जौनपुर (शर्की वंश) : उत्तर भारत का सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक केंद्र
| शासक | शासनकाल | प्रमुख जानकारी / महत्वपूर्ण घटनाएँ |
|---|---|---|
| मलिक सरवर (ख्वाजा-ए-जहाँ) | 1394–1399 ई. | दिल्ली सल्तनत के सुल्तान नासिरुद्दीन महमूद तुगलक ने उसे जौनपुर का सूबेदार नियुक्त किया। बाद में उसने स्वतंत्र होकर शर्की वंश की स्थापना की तथा मलिक-उस-शर्क की उपाधि धारण की। |
| मुबारक शाह शर्की | 1399–1402 ई. | मलिक सरवर का दत्तक पुत्र। उसने जौनपुर की स्वतंत्रता को बनाए रखा तथा राज्य को संगठित करने का प्रयास किया। |
| इब्राहीम शाह शर्की | 1402–1440 ई. | शर्की वंश का सबसे महान शासक। उसके शासनकाल में जौनपुर शिक्षा, साहित्य, संगीत एवं इस्लामी संस्कृति का प्रमुख केंद्र बना। अटाला मस्जिद का निर्माण पूर्ण कराया। जौनपुर को ‘शिराज़-ए-हिन्द’ कहा जाने लगा। |
| महमूद शाह शर्की | 1440–1457 ई. | दिल्ली एवं मालवा के साथ संघर्ष किया। उसके शासनकाल में शर्की राज्य की शक्ति बनी रही, किन्तु लोदी वंश से टकराव बढ़ने लगा। |
| मुहम्मद शाह शर्की | 1457–1458 ई. | अल्पकालीन शासन। आंतरिक षड्यंत्रों के कारण शीघ्र ही सत्ता से हट गया। |
| हुसैन शाह शर्की | 1458–1479 ई. | शर्की वंश का अंतिम एवं शक्तिशाली शासक। बहलोल लोदी से लगातार संघर्ष किया। 1479 ई. में बहलोल लोदी ने जौनपुर पर अधिकार कर उसे दिल्ली सल्तनत में मिला लिया, जिससे शर्की वंश का अंत हो गया। |
➣ जौनपुर (उत्तर प्रदेश में गोमती नदी के किनारे स्थित) की स्थापना फिरोजशाह तुगलक ने अपने चचेरे भाई जौन खां (मुहम्मद बिन तुगलक) की स्मृति में 1359 ई. में अपने बंगाल अभियान के दौरान की थी।
➣ जौनपुर में स्वतंत्र-सत्ता का संस्थापक ख्वांजा जहान मलिक सरवर नामक एक हिजड़ा था जिसकी उपाधि मलिक-उस-शर्क थी, इसलिए इसके द्वारा स्थापित राजवंश, शर्की राजवंश कहलाया।
➣ 1397 ई. में जौनपुर के सूबेदार ख़्वाजा जहान ने दिल्ली के सुल्तान मुहम्मद तुग़लक़ की अधीनता को ठुकराकर अपनी स्वाधीनता की घोषणा कर दी।
➣ शर्की राजवंश में 6 शासक (1. मलिक सरवर, 2.मुबारक शाह, 3. इब्राहीमशाह, 4. महमूदशाह, 5. मुहम्मदशाह 6. हुसैन शांह) हुए। इस वंश का अंतिम शासक हुसैन शाह था।
ख्वाजा जहाँ
➣ तैमूर के आक्रमण से दिल्ली में फैली अस्थिरता का लाभ उठाकर फिरोज तुगलक के एक हिंजड़े (ख्वाजा जहाँ) मलिक सरवर ने जौनपुर में एक स्वतन्त्र शर्की राज्य की स्थापना की।
➣ 1394 ई. में सुल्तान मुहम्मद शाह तुगलक द्वितीय ने उसे मलिक-उश-शर्क (पूर्व का शिराज) तथा ख्वाजा-ए-जहाँ की उपाधि प्रदान की।
➣ 1389 ई. में मलिक सरवर, मुहम्मद शाह (फिरोज़ तुगलक का पुत्र) का वज़ीर बना।
➣ मलिक सरवर ने अपने राज्य की सीमाओं का कोल (अलीगढ़), संभल तथा मैनपुरी तक विस्तार किया। 1399 ई. इसकी मृत्यु हो गई।
मुबारक शाह शर्की (1399-1402 ई.)
