अभिनव भारत (1904) : मित्र मेला, नासिक षड्यंत्र प्रकरण, सावरकर एवं क्रांतिकारी आंदोलन

भारतीय इतिहास आधुनिक भारत अभिनव भारत (1904)
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अभिनव भारत

अभिनव भारत आधुनिक भारत के प्रारम्भिक एवं सबसे महत्वपूर्ण गुप्त क्रांतिकारी संगठनों में से एक था। यह संगठन मित्र मेला (1899) का विकसित रूप था।

➣ इसकी स्थापना 1904 ई. में विनायक दामोदर सावरकर (वी. डी. सावरकर) एवं उनके बड़े भाई गणेश दामोदर सावरकर (बाबाराव सावरकर) ने नासिक (महाराष्ट्र) में की।

➣ अभिनव भारत का उद्देश्य केवल राजनीतिक सुधार प्राप्त करना नहीं था, बल्कि सशस्त्र क्रांति के माध्यम से ब्रिटिश शासन का अंत कर भारत को पूर्ण स्वतंत्र बनाना था। संगठन का विश्वास था कि विदेशी शासन को केवल संगठित क्रांतिकारी संघर्ष द्वारा ही समाप्त किया जा सकता है।

➣ अभिनव भारत ने महाराष्ट्र के साथ-साथ भारत के अन्य भागों तथा विदेशों में भी अपने क्रांतिकारी नेटवर्क का विस्तार किया। विशेष रूप से लंदन के इंडिया हाउस के माध्यम से इसने भारतीय विद्यार्थियों एवं प्रवासी युवाओं को संगठित कर उनमें राष्ट्रवादी और क्रांतिकारी विचारधारा का प्रसार किया।

मदनलाल धींगरा द्वारा सर कर्जन वायली की हत्या, नासिक षड्यंत्र प्रकरण, तथा विनायक दामोदर सावरकर की गिरफ्तारी जैसी घटनाओं ने अभिनव भारत को भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन के इतिहास में विशेष स्थान दिलाया।

➣ यद्यपि ब्रिटिश सरकार के कठोर दमन के कारण अभिनव भारत लंबे समय तक एक संगठित क्रांतिकारी संस्था के रूप में सक्रिय नहीं रह सका, फिर भी इसने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में क्रांतिकारी राष्ट्रवाद की भावना को सुदृढ़ किया और आगे आने वाले अनेक क्रांतिकारी संगठनों के लिए प्रेरणा का कार्य किया।

स्थापना की पृष्ठभूमि

उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम वर्षों में भारत में ब्रिटिश शासन के प्रति असंतोष तेजी से बढ़ रहा था। औपनिवेशिक शासन की दमनकारी नीतियों, आर्थिक शोषण तथा भारतीयों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार ने विशेषकर शिक्षित युवाओं में राष्ट्रीय चेतना को प्रबल कर दिया था।

➣ उस समय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पर उदारवादी नेताओं का प्रभाव था, जो याचिकाओं, प्रार्थनाओं और संवैधानिक उपायों के माध्यम से राजनीतिक अधिकार प्राप्त करने का प्रयास कर रहे थे।

➣ किंतु अनेक युवा राष्ट्रवादियों का विश्वास था कि इन उपायों से भारत को स्वतंत्र नहीं कराया जा सकता। इसलिए वे अधिक संगठित और संघर्षपूर्ण मार्ग अपनाने के पक्षधर बनने लगे।

➣ इस अवधि में छत्रपति शिवाजी महाराज के साहसपूर्ण जीवन, 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियों तथा बाल गंगाधर तिलक द्वारा जागृत राष्ट्रवादी चेतना ने महाराष्ट्र के युवाओं को गहराई से प्रभावित किया।

➣ साथ ही बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के ‘वंदे मातरम्’ और स्वामी विवेकानंद के राष्ट्रवादी विचारों ने भी उनमें आत्मगौरव और देशभक्ति की भावना को मजबूत किया।

➣ इन परिस्थितियों में अनेक युवाओं ने यह अनुभव किया कि ब्रिटिश शासन का सामना करने के लिए गुप्त संगठन, अनुशासित प्रशिक्षण तथा क्रांतिकारी विचारधारा का विकास आवश्यक है।

➣ इसी सोच के परिणामस्वरूप 1899 ई. में मित्र मेला की स्थापना हुई, जिसने आगे चलकर 1904 ई. में अभिनव भारत का रूप धारण किया।

मित्र मेला की स्थापना (1899)

1899 ई. में विनायक दामोदर सावरकर (वी. डी. सावरकर) ने अपने बड़े भाई गणेश दामोदर सावरकर (बाबाराव सावरकर) के सहयोग से नासिक (महाराष्ट्र) में मित्र मेला की स्थापना की। यह एक गुप्त राष्ट्रवादी युवा संगठन था, जिसे आगे चलकर अभिनव भारत के रूप में विकसित किया गया।

➣ मित्र मेला का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रवादी युवाओं को संगठित करना तथा उन्हें अनुशासित एवं समर्पित कार्यकर्ता के रूप में तैयार करना था। संगठन के सदस्यों को गोपनीय ढंग से जोड़ा जाता था और उनसे मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए कार्य करने की प्रतिज्ञा कराई जाती थी।

