1.ब्रिटिश भारत के निम्नलिखित प्रांतों पर विचार कीजिए और उन प्रांतों को पहचानिए जहां 1937 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का मंत्रिमंडल नहीं बना ?
1. मध्य प्रात 2. उड़ीसा
3. बंगाल 4. पंजाब
निम्नलिखित कूट से सही उत्तर चुनिए
1. मध्य प्रात 2. उड़ीसा
3. बंगाल 4. पंजाब
निम्नलिखित कूट से सही उत्तर चुनिए
U.P.R.O/A.R.O. (Pre) 2016
उत्तर-(b)
1937 के चुनावों के पश्चात कांग्रेस ने मध्य प्रांत और उड़ीसा में अपने मंत्रिमंडल गठित किए, जबकि बंगाल और पंजाब में वह सरकार नहीं बना सकी क्योंकि इन दोनों प्रांतों में वह बहुमत तो दूर, सबसे बड़ा दल भी नहीं बन पाई थी। पंजाब में यूनियनिस्ट पार्टी और बंगाल में कृषक प्रजा पार्टी-मुस्लिम लीग गठबंधन ने सरकार बनाई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) मध्य प्रांत में आरंभ में एन.बी. खरे कांग्रेस के प्रीमियर बने, परंतु आंतरिक मतभेदों के चलते 1938 में उनका स्थान पंडित रविशंकर शुक्ल ने ले लिया। (2) उड़ीसा 1 अप्रैल 1936 को बिहार से अलग होकर स्वतंत्र प्रांत बना था, और वहाँ कांग्रेस के बिश्वनाथ दास प्रथम प्रीमियर नियुक्त हुए।
2.निम्न में से किस एक प्रदेश में 1935 के अधिनियम के अंतर्गत कांग्रेस की मंत्रिपरिषद का गठन नहीं हुआ था?
I.A.S. (Pre) 2005
उत्तर-(d)
भारत सरकार अधिनियम, 1935 के तहत हुए प्रांतीय चुनावों के बाद कांग्रेस ने बिहार, मद्रास और उड़ीसा सहित कुल छह प्रांतों में अपनी मंत्रिपरिषदें गठित कीं, परंतु पंजाब में कांग्रेस की कोई मंत्रिपरिषद नहीं बनी। वहाँ सिकंदर हयात खान के नेतृत्व वाली यूनियनिस्ट पार्टी ने सरकार बनाई, जिसे मुस्लिम लीग का भी समर्थन प्राप्त था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) 1937 में सिकंदर हयात खान और मोहम्मद अली जिन्ना के बीच हुए “सिकंदर-जिन्ना समझौते” के तहत यूनियनिस्ट पार्टी के मुस्लिम सदस्यों ने मुस्लिम लीग की केंद्रीय सदस्यता भी स्वीकार की थी। (2) पंजाब में यूनियनिस्ट पार्टी का शासन 1947 तक चला, बाद में इसका नेतृत्व खिज्र हयात खान के हाथों में आया।
3.1937 में संपन्न विधानसभा चुनावों में इंडियन नेशनल कांग्रेस को निम्न में से किस प्रांत में पूर्ण बहुमत नहीं मिला था?
