गांधार का हिंदूशाही वंश (9वीं शताब्दी) : जयपाल

भारतीय इतिहास प्राचीन भारत गांधार का हिंदूशाही वंश (9वीं शताब्दी)
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हिन्दूशाही वंश : उत्तर-पश्चिम भारत की रक्षा शक्ति

9वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में हिंदूशाही वंश की स्थापना तुर्की शाही वंश के शासक लगर्तमान को उसके ब्राह्मण मंत्री कल्लर ने गद्दी से हटाकर कर काबुल घाटीगंधार प्रदेश में स्थापित की थी।

कल्लर के विषय में कल्हण की राजतरंगिणी से जानकारी मिलती है।

➣ उत्तरी पश्चिमी भाग में हिन्दू शाही वंश, भारत का पहला महत्त्वपूर्ण हिन्दू राज्य था। जिसके कमजोर होने के पश्चात विदेशी अक्रमंकारियों के लिए रास्ता खुल गया। इसकी राजधानी उद्भांडपुर थी।

➣ हालाँकि इससे पहले 712 ई. में अरबी मुस्लिम मुहम्मद बिन कासिम के नेतृत्व में हुआ था किन्तु यह अस्थायी था। यह भारत में पाँव नहीं जमा पाया। इस समय प्रतिहार और सिसोदिया वंश के शासको जिनमे क्रमश: नागभट्ट और बप्पा रावल का नाम प्रमुख, ने इन अक्रान्तों को आगे नहीं बढ़ने दिया।

उत्तर भारत में सिंध पहला राज्य था जो मुस्लिम आक्रमणों का शिकार हुआ। उस समय वहां राजा दाहिर का शासन था।

✨ विशेष:
❑ जबकि दक्षिण भारत में देवगिरी के यादव वंश मुस्लिम आक्रमण का पहला शिकार हुआ था।
❑ यह आक्रमण अल्लाउद्दीन खिलजी के शासनकाल के समय उसके सेनापति मालिक काफूर के नेतृत्व हुआ था। इस समय वहां का शासक रामचंद्र था।

➣ जयपाल के पुत्र आनन्दपाल और उसके वंशज त्रिलोचनपाल तथा भीमपाल ने कई बार महमूद ग़ज़नवी से युद्ध किया। अलबेरूनी के अनुसार हिन्दूशाही राजाओं में कुछ तुर्क और कुछ हिन्दू थे।

➣ हिन्दू राजाओं को काबुलशाह या महाराज धर्मपति कहा जाता था। इन राजाओं में कल्लार, सामन्तदेव, भीम, अष्टपाल, जयपाल, आनन्दपाल, त्रिलोचनपाल, भीमपाल आदि उल्लेखनीय हैं।

शासक परिचय / प्रमुख तथ्य
जयपाल हिंदू शाही वंश का प्रमुख शासक, उत्तर-पश्चिम भारत (काबुल–पेशावर क्षेत्र) में शासन किया। महमूद गजनवी के विरुद्ध संघर्ष किया लेकिन पराजित हुआ, जिससे शाही शक्ति कमजोर हुई।
आनन्दपाल जयपाल का उत्तराधिकारी, गजनवी आक्रमणों के खिलाफ कई युद्ध लड़े। हिंदू शाही वंश को बचाने का प्रयास किया लेकिन लगातार हार के कारण शक्ति घटती गई।
त्रिलोचनपाल हिंदू शाही वंश का कमजोर शासक, गजनवी के बढ़ते प्रभाव के कारण राज्य लगातार सिकुड़ता गया। संघर्ष जारी रखा लेकिन निर्णायक सफलता नहीं मिली।
भीमपाल शाही वंश के अंतिम शासकों में से एक, शासनकाल में राज्य लगभग समाप्ति की ओर था। मुस्लिम आक्रमणों के बाद शाही सत्ता का पूर्ण पतन हो गया।

जयपाल : महमूद गजनवी से प्रारंभिक संघर्ष

➣ जयपाल इस वंश का योग्य एवं पराक्रमी शासक था। उसके राज्य की सीमायें, सरहिन्द, लमगान, कश्मीर एवं मुल्तान तक फैली थीं।

➣ उसके समय में ग़ज़नी की गद्दी पर उसका समकालीन अमीर सुबुक्तगीन (977-997) सिंहासनासीन था। उसने जयपाल के विरुद्ध आक्रमण किया।

