अकबर MCQ प्रश्न | UPSC

1. किस चिश्ती संत के दरगाह पर अकबर दर्शन हेतु अधिक जाता था?
(a) मुइनुद्दीन चिश्ती
(b) शेख नसीमुद्दीन चिराग-देहलवी
(c) कुतुबुद्दीन बाख्तियार काकी
(d) शेख सलीम चिश्ती
U.P.P.C.S. (Mains) 2012
उत्तर-(a)
अकबर चिश्तिया सूफी परंपरा का गहरा श्रद्धालु था। वह ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती की अजमेर स्थित दरगाह पर नियमित रूप से दर्शन करने जाता था – विशेषकर पुत्र-प्राप्ति की मन्नत मानने के बाद, जब 1569 ई. में शेख सलीम चिश्ती के आशीर्वाद से उसे पुत्र (सलीम, बाद में जहाँगीर) की प्राप्ति हुई। इस कृतज्ञता-स्वरूप उसने फतेहपुर सीकरी को अपनी राजधानी बनाया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अकबर ने अजमेर दरगाह तक कुल 14 यात्राएं कीं – कभी पैदल भी। ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती (1143–1236 ई.) भारत में चिश्तिया सिलसिले के संस्थापक माने जाते हैं और उन्हें “गरीब नवाज़” की उपाधि से जाना जाता है।
2. हल्दी घाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप की सेना के सेनापति कौन थे?
(a) अमर सिंह
(b) मान सिंह
(c) हकीम खान
(d) शक्ति सिंह
56th to 59th B.P.S.C. (Pre) 2015
उत्तर-(c)
1576 ई. में हुए हल्दीघाटी युद्ध में महाराणा प्रताप की सेना का नेतृत्व अफगान सरदार हकीम खान सूर ने किया था। यह एक महत्वपूर्ण तथ्य है कि एक मुस्लिम सेनापति ने राजपूत राजा के लिए मुगलों के विरुद्ध युद्ध किया। राणा की सेना में भील योद्धाओं की एक टुकड़ी भी शामिल थी जिसका नेतृत्व राणापूंजा ने किया था। मुगल सेना का नेतृत्व मानसिंह और आसफ खां ने किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हल्दीघाटी दर्रा राजस्थान के राजसमंद जिले में अरावली पर्वत श्रृंखला में स्थित है। इस युद्ध में महाराणा प्रताप के प्रिय घोड़े ‘चेतक’ ने घायल अवस्था में भी अपने स्वामी को सुरक्षित निकाला – चेतक की वीरता आज भी राजस्थानी लोकगीतों में अमर है।
3. निम्नलिखित में से किस परिवार ने सर्वप्रथम अकबर के साथ वैवाहिक संबंध स्थापित किया था?
(a) राठौर
(b) सिसोदिया
(c) कछवाहा
(d) चौहान
U.P.R.O/A.R.O. (Pre) 2016
उत्तर-(c)
अकबर ने सर्वप्रथम कछवाहा वंश के राजा भारमल (बिहारीमल) की पुत्री हरखा बाई (जिन्हें लोकप्रिय रूप से जोधाबाई भी कहते हैं) से 1562 ई. में विवाह किया। यह विवाह सांभर में हुआ जब अकबर अजमेर दरगाह से लौट रहा था। इस वैवाहिक गठबंधन ने मुगल-राजपूत संबंधों की नींव रखी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: राजा भारमल के पुत्र भगवान दास और पौत्र मानसिंह दोनों अकबर के दरबार में उच्च पदों पर आसीन हुए। मानसिंह को अकबर ने “फर्जंद” (पुत्र) की उपाधि दी थी और वे नवरत्नों में शामिल थे। सिसोदिया (मेवाड़) वंश ने कभी भी मुगलों से वैवाहिक संबंध नहीं बनाए – यह उनके स्वाभिमान का प्रतीक था।
4. हल्दी घाटी का युद्ध किस वर्ष में हुआ था?
(a) 1756 ई.
(b) 1576 ई.
(c) 1756 ई. पू.
(d) 1767 ई. पू.
