1.बिहार प्रांतीय किसान सभा का गठन किसने किया?
65th B.P.S.C. (Pre) 2019
उत्तर-(a)
स्वामी सहजानंद सरस्वती ने वर्ष 1929 में बिहार प्रांतीय किसान सभा की नींव रखी, जिसका मुख्य उद्देश्य जमींदारी उत्पीड़न के विरुद्ध किसानों को संगठित करना था। इस कार्य में कार्यानंद शर्मा, राहुल सांकृत्यायन, पंचानन शर्मा और मदुनंदन शर्मा जैसे वामपंथी झुकाव वाले नेताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सहजानंद सरस्वती मूलतः दण्डी संन्यासी थे और उन्होंने ‘जंगल में मंगल’, ‘गया छपरा प्रजा आंदोलन का इतिहास’ तथा ‘मेरा जीवन संघर्ष’ जैसी पुस्तकें भी लिखीं। आगे चलकर वे ही वर्ष 1936 में स्थापित अखिल भारतीय किसान सभा के प्रथम अध्यक्ष भी बने।
2.’नाई-धोबी बंद’ सामाजिक बायकाट का एक स्वरूप था, जो 1919 में-
39th B.P.S.C. (Pre) 1994
उत्तर-(a)
वर्ष 1919 के अंत में अवध के प्रतापगढ़ जिले की एक जागीर में किसानों ने नाई-धोबी जैसी सेवाओं का बहिष्कार करके जमींदारों के विरुद्ध संगठित सामाजिक प्रतिरोध की शुरुआत की। शुरुआती नेतृत्व झिंगुरी सिंह और दुर्गापाल सिंह ने किया, परंतु बाद में बाबा रामचंद्र के आगमन से यह आंदोलन कहीं अधिक संगठित और प्रभावी बन गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बाबा रामचंद्र महाराष्ट्र मूल के थे और फिजी में गिरमिटिया मजदूर के रूप में कार्य कर चुके थे, वहीं से लौटकर उन्होंने अवध के किसानों को संगठित किया। उन्हीं के प्रयासों से अक्टूबर 1920 में ‘अवध किसान सभा’ की स्थापना हुई।
3.अखिल भारतीय किसान सभा के प्रथम सत्र की अध्यक्षता किसने की?
47th B.P.S.C. (Pre) 2005
उत्तर-(a)
अप्रैल 1936 में लखनऊ में आयोजित अखिल भारतीय किसान कांग्रेस (बाद में अखिल भारतीय किसान सभा नामकरण) के प्रथम सत्र की अध्यक्षता स्वामी सहजानंद सरस्वती ने की, जबकि एन.जी. रंगा को महासचिव चुना गया। दिसंबर 1936 में फैजपुर कांग्रेस अधिवेशन के साथ हुए दूसरे सत्र की अध्यक्षता एन.जी. रंगा ने संभाली।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: फैजपुर अधिवेशन में ही किसान सभा का प्रसिद्ध लाल झंडे वाला ध्वज अपनाया गया, और इसी सत्र में कांग्रेस ने अपने इतिहास में पहली बार किसानों की मांगों से जुड़ा एक अलग प्रस्ताव भी पारित किया।
4.भारतवर्ष का सर्वप्रथम किसान आंदोलन था-
R.A.S. / R.T.S. (Pre) 1992
उत्तर-(d)
दिए गए विकल्पों में बिजौलिया आंदोलन भारत का सबसे पुराना संगठित किसान आंदोलन माना जाता है, जिसकी शुरुआत मेवाड़ रियासत के बिजौलिया ठिकाने में हुई। वर्ष 1913 में साधु सीताराम दास ने इसका नेतृत्व संभाला और वर्ष 1916 में विजय सिंह पथिक के जुड़ने से आंदोलन को नई दिशा और ताकत मिली।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यह आंदोलन मुख्यतः चंवरी, लाग-बाग और तलवार-बंधाई जैसे अनुचित करों के विरुद्ध था, और लगभग दो दशकों तक चलने के बाद वर्ष 1941 में किसानों की प्रमुख मांगें स्वीकार की गईं।
5.इनमें से कौन 1930 के दशक में किसान सभा आंदोलन से सक्रिय रूप से जुड़े थे ?
