ब्रिटिश समिति (1889 ई.)
➣ ब्रिटिश समिति की स्थापना जुलाई 1889 ई. में लंदन (इंग्लैंड) में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा की गई थी।
➣ इसका उद्देश्य ब्रिटिश संसद, ब्रिटिश सरकार तथा ब्रिटिश जनता के समक्ष भारतीयों की समस्याओं एवं कांग्रेस की माँगों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना था, क्योंकि भारत सरकार संवैधानिक रूप से ब्रिटिश संसद के प्रति उत्तरदायी थी। इस समिति के गठन में सर विलियम वेडरबर्न, विलियम डिग्बी, डब्ल्यू. एस. केन तथा अन्य ब्रिटिश उदारवादी नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
➣ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 ई. में होने के बाद ही यह अनुभव किया गया कि भारत में उठाई गई राजनीतिक माँगों को केवल भारत तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं होगा। चूँकि भारत से संबंधित अंतिम निर्णय ब्रिटिश संसद में लिए जाते थे, इसलिए ब्रिटेन में भी भारतीय पक्ष को संगठित रूप से प्रस्तुत करना आवश्यक था।
➣ इसी उद्देश्य से 1888 ई. में कांग्रेस ने ब्रिटेन में एक भारतीय अभिकरण स्थापित किया, जिसने ब्रिटिश जनता, सांसदों तथा समाचार-पत्रों के बीच भारतीय प्रश्नों का प्रचार-प्रसार प्रारम्भ किया। इस प्रारम्भिक प्रयास के आधार पर जुलाई 1889 ई. में औपचारिक रूप से ब्रिटिश समिति का गठन किया गया।
➣ उल्लेखनीय है कि डब्ल्यू. सी. बनर्जी तथा दादाभाई नौरोजी इससे पहले ही ब्रिटिश सांसद चार्ल्स ब्रैडला जैसे भारत-समर्थक नेताओं के सहयोग से ब्रिटिश संसद में भारतीय प्रश्न उठा चुके थे। इन प्रयासों ने भी ब्रिटेन में कांग्रेस की एक स्थायी समिति स्थापित करने की आवश्यकता को और अधिक स्पष्ट किया।
कुछ समकालीन स्रोतों तथा पुराने हिन्दी ग्रंथों में 1887 ई. में इंग्लैंड में भारतीय सुधार समिति (Indian Reform Committee) के गठन का उल्लेख मिलता है। अधिकांश आधुनिक इतिहासकार इसे 1889 ई. में स्थापित ब्रिटिश समिति का प्रारम्भिक रूप अथवा पूर्ववर्ती प्रयास मानते हैं। इसलिए विभिन्न स्रोतों में 1887 तथा 1889 दोनों वर्ष मिल सकते हैं।
ब्रिटिश समिति के उद्देश्य
- ब्रिटिश संसद एवं ब्रिटिश सरकार के समक्ष भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की माँगों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना।
- ब्रिटिश जनता को भारत की राजनीतिक, आर्थिक एवं प्रशासनिक समस्याओं से अवगत कराना।
- भारतीय प्रशासन में संवैधानिक सुधारों तथा भारतीयों के अधिकारों के पक्ष में ब्रिटिश जनमत तैयार करना।
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस एवं ब्रिटिश उदारवादी नेताओं के बीच समन्वय स्थापित करना।
- भारतीय प्रश्नों को ब्रिटिश संसद एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता दिलाना।
प्रमुख पदाधिकारी एवं संबंधित व्यक्ति
- सर विलियम वेडरबर्न– समिति के प्रथम अध्यक्ष। वे 1889 ई. से अपनी मृत्यु (1918 ई.) तक इस पद पर रहे। वे बॉम्बे सिविल सेवा के पूर्व अधिकारी तथा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख ब्रिटिश समर्थकों में से एक थे।
- विलियम डिग्बी– समिति के प्रथम सचिव। उन्होंने ब्रिटेन में भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के प्रचार-प्रसार तथा समिति की गतिविधियों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- दादाभाई नौरोजी– समिति के प्रमुख सदस्य। 1892 ई. में वे फ़िन्सबरी सेंट्रल निर्वाचन क्षेत्र से लिबरल पार्टी के उम्मीदवार के रूप में ब्रिटिश हाउस ऑफ़ कॉमन्स के लिए निर्वाचित होने वाले प्रथम भारतीय बने।
- डब्ल्यू. एस. केन– ब्रिटिश उदारवादी सांसद तथा समिति के सक्रिय सदस्य, जिन्होंने ब्रिटिश संसद में भारतीय सुधारों के समर्थन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- चार्ल्स ब्रैडला– ब्रिटिश संसद के कट्टरपंथी सांसद। उन्होंने भारतीय प्रश्नों को संसद में उठाया तथा भारतीय काउंसिल्स संबंधी विधेयक प्रस्तुत किया, जो आगे चलकर भारतीय काउंसिल्स अधिनियम, 1892 के रूप में पारित हुआ।
ब्रिटिश समिति की गतिविधियाँ एवं संबद्ध संस्थाएँ
India पत्रिका का प्रकाशन
➣ ब्रिटिश समिति ने 1890 ई. में India नामक पत्रिका का प्रकाशन प्रारम्भ किया। यह प्रारम्भ में अनियमित रूप से प्रकाशित होती थी, किंतु 1892 ई. से इसका मासिक तथा 1893 ई. से साप्ताहिक प्रकाशन होने लगा।
➣ इस पत्रिका के माध्यम से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की नीतियों, भारत की राजनीतिक, आर्थिक एवं प्रशासनिक समस्याओं, अकालों, कर-नीति तथा प्रशासनिक सुधारों की माँगों से संबंधित जानकारी ब्रिटिश जनता एवं सांसदों तक पहुँचाई जाती थी। यह ब्रिटेन में भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के प्रचार का प्रमुख माध्यम बन गई।
इंडियन पार्लियामेंट्री कमिटी (1893 ई.)