U.P.P.C.S. (Pre) 1992
उत्तर-(c)
भारत सरकार अधिनियम, 1935 के आधार पर फरवरी 1937 में हुए प्रांतीय चुनावों में कांग्रेस ने मद्रास, बिहार, मध्य प्रांत व बरार, संयुक्त प्रांत तथा उड़ीसा – इन पाँच प्रांतों में पूर्ण बहुमत प्राप्त किया। बंबई में वह बहुमत के निकट (175 में से 86 सीटें) पहुँची और असम तथा पश्चिमोत्तर सीमा प्रांत में सबसे बड़े दल के रूप में उभरी, परंतु पंजाब में कांग्रेस सबसे बड़ा दल भी नहीं बन सकी; वहाँ सिकंदर हयात खान की यूनियनिस्ट पार्टी सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) यूनियनिस्ट पार्टी एक कृषक-हितैषी संगठन था जिसमें हिंदू, मुस्लिम और सिख जमींदार साथ शामिल थे, यह सांप्रदायिक आधार पर नहीं बल्कि कृषि-संबंधी मुद्दों पर लड़ी गई थी। (2) पंजाब में कांग्रेस की कमजोर स्थिति का एक कारण यह भी था कि वहाँ की राजनीति लंबे समय से जमींदार बनाम महाजन के द्वंद्व पर केंद्रित रही थी।
4. वह प्रांत जहां 1937 के आम चुनाव के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अपनी सरकार नहीं बनाई-
U.P. P.C.S. (Mains) 2003
U.P. Lower Sub.(Pre) 2004
U.P. Lower Sub.(Pre) 2008
U.P. Lower Sub.(Pre) 2004
U.P. Lower Sub.(Pre) 2008
उत्तर-(a)
जुलाई 1937 में कांग्रेस ने मद्रास, बंबई, मध्य प्रांत, उड़ीसा, बिहार तथा संयुक्त प्रांत – इन छह प्रांतों में अपने मंत्रिमंडल गठित किए। बंगाल में कांग्रेस सरकार नहीं बना सकी क्योंकि वहाँ वह सबसे बड़ा दल भी नहीं बन पाई थी; वहाँ कृषक प्रजा पार्टी के नेता ए.के. फजलुल हक के नेतृत्व में मुस्लिम लीग के सहयोग से सरकार बनी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) बाद में सितंबर 1937 में पश्चिमोत्तर सीमा प्रांत में और 1938 में असम में भी कांग्रेस ने अन्य दलों के साथ मिलकर गठबंधन सरकारें बनाईं। (2) बंगाल में मुस्लिम लीग का प्रभाव आगामी वर्षों में निरंतर मजबूत होता गया, जो बाद में पाकिस्तान की माँग के समर्थन में महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ।
5.1935 के अधिनियम के तहत कराए गए विधानसभा चुनावों में किस राज्य में कांग्रेस ने पूर्ण बहुमत नहीं प्राप्त किया?
U.P.P.C.S. (Spl) (Mains) 2004
उत्तर-(d)
1935 के अधिनियम के तहत फरवरी 1937 में हुए प्रांतीय चुनावों में कांग्रेस मद्रास, बिहार, मध्य प्रांत, संयुक्त प्रांत और उड़ीसा में पूर्ण बहुमत प्राप्त करने में सफल रही, परंतु बंगाल में वह पूर्ण बहुमत तो दूर, सबसे बड़ा दल भी नहीं बन सकी। बंगाल में कृषक प्रजा पार्टी और मुस्लिम लीग के गठबंधन ने सरकार बनाई, जिसके प्रीमियर ए.के. फजलुल हक बने।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) फजलुल हक “शेर-ए-बंगाल” के नाम से प्रसिद्ध थे और कृषक प्रजा पार्टी के संस्थापक थे। (2) आगे चलकर 1943 के बंगाल के भीषण अकाल के समय भी बंगाल में सत्ता मुस्लिम लीग के नेतृत्व वाली सरकार के हाथों में थी, कांग्रेस की नहीं।
6. 1937 में प्रांतों में मंत्रिमंडल के निर्माण के उपरांत कांग्रेस का शासन कितने महीने चला था?
U.P.P.C.S. (Pre) 2013
U.P. Lower Sub. (Pre) 2013
U.P. Lower Sub. (Pre) 2013
उत्तर-(a)
जुलाई 1937 में गठित प्रांतीय कांग्रेस मंत्रिमंडलों ने द्वितीय विश्व युद्ध छिड़ने के बाद 22 अक्टूबर 1939 को सामूहिक रूप से त्यागपत्र दे दिया। इस प्रकार गठन से त्यागपत्र तक इन मंत्रिमंडलों का कुल कार्यकाल लगभग 28 महीने रहा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) त्यागपत्र का तात्कालिक कारण यह था कि वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो ने भारतीय नेताओं से बिना परामर्श किए ही भारत को युद्ध में शामिल किए जाने की घोषणा कर दी थी। (2) कांग्रेस मंत्रिमंडलों के इस्तीफे के बाद संबंधित प्रांतों में भारत सरकार अधिनियम, 1935 की धारा 93 के तहत गवर्नर शासन लागू कर दिया गया।
7.प्रांतीय सरकारों का गठन निम्नलिखित में से किस अधिनियम के तहत किया गया था?