Uttarkhand P.C.S. (Pre) 2010
उत्तर-(b)
हल्दीघाटी का युद्ध 18 जून, 1576 ई. को मेवाड़ के महाराणा प्रताप और मुगल सम्राट अकबर की सेना के बीच हुआ। यह युद्ध कुछ ही घंटों में समाप्त हो गया था, परंतु इसका ऐतिहासिक महत्व बहुत अधिक है। राणा प्रताप पराजित होने के बाद अरावली की पहाड़ियों में चले गए और छापामार युद्ध जारी रखा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अबुल फजल ने इस युद्ध का वर्णन “खमनोर के युद्ध” के रूप में किया है क्योंकि यह युद्ध खमनोर गांव के पास हुआ था। कर्नल जेम्स टॉड ने इसे “मेवाड़ की थर्मोपल्ली” की संज्ञा दी थी, जो यूनानी इतिहास की उस प्रसिद्ध लड़ाई के समान वीरता का प्रतीक है।
5. निम्नलिखित में से किस स्थान पर अकबर को हुमायूं की मृत्यु की सूचना मिलने पर राजगद्दी पर बैठाया गया था?
(a) काबुल
(b) लाहौर
(c) सरहिंद
(d) कालानौर
P.C.S. (Pre) 2015
उत्तर-(d)
27 जनवरी, 1556 को हुमायूं की मृत्यु के समय अकबर पंजाब में सिकंदर सूर के विरुद्ध अभियान में था। 14 फरवरी, 1556 को वर्तमान गुरदासपुर जिले के निकट कालानौर नामक स्थान पर उसे मुगल सम्राट घोषित किया गया। उस समय उसके संरक्षक और वली (रीजेंट) बैरम खान थे, जो अगले चार वर्षों तक साम्राज्य का वास्तविक संचालन करते रहे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: राज्याभिषेक के समय अकबर की आयु मात्र 13 वर्ष 4 माह थी। बैरम खान को “खान-ए-खाना” की उपाधि दी गई थी। 1560 ई. में अकबर ने बैरम खान के संरक्षण से मुक्ति पाई – इस घटना को “पेटीकोट सरकार का अंत” भी कहा जाता है क्योंकि इसके बाद कुछ समय तक अकबर की धाय माँ माहम अनगा का प्रभाव बढ़ा।
6. हल्दी घाटी के युद्ध के पीछे अकबर का मुख्य उद्देश्य था-
(a) राणा प्रताप को अपने अधीन लाना
(b) राजपूतों में फूट डालना
(c) मानसिंह की भावना को संतुष्ट करना
(d) साम्राज्यवादी नीति
R.A.S. / R.T.S. (Pre) 1992
उत्तर-(a)
हल्दीघाटी युद्ध के पीछे अकबर का प्रमुख उद्देश्य अजेय मेवाड़ को मुगल अधीनता में लाना था। अकबर ने महाराणा प्रताप के पास कई बार दूत भेजे – जलाल खान, मानसिंह, भगवान दास और टोडरमल – परंतु राणा ने हर बार समझौते से इनकार किया। अंततः 1576 में मानसिंह के नेतृत्व में मुगल सेना भेजी गई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हल्दीघाटी युद्ध में अकबर की जीत के बावजूद वह मेवाड़ को कभी पूर्णतः नहीं जीत सका। महाराणा प्रताप ने 1582 में दिवेर के युद्ध में मुगलों को निर्णायक रूप से पराजित किया, जिसे “मेवाड़ का मैराथन” कहा जाता है – इस जीत के बाद उन्होंने चित्तौड़ और मांडलगढ़ को छोड़कर मेवाड़ का अधिकांश भाग पुनः प्राप्त कर लिया।
7. हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप के अलावा राजपूत सेना का सेनापति कौन था?