➣ संगठन की गतिविधियों में शारीरिक प्रशिक्षण, व्यायाम, लाठी एवं शस्त्र संचालन, राष्ट्रवादी साहित्य का अध्ययन तथा गुप्त बैठकों का आयोजन शामिल था। इन गतिविधियों का उद्देश्य युवाओं को भविष्य के क्रांतिकारी संघर्ष के लिए तैयार करना था।

➣ कुछ ही वर्षों में मित्र मेला का प्रभाव महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों तक फैल गया। संगठन के बढ़ते कार्यक्षेत्र और व्यापक उद्देश्यों को देखते हुए 1904 ई. में इसका पुनर्गठन किया गया और इसका नाम अभिनव भारत रखा गया। इसके साथ ही यह एक स्थानीय युवा संगठन से विकसित होकर संगठित क्रांतिकारी संस्था बन गया।

अभिनव भारत नामकरण (1904)

1904 ई. में मित्र मेला का विस्तार एवं पुनर्गठन कर उसका नाम अभिनव भारत रखा गया। इस संगठन की स्थापना विनायक दामोदर सावरकर (वी. डी. सावरकर) एवं उनके बड़े भाई गणेश दामोदर सावरकर (बाबाराव सावरकर) ने नासिक (महाराष्ट्र) में की।

➣ ‘अभिनव भारत‘ नाम की प्रेरणा इटली के प्रसिद्ध क्रांतिकारी ज्यूसेपे मैज़िनी द्वारा स्थापित यंग इटली संगठन से ली गई थी। सावरकर मैज़िनी के राष्ट्रवादी और क्रांतिकारी विचारों से अत्यंत प्रभावित थे तथा भारत में भी उसी प्रकार का एक गुप्त क्रांतिकारी संगठन स्थापित करना चाहते थे।

➣ अभिनव भारत ने राष्ट्रवादी साहित्य के प्रचार, गुप्त बैठकों, शस्त्र प्रशिक्षण तथा क्रांतिकारी संगठन निर्माण पर विशेष बल दिया।

➣ आगे चलकर विनायक दामोदर सावरकर के लंदन जाने के बाद संगठन की गतिविधियों का विस्तार विदेशों तक हुआ और उसका संबंध इंडिया हाउस से भी स्थापित हुआ। इससे अभिनव भारत भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया।

प्रमुख संस्थापक एवं नेतृत्व

व्यक्तित्व भूमिका / योगदान
विनायक दामोदर सावरकर (वी. डी. सावरकर) अभिनव भारत के प्रमुख संस्थापक; संगठन की वैचारिक दिशा निर्धारित की तथा क्रांतिकारी आंदोलन को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गणेश दामोदर सावरकर (बाबाराव सावरकर) सह-संस्थापक; महाराष्ट्र में संगठन के विस्तार तथा युवाओं को संगठित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
नारायण दामोदर सावरकर सावरकर परिवार के सदस्य; अभिनव भारत की गतिविधियों में सहयोग किया तथा संगठन के कार्यों को आगे बढ़ाने में योगदान दिया।
मदनलाल धींगरा लंदन में इंडिया हाउस से जुड़े प्रमुख क्रांतिकारी; 1909 ई. में सर कर्जन वायली की हत्या कर भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित किया।
श्यामजी कृष्ण वर्मा इंडिया हाउस (लंदन) के संस्थापक; भारतीय विद्यार्थियों एवं क्रांतिकारियों को संरक्षण प्रदान किया तथा अभिनव भारत के सदस्यों को वैचारिक एवं संगठनात्मक सहयोग दिया।
वी. वी. एस. अय्यर इंडिया हाउस से जुड़े प्रमुख क्रांतिकारी; सावरकर के सहयोगी तथा क्रांतिकारी गतिविधियों के सक्रिय आयोजक।
अनंत लक्ष्मण कान्हेरे नासिक षड्यंत्र प्रकरण (1909) में नासिक के कलेक्टर ए. एम. टी. जैक्सन की हत्या करने वाले प्रमुख क्रांतिकारी।

उद्देश्य

➣ अभिनव भारत के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित थे-

  • भारत को ब्रिटिश शासन से पूर्ण स्वतंत्र कराने के लिए राष्ट्रवादी युवाओं को संगठित करना।
  • गुप्त क्रांतिकारी संगठन का निर्माण कर देशभर में उसके नेटवर्क का विस्तार करना।
  • युवाओं में देशभक्ति, त्याग, अनुशासन तथा राष्ट्रवादी चेतना का विकास करना।
  • शारीरिक प्रशिक्षण, शस्त्र संचालन तथा सैन्य अनुशासन के माध्यम से युवाओं को क्रांतिकारी संघर्ष के लिए तैयार करना।
  • क्रांतिकारी साहित्य के प्रकाशन एवं प्रचार के माध्यम से ब्रिटिश शासन के विरुद्ध जनमत तैयार करना।
  • भारत एवं विदेशों में रह रहे भारतीय युवाओं को एक साझा क्रांतिकारी मंच पर संगठित करना तथा उनके बीच समन्वय स्थापित करना।
  • विश्व के अन्य राष्ट्रवादी आंदोलनों, विशेषकर ज्यूसेपे मैज़िनी के यंग इटली आंदोलन से प्रेरणा लेकर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को अधिक संगठित और प्रभावी बनाना।
  • भारतीयों में राष्ट्रीय एकता, आत्मसम्मान एवं स्वराज्य की भावना को सुदृढ़ करना।