Jharkhand P.C.S. (Pre) 2013
उत्तर-(b)
1930 के दशक में किसान सभा आंदोलन की धुरी स्वामी सहजानंद सरस्वती ही रहे, जिन्होंने बिहार किसान सभा की स्थापना की और अप्रैल 1936 के लखनऊ अधिवेशन में अखिल भारतीय किसान सभा के प्रथम अध्यक्ष का दायित्व संभाला।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सहजानंद सरस्वती प्रारंभ में कांग्रेस के साथ निकटता से जुड़े थे, परंतु आगे चलकर उनके विचार साम्यवाद की ओर झुक गए और वे किसान सभा को कांग्रेस से स्वतंत्र एक वर्ग-आधारित संगठन के रूप में विकसित करना चाहते थे, जिसके कारण बाद में कांग्रेस नेतृत्व से उनके मतभेद भी उभरे।
6.निम्न में से कौन फरवरी, 1918 में स्थापित यू.पी. किसान सभा की स्थापना से संबद्ध नहीं था?
I.A.S. (Pre) 2005
उत्तर-(c)
अवध क्षेत्र में होमरूल लीग से प्रेरित कार्यकर्ताओं की सक्रियता के परिणामस्वरूप फरवरी 1918 में इंद्रनारायण द्विवेदी, गौरीशंकर मिश्र और मदन मोहन मालवीय के संयुक्त प्रयासों से यू.पी. किसान सभा की स्थापना हुई, जबकि जवाहरलाल नेहरू इसकी स्थापना से सीधे संबद्ध नहीं थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जवाहरलाल नेहरू इसके कुछ समय बाद वर्ष 1920 में किसान सभा के कार्यों से जुड़े और उन्होंने प्रतापगढ़ सहित अवध के कई गांवों का दौरा कर किसानों की समस्याओं को नजदीक से समझा, जिसने उनके राजनीतिक दृष्टिकोण को भी प्रभावित किया।
7.स्वामी सहजानंद निम्न में से किससे संबंधित थे?
66th B.P.S.C (Pre) 2020
उत्तर-(c)
स्वामी सहजानंद सरस्वती का संपूर्ण राजनीतिक-सामाजिक जीवन मुख्यतः बिहार के किसान आंदोलन को संगठित करने और जमींदारी उत्पीड़न के विरुद्ध संघर्ष करने में समर्पित रहा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: उन्होंने वर्ष 1927 में बिहटा (पटना के निकट) स्थित सीताराम आश्रम को अपनी गतिविधियों का केंद्र बनाया, और यहीं से उन्होंने बकाश्त भूमि आंदोलन जैसे महत्वपूर्ण किसान संघर्षों का संचालन किया, जो भूमिहीन तथा बेदखल काश्तकारों के अधिकारों से जुड़ा था।
8.वह प्रदेश कौन था, जहां बाबा रामचंद्र ने किसानों को संगठित किया ?
U.P. P.C.S. (Spl.) (Pre) 2008
U.P. U.D.A./L.D.A. (Mains) 2010
U.P. U.D.A./L.D.A. (Mains) 2010
उत्तर-(a)
बाबा रामचंद्र ने वर्ष 1920 के आसपास अवध क्षेत्र के किसानों को जमींदारी शोषण के विरुद्ध संगठित करना शुरू किया और जल्द ही वे इस क्षेत्र के सबसे प्रभावशाली किसान नेता के रूप में उभरे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बाबा रामचंद्र मूलतः महाराष्ट्र के एक ब्राह्मण परिवार से थे और फिजी द्वीप समूह में गिरमिटिया (इंडेंचर्ड लेबर) मजदूर के रूप में कार्य करने के बाद भारत लौटे थे, जिसके अनुभव ने उनकी किसान-हितैषी सोच को मजबूत किया।
9.अवध के एका आंदोलन का उद्देश्य क्या था?