53rd to 55th B.P.S.C. (Pre) 2011
उत्तर-(a)
1937 में हुए प्रांतीय चुनाव और उसके बाद प्रांतों में मंत्रिमंडलों का गठन भारत सरकार अधिनियम, 1935 के प्रावधानों के अंतर्गत हुआ था। इस अधिनियम ने प्रांतों में पूर्व प्रचलित द्वैध शासन (Dyarchy) को समाप्त कर प्रांतीय स्वायत्तता (Provincial Autonomy) की व्यवस्था लागू की, जिससे निर्वाचित मंत्रिमंडल अधिकांश विषयों पर उत्तरदायी शासन चला सकते थे, यद्यपि गवर्नर के पास विशेष आपातकालीन शक्तियाँ बनी रहीं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) इसी अधिनियम में अखिल भारतीय संघ (All India Federation) की भी योजना थी, परंतु देशी रियासतों का अपेक्षित समर्थन न मिलने के कारण यह संघीय भाग कभी क्रियान्वित नहीं हो सका। (2) इसी अधिनियम के आधार पर बर्मा को भारत से पृथक किया गया तथा सिंध एवं उड़ीसा को नए प्रांतों के रूप में गठित किया गया।
8.वर्ष 1937 के चुनावों में कितने प्रांतों में कांग्रेस का मंत्रिमंडल बना था ?
U.P. Lower Sub. (Pre) 2015
उत्तर-(*)
इस प्रश्न को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा जारी अंतिम उत्तर-कुंजी में मूल्यांकन से बाहर रखा गया था, क्योंकि “मंत्रिमंडल बनना” शब्द को लेकर अस्पष्टता थी। तथ्यात्मक रूप से जुलाई 1937 में कांग्रेस ने छह प्रांतों – मद्रास, बंबई, मध्य प्रांत, उड़ीसा, बिहार और संयुक्त प्रांत – में सीधे अपने मंत्रिमंडल बनाए, जबकि पश्चिमोत्तर सीमा प्रांत और असम में बाद में गठबंधन सरकारें बनीं, जिससे कुल आँकड़े को लेकर अस्पष्टता उत्पन्न हुई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) यदि गठबंधन सरकारों को भी गिन लिया जाए तो यह संख्या आठ प्रांतों तक पहुँचती है। (2) ब्रिटिश भारत के 11 गवर्नरों के प्रांतों में से केवल बंगाल, पंजाब और सिंध ही ऐसे रहे जहाँ कांग्रेस किसी भी रूप में सत्ता में भागीदार नहीं बनी।
9.1937 के चुनावों में कांग्रेस द्वारा बहुमत प्राप्त प्रांतों की संख्या है –
R.A.S./R.T.S. (Pre) 1996
उत्तर-(c)
फरवरी 1937 में संपन्न प्रांतीय विधानसभा चुनावों में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने कुल पाँच प्रांतों – मद्रास, बिहार, मध्य प्रांत व बरार, संयुक्त प्रांत तथा उड़ीसा – में पूर्ण बहुमत हासिल किया। इसके अतिरिक्त बंबई, असम और पश्चिमोत्तर सीमा प्रांत में वह सबसे बड़े दल के रूप में उभरी, जहाँ बाद में उसने अन्य दलों के सहयोग से मंत्रिमंडल बनाए।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) पद ग्रहण करने के प्रश्न पर कांग्रेस के भीतर गंभीर मतभेद थे; अंततः मार्च 1937 में हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो के इस आश्वासन के बाद कि गवर्नर अपनी विशेष शक्तियों का दुरुपयोग नहीं करेंगे, पद ग्रहण करने का निर्णय लिया गया। (2) इन चुनावों में कांग्रेस की भारी सफलता ने हिंदू महासभा और जस्टिस पार्टी जैसे प्रतिद्वंद्वी दलों को लगभग हाशिए पर ला दिया।