➣ इस प्रकार अभिनव भारत केवल एक गुप्त क्रांतिकारी संगठन नहीं था, बल्कि ऐसा राष्ट्रवादी मंच था, जिसने युवाओं में स्वतंत्रता, संगठन, अनुशासन और बलिदान की भावना विकसित कर भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन को नई दिशा प्रदान की।

प्रमुख गतिविधियाँ

इंडिया हाउस एवं विदेशों में क्रांतिकारी गतिविधियाँ

1906 ई. में विनायक दामोदर सावरकर कानून की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए। वहाँ वे श्यामजी कृष्ण वर्मा द्वारा 1905 ई. में लंदन में स्थापित इंडिया हाउस से जुड़े। प्रारम्भ में इंडिया हाउस भारतीय विद्यार्थियों के लिए एक छात्रावास था, किंतु शीघ्र ही यह भारतीय क्रांतिकारियों का प्रमुख केंद्र बन गया।

➣ सावरकर के नेतृत्व में इंडिया हाउस भारतीय राष्ट्रवादी एवं क्रांतिकारी गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र बन गया। यहाँ भारतीय विद्यार्थियों को स्वतंत्रता, राष्ट्रवाद तथा क्रांतिकारी विचारधारा से परिचित कराया जाता था। साथ ही विदेशी क्रांतिकारी आंदोलनों का अध्ययन, राजनीतिक चर्चाएँ तथा संगठनात्मक बैठकों का नियमित आयोजन किया जाता था।

➣ सावरकर ने लंदन में रहते हुए ज्यूसेपे मैज़िनी के जीवन एवं विचारों का अध्ययन किया और उनसे प्रेरित होकर भारतीय युवाओं में संगठित क्रांतिकारी आंदोलन की भावना विकसित की। इसी अवधि में उन्होंने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम को भारत का पहला स्वतंत्रता युद्ध सिद्ध करते हुए प्रसिद्ध ग्रंथ ‘द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस, 1857’ लिखा। ब्रिटिश सरकार ने इस पुस्तक के प्रकाशन पर प्रतिबंध लगा दिया, किंतु इसकी प्रतियाँ गुप्त रूप से भारत और यूरोप के विभिन्न देशों में पहुँचाई गईं।

➣ इंडिया हाउस के माध्यम से अभिनव भारत का संपर्क विदेशों में रह रहे भारतीय विद्यार्थियों एवं राष्ट्रवादियों से स्थापित हुआ। मदनलाल धींगरा, वी. वी. एस. अय्यर, लाला हरदयाल तथा अन्य अनेक युवा क्रांतिकारी इससे प्रभावित हुए। इस प्रकार अभिनव भारत का प्रभाव भारत तक सीमित न रहकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी फैलने लगा। ब्रिटिश सरकार इंडिया हाउस की बढ़ती क्रांतिकारी गतिविधियों से चिंतित थी और उसकी गतिविधियों पर लगातार निगरानी रख रही थी। आगे चलकर 1909 ई. में मदनलाल धींगरा द्वारा सर कर्जन वायली की हत्या के बाद इंडिया हाउस और अभिनव भारत दोनों ब्रिटिश सरकार के निशाने पर आ गए।

मदनलाल धींगरा द्वारा सर कर्जन वायली की हत्या (1909)

मदनलाल धींगरा का जन्म 18 फरवरी 1883 ई. को अमृतसर (पंजाब) में एक समृद्ध परिवार में हुआ था। उनके पिता डॉ. दित्तामल धींगरा ब्रिटिश सरकार के अधीन उच्च पद पर कार्यरत थे और अंग्रेज़ी शासन के समर्थक माने जाते थे।

➣ उच्च शिक्षा के लिए मदनलाल धींगरा 1906 ई. में इंग्लैंड गए, जहाँ वे यूनिवर्सिटी कॉलेज, लंदन में अभियांत्रिकी की पढ़ाई करने लगे। इसी दौरान उनका संपर्क श्यामजी कृष्ण वर्मा द्वारा स्थापित इंडिया हाउस तथा विनायक दामोदर सावरकर से हुआ।

➣ इंडिया हाउस में रहकर धींगरा सावरकर के राष्ट्रवादी एवं क्रांतिकारी विचारों से अत्यंत प्रभावित हुए। उन्होंने ब्रिटिश शासन द्वारा भारत में किए जा रहे दमन, आर्थिक शोषण तथा राष्ट्रवादियों पर हो रहे अत्याचारों का गहन अध्ययन किया।

धीरे-धीरे उनका विश्वास दृढ़ हो गया कि विदेशी शासन का उत्तर केवल संगठित क्रांतिकारी संघर्ष से ही दिया जा सकता है।

1 जुलाई 1909 ई. को लंदन स्थित इम्पीरियल इंस्टीट्यूट में नेशनल इंडियन एसोसिएशन द्वारा आयोजित एक समारोह में मदनलाल धींगरा ने ब्रिटिश अधिकारी सर विलियम हट कर्जन वायली पर निकट से कई गोलियाँ चलाईं।