39th B.P.S.C. (Pre) 1994
उत्तर-(d)
हरदोई, बाराबंकी, बहराइच और सीतापुर जैसे क्षेत्रों में सक्रिय एका आंदोलन (1921-22) की मुख्य मांग यह थी कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए लगान का भुगतान नकद के रूप में निर्धारित किया जाए, क्योंकि उपज के रूप में वसूली में जमींदारों के ठेकेदार किसानों का अत्यधिक शोषण करते थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस आंदोलन का नेतृत्व पिछड़ी जाति के मदारी पासी ने किया, और चूंकि यह राष्ट्रवादी नेतृत्व की अहिंसक नीति से अलग हटकर अधिक उग्र रुख अपनाए हुए था, इसलिए कांग्रेस नेताओं ने स्वयं को इससे शीघ्र ही अलग कर लिया।
10.1930 के दशक में देश के विभिन्न भागों के भिन्न-भिन्न नेताओं द्वारा किसान आंदोलन चलाए गए थे। उनके प्रभाव क्षेत्रों से सुमेलित कीजिए-
(a) सहजानंद सरस्वती 1. हैदराबाद
(b) खुदाई खिदमतगार 2. दक्षिणी असम
(c) स्वामी रामानंद 3. बिहार
(d) अब्दुल हमीद खां 4. एन.डब्ल्यू. एफ.पी.
कूट :
A B C D
(a) सहजानंद सरस्वती 1. हैदराबाद
(b) खुदाई खिदमतगार 2. दक्षिणी असम
(c) स्वामी रामानंद 3. बिहार
(d) अब्दुल हमीद खां 4. एन.डब्ल्यू. एफ.पी.
कूट :
A B C D
U.P. P.C.S. (Pre) 1998
उत्तर-(b)
सहजानंद सरस्वती का कार्यक्षेत्र बिहार था जहां उन्होंने बिहार प्रांतीय किसान सभा का गठन किया, खान अब्दुल गफ्फार खां के नेतृत्व वाला खुदाई खिदमतगार (लाल कुर्ती) संगठन पश्चिमोत्तर सीमा प्रांत (NWFP) में सविनय अवज्ञा आंदोलन में सक्रिय रहा, स्वामी रामानंद हैदराबाद रियासत में तथा अब्दुल हमीद खां दक्षिणी असम में किसान आंदोलन से जुड़े थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: खुदाई खिदमतगार संगठन भारत का सबसे बड़ा अहिंसक सशस्त्र-विरोधी आंदोलन माना जाता है, जिसके स्वयंसेवक लाल रंग की वर्दी पहनते थे, इसी कारण इसे ‘सुर्ख पोश’ या ‘लाल कुर्ती’ आंदोलन भी कहा गया।
11. वह कौन जगह थी, जहां अखिल भारतीय किसान सभा का पहला अधिवेशन हुआ था ?
U.P. P.C.S. (Spl.) (Pre) 2008
U.P.U.D.A./L.D.A. (Mains) 2010
48th to 52nd B.P.S.C. (Pre) 2008
U.P.U.D.A./L.D.A. (Mains) 2010
48th to 52nd B.P.S.C. (Pre) 2008
उत्तर-(c)
अप्रैल 1936 में लखनऊ में आयोजित कांग्रेस अधिवेशन के साथ ही अखिल भारतीय किसान सभा (तत्कालीन नाम अखिल भारतीय किसान कांग्रेस) का प्रथम अधिवेशन हुआ, जिसमें स्वामी सहजानंद सरस्वती को अध्यक्ष चुना गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी लखनऊ अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू अध्यक्ष पद से कांग्रेस सत्र की अध्यक्षता कर रहे थे, और उन्होंने किसान सभा के सम्मेलन को भी संबोधित कर समाजवादी विचारधारा से जुड़ाव दर्शाया।
12. लखनऊ में स्थापित ‘अखिल भारतीय किसान कांग्रेस’ के महासचिव के रूप में निम्नलिखित में से किसे चुना गया था?
