चन्देल वंश बुन्देलखंड (831-1203 ई.) : विद्याधर

भारतीय इतिहास प्राचीन भारत चन्देल वंश बुन्देलखंड (831-1203 ई.)
📚 विषय सूची

चंदेल वंश (9वीं – 13वीं शताब्दी) : खजुराहो मंदिरों का निर्माण

➣ चन्देल वंश गोंड जनजातीय मूल का राजपूत वंश था, जिसने 8वीं से 12वीं शताब्दी तक स्वतंत्र रूप से राज किया। चन्देल प्रतिहारों के सामंत थे। प्रतिहारों के पतन के साथ ही चंदेल नौवीं शताब्दी में सत्ता में आए।

➣ उनका साम्राज्य उत्तर में यमुना नदी से लेकर सागर (मध्य प्रदेश, मध्य भारत) तक और धसान नदी से विंध्य पहाड़ियों तक फैला हुआ था। सुप्रसिद्ध कालिंजर का क़िला, खजुराहो, महोबा और अजयगढ़ उनके प्रमुख किले थे।

चंदेल राजा नंद या गंड ने लाहौर में तुर्कों के विरुद्ध अभियान में एक अन्य राजपूत सरदार जयपाल की मदद की, लेकिन ग़ज़ना (ग़ज़नी) के महमूद ने उन्हें पराजित कर दिया था।

1023 ई. में चंदेलों का स्थान बुंदेलों ने ले लिया। खजुराहो के मंदिर निर्माण के लिए ही चंदेल संभवत: सबसे अधिक विख्यात हैं। खजुराहो उनकी राजधानी थी।

जयसिंह अथवा जेजा या जयशक्ति के नाम पर यह प्रदेश जेजाकभुक्ति कहलाया। बुन्देलखंड का प्राचीन नाम जेजाकभुक्ति था। च चंदेल पूर्व मध्यकाल में हिन्दी की देवनागरी लिपि का अपने अभिलेखों में प्रयोग करने वाले प्रथम शासक थे।

➣ इस वंश के अंतिम शासक परमार्दिदेव अथवा परमल का पृथ्वी राज चौहान से युद्ध हुआ था जिसमे वह परास्त हुआ।

शासक शासनकाल परिचय / प्रमुख तथ्य
नन्नुक 831 – 845 ई. चन्देल वंश के संस्थापक, बुंदेलखंड (जेजाकभुक्ति) क्षेत्र में प्रारंभिक सत्ता स्थापित की। प्रतिहारों के अधीन रहते हुए स्थानीय शक्ति का उदय किया।
वाक्पति 845 – 870 ई. चन्देल शक्ति का विस्तार प्रारंभ, छोटे-छोटे क्षेत्रों पर नियंत्रण बढ़ाया और वंश को स्थिरता दी।
जयशक्ति और विजयशक्ति 870 – 900 ई. संयुक्त शासन, चन्देल राज्य को मजबूत किया और क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाया। प्रारंभिक प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित की।
राहिल 900 ई. कम जानकारी उपलब्ध, संक्रमण काल का शासक, वंश की स्थिरता बनाए रखने का प्रयास।
हर्ष चन्देल 900 – 925 ई. राजनीतिक स्थिरता लाने का प्रयास, चन्देल शक्ति को पुनर्गठित किया।
यशोवर्मन 925 – 950 ई. महत्वपूर्ण शासक, चन्देल वंश को पहचान दिलाई। खजुराहो मंदिरों की नींव रखी और सांस्कृतिक विकास को बढ़ावा दिया।
धंगदेव 950 – 1003 ई. चन्देल वंश का स्वर्णकालीन शासक, स्वतंत्रता स्थापित की और खजुराहो मंदिरों का उत्कर्ष हुआ। कला, स्थापत्य और संस्कृति का विकास चरम पर पहुँचा।
गंडदेव 1003 – 1017 ई. साम्राज्य को बनाए रखने का प्रयास, लेकिन राजनीतिक दबाव और बाहरी आक्रमणों का प्रभाव बढ़ा।
विद्याधर 1017 – 1029 ई. सबसे शक्तिशाली चन्देल शासकों में से एक, महमूद गजनवी के आक्रमणों का सफल प्रतिरोध किया।
विजयपाल 1030 – 1045 ई. साम्राज्य को स्थिर रखने का प्रयास, लेकिन केंद्रीय शक्ति कमजोर होने लगी।
देववर्मन 1050 – 1060 ई. कमजोर शासन, आंतरिक संघर्ष और क्षेत्रीय शक्तियों का प्रभाव बढ़ा।
कीरतवर्मन (कीर्तिवर्मन) 1060 – 1100 ई. चन्देल शक्ति को पुनर्जीवित करने का आंशिक प्रयास, कुछ क्षेत्रों में नियंत्रण पुनः स्थापित किया।
सल्लक्षणवर्मन 1100 – 1115 ई. पतन काल की शुरुआत, राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी और साम्राज्य कमजोर हुआ।
जयवर्मन 1115 ई. अल्पकालीन शासन, प्रभाव लगभग नगण्य।
पृथ्वीवर्मन 1120 – 1129 ई. साम्राज्य की शक्ति बहुत कमजोर हो चुकी थी, सीमित क्षेत्रीय नियंत्रण।
मदनवर्मन 1129 – 1162 ई. चन्देल वंश का अंतिम शक्तिशाली शासक, कुछ समय के लिए स्थिरता और शक्ति पुनः स्थापित की।
यशोवर्मन द्वितीय 1165 – 1166 ई. नाममात्र का शासक, वास्तविक सत्ता समाप्त हो चुकी थी।
परमार्दिदेव (परमल) 1166 – 1203 ई. चन्देल वंश का अंतिम शासक, कुतुबुद्दीन ऐबक के आक्रमणों के बाद वंश का पतन हो गया।

