बंगाल : स्वतंत्र सल्तनत का प्रमुख केंद्र
| शासक | शासनकाल | प्रमुख जानकारी / महत्वपूर्ण घटनाएँ |
|---|---|---|
| अलाउद्दीन अलीशाह | 1338–1342 ई. | दिल्ली सल्तनत के कमजोर होने का लाभ उठाकर बंगाल में स्वतंत्र शासन स्थापित किया। उसके शासनकाल में बंगाल की स्वतंत्र सल्तनत की नींव मजबूत हुई। |
| शम्सुद्दीन इलियास शाह | 1342–1358 ई. | इलियासशाही वंश का संस्थापक। पहली बार लखनौती, सोनारगाँव और सतगाँव को एकीकृत कर सम्पूर्ण बंगाल को एक शासन के अधीन किया। |
| सिकंदर शाह | 1358–1390 ई. | अदीना मस्जिद (पांडुआ) का निर्माण कराया, जो मध्यकालीन भारत की सबसे विशाल मस्जिदों में से एक मानी जाती है। |
| गयासुद्दीन आज़म शाह | 1390–1411 ई. | विद्वानों एवं साहित्यकारों का संरक्षक था। चीन के मिंग वंश के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए तथा न्यायप्रिय शासक माना जाता है। |
| सैफुद्दीन हमज़ा शाह | 1411–1413 ई. | गयासुद्दीन आज़म शाह का उत्तराधिकारी। उसका शासन अल्पकालीन रहा तथा राजनीतिक अस्थिरता बढ़ने लगी। |
| शिहाबुद्दीन बायज़ीद शाह | 1413–1414 ई. | कमजोर शासन के कारण बंगाल में अराजकता फैली, जिसका लाभ उठाकर राजा गणेश ने सत्ता पर अधिकार कर लिया। |
| अलाउद्दीन फिरोज़ शाह | 1414 ई. | अल्पकालीन शासक। शीघ्र ही सत्ता संघर्ष में पराजित हुआ और राजा गणेश का प्रभाव बढ़ गया। |
| राजा गणेश | 1414–1418 ई. | बंगाल का शक्तिशाली हिन्दू जमींदार जिसने सत्ता पर अधिकार किया। उसके पुत्र जदु ने इस्लाम स्वीकार कर जलालुद्दीन मुहम्मद शाह के नाम से शासन किया। |
| जलालुद्दीन मुहम्मद शाह | 1418–1433 ई. | राजा गणेश का पुत्र। इस्लाम स्वीकार करने के बाद बंगाल का सुल्तान बना तथा प्रशासन को स्थिर किया। |
| शम्सुद्दीन अहमद शाह | 1433–1435 ई. | उसके शासनकाल में आंतरिक षड्यंत्र बढ़े और अंततः उसकी हत्या कर दी गई। |
| नासिरुद्दीन महमूद शाह | 1435–1459 ई. | इलियासशाही वंश की पुनः स्थापना की। उसके शासनकाल में बंगाल में राजनीतिक स्थिरता स्थापित हुई। |
| रुक्नुद्दीन बरबक शाह | 1459–1474 ई. | विद्या, साहित्य और स्थापत्य कला का संरक्षक। बड़ी संख्या में हब्शी (अबीसीनियाई) सैनिकों को उच्च पदों पर नियुक्त किया। |
| शम्सुद्दीन यूसुफ शाह | 1474–1481 ई. | शांतिपूर्ण शासन किया तथा धार्मिक और स्थापत्य गतिविधियों को प्रोत्साहन दिया। |
| सिकंदर शाह द्वितीय | 1481 ई. | बहुत अल्पकालीन शासन। शीघ्र ही सत्ता से हटा दिया गया। |
| जलालुद्दीन फतेह शाह | 1481–1487 ई. | उसके शासनकाल में हब्शी अमीरों का प्रभाव बढ़ा और अंततः उसकी हत्या कर दी गई। |
| सैफुद्दीन फिरोज़ शाह | 1487–1490 ई. | हब्शी शासकों में प्रमुख। उसके शासनकाल में हब्शी सत्ता मजबूत हुई। |
| शम्सुद्दीन मुज़फ्फर शाह | 1490–1494 ई. | हब्शी वंश का अंतिम प्रमुख शासक। उसके पतन के बाद हुसैनशाही वंश की स्थापना हुई। |