10. 1935 के अधिनियम के उपरांत, 1937 में हुए चुनावों में गठित कांग्रेस मंत्रिमंडलों का कार्यकाल था-
U.P.P.C.S. (Mains) 2010
उत्तर-(d)
1935 के अधिनियम के तहत गठित कांग्रेस मंत्रिमंडलों ने जुलाई 1937 से लेकर 22 अक्टूबर 1939 तक, अर्थात लगभग 28 माह तक शासन किया। द्वितीय विश्व युद्ध में भारतीयों की सहमति लिए बिना ब्रिटेन द्वारा भारत को शामिल किए जाने के विरोध में सभी कांग्रेसी मंत्रिमंडलों ने सामूहिक रूप से त्यागपत्र दे दिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) कांग्रेस मंत्रिमंडलों के त्यागपत्र के उपरांत मोहम्मद अली जिन्ना के आह्वान पर 22 दिसंबर 1939 को मुसलमानों द्वारा “मुक्ति दिवस” (Day of Deliverance) मनाया गया। (2) अपने इस लगभग ढाई वर्ष के कार्यकाल में कांग्रेस मंत्रिमंडलों ने राजनीतिक बंदियों की रिहाई, ग्रामीण ऋणग्रस्तता में राहत और बुनियादी शिक्षा (वर्धा शिक्षा योजना) जैसे अनेक जनकल्याणकारी कदम उठाए।
11.वह कौन-सा प्रांत था जहां 1937 के आम निर्वाचन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को पूर्ण बहुमत नहीं प्राप्त हुआ था?
U.P.P.C.S. (Mains) 2004
उत्तर-(*)
1937 के चुनाव में कांग्रेस को बंबई और असम – दोनों ही प्रांतों में पूर्ण बहुमत नहीं मिला था, इसी कारण इस प्रश्न को आधिकारिक उत्तर-कुंजी में मूल्यांकन से बाहर रखा गया। बंबई में कांग्रेस को 175 में से 86 सीटें (लगभग 56 प्रतिशत मत) मिलीं, जो बहुमत के बेहद निकट था और सबसे बड़े दल के रूप में उभरने के लिए पर्याप्त था, परंतु पूर्ण बहुमत नहीं था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) बंबई में बाद में कांग्रेस ने निर्दलीय विधायकों के समर्थन से बी.जी. खेर के नेतृत्व में सरकार बनाई। (2) असम में कांग्रेस ने सहयोगी दलों के साथ मिलकर गोपीनाथ बारदोलोई के नेतृत्व में गठबंधन सरकार बनाई थी।
12.1938 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष निर्वाचित हुए-
41st B.P.S.C. (Pre) 1996
उत्तर-(b)
कांग्रेस के हरिपुरा (गुजरात) अधिवेशन में फरवरी 1938 में सुभाष चंद्र बोस निर्विरोध कांग्रेस अध्यक्ष चुने गए। इसके अगले वर्ष 1939 में त्रिपुरी अधिवेशन में भी वे गांधीजी द्वारा समर्थित प्रत्याशी पट्टाभि सीतारमैया को हराकर पुनः अध्यक्ष पद के लिए निर्वाचित हुए, परंतु कार्यसमिति से गहरे मतभेदों के चलते कुछ ही महीनों बाद उन्होंने अध्यक्ष पद से त्यागपत्र दे दिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) त्यागपत्र देने के बाद सुभाष चंद्र बोस ने 3 मई 1939 को फॉरवर्ड ब्लॉक नामक नए दल की स्थापना की। (2) हरिपुरा अधिवेशन के अवसर पर प्रसिद्ध चित्रकार नंदलाल बोस ने ग्रामीण भारतीय जीवन को दर्शाते “हरिपुरा पैनल्स” नामक चित्रों की शृंखला तैयार की थी, जो आधुनिक भारतीय कला के इतिहास में विशेष स्थान रखती है।
13. अपनी किस कार्यकारिणी कमेटी में कांग्रेस ने भू-स्वामित्व को समाप्त करने की नीति अपनाई?