नन्नुक (831 – 900 ई.) : चंदेल वंश की स्थापना

➣ चन्देल वंश की स्थापना 831 ई. के लगभग नन्नुक नामक व्यक्ति ने की थी। उसकी उपाधि नृप तथा महीपति की मिलती है।

➣ वह स्वतंत्र शासक न होकर कोई सामन्त सरदार रहा होगा। इस समय की सार्वभौम सत्ता प्रतिहारों की थी।

➣ नन्नुक के बाद क्रमश: वाक्पति, जयशक्ति, विजयशक्तिराहिल के नाम मिलते है।

हर्ष (900 – 925 ई.) : प्रारंभिक विस्तार

राहिल का पुत्र तथा उत्तराधिकारी हर्ष एक शक्तिशाली शासक था। खजुराहों लेख में उसे परमभट्टारक कहा गया है जो उसकी स्वतंत्र स्थिति का द्योतक है।

➣ हर्ष ने अपने समकालीन दो राजवंशों (चौहान, कलचुरि) के साथ वैवाहिक सम्बन्ध स्थापित कर अपनी स्थिति सुदृढ़ कर ली।

➣ उसने अपने वंश की कन्या नट्टादेवी का विवाह कलचुरि नरेश कोक्कल के साथ तथा स्वयं अपना विवाह चाहमान वंश की कन्या कंचुका के साथ किया था।

यशोवर्मन (925 – 950 ई.) : राज्य सुदृढ़ीकरण

➣ यशोवर्मन (लक्ष्मणवर्मन) इस वंश का प्रथम शक्तिशाली शासक था। यशोवर्मन एक साम्राज्यवादी शासक था। यशोवर्मन के शासन काल चन्देलों की शक्ति अपने चरमोत्कर्ष पर थी।

➣ यशोवर्मन ने सर्वप्रथम प्रतिहारों के अधीन कन्नौज पर आक्रमण किया, तत्पश्चात् राष्ट्रकूटों से कालिंजर दुर्ग जीता। उसने मालवा, चेदि और मद्यकोशल पर आक्रमण करके अपने राज्य का पर्याप्त विस्तार किया।

➣ यशोवर्मन ने प्रतिहार राजा देवपाल को पराजित किया एंव प्रतिहारों से कालिंजर छीन लिया। कालिंजर को जीतने के बाद यशोवर्मन के राज्य की सीमा गंगा एवं यमुना तक विस्तृत हो गई थी।

खजुराहो में प्राप्त एक लेख के वर्णन के आधार पर यशोवर्मन को गौड़, खस, कोशल, मालवा, चेदि, कुरु, गुर्जर आदि का विजेता माना जाता है।

➣ यशोवर्मन ने खजुराहो में एक विशाल विष्णु मन्दिर, जो कि कन्दारिया महादेव मन्दिर के नाम से प्रसिद्ध है, का निर्माण करवाया। इस मन्दिर को चतुर्भुज मंदिर भी कहा जाता है तथा मंदिर में वैकुण्ठ की मूर्ति यशोवर्मन ने स्थापित करायी थी।

➣ यशोवर्मन सम्भवत: 950 ई. में मृत्यु हो गई। धंगदेव उसका उत्तराधिकारी बना।

➣ धंग ने ब्राह्मणों को भूमि दान में दिया तथा उन्हें उच्च प्रशासनिक पदों पर नियुक्त किया। धंग ने तुलापुरूष दान किया था।