U.P.R.O./ A.R.O. (Mains) 2016
उत्तर-(b)
अप्रैल 1936 में लखनऊ अधिवेशन में अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के महासचिव पद पर एन.जी. रंगा का चुनाव हुआ, जबकि अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी स्वामी सहजानंद सरस्वती को सौंपी गई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: एन.जी. रंगा आंध्र क्षेत्र में किसान आंदोलन के अग्रणी नेता थे और उन्हें कृषि अर्थशास्त्र का गहरा ज्ञाता माना जाता था; आगे चलकर उन्होंने स्वतंत्र भारत में स्वतंत्र पार्टी की स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
13. इनमें से कौन बिहार में किसान आंदोलन के साथ जुड़े थे?
44th B.P.S.C. (Pre) 2000
उत्तर-(a)
दिए गए विकल्पों में डॉ. राजेंद्र प्रसाद बिहार में किसान आंदोलन से जुड़े रहे; उन्होंने चंपारण सत्याग्रह के दौरान महात्मा गांधी का सहयोग किया और बिहार के किसानों की समस्याओं को समझने हेतु क्षेत्र का गहन दौरा किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के अध्यक्ष रहे और भारत के प्रथम राष्ट्रपति बने; उन्होंने अपनी पुस्तक ‘सत्याग्रह एट चंपारण’ में इस आंदोलन का विस्तृत विवरण भी प्रस्तुत किया।
14. स्वामी सहजानंद सरस्वती ने ‘भूमि और जलमार्ग के राष्ट्रीयकरण’ की मांग के साथ अखिल भारतीय संयुक्त किसान सभा गठन किया-
56th to 59th B.P.S.C. (Pre) 2015
उत्तर-(a)
स्वामी सहजानंद सरस्वती ने अपने जीवन के अंतिम चरण में, अर्थात वर्ष 1950 में अपनी मृत्यु से ठीक पहले, भूमि, जलमार्ग और ऊर्जा स्रोतों के राष्ट्रीयकरण की मांग को लेकर अखिल भारतीय संयुक्त किसान सभा की स्थापना की।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यह 1936 में स्थापित मूल अखिल भारतीय किसान सभा से अलग एक नया संगठन था, जिसके गठन का मुख्य कारण किसान सभा के भीतर वैचारिक विभाजन और कम्युनिस्ट प्रभाव से असंतोष माना जाता है।
15.अखिल भारतीय किसान सभा के संस्थापक अध्यक्ष थे-.
U.P. P.C.S. (Pre) 2015
उत्तर-(b)
अप्रैल 1936 में लखनऊ में आयोजित प्रथम अधिवेशन में स्वामी सहजानंद सरस्वती अखिल भारतीय किसान सभा के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में चुने गए, जिन्होंने इससे पहले बिहार प्रांतीय किसान सभा का भी नेतृत्व किया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: आचार्य नरेंद्र देव और जयप्रकाश नारायण कांग्रेस समाजवादी पार्टी (1934 में स्थापित) के संस्थापक नेताओं में शामिल थे, जिसके किसान सभा के साथ वैचारिक रूप से घनिष्ठ संबंध थे।
16. स्वामी सहजानंद का संबंध था-
42nd B.P.S.C. (Pre) 1997
उत्तर-(c)
स्वामी सहजानंद सरस्वती ने अपना संपूर्ण सार्वजनिक जीवन बिहार के किसान आंदोलनों को संगठित करने में लगाया, जिसकी शुरुआत वर्ष 1929 में बिहार प्रांतीय किसान सभा की स्थापना से हुई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: उन्होंने बिहटा स्थित सीताराम आश्रम को अपना केंद्र बनाकर बकाश्त भूमि आंदोलन का नेतृत्व किया, जो भूमिहीन बटाईदारों को उनकी जोती हुई भूमि पर अधिकार दिलाने के लिए चलाया गया एक महत्वपूर्ण संघर्ष था।
17. निम्नलिखित में से किस एक कांग्रेसी नेता ने प्रथम अखिल भारतीय किसान सभा में भाग लिया था ?