39th B.P.S.C. (Pre) 1994
उत्तर-(a)
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की कार्यकारिणी कमेटी ने वर्ष 1937 में भू-स्वामित्व व्यवस्था को समाप्त करने की नीति को औपचारिक रूप से अपनाया। इसके परिणामस्वरूप संयुक्त प्रांत और बिहार की कांग्रेस सरकारों ने काश्तकारी (टेनेंसी) संबंधी विधेयक पारित कर किसानों को बेदखली और साहूकारों के शोषण से सुरक्षा प्रदान करने का प्रयास किया, साथ ही सिंचाई सुविधाओं के विस्तार पर भी बल दिया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) इसी कड़ी में आगे चलकर स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद उत्तर प्रदेश में जमींदारी प्रथा का पूर्ण उन्मूलन वर्ष 1951 में गोविंद बल्लभ पंत के मुख्यमंत्रित्व काल में “उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन अधिनियम” के माध्यम से किया गया। (2) फैजपुर अधिवेशन (दिसंबर 1936), जो गांव में आयोजित होने वाला पहला कांग्रेस अधिवेशन था, में पारित कृषि कार्यक्रम संबंधी प्रस्ताव ने भी इस भूमि-सुधार नीति की पृष्ठभूमि तैयार की।
14.’हरिपुरा’ जहां भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन1938 में सुभाष चंद्र बोस की अध्यक्षता में हुआ था, वह निम्नांकित राज्य में स्थित है-
U.P.P.C.S. (Pre) 2000
उत्तर-(a)
सुभाष चंद्र बोस की अध्यक्षता में हुआ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन फरवरी 1938 में हरिपुरा नामक स्थान पर आयोजित हुआ था, जो वर्तमान गुजरात राज्य के बारदोली क्षेत्र के निकट सूरत जिले में स्थित है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) इसी अधिवेशन के लिए कांग्रेस ने एक विशाल “ग्राम स्वराज” प्रदर्शनी का भी आयोजन किया था, जिसमें भारतीय ग्रामीण उद्योगों और हस्तशिल्प को प्रदर्शित किया गया। (2) हरिपुरा अधिवेशन स्थल के प्रवेश द्वार और मंच को नंदलाल बोस द्वारा निर्मित लोक-कला शैली के भित्ति-चित्रों से सजाया गया था, जिन्हें आज “हरिपुरा पैनल्स” के नाम से जाना जाता है।
15. मुस्लिम लीग ने ‘मुक्ति दिवस’ मनाया था-
R.A.S./R.T.S. (Pre) 1999
उत्तर-(a)
कांग्रेस मंत्रिमंडलों द्वारा 22 अक्टूबर 1939 को सामूहिक त्यागपत्र दिए जाने के बाद मोहम्मद अली जिन्ना के आह्वान पर मुस्लिम लीग ने 22 दिसंबर 1939 को संपूर्ण भारत में “मुक्ति दिवस” (Day of Deliverance) के रूप में मनाया, जिसे कांग्रेस शासन से “मुक्ति” के उत्सव के रूप में प्रचारित किया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) मुस्लिम लीग ने इस अवसर का उपयोग कांग्रेस-शासित प्रांतों में कथित मुस्लिम-विरोधी भेदभाव के आरोपों को प्रचारित करने के लिए किया, जिसके समर्थन में पीरपुर रिपोर्ट और शरीफ रिपोर्ट जैसे दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। (2) कांग्रेस तथा जमीयत उलेमा-ए-हिंद जैसे कुछ अन्य राष्ट्रवादी संगठनों ने इस दिवस का विरोध करते हुए इसे सांप्रदायिक राजनीति का हिस्सा बताया।
16. कांग्रेस प्रशासित प्रदेशों में मुस्लिमों की शिकायतों से संबंधित रिपोर्टों पर विचार कीजिए।
1. पीरपुर रिपोर्ट 2. शरीफ रिपोर्ट