➣ कर्जन वायली की घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई। उन्हें बचाने का प्रयास कर रहे डॉ. कावस ललकाका भी गोली लगने से मारे गए।

➣ घटना के तुरंत बाद मदनलाल धींगरा को गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर सेंट्रल क्रिमिनल कोर्ट, लंदन में मुकदमा चलाया गया। न्यायालय में उन्होंने अपने बचाव के लिए कोई दया याचिका प्रस्तुत नहीं की।

➣ उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिस प्रकार कोई विदेशी शक्ति इंग्लैंड पर अधिकार कर ले तो अंग्रेज उसका विरोध करेंगे, उसी प्रकार भारतवासियों का भी विदेशी शासन के विरुद्ध संघर्ष करना उनका राष्ट्रीय अधिकार है।

➣ मुकदमे के दौरान मदनलाल धींगरा का प्रसिद्ध वक्तव्य अत्यंत चर्चित हुआ, जिसमें उन्होंने कहा कि वे अपने कृत्य पर गर्व करते हैं और यदि उन्हें पुनः अवसर मिले तो वे मातृभूमि के लिए वही कार्य फिर करेंगे। उनके इस निर्भीक व्यवहार ने भारतीय युवाओं में राष्ट्रवादी चेतना को नई प्रेरणा दी।

➣ ब्रिटिश न्यायालय ने मदनलाल धींगरा को मृत्युदंड की सज़ा सुनाई। 17 अगस्त 1909 ई. को उन्हें पेंटनविल कारागार, लंदन में फाँसी दे दी गई। उनकी शहादत का समाचार भारत पहुँचते ही अनेक राष्ट्रवादी युवाओं ने उन्हें स्वतंत्रता संग्राम का वीर शहीद माना, जबकि ब्रिटिश समर्थक वर्ग ने इस घटना की आलोचना की।

➣ इस घटना के बाद ब्रिटिश सरकार ने इंडिया हाउस की गतिविधियों पर कड़ा नियंत्रण स्थापित कर दिया। अनेक भारतीय विद्यार्थियों की निगरानी बढ़ा दी गई तथा विनायक दामोदर सावरकर सहित अभिनव भारत से जुड़े क्रांतिकारी ब्रिटिश सरकार के प्रमुख निशाने पर आ गए।

➣ आगे चलकर यही परिस्थितियाँ नासिक षड्यंत्र प्रकरण (1909) तथा सावरकर की गिरफ्तारी (1910) की पृष्ठभूमि बनीं।

नासिक षड्यंत्र प्रकरण (1909)

नासिक षड्यंत्र प्रकरण अभिनव भारत के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक था। इस घटना का संबंध नासिक के जिला मजिस्ट्रेट ए. एम. टी. जैक्सन की हत्या और उसके बाद चले मुकदमे से है।

इसी प्रकरण के कारण ब्रिटिश सरकार ने अभिनव भारत के विरुद्ध व्यापक दमन अभियान चलाया तथा विनायक दामोदर सावरकर (वी. डी. सावरकर) को भी इस मामले में आरोपी बनाया।


➣ इस घटना की शुरुआत गणेश दामोदर सावरकर (बाबाराव सावरकर) की गिरफ्तारी से हुई। बाबाराव सावरकर, वी. डी. सावरकर के बड़े भाई तथा अभिनव भारत के सह-संस्थापक थे।

➣ वे राष्ट्रवादी कविताओं, भाषणों और क्रांतिकारी साहित्य के माध्यम से युवाओं में देशभक्ति की भावना जागृत करते थे। ब्रिटिश सरकार ने उनकी इन गतिविधियों को राजद्रोह मानते हुए उनके विरुद्ध मुकदमा चलाया।

8 जून 1909 ई. को बाबाराव सावरकर को आजीवन परिवहन, अर्थात सेल्युलर जेल (काला पानी) की सज़ा सुनाई गई। इस कठोर दंड से अभिनव भारत के सदस्यों में भारी आक्रोश फैल गया।

उनका मानना था कि ए. एम. टी. जैक्सन ने इस पूरे मामले में ब्रिटिश सरकार का साथ दिया और बाबाराव सावरकर को कठोर दंड दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसलिए उन्होंने जैक्सन को दंडित करने का निर्णय लिया।

➣ इस कार्य का दायित्व युवा क्रांतिकारी अनंत लक्ष्मण कान्हेरे को सौंपा गया। 21 दिसंबर 1909 ई. को नासिक के विजयानंद थिएटर में एक मराठी नाटक के मंचन के दौरान, जब जैक्सन कार्यक्रम देखने पहुँचा, तब अनंत कान्हेरे ने उस पर निकट से कई गोलियाँ चलाईं, जिससे उसकी घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई। इसके तुरंत बाद कान्हेरे को गिरफ्तार कर लिया गया।

➣ हत्या की जाँच के दौरान पुलिस ने अभिनव भारत के कई सदस्यों को गिरफ्तार किया। तलाशी में हथियार, गुप्त दस्तावेज़ और क्रांतिकारी गतिविधियों से जुड़े अनेक प्रमाण मिले। जाँच आगे बढ़ने पर ब्रिटिश सरकार का ध्यान वी. डी. सावरकर की ओर गया। आरोप लगाया गया कि हत्या में प्रयुक्त ब्राउनिंग पिस्तौल लंदन से सावरकर द्वारा भारत भेजी गई थी।