(a) इब्राहीम गार्दी
(b) हकीम सूर
(c) टार्डी बेग
(d) मोहम्मद लोदी
U.P.R.O./A.R.O. (Re. Exam) (Pre) 2016
उत्तर-(b)
हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप के साथ अफगान सरदार हकीम खान सूर ने सेनापति के रूप में कार्य किया। वे सूरी वंश के अंतिम सम्राट सिकंदर सूर के वंशज थे जो मुगलों के कट्टर शत्रु थे – इसलिए उन्होंने मुगलों के विरुद्ध राणा प्रताप का साथ दिया। उनके अधीन अफगान पैदल सेना की एक महत्वपूर्ण टुकड़ी थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हकीम खान सूर की वीरगति हल्दीघाटी के युद्धक्षेत्र में ही हुई और उन्हें राजसमंद जिले में दफनाया गया। उनकी मजार आज भी वहाँ मौजूद है, जो हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक मानी जाती है। इब्राहीम गार्दी पानीपत के द्वितीय युद्ध (1556) में हेमू की तोपखाना सेना का प्रमुख था – इसे प्रश्न के विकल्पों से भ्रमित नहीं करना चाहिए।
8. अकबर ने सर्वप्रथम वैवाहिक संबंध राजपूतों के जिस गृह से स्थापित किए, वह था-
(a) बुंदेलों से
(b) कछवाहों से
(c) राठौरों से
(d) चौहानों से
U.P.P.C.S. (Pre) 2004
उत्तर-(b)
1562 ई. में अजमेर यात्रा के दौरान आमेर (जयपुर) के राजा भारमल ने सांगानेर के पास अकबर की अधीनता स्वीकार कर अपनी पुत्री हरखा बाई का विवाह अकबर से कराया। यह मुगल-राजपूत इतिहास की पहली वैवाहिक संधि थी। अजमेर से लौटते समय सांभर में यह विवाह संपन्न हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हरखा बाई को मरियम-उज़-ज़मानी की उपाधि मिली और वे जहाँगीर की माँ बनीं। इस गठजोड़ की नींव पर अकबर ने आगे चलकर राठौर (बीकानेर और जोधपुर), हाड़ा (बूंदी) आदि अनेक राजपूत वंशों से वैवाहिक संबंध बनाए। यही “राजपूत नीति” मुगल साम्राज्य की स्थिरता का एक प्रमुख स्तंभ बनी।
9. दिए गए मानचित्र में, छायांकित भाग एक कालावधि विशेष में अकबर के साम्राज्य को दर्शाता है, ‘A’ स्वतंत्र देश का परिचायक है और ‘B’ एक नगर की स्थिति दिखाता है, निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प पूरी सही जानकारी देता है?
अकबर का साम्राज्य
(a) 1557 में अकबर (a) गोलकुंडा, (b) लाहौर
(b) 1557 में अकबर (a) खानदेश,(b) मुल्तान
(c) 1605 में अकबर (a) गोंडवाना, (b) मुल्तान
(d) 1605 में अकबर (a) गोंडवाना, (b) लाहौर
I.A.S. (Pre) 1998
उत्तर-(d)
मानचित्र में दिखाया गया विस्तृत साम्राज्य 1605 ई. में अकबर के शासनकाल के अंत का है। इसमें ‘A’ संकेत गोंडवाना राज्य को दर्शाता है जो मुगल साम्राज्य के बाहर था, और ‘B’ संकेत लाहौर नगर को। अकबर ने 1564 में गोंडवाना पर आक्रमण किया था और वहाँ की वीरांगना रानी दुर्गावती ने मुगलों का सामना करते हुए वीरगति पाई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अकबर का साम्राज्य उसकी मृत्यु (1605) तक उत्तर में काबुल से लेकर दक्षिण में अहमदनगर तक और पूर्व में बंगाल से पश्चिम में सिंध तक फैला हुआ था। लाहौर अकबर की दूसरी महत्वपूर्ण राजधानी थी – उसने 1585–1598 ई. के बीच लाहौर को ही अपनी मुख्य राजधानी बनाए रखा, जब वह उत्तर-पश्चिमी सीमा की समस्याओं से निपट रहा था।
10. अबुल फजल की मृत्यु इनमें से किसके कारण हुई?