3. मुस्लिम सफरिंग्स अंडर कांग्रेस रूल
नीचे दिए गए कूट से रिपोर्टों के सही कालानुक्रम का चयन कीजिए-
कूट :
1. पीरपुर रिपोर्ट 2. शरीफ रिपोर्ट
3. मुस्लिम सफरिंग्स अंडर कांग्रेस रूल
नीचे दिए गए कूट से रिपोर्टों के सही कालानुक्रम का चयन कीजिए-
कूट :
U.P. Lower Sub. (Pre) 2013
उत्तर-(a)
कांग्रेस-शासित प्रांतों में मुस्लिमों की कथित शिकायतों से संबंधित रिपोर्टों का सही कालानुक्रम है- सबसे पहले पीरपुर रिपोर्ट (1938), इसके बाद शरीफ रिपोर्ट (मार्च 1939), और अंत में फजलुल हक द्वारा प्रस्तुत “मुस्लिम सफरिंग्स अंडर कांग्रेस रूल” रिपोर्ट (दिसंबर 1939) आई। इस प्रकार सही क्रम 1, 2, 3 है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) पीरपुर रिपोर्ट मुस्लिम लीग द्वारा गठित एक समिति की रिपोर्ट थी, जिसके अध्यक्ष राजा सैयद मेहंदी (पीरपुर के राजा) थे, और इसमें संयुक्त प्रांत व बिहार जैसे कांग्रेस-शासित प्रांतों में मुस्लिमों के साथ कथित दुर्व्यवहार का ब्योरा दिया गया। (2) ये तीनों रिपोर्टें आगे चलकर जिन्ना और मुस्लिम लीग द्वारा द्वि-राष्ट्र सिद्धांत को बल देने तथा “मुक्ति दिवस” मनाए जाने के औचित्य के रूप में प्रयुक्त की गईं।
17. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के हरिपुरा अधिवेशन की अध्यक्षता निम्नलिखित में से किसने की थी ?
U.P.P.C.S. (Mains) 2006
उत्तर-(c)
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के हरिपुरा अधिवेशन (फरवरी 1938) की अध्यक्षता सुभाष चंद्र बोस ने की थी। वे इस अधिवेशन में निर्विरोध रूप से कांग्रेस अध्यक्ष चुने गए थे, और यह उनके राजनीतिक जीवन का पहला कांग्रेस अध्यक्ष पद था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) हरिपुरा अधिवेशन के स्वागत समिति अध्यक्ष (Reception Committee Chairman) दरबार गोपालदास देसाई थे, जो एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी और बारदोली क्षेत्र के नेता थे। (2) हरिपुरा अधिवेशन से पूर्व जवाहरलाल नेहरू लगातार 1936 और 1937 में कांग्रेस अध्यक्ष रह चुके थे, जबकि जे.बी. कृपलानी बाद में 1946 के मेरठ अधिवेशन में कांग्रेस अध्यक्ष बने।
18.1937 के चुनाव के पश्चात यू.पी. में गठित मंत्रिमंडल में किसको वित्त विभाग सौंपा गया था?
U.P.P.C.S. (Pre) 2012
उत्तर-(b)
वर्ष 1937 के प्रांतीय चुनावों में संयुक्त प्रांत (यू.पी.) की कुल 228 सीटों में से 134 सीटें जीतकर कांग्रेस ने अकेले अपने दम पर सरकार बनाई। इस मंत्रिमंडल में गोविंद बल्लभ पंत प्रधानमंत्री (प्रीमियर) बने, कैलाश नाथ काटजू को कानून एवं न्याय विभाग मिला, जबकि वित्त विभाग की जिम्मेदारी रफी अहमद किदवई को सौंपी गई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) रफी अहमद किदवई को उनकी किसान-हितैषी और प्रगतिशील नीतियों के कारण “यूपी का लेनिन” भी कहा जाता था। (2) कैलाश नाथ काटजू आगे चलकर स्वतंत्र भारत में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री तथा केंद्रीय गृह मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे।
19.नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष किनको हराकर बनें ?