धंग देव (950 – 1002 ई.) : खजुराहो मंदिरों का उत्कर्ष

यशोधर्मन का पुत्र धंग देव इस वंश का प्रसिद्ध शासक था। जिसका वर्णन खजुराहो एवं नन्योरा अभिलेख करता है। इसने ही प्रतिहारों से पूर्ण स्वतंत्रता की घोषणा की।

➣ धंग की ग्वालियर विजय के पश्चात् ही चन्देल प्रतिहारों की अधीनता से मुक्त हुए इसलिए धंग को चन्देलों की स्वाधीनता का वास्तविक जन्मदाता कहा जाता है।

ग्वालियर की विजय धंग देव की सबसे महत्वपूर्ण सफलता थी।।

➣ धंग ने सर्वप्रथम कालिंजर को राजधानी बनाया लेकिन बाद में राजधानी खजुराहो स्थानान्तरित कर दी।

➣ धंग देव का साम्राज्य पश्चिम में ग्वालियर, पूर्व में वाराणसी, उत्तर में यमुनादक्षिण में चेदि एवं मालवा तक विस्तृत था ।

➣ धंग ने भटिण्डा के शाही शासक जयपाल को सुबुक्तगीन के विरुद्ध सैनिक सहायता भेजी थी तथा उसके विरुद्ध बने हिन्दू राजाओं के संघ में सम्मिलित हुआ।

➣ उसने ब्राह्मणों को उच्च पदों पर नियुक्त किया। उसका मुख्य न्यायाधीश भट्टयशोधर तथा प्रधानमंत्री प्रभास जैसे विद्वान् ब्राह्मण थे।

➣ धंग प्रसिद्ध विजेता होने के साथ ही उच्चकोटि का निर्माता भी था। उसके शासन काल में निर्मित खजुराहो का विश्व विख्यात मंदिर स्थापत्य कला का एक अनोखा उदाहरण है। इसमें जिननाथ, वैद्यनाथ, विश्वनाथ विशेष उल्लेखनीय हैं।

➣ धंग 100 साल से अधिक जीवित रहा। अपने अंत समय में उसने प्रयाग में गंगा-यमुना के संगम में अपना शरीर त्याग दिया।

गण्ड देव (1002 – 1019 ई.) : चंदेल शक्ति का कमजोर होना

➣ धंग देव के पश्चात उसका पुत्र गण्ड देव चन्देलवंश का राजा बना। वह अधिक आयु में शासक बना था। इसी कारण ही वह न तो विजय किया और न कोई लेख लिखवाये।

➣ गण्ड के काल में चन्देलों की शक्ति अक्षुण रही। त्रिपुरी के कलचुरि-चेदी तथा ग्वालियर के कच्छपघात शासक उसकी अधीनता स्वीकार करते थे।

➣ गंडदेव ने 1008 ई. में महमूद ग़ज़नवी के विरुद्ध जयपाल के पुत्र आनन्दपाल द्वारा बनाये गये संघ में भाग लिया था।

विद्याधर (1019 – 1029 ई.) : महमूद गजनवी से संघर्ष

➣ गण्ड देव के पश्चात उसका पुत्र विद्याधर शासक बना। वह चन्देल शासकों में सर्वाधिक शक्तिशाली था। मुस्लिम लेखक उसका उल्लेख चन्द्र एवं विदा नाम से करते है।

1019 ई. में महमूद ने कन्नौज के प्रतिहार शासक राज्यपाल के ऊपर आक्रमण किया। राज्यपाल ने डरकर बिना युद्ध के ही आत्मसमर्पण कर दिया। क्रोध वश विद्याधर ने प्रतिहार शासक राज्यपाल की हत्या कर दी।

विद्याधर ही अकेला ऐसा भारतीय राजा था जिसने महमूद गजनवी की महत्वाकांक्षाओं का सफलतापूर्वक प्रतिरोध किया।

➣ विद्याधर ने मालवा के परमार शासक भोज एवं कलचुरि गांगेय देव को अपनी अधीनता मानने के लिए बाध्य किया था।

➣ विद्याधर के समय गजनवी ने चन्देलों पर आक्रमण किया लेकिन गजनवी उन्हें परास्त नहीं कर सका।

1022 ई. में महमूद के दूसरे आक्रमण के समय विद्याधर ने उससे शांति का समझौता कर लिया। विद्याधर की मृत्यु के पश्चात चन्देल वंश की शक्ति का क्रमिक हास प्रारम्भ हुआ।