U.P.P.C.S. (Mains) 2017
उत्तर-(a)
वर्ष 1936 के लखनऊ अधिवेशन में आयोजित प्रथम अखिल भारतीय किसान सभा सम्मेलन में जवाहरलाल नेहरू ने भी भाग लिया और इसे संबोधित किया, जिससे किसान आंदोलन को कांग्रेस के भीतर समाजवादी धड़े का समर्थन मिला।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी अधिवेशन में स्वामी सहजानंद सरस्वती को अध्यक्ष तथा एन.जी. रंगा को महासचिव चुना गया था, और इस सम्मेलन ने किसान सभा के झंडे तथा संगठनात्मक ढांचे की भी नींव रखी।
18. 1936 में लखनऊ में अखिल भारतीय किसान सभा का प्रथम अध्यक्ष किसे चुना गया?
Bihar P.C.S. (Pre.) 2016
उत्तर-(c)
अप्रैल 1936 में लखनऊ अधिवेशन में स्वामी सहजानंद सरस्वती को अखिल भारतीय किसान सभा का प्रथम अध्यक्ष चुना गया, जो इससे पहले बिहार प्रांतीय किसान सभा की स्थापना कर चुके थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: ई.एम.एस. नम्बूद्रिपाद आगे चलकर केरल में किसान सभा एवं कम्युनिस्ट आंदोलन के प्रमुख नेता बने और वर्ष 1957 में विश्व के पहले लोकतांत्रिक ढंग से चुने गए कम्युनिस्ट मुख्यमंत्री बने।
19. ‘अखिल भारतीय किसान कांग्रेस’ का गठन किया गया था-
Bihar P.C.S. (Pre.) 2016
उत्तर-(a)
अप्रैल 1936 में लखनऊ में ‘अखिल भारतीय किसान कांग्रेस’ की स्थापना हुई, जिसका नाम बाद में बदलकर ‘अखिल भारतीय किसान सभा’ कर दिया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस संगठन की स्थापना के पीछे प्रमुख उद्देश्य देशभर के बिखरे हुए क्षेत्रीय किसान संगठनों जैसे यू.पी. किसान सभा, बिहार किसान सभा एवं आंध्र किसान संघ को एक राष्ट्रीय मंच के अंतर्गत लाना था, ताकि किसान आंदोलन को अधिक संगठित स्वरूप मिल सके।
20. भूदान आंदोलन किसने प्रारंभ किया?
M.P.P.C.S. (Pre) 1998
उत्तर-(c)
महात्मा गांधी के निकटतम सहयोगियों में गिने जाने वाले विनोबा भावे ने स्वतंत्रता-प्राप्ति के पश्चात भूमिहीन किसानों में भूमि के स्वैच्छिक वितरण हेतु भूदान आंदोलन की शुरुआत की।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: विनोबा भावे वर्ष 1940 में गांधीजी द्वारा शुरू किए गए व्यक्तिगत सत्याग्रह में चुने गए प्रथम सत्याग्रही थे, और भूदान आंदोलन की सफलता को देखते हुए उन्होंने आगे चलकर सर्वोदय व ग्रामदान जैसी अवधारणाओं को भी विकसित किया।
21. भूदान आंदोलन का सर्वप्रथम प्रारंभ किस राज्य में हुआ था ?