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2013
उत्तर-(e)
सुभाष चंद्र बोस ने 1939 के त्रिपुरी अधिवेशन हेतु जनवरी 1939 में हुए कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में महात्मा गांधी द्वारा समर्थित उम्मीदवार पट्टाभि सीतारमैया को पराजित किया था। इस चुनाव में बोस को 1580 तथा सीतारमैया को 1377 मत प्राप्त हुए थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: गांधीजी ने सीतारमैया की हार को सार्वजनिक रूप से अपनी ही हार बताया था, और इसी मतभेद के परिणामस्वरूप बोस ने आगे चलकर 3 मई 1939 को फॉरवर्ड ब्लॉक नामक नया राजनीतिक दल गठित किया।
20.भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के त्रिपुरी सम्मेलन में वर्ष 1939 में सुभाष चंद्र बोस को कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया था। यह त्रिपुरी कहां है?
M.P.P.C.S. (Pre) 2000
उत्तर-(c)
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का 52वां वार्षिक अधिवेशन मार्च 1939 में त्रिपुरी नामक स्थान पर आयोजित हुआ, जो मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर के निकट नर्मदा नदी के तट पर स्थित है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस अधिवेशन के समय सुभाष चंद्र बोस स्वास्थ्य कारणों से स्वयं उपस्थित नहीं हो सके थे और उनका अध्यक्षीय भाषण किसी अन्य व्यक्ति द्वारा पढ़ा गया था; यही अधिवेशन कार्यसमिति गठन को लेकर हुए विवाद के कारण उनके त्यागपत्र की पृष्ठभूमि भी बना।
21. कांग्रेस के त्रिपुरी अधिवेशन के पश्चात, सुभाष चंद्र बोस और दक्षिणपंथी का समस्त झगड़ा किस प्रश्न पर केंद्रित हो गया?
R.A.S./ R.T.S. (Pre) 2008
उत्तर-(a)
त्रिपुरी अधिवेशन के बाद सुभाष चंद्र बोस और कांग्रेस के दक्षिणपंथी गुट के बीच विवाद मुख्यतः कार्यसमिति के गठन को लेकर उत्पन्न हुआ। गोविंद बल्लभ पंत के प्रस्ताव में बोस से कहा गया कि वे गांधीजी की इच्छानुसार समिति बनाएं, परंतु गांधीजी ने स्वयं यह उत्तरदायित्व लेने से इनकार कर बोस को अपनी पसंद की समिति बनाने को कहा। मतभेद गहराने पर बोस ने अंततः अप्रैल 1939 में अध्यक्ष पद से त्यागपत्र दे दिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: त्यागपत्र के कुछ माह बाद अगस्त 1939 में कांग्रेस कार्यसमिति ने बोस को बंगाल प्रांतीय कांग्रेस समिति के अध्यक्ष पद से भी तीन वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया था।
22.भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का त्रिपुरी सम्मेलन कब आयोजित हुआ था जिसमें नेताजी सुभाष चंद्र बोस कांग्रेस के अध्यक्ष मनोनीत किए गए थे?
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2020
उत्तर-(d)
त्रिपुरी अधिवेशन मार्च 1939 में आयोजित हुआ, जिसमें सुभाष चंद्र बोस अध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण करने पहुंचे, जबकि इसके लिए चुनाव इससे पूर्व जनवरी 1939 में ही संपन्न हो चुका था जिसमें उन्होंने पट्टाभि सीतारमैया को हराया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यह अधिवेशन कांग्रेस के इतिहास का अंतिम अधिवेशन था जिसकी अध्यक्षता बोस ने की, क्योंकि कुछ ही सप्ताह बाद उन्होंने त्यागपत्र दे दिया। इसी अधिवेशन में ब्रिटेन को छह माह के भीतर पूर्ण स्वराज्य देने का अल्टीमेटम देने का प्रस्ताव भी रखा गया था, जिसे गांधीजी का समर्थन नहीं मिला।
23. किस भारतीय राष्ट्रवादी नेता ने जर्मनी और ब्रिटेन के बीच युद्ध को ऐसे ईश्वर प्रदत्त अवसर के रूप में देखा, जिसमें भारतीयों को उस स्थिति का अपने हित में लाभ उठाने का मौका मिलता?
