का निर्माण गणपतिदेव ने वहाँ पर दो क़िले बनवाकर पूरा किया था। बाद के समय में उसने यहाँ अपनी राजधानी स्थानांतरित की।
➣ गणपतिदेव के एक भी पुत्र नहीं था उसकी दो पुत्रियाँ थीं- रुद्रमा देवी और गणपम्बा। उसने अपने उत्तराधिकारी के रूप में गणपतिदेव ने रुद्रमा देवी को बनाया।
रुद्रमा देवी (1262 – 1289 ई.) : भारत की प्रमुख महिला शासक
➣ वारंगल के काकतीय वंश की रानी थी। उसका प्रारंभिक नाम रुद्राम्बा था। जब रुद्रमा देवी ने शासन सम्भाला तब उसकी आयु मात्र 14 वर्ष थी।
➣ रुद्रमा देवी का विवाह चालुक्य वंश के राजकुमार वीरभद्र के साथ हुआ था।
➣ इटली के प्रसिद्ध मार्कोपोलो ने अपनी पुस्तक में रुद्रमा देवी की प्रशंसा की है और इसे अनुकरणीय बताते हुए इटली में भी महिला शासिका घोषित की गयी।
प्रतापरुद्रदेव या रुद्रदेव द्वितीय (1289-1323 ई.) : दिल्ली सल्तनत संघर्ष एवं पतन
➣ प्रतापरुद्रदेव काकतीय वंश का अंतिम राजा था। वह रुद्रमा देवी का पुत्र और राज्य का उत्तराधिकारी था।
➣ प्रतापरुद्रदेव के शासन काल में ही ख़िलजी एवं तुग़लक़ शासकों ने वारंगल पर आक्रमण हुआ।
➣ 14वीं सदी के प्रारम्भ में अफ़ग़ान सुल्तान अलाउद्दीन ख़िलज़ी का प्रसिद्ध सेनापति मलिक काफ़ूर दक्षिण भारत की विजय के दौरान देवगिरि के यादवों और द्वारसमुद्र के होयसलों के समान वारंगल के काकतीयों की भी विजित कर लिया।
➣ 1512 ई. में हिन्दू राज्य वारांगल के ध्वंसावेषों पर गोलकुण्डा राज्य की स्थापना हुई।
➣ सर्वप्रथम काकतीय सम्राज्य मे ही नायंकार प्रणाली का उद्भव हुआ जो कि कालान्तर में विजयनगर के प्रशासन की मुख्य विशेषता बनी।
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