➣ इस मामले में अनंत लक्ष्मण कान्हेरे, कृष्णाजी गोपाल कर्वे तथा विनायक नारायण देशपांडे को मृत्युदंड की सज़ा सुनाई गई। 19 अप्रैल 1910 ई. को तीनों को ठाणे केंद्रीय कारागार में फाँसी दे दी गई।

➣ नासिक षड्यंत्र प्रकरण के कारण ब्रिटिश सरकार ने अभिनव भारत पर शिकंजा और कस दिया। इसी मामले में मिले साक्ष्यों के आधार पर 13 मार्च 1910 ई. को लंदन में विनायक दामोदर सावरकर को गिरफ्तार कर लिया गया।

➣ आगे चलकर उनकी गिरफ्तारी, मार्सेई से भागने का प्रयास तथा सेल्युलर जेल (काला पानी) की सज़ा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे चर्चित प्रसंगों में शामिल हो गई।

विनायक दामोदर सावरकर की गिरफ्तारी(1910)

नासिक षड्यंत्र प्रकरण (1909) की जाँच के दौरान ब्रिटिश सरकार ने आरोप लगाया कि अनंत लक्ष्मण कान्हेरे द्वारा ए. एम. टी. जैक्सन की हत्या में प्रयुक्त ब्राउनिंग पिस्तौल विनायक दामोदर सावरकर (वी. डी. सावरकर) ने लंदन से भारत भेजी थी।

➣ इसके अतिरिक्त उन पर क्रांतिकारी साहित्य के प्रचार, हथियारों की व्यवस्था तथा अभिनव भारत के माध्यम से ब्रिटिश शासन के विरुद्ध षड्यंत्र रचने का भी आरोप लगाया गया।

➣ इन आरोपों के आधार पर 13 मार्च 1910 ई. को लंदन में सावरकर को गिरफ्तार कर लिया गया। ब्रिटिश सरकार ने उनके विरुद्ध भारत में मुकदमा चलाने का निर्णय लिया और उन्हें जलमार्ग से भारत भेजने की व्यवस्था की गई।

1 जुलाई 1910 ई. को सावरकर को एस. एस. मोरिया नामक जहाज से भारत लाया जा रहा था। 8 जुलाई 1910 ई. को जब यह जहाज फ्रांस के मार्सेई बंदरगाह पर रुका, तब सावरकर ने शौचालय की खिड़की (पोर्टहोल) से समुद्र में छलांग लगा दी।

➣ वे तैरकर फ्रांस के तट तक पहुँच गए और वहाँ राजनीतिक शरण लेने का प्रयास किया। किन्तु उनका यह प्रयास सफल नहीं हो सका। ब्रिटिश अधिकारियों ने फ्रांसीसी पुलिस की सहायता से उन्हें पुनः गिरफ्तार कर लिया और वापस जहाज पर ले आए।

➣ चूँकि गिरफ्तारी फ्रांस की भूमि पर हुई थी, इसलिए बाद में यह मामला ब्रिटेन और फ्रांस के बीच एक अंतरराष्ट्रीय कानूनी विवाद बन गया, जिसे इतिहास में सावरकर केस के नाम से जाना जाता है। अंततः इस विवाद का निपटारा हेग स्थित स्थायी पंचाट न्यायालय में हुआ, जहाँ ब्रिटेन के पक्ष में निर्णय दिया गया।

➣ भारत लाए जाने के बाद विनायक दामोदर सावरकर पर नासिक षड्यंत्र प्रकरण तथा ब्रिटिश शासन के विरुद्ध षड्यंत्र, राजद्रोह और हथियारों की तस्करी से संबंधित आरोपों में मुकदमा चलाया गया। यह मुकदमा बंबई (वर्तमान मुंबई) में गठित विशेष न्यायाधिकरण के समक्ष चला।

➣ विशेष न्यायाधिकरण ने पहले मुकदमे में 24 दिसंबर 1910 ई. को सावरकर को आजीवन परिवहन की सज़ा सुनाई। इसके बाद दूसरे मुकदमे में 30 जनवरी 1911 ई. को उन्हें पुनः एक और आजीवन परिवहन की सज़ा दी गई।

इस प्रकार उन्हें कुल दो आजीवन कारावास (50 वर्ष) का दंड मिला, जो उस समय अत्यंत कठोर दंड माना जाता था।

➣ सज़ा सुनाए जाने के बाद 27 जून 1911 ई. को सावरकर को अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह की कुख्यात सेल्युलर जेल (काला पानी) भेज दिया गया। वहाँ उन्होंने वर्षों तक कठोर कारावास, एकांतवास तथा श्रमपूर्ण दंड का सामना किया।

➣ सावरकर का मार्सेई से भागने का प्रयास भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास की सबसे साहसिक घटनाओं में से एक माना जाता है। इस घटना ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध कर दिया और भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन की ओर विश्व का ध्यान आकर्षित किया।