I.A.S. (Pre) 1999
उत्तर-(c)
द्वितीय विश्व युद्ध आरंभ होने पर सुभाष चंद्र बोस ने इसे भारत की स्वतंत्रता के लिए एक स्वर्णिम अवसर माना और “इंग्लैंड की कठिनाई भारत के लिए अवसर है” के सिद्धांत के आधार पर ब्रिटेन के शत्रुओं से सहयोग लेने की वकालत की।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी सोच के तहत बोस जनवरी 1941 में अंग्रेजों की निगरानी से गुप्त रूप से निकलकर काबुल होते हुए जर्मनी पहुंचे, जहां उन्होंने आजाद हिंद रेडियो की स्थापना की, और बाद में 1943 में जापान की सहायता से सिंगापुर में आजाद हिंद फौज तथा स्वतंत्र भारत की अनंतिम सरकार का गठन किया।
24.निम्नलिखित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के किस अधिवेशन में सुभाष चंद्र बोस दूसरी बार अध्यक्ष चुने गए थे?
U.P.P.C.S. (Mains) 2011
उत्तर-(c)
सुभाष चंद्र बोस पहली बार 1938 के हरिपुरा अधिवेशन में निर्विरोध कांग्रेस अध्यक्ष चुने गए थे, जबकि दूसरी बार वे 1939 में त्रिपुरी अधिवेशन हेतु हुए चुनाव में पट्टाभि सीतारमैया को पराजित कर अध्यक्ष बने। किंतु कार्यसमिति गठन को लेकर गांधीजी से गहरे मतभेद के कारण उन्होंने शीघ्र ही त्यागपत्र दे दिया, जिसके बाद डॉ. राजेंद्र प्रसाद अध्यक्ष बने।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हरिपुरा अधिवेशन गुजरात के बारडोली के निकट हरिपुरा गांव में हुआ था, और इसी अधिवेशन में पहली बार राष्ट्रीय योजना समिति के गठन का विचार सामने आया जिसकी अध्यक्षता आगे चलकर जवाहरलाल नेहरू ने की।
25.सुभाष चंद्र बोस के त्यागपत्र के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष कौन हुआ?
U.P.P.C.S. (Pre) 1997
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2005
U.P.P.C.S. (Pre) 2007 –
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2005
U.P.P.C.S. (Pre) 2007 –
उत्तर-(c)
अप्रैल 1939 में सुभाष चंद्र बोस के त्यागपत्र के पश्चात डॉ. राजेंद्र प्रसाद कांग्रेस के अध्यक्ष नियुक्त हुए और उन्होंने शेष कार्यकाल पूरा किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: डॉ. राजेंद्र प्रसाद इससे पूर्व 1934 के बंबई अधिवेशन में भी कांग्रेस अध्यक्ष रह चुके थे, तथा स्वतंत्रता के बाद वे भारत के प्रथम राष्ट्रपति (1950-1962) बने, जो आज तक स्वतंत्र भारत के सबसे लंबे कार्यकाल वाले राष्ट्रपति हैं।
26. निम्नलिखित में से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के किस अधिवेशन में कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव में सुभाष चंद्र बोस ने पट्टाभि सीतारमैया को पराजित किया था?
U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2010
U.P.P.C.S. (Spl.) Mains 2004
U.P.P.C.S. (Spl.) Mains 2004
उत्तर-(b)
कांग्रेस अध्यक्ष पद हेतु जनवरी 1939 में हुए चुनाव में सुभाष चंद्र बोस ने महात्मा गांधी समर्थित पट्टाभि सीतारमैया को पराजित किया, और इसके पश्चात मार्च 1939 में आयोजित त्रिपुरी अधिवेशन में उन्होंने अध्यक्ष पद ग्रहण किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कांग्रेस के इतिहास में यह पहला अवसर था जब अध्यक्ष पद हेतु गांधीजी समर्थित प्रत्याशी की प्रत्यक्ष चुनावी पराजय हुई, जिससे कांग्रेस के भीतर वामपंथी और दक्षिणपंथी धड़ों के बीच गहरी दरार उत्पन्न हो गई।
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