| अलाउद्दीन हुसैन शाह | 1494–1519 ई. | हुसैनशाही वंश का संस्थापक। बंगाल का स्वर्णकाल माना जाता है। चैतन्य महाप्रभु उसके समकालीन थे। साहित्य, कला एवं व्यापार का विकास हुआ। |
| नासिरुद्दीन नुसरत शाह | 1519–1533 ई. | हुसैन शाह का पुत्र। बाबर के समकालीन था। 1529 ई. के घाघरा के युद्ध के बाद बाबर से संधि की। |
| अलाउद्दीन फिरोज़ शाह द्वितीय | 1533 ई. | अल्पकालीन शासक। कुछ ही समय बाद सत्ता से हटा दिया गया। |
| गयासुद्दीन महमूद शाह | 1533–1538 ई. | हुसैनशाही वंश का अंतिम शासक। 1538 ई. में शेरशाह सूरी ने बंगाल पर अधिकार कर लिया, जिससे स्वतंत्र हुसैनशाही शासन का अंत हो गया। |
➣ बंगाल, पूर्वी भारत का प्रमुख नगर था। सल्तनत कालीन उत्तर भारतीय प्रान्तों में सर्वाधिक विद्रोह बंगाल में हुए। बंगाल की राजधानी लखनौती को विद्रोहों का नगर कहा जाता था।
➣ 12वीं सदी के अन्तिम दशक में ऐबक के दास इख्तियारुद्दीन मुहम्मद बख्तियार खिलजी ने बंगाल को दिल्ली सल्तनत में मिलाया था।
➣ दिल्ली से दूर होने के कारण बंगाल पर नियंत्रण करना कठिन था। समय-समय पर यहां के शासकों ने विद्रोह कर दिल्ली की सत्ता को चुनौती दी।
➣ बलबन के समय में 1279 ई. में तुगरिल खां ने विद्रोह किया, जिसे दबाकर बलबन ने अपने पुत्र बुगरा खा को वहां का शासक नियुक्त किया। बलबन की मृत्यु के बाद बुगरा खा ने अपने को स्वतंत्र घोषित कर लिया।
➣ 1324 ई.में गियासुद्दीन तुगलक ने बंगाल अभियान किया। उसने गियासुद्दीन बहादुर को पराजित कर नासिरुद्दीन को बंगाल में अपना अधीनस्थ शासक नियुक्त किया तथा उसे सुल्तान की उपाधि धारण करने व सिक्के जारी करने का अधिकार प्रदान किया।
➣ विद्रोह की समस्या को हल करने के लिए गयासुद्दीन तुगलक ने बंगाल को 3 भागों लखनौती (उत्तरी बंगाल), 2. सोनार गांव (पूर्वी बंगाल), 3. सतगांव (दक्षिण बंगाल) } में विभाजित किया।
➣ गद्दी पर बैठने के उपरान्त मुहम्मद तुगलक ने कादर खां को लखनौती का, इजीजुद्दीन आजम-उल-मुल्क को सतगांव का और गयासुद्दीन बहादुर को सोनारगांव का प्रबन्धक नियुक्त किया।
➣ मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में बंगाल दिल्ली सल्तनत से 1338 ई. में अलग हो गया था।
इस प्रकार दिल्ली सल्तनत से अलग होने वाला बंगाल पहला प्रान्त था।
➣ उत्तर बंगाल में अलाउद्दीन अलीशाह ने स्वयं को स्वतन्त्र घोषित कर दिया और अपनी राजधानी लखनौती से पाण्डुआ स्थानान्तरित की।
➣ 1342-57 ई. में अलाउद्दीन अलीशाह के एक सरदार इलियास खाँ ने सम्पूर्ण बंगाल पर अधिकार कर लिया और सुल्तान शम्सुद्दीन इलियास शाह के नाम से गद्दी पर बैठा।
➣ इलियास शाह एक लोकप्रिय शासक था। उसकी बहुत सी उपलब्धियाँ हैं, उसके शासन काल में फिरोज तुगलक ने प्रथम बार बंगाल पर आक्रमण किया।
➣ फिरोज तुगलक ने पाण्डुआ के नगरवासियों को अपने पक्ष में करने के लिए मलिकों, धर्मशास्त्रियों एवं अन्य मंद लोगों को मुक्त हस्त से भू-अनुदान प्रदान किये, परन्तु उसका यह प्रयास विफल हो गया। इस असफलता का कारण सम्भवतः इलियास की लोकप्रियता थी।
सिकन्दरशाह इलियास (1357-1389 ई.)