ब्रिटिश सरकार का दमन एवं अभिनव भारत का पतन

1909–1910 ई. की घटनाओं ने अभिनव भारत की गतिविधियों को गहरा आघात पहुँचाया। मदनलाल धींगरा द्वारा सर कर्जन वायली की हत्या, नासिक षड्यंत्र प्रकरण तथा विनायक दामोदर सावरकर की गिरफ्तारी के बाद ब्रिटिश सरकार ने संगठन के विरुद्ध व्यापक दमन अभियान चलाया।

➣ अनेक क्रांतिकारियों को गिरफ्तार किया गया, गुप्त ठिकानों पर छापे मारे गए तथा संगठन की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जाने लगी।

गणेश दामोदर सावरकर (बाबाराव सावरकर) पहले ही आजीवन परिवहन (काला पानी) की सज़ा पा चुके थे, जबकि विनायक दामोदर सावरकर को भी दो आजीवन कारावास देकर सेल्युलर जेल भेज दिया गया।

➣ इसके अतिरिक्त अनंत लक्ष्मण कान्हेरे, कृष्णाजी गोपाल कर्वे तथा विनायक नारायण देशपांडे को फाँसी दे दी गई। संगठन के अनेक अन्य सदस्य भी कारावास, निर्वासन अथवा पुलिस की निरंतर निगरानी का सामना करने लगे।

➣ ब्रिटिश सरकार की इन कठोर कार्रवाइयों के कारण अभिनव भारत का संगठित नेटवर्क धीरे-धीरे कमजोर पड़ गया। महाराष्ट्र में इसकी अधिकांश शाखाएँ निष्क्रिय हो गईं और खुले रूप में क्रांतिकारी गतिविधियाँ चलाना कठिन हो गया। परिणामस्वरूप संगठन पहले जैसी सक्रिय भूमिका निभाने में असमर्थ हो गया।

➣ यद्यपि एक संगठित संस्था के रूप में अभिनव भारत का प्रभाव धीरे-धीरे कम हो गया, फिर भी उसके विचार और कार्यपद्धति समाप्त नहीं हुए। संगठन द्वारा विकसित गुप्त संगठन निर्माण, क्रांतिकारी साहित्य के प्रचार, युवाओं के संगठन तथा सशस्त्र प्रतिरोध की परंपरा ने आगे चलकर भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन को नई दिशा दी।

➣ अभिनव भारत की वैचारिक विरासत का प्रभाव आगे चलकर गदर पार्टी, हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA), हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) तथा अन्य क्रांतिकारी संगठनों में भी दिखाई देता है।

➣ इस प्रकार, यद्यपि संगठन स्वयं अधिक समय तक सक्रिय नहीं रह सका, फिर भी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उसके योगदान और प्रेरणा का महत्व सदैव बना रहा।

प्रमुख व्यक्तित्व

व्यक्तित्व भूमिका / योगदान
विनायक दामोदर सावरकर (वी. डी. सावरकर) अभिनव भारत के प्रमुख संस्थापक; संगठन के वैचारिक नेता। लंदन में इंडिया हाउस के माध्यम से क्रांतिकारी आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप दिया तथा ‘द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस, 1857’ की रचना की।
गणेश दामोदर सावरकर (बाबाराव सावरकर) अभिनव भारत के सह-संस्थापक एवं वी. डी. सावरकर के बड़े भाई। महाराष्ट्र में संगठन के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा 1909 ई. में आजीवन परिवहन (काला पानी) की सज़ा प्राप्त की।
श्यामजी कृष्ण वर्मा इंडिया हाउस (लंदन) के संस्थापक। भारतीय विद्यार्थियों एवं क्रांतिकारियों को संरक्षण दिया तथा विदेशों में राष्ट्रवादी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया।
मदनलाल धींगरा 1 जुलाई 1909 ई. को लंदन में सर विलियम हट कर्जन वायली की हत्या कर भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित किया।
अनंत लक्ष्मण कान्हेरे 21 दिसंबर 1909 ई. को नासिक के जिला मजिस्ट्रेट ए. एम. टी. जैक्सन की हत्या की। 19 अप्रैल 1910 ई. को ठाणे केंद्रीय कारागार में फाँसी दी गई।
वी. वी. एस. अय्यर (V. V. S. Aiyar) इंडिया हाउस से जुड़े प्रमुख क्रांतिकारी; सावरकर के निकट सहयोगी तथा विदेशों में क्रांतिकारी गतिविधियों के सक्रिय आयोजक।
कृष्णाजी गोपाल कर्वे नासिक षड्यंत्र प्रकरण के प्रमुख अभियुक्तों में से एक; अनंत कान्हेरे के सहयोगी। 19 अप्रैल 1910 ई. को फाँसी दी गई।
विनायक नारायण देशपांडे नासिक षड्यंत्र प्रकरण के प्रमुख क्रांतिकारी; अनंत कान्हेरे के सहयोगी। 19 अप्रैल 1910 ई. को ठाणे केंद्रीय कारागार में फाँसी दी गई।

समयरेखा (Timeline)