➣ युद्ध के लिए जयपाल भी सेना लेकर ग़ज़नी और लगमान के बीच गुजुक नामक स्थान तक बढ़ गया। परन्तु अचानक एक बर्फीला तूफान आ गया और जयपाल को बड़ा भारी नुकसान उठाना पड़ा।

➣ उसे सुबुक्तगीन के साथ एक अपमानजनक संधि कर लेनी पड़ी। परंतु उसने शीघ्र ही इस संधि की शर्तों की तोड़ दिया और सुबुक्तगीन के साथ फिर से लड़ाई छिड़ गई।

➣ सुबुक्तगीन की 997 में मृत्यु हो गई। उसके बाद उसके उत्तराधिकारी सुल्तान महमूद ग़ज़नवी ने फिर से युद्ध शुरू कर दिया और 1001 ई. में पेशावर के निकट जयपाल को बुरी तरह परास्त किया।

➣ तुर्क आक्रमणकारी महमूद ग़ज़नवी से हारने के उपरान्त जयपाल ने 1001 ई. में अग्नि में कूद कर आत्महत्या कर ली।

➣ जयपाल एकमात्र हिन्दू राजा था, जिसने उत्तर-पश्चिम से भारत पर आक्रमण करने वाले मुस्लिमों के ख़िलाफ़ आक्रामक नीति अपनायी और अपनी आहूति देकर आत्महत्या का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया।

आनन्दपाल : हिंदूशाही प्रतिरोध का नेतृत्व

➣ वह राजा जयपाल का पुत्र और उत्तराधिकारी था। जयपाल के बाद उसके पुत्र आनन्दपाल को भी महमूद ग़ज़नवी ने परास्त किया।

➣ सुल्तान महमूद ग़ज़नवी ने 1006 ई. में अब मुल्तान पर क़ब्ज़ा कर लिया और 1008 ई. में आनन्दपाल के राज्य पर फिर से हमला किया।

➣ आनन्दपाल ने उज्जैन, ग्वालियर, कन्नौज, दिल्ली और अजमेर के हिन्दू राजाओं का संघ बनाकर सुल्तान की सेना का पेशावर के मैदान में सामना किया।

➣ दुर्भाग्यवंश युद्ध गजनवी के पक्ष में रहा। इस युद्ध में आनन्दपाल का पुत्र युवराज ब्राह्मणपाल भी मारा गया। सुल्तान की सेना ने कांगड़ा तथा भीमनगर के क़िलों में घूस गई।

➣ कालांतर में आनन्दपाल ने नमक की पहाड़ियों से मुसलमानों का लगातार प्रतिरोध किया लेकिन कुछ वर्ष बाद ही उसकी मृत्यु हो गई।

त्रिलोचनपाल : साम्राज्य का पतन काल

➣ वह आनन्दपाल का पुत्र था और राज्य का उत्तराधिकारी बना था। महमूद ग़ज़नवी के साथ रामगंगा के युद्ध में त्रिलोचनपाल को पराजय का सामना करना पड़ा।

➣ अपने 10वें आक्रमण में महमूद ने लाहौर पर आक्रमण किया और त्रिलोचनपाल को खदेड़ दिया। युद्ध में पराजय के बाद 1021-1022 ई. में त्रिलोचनपाल की मृत्यु हो गई।

भीमपाल : हिन्दूशाही वंश का अंतिम शासक

➣ यह हिन्दू शाही राजवंश का अंतिम हिन्दू राजा था। त्रिलोचनपाल की मृत्यु के बाद उसका पुत्र भीमपाल कश्मीर विस्थापित हो गया।

➣ इस वंश के शासक भीम ने अपनी पुत्री की शादी लोहर वंश (कश्मीर का राजवंश) के शासक सिंह राम से किया जिनके कालांतर में दिद्दर नाम की पुत्री उत्पन्न हुई। इसका विवाह क्षेमेंद्र गुप्त से किया गया था।

➣ इस प्रकार जयपाल, आनन्दपाल, त्रिलोचनपाल एवं भीमपाल ने लगभग 50 वर्षों तक महमूद ग़ज़नवी से संघर्ष किया।

➣ इस समय तक तुर्कियों ने पंजाब पर अधिकार अधिकार कर लिया था। आगे चलकर पंजाब से गजनवी के उत्तराधिकारियों को अफगान सेनानायक गौरी द्वारा खदेड़ा जाता है।

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