➣ उसके पुत्र विजयपाल तथा पौत्र देववर्मन के काल में चन्देल, कलचुरि- चेदि वंशी शासक गांगेयदेव तथा कर्ण की अधीनता स्वीकार करते थे। एक लेख में विजयपाल को नृपेन्द्र कहा गया है।

कीर्तिवर्मन (1060 – 1100 ई.) : पुनरुत्थान काल

देववर्मन के उपरान्त उसका छोटा भाई कीर्त्तिवर्मन राजा बना। वह सफल शासक सिद्ध हुआ।

➣ उसके राज्यारोहण के समय संभवतः चेदि नरेश कर्ण ने देववर्मन को हराकर चन्देल राज्य पर अधिकार कर लिया था।

➣ कीर्तिवर्मा ने अपने सामंत गोपाल की सहायता से कर्ण को हराया था। इस संस्कृत नाटक में चेदिराज के विरुद्ध गोपाल के युद्धों और विजयों का उल्लेख है।

➣ उसमें कहा गया है कि गोपाल ने नृपति तिलक कीर्तिवर्मा को पृथ्वी के साम्राज्य का स्वामी बनाया तथा उनके दिग्विजय व्यापार में शामिल हुआ।

➣ महोबा के निकट कीरत सागर नामक एक झील का निर्माण कीर्तिवर्मा ने करवाया था।

➣ प्रबोधचन्द्रोदय का रचयिता श्री कृष्णा मिश्र चन्देल शासक कीर्तिवर्मा (1060 ई. से 1100 ई.) का राज कवि था। इस नाटक में विष्णु भक्ति का वर्णन है।

मदन वर्मा (1100 – 1163 ई.) : स्थिरता एवं प्रशासन

पृथ्वी वर्मन का पुत्र मदन वर्मा चन्देल वंश का एक शक्तिशाली राजा हुआ।

बुन्देलखण्ड के चार प्रमुख स्थान ( कालिंजर, खजुराहों, अजयगढ़, महोबा) में चन्देल सत्ता पुनः स्थापित हो गया था।

➣ उसका साम्राज्य त्रिभुजाकार रूप में बढ़ गया जिसके आधार का निर्माण विन्ध्य, भाण्डीर तथा कैमूर की पर्वत श्रेणियां करती थी तथा यमुना और बेतवा नदियों उसकी दो भुजायें थी।

34 वर्षों के दीर्घकाली शासन के उपरान्त मदन वर्मा 1163 ई. में निधन हुआ था।

➣ चन्देल लेखों में सामान्यतः मदनवर्मा के बाद परमर्दि का नाम मिलता है। उसे तत्पादानुध्यात कहा गया है। इससे सूचित होता है कि मदन वर्मा का तत्कालिक उत्तराधिकारी परमर्दि की हुआ।

परमर्दिदेव वर्मन (परमल) (1165 – 1203 ई.) : कुतुबुद्दीन ऐबक से संघर्ष एवं पतन

➣ परमर्दि चन्देल वंश का अन्तिम महान शासक था। जिसने 1165-1203 ई तक राज्य किया। परमर्दि तथा चाहमान वंश के प्रसिद्ध शासक पृथ्वीराज तृतीय के बीच शत्रुता थी।

आल्हा तथा ऊदल नामक चन्देल सेना के दो वीर सेनानायक थे। ऊदल पृथ्वीराज के विरूद्ध लड़ते हुये मारा गया जबकि आल्हा ने सन्यास ले लिया।

आल्हा खण्ड नामक काव्य की रचना जगनिक ने की थी।

➣ पृथ्वीराज ने परमर्दिन को पराजित कर महोबा पर अधिकार कर लिया। महोबा (बुन्देलखण्ड) पर उसका अधिकार मदनपुरलेख (1182 ई.) से भी पुष्ठ होता है। 1183 ई. का उसका लेख मिलता है। जिसमें उसे दशार्णाधिपति कहा गया है।

➣ 1203 ई. में कुतुबद्दीन ने परमर्दिदेव को पराजित कर कालंजर के दुर्ग पर अधिकार कर लिया। अंततः 1305 ई. में चन्देल राज्य दिल्ली में मिल गया।

➣ कालंजर के दुर्ग में ही परमर्दिन की मृत्यु हो गयी। फिरिश्ता के विवरण से पता चलता है कि उसके स्वय के मंत्री अजयदेव ने उसकी कायरता से चिढ़ कर उसकी हत्या कर दी।

📚 Chapters

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    Swipe left/right to change content

    Share This Page

    WhatsApp Telegram