➣ इसके शासन काल में फिरोज तुगलक ने बंगाल को पुनः प्राप्त करने के लिए दूसरी बार आक्रमण किया, परन्तु, उसे निराश होकर लौटना पड़ा।
➣ सिकन्दर शाह इलियास एवं फिरोज तुगलक ने कोसी नदी को दोनों राज्यों के बीच सीमा मान लिया।
➣ 1368 ई. में इसने पाण्डुआ में अदीना मस्जिद का निर्माण कराया।
➣ लगभग 35 वर्ष के अपने शान्तिपूर्ण शासन के पश्चात् सिकन्दर शाह अपने विद्रोही पुत्र गियासुद्दीन आजमशाह के साथ हुए युद्ध में पांडुआ के निकट 1389 ई. में मारा गया।
गयासुद्दीन आजमशाह (1389-1409 ई.)
➣ यह अत्यन्त लोकप्रिय शासक था। वह प्रसिद्ध कवि हाफिज से पत्र व्यवहार करता था।
➣ उसने चीनी सम्राट के दरबार में दूतमण्डल भेजा एवं चीनी सम्राट की मांग पर बौद्ध भिक्षु चीन भेजे। चीनी सम्राट ने भी बदले में उसके पास दूतमण्डल और उपहार भेजे थे।
➣ 1409 ई. में गयासुद्दीन ने महारत्न धर्मराज नामक एक बौद्ध भिक्षु को अपना दूत बनाकर उपहारों सहित चीनी सम्राट के दरबार में भेजा था।
➣ अपने समय के प्रसिद्ध चिश्ती संत शेख नूर कुत्बे आलम के साथ गयासुद्दीन का अत्यन्त घनिष्ठ सम्बन्ध था।
➣ 1409 ई. में गयासुद्दीन की मृत्यु हो गयी।
➣ गयासुद्दीन के पुत्र शैफुद्दीन हम्जाशाह के काल में राय गणेश नामक जमींदार दरबार में काफी प्रभावी हो गया।
➣ हम्जाशाह की मृत्यु के बाद राय गणेश शासक बना। गणेश ने दनुजमर्दन की उपाधि ली।
➣ बाद में गणेश ने अपने पुत्र जादु के पक्ष में गद्दी त्याग दी। जादु ने इस्लाम ग्रहण कर जलालुद्दीन मुहम्मद शाह के नाम से शासन किया।
➣ जलालुद्दीन ने बृहस्पति मिश्र नामक विद्वान को संरक्षण दिया, जिसने मेघदूत, कुमार संभव, रघुवंश आदि पर टीका लिखी।
➣ शमसुद्दीन अहमदशाह (1431-1435 ई.) के शासन काल में जौनपुर के इब्राहीम शर्की ने बंगाल पर आक्रमण किया।
➣ 1431-32 ई. में एक चीनी दूतमण्डल उसके दरबार में आया था।
➣ शमसुद्दीन अहमदशाह की मृत्यु के साथ ही बंगाल में इलियास शाही वंश की पुनर्स्थापना हुई।
रुकनुद्दीन बारबक शाह (1459-1474 ई.)
➣ सुल्तान बारबक बंगाली साहित्य का महान संरक्षक था। उसने श्री कृष्ण विजय नामक ग्रन्थ के रचयिता मालधर बसु को संरक्षण प्रदान किया और उन्हें गुणराज खान की उपाधि तथा उसके पुत्र को सत्यराज खान की उपाधि से सम्मानित किया।
➣ बारबक शाह के शासनकाल में ‘कृत्तिवास’ ने रामायण का बंगला में अनुवाद किया, जिसे बंगाल का बाइबिल अथवा पंचवेद कहा जाता है।
➣ फरिश्ता के अनुसार उसके पास बहुत अबीसीनियाई दास थे। उसने सेना में अरबों व अबीसीनियाई दासों को नियुक्त किया।
➣ फरिश्ता के अनुसार यह (बारबक शाह) हिन्दुस्तान का सर्वप्रथम शासक था, उसके पास अत्यधिक संख्या में अबीसीनियन दास थे, जिनमें कुछ को ऊँचे पद मिले।
➣ उसकी मृत्यु के बाद अवीसीनियाई दासों ने राजनीति में हस्तश्चेप करना शुरू किया, जिससे राजनैतिक अस्थिरता हो गई।
➣ 1486 ई. में एक अबीसीनियाई दास ने स्वयं को बारबकशाह नाम से सुल्तान घोषित किया।
➣ जलालुद्दीन फतेहशाह इलियास वंश का अन्तिम शासक था।
अलाउद्दीन हुसैनशाह (1493-1519 ई.)