वर्ष / तिथि प्रमुख घटना
1899 ई. विनायक दामोदर सावरकर ने नासिक में मित्र मेला की स्थापना की।
1904 ई. मित्र मेला का पुनर्गठन कर उसका नाम अभिनव भारत रखा गया।
1905 ई. श्यामजी कृष्ण वर्मा ने लंदन में इंडिया हाउस की स्थापना की।
1906 ई. वी. डी. सावरकर कानून की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए और इंडिया हाउस से जुड़े।
8 जून 1909 ई. गणेश दामोदर सावरकर (बाबाराव सावरकर) को आजीवन परिवहन (काला पानी) की सज़ा सुनाई गई।
1 जुलाई 1909 ई. मदनलाल धींगरा ने लंदन में सर विलियम हट कर्जन वायली की हत्या की।
17 अगस्त 1909 ई. मदनलाल धींगरा को पेंटनविल कारागार (लंदन) में फाँसी दी गई।
21 दिसंबर 1909 ई. अनंत लक्ष्मण कान्हेरे ने नासिक के जिला मजिस्ट्रेट ए. एम. टी. जैक्सन की हत्या की।
13 मार्च 1910 ई. वी. डी. सावरकर को लंदन में गिरफ्तार किया गया।
19 अप्रैल 1910 ई. अनंत लक्ष्मण कान्हेरे, कृष्णाजी गोपाल कर्वे तथा विनायक नारायण देशपांडे को ठाणे केंद्रीय कारागार में फाँसी दी गई।
8 जुलाई 1910 ई. मार्सेई (फ्रांस) बंदरगाह पर वी. डी. सावरकर ने S.S. Morea जहाज से भागने का प्रयास किया, लेकिन पुनः गिरफ्तार कर लिए गए।
24 दिसंबर 1910 ई. वी. डी. सावरकर को पहले मुकदमे में आजीवन परिवहन (Transportation for Life) की सज़ा सुनाई गई।
30 जनवरी 1911 ई. दूसरे मुकदमे में भी वी. डी. सावरकर को एक और आजीवन परिवहन की सज़ा दी गई।
27 जून 1911 ई. वी. डी. सावरकर को अंडमान की सेल्युलर जेल (काला पानी) भेजा गया।

तुलनात्मक अध्ययन : अभिनव भारत एवं अनुशीलन समिति

आधार अभिनव भारत अनुशीलन समिति
स्थापना 1904 ई. 1902 ई.
पूर्ववर्ती संगठन मित्र मेला (1899) का विकसित रूप। किसी पूर्व संगठन का विकसित रूप नहीं।
स्थापना स्थान नासिक (महाराष्ट्र) कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता)
प्रमुख संस्थापक विनायक दामोदर सावरकर एवं गणेश दामोदर सावरकर प्रमथनाथ मित्र (सतीश चंद्र बोस एवं अन्य राष्ट्रवादियों के सहयोग से)
मुख्य कार्यक्षेत्र महाराष्ट्र तथा लंदन (इंडिया हाउस) बंगाल एवं पूर्वी भारत
प्रमुख उद्देश्य गुप्त संगठन बनाकर सशस्त्र क्रांति के माध्यम से भारत को स्वतंत्र कराना। युवाओं को संगठित कर सशस्त्र क्रांति के लिए तैयार करना तथा ब्रिटिश शासन का विरोध करना।
प्रमुख गतिविधियाँ इंडिया हाउस की गतिविधियाँ, कर्जन वायली की हत्या, नासिक षड्यंत्र प्रकरण तथा सावरकर की क्रांतिकारी गतिविधियाँ। युगांतर समूह, मुजफ्फरपुर बम कांड, अलीपुर षड्यंत्र मामला तथा बाघा जतिन का नेतृत्व।
विदेशों में गतिविधियाँ विदेशों, विशेषकर लंदन के इंडिया हाउस के माध्यम से सक्रिय भूमिका। मुख्यतः भारत, विशेषकर बंगाल तक सीमित।
प्रमुख क्रांतिकारी वी. डी. सावरकर, बाबाराव सावरकर, मदनलाल धींगरा, अनंत लक्ष्मण कान्हेरे, वी. वी. एस. अय्यर। अरविंद घोष, बारिंद्र कुमार घोष, खुदीराम बोस, प्रफुल्ल चाकी, बाघा जतिन।
ऐतिहासिक महत्व महाराष्ट्र तथा विदेशों में भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन को संगठित किया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। बंगाल में संगठित क्रांतिकारी आंदोलन की मजबूत नींव रखी तथा आगे के अनेक क्रांतिकारी संगठनों को प्रेरित किया।

अक्सर होने वाले सामान्य भ्रम

अभिनव भारत की स्थापना 1899 ई. में नहीं हुई थी। 1899 ई. में मित्र मेला की स्थापना हुई थी, जिसका 1904 ई. में पुनर्गठन कर अभिनव भारत का रूप दिया गया।

मित्र मेला और अभिनव भारत को पूरी तरह अलग संगठन नहीं माना जाना चाहिए। अभिनव भारत, मित्र मेला (1899) का विकसित एवं विस्तारित रूप था।

अभिनव भारत की स्थापना लंदन में नहीं, बल्कि 1904 ई. में नासिक (महाराष्ट्र) में हुई थी। बाद में इसकी गतिविधियाँ लंदन के इंडिया हाउस तक भी पहुँचीं।

इंडिया हाउस की स्थापना वी. डी. सावरकर ने नहीं की थी। इसकी स्थापना 1905 ई. में श्यामजी कृष्ण वर्मा ने की थी; बाद में वी. डी. सावरकर इससे जुड़े।