U.P.P.C.S. (Mains) 2013
U.P.R.O./A.R.O. (Pre) 2014
U.P.R.O./A.R.O. (Pre) 2014
उत्तर-प्रदेश में
18 अप्रैल 1951 को आचार्य विनोबा भावे ने तत्कालीन आंध्र प्रदेश के तेलंगाना क्षेत्र स्थित पोचमपल्ली ग्राम से भूदान आंदोलन की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य गांधीवादी ट्रस्टीशिप के सिद्धांत पर आधारित भूमि सुधार करना था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जयप्रकाश नारायण वर्ष 1953 में सक्रिय राजनीति त्यागकर इस आंदोलन से जुड़े, और वर्ष 1955 के बाद इसने ग्रामदान का रूप लिया, जिसकी शुरुआत सर्वप्रथम उड़ीसा राज्य में सफलतापूर्वक हुई।
22. ‘भूदान आंदोलन’ की शुरुआत हुई थी-
Uttarakhand U.D.A./ L.D.A. (Pre) 2007
उत्तर-प्रदेश राज्य में (b) मध्य प्रदेश राज्य में
भूदान आंदोलन की शुरुआत 18 अप्रैल 1951 को तत्कालीन आंध्र प्रदेश राज्य के तेलंगाना क्षेत्र के पोचमपल्ली गांव से आचार्य विनोबा भावे द्वारा की गई थी, जहां एक भूमिहीन परिवार की सहायता हेतु एक जमींदार ने स्वेच्छा से भूमि दान की थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यह घटना भूदान यज्ञ की प्रेरणा बनी, और अगले कुछ वर्षों में विनोबा भावे ने पूरे भारत में पदयात्रा करते हुए लाखों एकड़ भूमि दान में एकत्र की।
23. आचार्य विनोबा भावे के भूदान आंदोलन के प्रारंभ में निम्नलिखित स्थानों में से कौन-सा एक उससे संबद्ध था?
I.A.S. (Pre) 2007
उत्तर-(c)
भूदान आंदोलन का जन्मस्थल पोचमपल्ली गांव था, जो तेलंगाना क्षेत्र (तत्कालीन आंध्र प्रदेश) में स्थित है और जहां से 18 अप्रैल 1951 को आचार्य विनोबा भावे ने इस आंदोलन की शुरुआत की।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: पोचमपल्ली अपनी इकत बुनाई शिल्प के लिए भी प्रसिद्ध है, परंतु भूदान आंदोलन के कारण इसे भारत के भूमि-सुधार इतिहास में विशेष पहचान मिली।
24. बंगाल के तिभागा किसान आंदोलन की क्या मांग थी?
I.A.S. (Pre) 2013
उत्तर-(a)
सितंबर 1946 में बंगाल प्रांतीय किसान सभा द्वारा शुरू किए गए तिभागा आंदोलन में बर्गादारों (बंटाईदारों) की मांग थी कि उपज में जमींदार का हिस्सा आधे से घटाकर एक-तिहाई कर दिया जाए और शेष दो-तिहाई हिस्सा वास्तविक जोतने वाले किसान को मिले।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यह आंदोलन उत्तरी बंगाल के दिनाजपुर, जलपाईगुड़ी और रंगपुर जैसे जिलों में विशेष रूप से प्रभावी रहा, और इसने आगे चलकर पश्चिम बंगाल में लागू भूमि सुधार कानूनों की नींव तैयार करने में भी भूमिका निभाई।
25.सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए ।
सूची-I सूची-II
A. बारदोली सत्याग्रह 1. स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती
B. भारतीय किसान संस्थान 2. सरदार वल्लभभाई पटेल
C. बंगाल प्रजा पार्टी 3. फजलुल हक
D. बाकाश्त संघर्ष 4. एन.जी. रंगा
कूट :
A B C D
सूची-I सूची-II
A. बारदोली सत्याग्रह 1. स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती
B. भारतीय किसान संस्थान 2. सरदार वल्लभभाई पटेल
C. बंगाल प्रजा पार्टी 3. फजलुल हक
D. बाकाश्त संघर्ष 4. एन.जी. रंगा
कूट :
A B C D
U.P. P.C.S. (Mains) 2006
उत्तर-(b)