➣ इसने नये राजवंश हुसैन वंश की नींव रखी व अबीसीनियाई दासों को निष्कासित किया।
➣ 1494 ई. में उसने खलीफतुल्ला की उपाधि धारण की। उसने गौड़ के स्थान पर इकदला को अपनी राजधानी बनाई।
➣ हुसैन शाह बंगाल के मुस्लिम शासकों में श्रेष्ठ व विद्वान था। वह चैतन्य महाप्रभु का समकालीन था। इसी के शासनकाल में चैतन्य ने बंगाल और बिहार में वैष्णव धर्म का प्रचार किया था।
➣ उसके शासनकाल में बंगाल साहित्य का सबसे अधिक विकास हुआ। इसका समय बांग्ला भाषा का स्वर्णकाल था।
➣ उसने हिन्दुओं के प्रति उदार नीति अपनाई व ऊँचे पद दिये। उसने एक हिन्दू को वजीर बनाया। रूप व सनातन नामक दो वैष्णव भाई उसके प्रमुख अधिकारी थे।
➣ इसके अतिरिक्त हुसैन शाह का मंत्री गोपीनाथ बसु, चिकित्सक मुकुन्द दास, प्रधान अंगरक्षक केशव क्षत्री तथा टकसाल अधीक्षक अनूप था।
➣ हिन्दुओं के प्रति उदारता के कारण हुसैन शाह को कृष्ण का अवतार, नृपति तिलक और जगत भूषण की उपाधियां दी गई।
➣ हुसैनशाह ने अपने हमनाम जौनपुर के पराजित शर्की सुल्तान को लोदियों के विरुद्ध शरण दी, इसलिए इसे सिकन्दर लोदी से युद्ध करना पड़ा।
➣ हुसैनशाह के सेनापति परागंल खाँ ने कविन्द्र परमेश्वर से महाभारत का बांग्ला में अनुवाद करवाया।
➣ मालाधर बसु ने हुसैनशाह एवं नुसरतशाह के संरक्षण में भगवद्गीता का श्रीकृष्ण विजय नाम से बांग्ला में अनुवाद किया।
➣ अलाउद्दीन हुसैन शाह के समय वली मुहम्मद ने छोटा सोना मस्जिद बनवायी।
➣ बंगाल में सत्यपीर नामक आन्दोलन की शुरुआत अलाउद्दीन हुसैनशाह ने की थी, जो एक सूफी आन्दोलन था।
नुसरत शाह (1519-1532 ई.)
➣ बाबर के समय बंगाल का शासक नुसरत शाह था। बाबर ने उसे घाघरा के युद्ध में पराजित किया था।
➣ वह वास्तुकला तथा साहित्य का संरक्षक था। उसने 1526 ई. में गौड़ में बड़ा सोना मस्जिद व 1530 ई. में कदम रसूल मस्जिद बनवाई।
➣ नुसरत शाह के शासनकाल में ही काशीराम ने प्रथम बंगला भाषी महाभारत की रचना की थी।
➣ नुसरत शाह ने एक आदेश से शरफनामा नामक एक पाण्डुलिपि तैयार करवायी थी।
➣ सबसे पहले पुर्तगाली नुसरतशाह के शासन में ही बंगाल में प्रविष्ट हुए थे।
गयासुद्दीन महमूद (1533-38 ई.)
➣ यह हुसैन शाही का अन्तिम शासक था। इसके शासन काल में शेरशाह सूरी ने बंगाल आक्रमण कर पूरे बंगाल पर अधिकार कर लिया।
➣ 1538 ई. में गयासुद्दीन महमूद की मृत्यु के साथ ही इलियासी शाहीवंश का अन्त हो गया।
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