अभिनव भारत के संस्थापक केवल वी. डी. सावरकर नहीं थे। इसके गठन में विनायक दामोदर सावरकर और उनके बड़े भाई गणेश दामोदर सावरकर (बाबाराव सावरकर) दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका थी।

गणेश दामोदर सावरकर और विनायक दामोदर सावरकर एक ही व्यक्ति नहीं थे। गणेश दामोदर सावरकर, जिन्हें बाबाराव सावरकर के नाम से भी जाना जाता है, वी. डी. सावरकर के बड़े भाई थे।

मदनलाल धींगरा ने लॉर्ड कर्जन की हत्या नहीं की थी। उन्होंने 1 जुलाई 1909 ई. को सर विलियम हट कर्जन वायली (Curzon Wyllie) की हत्या की थी।

नासिक षड्यंत्र प्रकरण में ए. एम. टी. जैक्सन की हत्या वी. डी. सावरकर ने स्वयं नहीं की थी। 21 दिसंबर 1909 ई. को अनंत लक्ष्मण कान्हेरे ने जैक्सन की हत्या की थी।

वी. डी. सावरकर की गिरफ्तारी भारत में नहीं हुई थी। उन्हें 13 मार्च 1910 ई. को लंदन में गिरफ्तार किया गया था।

सावरकर मार्सेई से भागने में सफल नहीं हुए थे। 8 जुलाई 1910 ई. को मार्सेई (फ्रांस) में उन्होंने भागने का प्रयास किया, लेकिन पुनः गिरफ्तार कर लिए गए।

वी. डी. सावरकर को केवल एक आजीवन कारावास की सजा नहीं मिली थी। उन्हें दो अलग-अलग मुकदमों में दो आजीवन परिवहन की सजा सुनाई गई थी, जिसे कुल 50 वर्ष के रूप में जाना जाता है।

अभिनव भारत की गतिविधियाँ केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं थीं। संगठन का प्रभाव लंदन के इंडिया हाउस के माध्यम से विदेशों तक भी पहुँचा।

अभिनव भारत और अनुशीलन समिति एक ही संगठन नहीं थे। अभिनव भारत की स्थापना 1904 ई. में नासिक में हुई थी, जबकि अनुशीलन समिति की स्थापना 1902 ई. में कलकत्ता में हुई थी।

सारांश

  • अभिनव भारत आधुनिक भारत के प्रारम्भिक एवं सबसे प्रभावशाली गुप्त क्रांतिकारी संगठनों में से एक था। इसकी स्थापना 1904 ई. में नासिक (महाराष्ट्र) में विनायक दामोदर सावरकर (वी. डी. सावरकर) एवं गणेश दामोदर सावरकर (बाबाराव सावरकर) ने की।
  • इसकी शुरुआत मित्र मेला (1899) के रूप में हुई थी, जिसका विस्तार कर बाद में अभिनव भारत बनाया गया।
  • संगठन का उद्देश्य भारतीय युवाओं को संगठित कर सशस्त्र क्रांति के माध्यम से भारत को ब्रिटिश शासन से मुक्त कराना तथा उनमें राष्ट्रवाद, अनुशासन और बलिदान की भावना विकसित करना था।
  • वी. डी. सावरकर के 1906 ई. में इंग्लैंड जाने के बाद अभिनव भारत की गतिविधियों का विस्तार लंदन के इंडिया हाउस तक हुआ, जिससे संगठन को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली।
  • 1 जुलाई 1909 ई. को मदनलाल धींगरा द्वारा सर विलियम हट कर्जन वायली की हत्या तथा 21 दिसंबर 1909 ई. को अनंत लक्ष्मण कान्हेरे द्वारा ए. एम. टी. जैक्सन की हत्या अभिनव भारत से जुड़ी प्रमुख क्रांतिकारी घटनाएँ थीं।
  • 13 मार्च 1910 ई. को वी. डी. सावरकर को लंदन में गिरफ्तार किया गया। 8 जुलाई 1910 ई. को उन्होंने मार्सेई (फ्रांस) में जहाज से भागने का साहसिक प्रयास किया, किंतु पुनः गिरफ्तार कर लिए गए।
  • सावरकर को दो अलग-अलग मुकदमों में दो आजीवन परिवहन (कुल 50 वर्ष) की सज़ा सुनाई गई और उन्हें अंडमान की सेल्युलर जेल (काला पानी) भेज दिया गया।
  • ब्रिटिश सरकार के कठोर दमन, प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी, मृत्युदंड एवं आजीवन कारावास के कारण अभिनव भारत का संगठित स्वरूप धीरे-धीरे कमजोर पड़ गया।
  • यद्यपि संगठन अधिक समय तक सक्रिय नहीं रह सका, फिर भी इसने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में क्रांतिकारी राष्ट्रवाद, गुप्त संगठन निर्माण तथा सशस्त्र प्रतिरोध की परंपरा को मजबूत किया और आगे आने वाले अनेक क्रांतिकारी संगठनों को प्रेरणा प्रदान की।
  • भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में अभिनव भारत का सबसे बड़ा योगदान यह था कि इसने क्रांतिकारी आंदोलन को महाराष्ट्र से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाया तथा अनेक युवाओं में स्वतंत्रता के लिए संघर्ष और बलिदान की भावना जागृत की।

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