➣ मलिक सरवर का दत्तक पुत्र मुबारक शाह शर्की वंश का प्रथम शासक था जिसने सुल्तान की उपाधि धारण (1399 ई.) किया था।
➣ शर्की सुल्तान ज्ञान व संस्कृति के महान रक्षक थे। अतः कवि, लेखक, विद्वान व संत विभिन्न भागों से आकर जौनपुर में बस गए। पद्मावत के लेखक मलिक मोहम्मद जायसी जौनपुर में ही रहते थे।
➣ शर्की सुल्तानों के समय में जौनपुर में हुई सांस्कृतिक विकास के कारण इसे भारत का शिराज कहा जाता था। इस दौरान शर्की सुल्तानों ने जौनपुर में कई सुन्दर भवन, एक क़िला, मक़बरा तथा मस्जिदें बनवाईं।
इब्राहिम शक (1402-1440 ई.)
➣ इब्राहीम शाह शक वंश का महानतम शासक था। शर्की शैली का जन्म इब्राहीम शाह के समय में हुआ था।
➣ इसके समय में यहाँ हुई सांस्कृतिक उन्नति के कारण जौनपुर को भारत का शिराज की उपाधि प्राप्त हुई। उसने स्वयं सिराज-ए-हिन्द की उपाधि धारण की।
➣ इब्राहिम शक की सबसे महत्त्वपूर्ण विजय कन्नौज (1406 ई.) की थी। इस समय कन्नौज मुहम्मद शाह तुगलक के अधीन था।
➣ इसके शासन मे प्रसिद्ध अटाला मस्जिद (1408 ई.) व जामा मस्जिद का निर्माण करवाया गया। इसके अतिरिक्त झाँझरी मस्जिद का निर्माण भी इसी के शासनकाल में सम्पन्न हुआ।
➣ जामा मस्जिद को इब्राहीमशाह ने 1438 ई. में बनवाना प्रारंभ किया था और इसे 1442 ई. में इसकी बेगम राजीबीवी ने पूरा करवाया था।
➣ कहा जाता है कि अटाला मस्जिद के स्थान पर पहले अतला (या अताला) देवी का मंदिर था, जिसको ध्वस्त करके उसकी सामग्री से यह मस्जिद बनाई गई।
➣ 1417 ई. में प्राचीन विजयचंद्र मंदिर के स्थान पर खालिस मूख्ख्लीस मस्जिद (या चार उंगली मस्जिद) को सुल्तान इब्राहीम के अमीर खालिस ख़ाँ ने बनवाया था।
➣ 1440 ई. में इब्राहिम शाह शर्की की मृत्यु के पश्चात् महमूदशाह (1440-1457 ई.) शासक बना, जो बहलोल लोदी से पराजित हुआ, उसके बाद मुहम्मदशाह (1457-1458 ई.) शासक बना।
➣ हुसैन शाह शर्की (1458-1505 ई.) इस वंश का अन्तिम शासक था। उसके समय में बहलोल लोदी ने जौनपुर को 1484 ई. में पराजित किया। हुसैन शाह ने भागकर बंगाल में अलाउद्दीन हुसैन शाह (1493-1519 ई.) के यहाँ शरण ली।
➣ बहलोल लोदी ने जौनपुर राज्य को अपने अधीन कर लिया और अपने पुत्र बारबक शाह को वहाँ का शासक नियुक्त किया।
➣ कालांतर में सिकन्दर लोदी ने जौनपुर को अपने अधीन करने के लिए अपने भाई बारबक शाह के ख़िलाफ़ अभियान किया और जौनपुर को दिल्ली में मिला लिया।
➣ जौनपुर के शर्की सुल्तानों के समय के तथा अन्य स्मारकों को लोदी वंश के धर्मांध सुल्तान सिकन्दर लोदी ने 1495 ई. में बहुत हानि पहुँचाई।
➣ क्रोध में उसने शर्की शासकों द्वारा जौनपुर में बनवायी गयी एक मस्जिद तोड़ने का आदेश दिया, यद्यपि उलेमाओं की सलाह पर आदेश वापस ले लिया गया।
➣ जौनपुर के बाद सुल्तान सिकन्दर लोदी ने 1494 ई. में बनारस के समीप हुए बनारस के युद्ध में हुसैनशाह शर्की को परास्त कर बिहार को भी दिल्ली में मिला लिया।
➣ हुसैन शाह शर्की ने संगीत में महारथ के लिये गंधर्व की उपाधि धारण की। जौनपुर को ढाक ए अमन (शरणस्थली) भी कहा जाता था।
➣ जौनपुर में गोमती नदी के पुल का निर्माण कार्य मुग़ल बादशाह अकबर ने 1564 ई. में प्रारंभ करवाया था। यह 1569 ई. में बनकर तैयार हुआ था। यह अकबर के सूबेदार मुनीम ख़ाँ के निरीक्षण में बनाया गया था।
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