➣ जब सर विलियम वेडरबर्न (बैनफ़शायर) तथा दादाभाई नौरोजी (फ़िन्सबरी सेंट्रल) दोनों ब्रिटिश हाउस ऑफ़ कॉमन्स के सदस्य निर्वाचित हो गए, तब 1893 ई. में सर विलियम वेडरबर्न एवं डब्ल्यू. एस. केन ने दादाभाई नौरोजी तथा अन्य भारत-हितैषी सांसदों के सहयोग से इंडियन पार्लियामेंट्री कमिटी (Indian Parliamentary Committee) का गठन किया।
➣ इस समिति का उद्देश्य ब्रिटिश संसद में भारतीय प्रश्नों को नियमित रूप से उठाना, भारतीय राजनीतिक सुधारों के पक्ष में सांसदों का समर्थन प्राप्त करना तथा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और ब्रिटिश संसद के बीच समन्वय स्थापित करना था।
अन्य प्रमुख गतिविधियाँ
➣ ब्रिटिश समिति ने सार्वजनिक सभाओं, व्याख्यानों, पर्चों तथा ब्रिटिश सांसदों से प्रत्यक्ष संपर्क के माध्यम से भारत की समस्याओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया। इसके अतिरिक्त समिति ब्रिटिश समाचार-पत्रों में भारतीय प्रश्नों को प्रमुखता से उठाने का भी प्रयास करती थी।
➣ समिति की कार्यशैली को प्रायः ब्रिटेन के प्रसिद्ध एंटी-कॉर्न-लॉ लीग के समान माना जाता है, क्योंकि यह भी संवैधानिक एवं शांतिपूर्ण तरीकों से दबाव-समूह के रूप में कार्य करती थी।
➣ यह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ब्रिटेन स्थित आधिकारिक समिति थी, जिसने ब्रिटिश संसद एवं सरकार के समक्ष भारतीयों की समस्याओं को संगठित रूप से प्रस्तुत किया।
➣ इसने ब्रिटिश संसद, ब्रिटिश जनता तथा उदारवादी नेताओं के बीच भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
➣ समिति ने India पत्रिका के माध्यम से भारतीय प्रश्नों, कांग्रेस की नीतियों तथा प्रशासनिक सुधारों की माँगों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया।
➣ इंडियन पार्लियामेंट्री कमिटी (1893) के गठन के माध्यम से भारतीय प्रश्नों को ब्रिटिश संसद की नियमित बहसों का हिस्सा बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
➣ इसने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस तथा ब्रिटिश सांसदों एवं उदारवादी नेताओं के बीच एक प्रभावी संवाद स्थापित किया, जिससे भारतीय सुधारों के पक्ष में जनमत तैयार करने में सहायता मिली।
➣ विदेश में कांग्रेस की पहली संगठित प्रचार-व्यवस्था के रूप में इसने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
➣ ब्रिटिश समिति 1921 ई. तक सक्रिय रही, जिसके पश्चात् इसे भंग कर दिया गया। उसी वर्ष इसके अभिलेख भारत लाकर इलाहाबाद स्थित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के कार्यालय में जमा कर दिए गए। इस प्रकार यह समिति लगभग 32 वर्षों (1889–1921) तक भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की ब्रिटेन स्थित प्रमुख सहायक इकाई के रूप में कार्य करती रही।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| स्थापना वर्ष | जुलाई, 1889 ई. |
| स्थान | लंदन (इंग्लैंड) |
| स्थापना | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा |
| प्रथम अध्यक्ष | सर विलियम वेडरबर्न |
| प्रथम सचिव | विलियम डिग्बी |
| अन्य प्रमुख सदस्य | दादाभाई नौरोजी, डब्ल्यू. एस. केन, डब्ल्यू. सी. बनर्जी, चार्ल्स ब्रैडला (सहयोगी सांसद) |
| मुख्य उद्देश्य | ब्रिटिश संसद एवं जनता के समक्ष भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की माँगों तथा भारतीय समस्याओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना। |
| प्रमुख पत्रिका | India (1890; 1892 से मासिक, 1893 से साप्ताहिक) |
| संबद्ध संस्था | इंडियन पार्लियामेंट्री कमिटी (1893 ई.) |
| संबंधित अधिनियम | भारतीय काउंसिल्स अधिनियम, 1892 |
| अंत | 1921 ई.; अभिलेख इलाहाबाद स्थित AICC कार्यालय में जमा किए गए। |
| विशेषता | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ब्रिटेन स्थित आधिकारिक समिति, जिसने India पत्रिका एवं इंडियन पार्लियामेंट्री कमिटी के माध्यम से भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का ब्रिटेन में प्रचार-प्रसार किया। |
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