(a) शहजादा सलीम
(b) अब्दुर रहीम खान-इ-खानां
(c) शहजादा मुराद
(d) शहजादा दानियल
Jharkhand P.C.S. (Pre)2013
उत्तर-(a)
1602 ई. में जब शहजादा सलीम इलाहाबाद में विद्रोही स्वर में स्वतंत्र आचरण कर रहा था, अकबर ने दक्षिण में नियुक्त अपने विश्वसनीय दरबारी अबुल फजल को वापस बुलाया। सलीम के षड्यंत्र पर ओरछा के बुंदेला सरदार वीरसिंह देव ने रास्ते में ही अबुल फजल की हत्या कर दी और उसका कटा सिर सलीम के पास भेज दिया। जब सलीम जहाँगीर के रूप में सम्राट बना, तो उसने वीरसिंह देव को 3000 का मनसब दिया – जो उसकी कृतज्ञता का प्रमाण था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अबुल फजल अकबर के नवरत्नों में सबसे विद्वान माने जाते थे। उन्होंने “आइन-ए-अकबरी” और “अकबरनामा” जैसे ऐतिहासिक ग्रंथों की रचना की, जो मुगल काल के इतिहास के प्रमुख स्रोत हैं। वे शेख मुबारक के पुत्र और कवि फैज़ी के भाई थे।
11. निम्नलिखित में से किसे अकबर ने स्वयं मारा था?
(a) अधम खां को
(b) बैरम खां को
(c) बाज बहादुर को
(d) पीर मुहम्मद खां को
U.P.P.C.S. (Mains) 2010
उत्तर-(a)
अधम खां अकबर की धाय माँ माहम अनगा का पुत्र था। 1562 ई. में अधम खां ने दरबार में अकबर के प्रधानमंत्री अतगा खां की निर्मम हत्या कर दी। इस घटना से क्रोधित होकर अकबर ने स्वयं अधम खां को महल की छत से नीचे फेंककर मार डाला। यह घटना अकबर के दृढ़ व्यक्तित्व और न्याय के प्रति निष्ठा का प्रमाण है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: माहम अनगा “पेटीकोट सरकार” की प्रमुख थीं जिन्होंने बैरम खां की बर्खास्तगी के बाद (1560–1562) दरबार में अत्यधिक प्रभाव रखा। अधम खां की मृत्यु के बाद माहम अनगा को इतना गहरा सदमा लगा कि 40 दिन के भीतर उनकी भी मृत्यु हो गई। दोनों की कब्रें दिल्ली में महरौली के पास एक ही परिसर में स्थित हैं।
12. निम्नलिखित में से किसने यह आज्ञा दी थी कि आदमी को एक ही स्त्री से विवाह करना चाहिए और वह तभी दूसरा विवाह कर सकता है, जब उसकी पहली पत्नी बन्ध्या हो?
(a) अलाउद्दीन खिलजी
(b) शेरशाह
(c) अकबर
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर-(c)
अकबर ने विवाह संबंधी सुधारों के अंतर्गत यह आदेश जारी किया कि पुरुष को एक ही पत्नी से विवाह करना चाहिए और दूसरा विवाह केवल तभी मान्य होगा जब पहली पत्नी निःसंतान हो। इसके अतिरिक्त उसने विधवाओं को पुनर्विवाह का अधिकार दिया और बलपूर्वक सती होने पर प्रतिबंध लगाया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अकबर ने 1562 ई. में दास प्रथा, 1563 ई. में तीर्थयात्रा कर और 1564 ई. में जजिया कर समाप्त किया – ये तीनों सुधार उसकी सामाजिक और धार्मिक उदारता के प्रतीक हैं। अकबर के सामाजिक सुधारों का विस्तृत विवरण अबुल फजल रचित “आइन-ए-अकबरी” में मिलता है।
13. किस राजपूत शासक ने मुगलों के विरुद्ध निरंतर स्वतंत्रता का संघर्ष जारी रखा और समर्पण नहीं किया?