बारदोली सत्याग्रह (1928) का नेतृत्व वल्लभभाई पटेल ने किया, जिन्हें इसी आंदोलन की सफलता पर बारदोली की महिलाओं ने ‘सरदार’ की उपाधि दी। भारतीय किसान संस्थान की स्थापना एन.जी. रंगा ने की, वर्ष 1929 में फजलुल हक ने प्रजा पार्टी (आगे चलकर बंगाल प्रजा पार्टी) बनाई जिसने 1937 के चुनावों बाद मुस्लिम लीग संग सरकार बनाई, और बिहार का बाकाश्त संघर्ष स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती से जुड़ा था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बारदोली सत्याग्रह मूलतः लगान में 22 प्रतिशत वृद्धि के विरोध में हुआ था, और सरकार को अंततः जांच आयोग बैठाकर बढ़ोत्तरी वापस लेनी पड़ी, जिसे गांधीवादी सविनय अवज्ञा की एक बड़ी प्रारंभिक सफलता माना जाता है।
26. बारदोली सत्याग्रह (1928) का नेतृत्व किया-
I.A.S. (Pre) 2003
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2005
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2005
उत्तर-(a)
गुजरात के सूरत जिले के बारदोली तालुके में वर्ष 1928 में हुए सफल किसान सत्याग्रह का नेतृत्व वल्लभभाई पटेल ने किया, जो लगान वृद्धि के विरुद्ध किसानों का संगठित अहिंसक प्रतिरोध था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस आंदोलन में मेहता बंधुओं जैसे स्थानीय गांधीवादी कार्यकर्ताओं ने वर्ष 1922 से ही जमीनी स्तर पर निरंतर तैयारी का कार्य किया था, जिसने सत्याग्रह की सफलता की नींव रखी।
27. निम्न में से किस आंदोलन में सरदार वल्लभभाई पटेल ने मुख्य भूमिका निभाई?
U.P.P.C.S. (Pre) 2002
U.P. P.S.C. (GIC) 2010
U.P. P.S.C. (GIC) 2010
उत्तर-(d)
वल्लभभाई पटेल ने बारदोली सत्याग्रह (1928) में मुख्य नेतृत्वकर्ता की भूमिका निभाई, जिसके कारण लगान वृद्धि वापस लेने को सरकार बाध्य हुई और किसानों की निर्णायक जीत हुई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इससे पहले पटेल खेड़ा सत्याग्रह (1918) में भी गांधीजी के सहयोगी के रूप में सक्रिय रहे थे, जिसने उनकी संगठनात्मक क्षमता को पहली बार सार्वजनिक रूप से उजागर किया।
28. वल्लभभाई पटेल को सरदार की उपाधि किसने दी?
R.A.S. / R.T.S. (Pre) 1997
उत्तर-(a)
बारदोली सत्याग्रह की सफलता के पश्चात वहां की महिलाओं ने वल्लभभाई पटेल को ‘सरदार’ की उपाधि दी, और इसी उपाधि को महात्मा गांधी ने भी अपनी स्वीकृति देकर लोकप्रिय बनाया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी उपाधि के कारण आगे चलकर वे ‘सरदार पटेल’ के नाम से प्रसिद्ध हुए, और स्वतंत्रता के बाद रियासतों के एकीकरण में उनकी ऐतिहासिक भूमिका के चलते उन्हें ‘भारत का लौह पुरुष’ भी कहा गया।
29. महात्मा गांधी ने वल्लभभाई पटेल को ‘सरदार’ की उपाधि उनकी बड़ी संगठन क्षमता के कारण किस आंदोलन में दी थी?
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2011
उत्तर-(b)
वल्लभभाई पटेल की असाधारण संगठन क्षमता को देखते हुए बारदोली सत्याग्रह (1928) के दौरान उन्हें ‘सरदार’ की उपाधि से सम्मानित किया गया, जिसने लगान वृद्धि के विरुद्ध किसानों को एकजुट कर एक अहिंसक किंतु प्रभावी आंदोलन खड़ा किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बारदोली सत्याग्रह की सफलता ने महात्मा गांधी को वर्ष 1930 में नमक सत्याग्रह जैसे बड़े राष्ट्रव्यापी जन-आंदोलन की रणनीति बनाने में भी आत्मविश्वास प्रदान किया।
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