(a) बीकानेर के राजा रायसिंह
(b) मारवाड़ के राव चंद्रसेन
(c) आमेर के राजा भारमल
(d) मेवाड़ के महाराजा अमर सिंह
R.A.S./R.T.S. (Pre) 2012
उत्तर-(b)
मारवाड़ के राव चंद्रसेन ने अकबर की अधीनता स्वीकार करने से आजीवन इनकार किया। 1565 ई. में मुगल सेना से घिरने के बाद वे पहाड़ी क्षेत्रों में चले गए और 1581 ई. में अपनी मृत्यु तक संघर्ष जारी रखा। उन्होंने 1579 में सोजत पर पुनः अधिकार भी किया। उनकी तुलना प्रायः महाराणा प्रताप से की जाती है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: राव चंद्रसेन को “भूला-बिसरा राजा” भी कहा जाता है क्योंकि इतिहास में उन्हें वह सम्मान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे। वे मारवाड़ के राव मालदेव के पुत्र थे। उनके बड़े भाई राम ने मुगलों से समझौता कर लिया था, किंतु चंद्रसेन ने इसे अपने स्वाभिमान के विरुद्ध माना।
14. निम्न तथ्यों में से कौन तथ्य ऐसा है, जो अकबर को राष्ट्रीय सम्राट सिद्ध करने में सहायक नहीं है-
(a) अकबर ने इस्लाम धर्म को त्याग दिया
(b) प्रशासकीय एकता और कानूनों की एकरूपता
(c) अकबर द्वारा सांस्कृतिक एकता का प्रयत्न
(d) अकबर की धार्मिक नीति
R.A.S./ R.T.S. (Pre) 1994
उत्तर-(a)
अकबर को राष्ट्रीय सम्राट इसलिए कहा जाता है क्योंकि उसने प्रशासनिक एकता, समान लगान व्यवस्था, धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक समन्वय के माध्यम से हिंदू-मुस्लिम एकता स्थापित करने का प्रयास किया। किंतु यह कहना कि उसने “इस्लाम धर्म को त्याग दिया” – पूर्णतः असत्य और भ्रामक है, इसलिए यह तथ्य उसे राष्ट्रीय सम्राट सिद्ध करने में सहायक नहीं बल्कि बाधक है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अकबर ने 1582 ई. में “दीन-ए-इलाही” (ईश्वरीय धर्म) की स्थापना की, जो इस्लाम का त्याग नहीं बल्कि सभी धर्मों के श्रेष्ठ तत्वों का समन्वय था। इसे अपनाने वाले केवल 18 व्यक्ति थे, जिनमें एकमात्र हिंदू बीरबल थे। इतिहासकार वी.ए. स्मिथ ने इसे “अकबर की मूर्खता” कहा, जबकि अबुल फजल इसे दिव्य ज्ञान की खोज मानते थे।
15. राजपूताना के निम्न राज्यों में से किस एक ने अकबर की संप्रभुता स्वयं स्वीकार नहीं की थी?
(a) आमेर (अम्बेर)
(b) मेवाड़
(c) मारवाड़
(d) बीकानेर
उत्तर-(b)
मेवाड़ एकमात्र प्रमुख राजपूत राज्य था जिसने अकबर की अधीनता कभी स्वीकार नहीं की। महाराणा प्रताप ने हल्दीघाटी (1576) के बाद भी छापामार युद्ध जारी रखा और 1582 में दिवेर की लड़ाई में मुगलों को पराजित किया। 1597 ई. में महाराणा प्रताप की मृत्यु के बाद उनके पुत्र अमर सिंह ने 1615 ई. में जहाँगीर से संधि की।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अकबर ने महाराणा प्रताप के पास चार बार शांति दूत भेजे – जलाल खान कोरची, मानसिंह, भगवान दास और टोडरमल – परंतु राणा ने हर बार अधीनता से इनकार किया। मेवाड़ की यह स्वतंत्रता-भावना राजपूत इतिहास का सबसे गौरवशाली अध्याय मानी जाती है।
16. अकबर के साथ युद्ध करने वाली दुर्गावती_____की रानी थी।
(a) मंडला
(b) मांडू
(c) असीरगढ़
(d) रामगढ़
उत्तर-(a)
रानी दुर्गावती गोंडवाना (गढ़कटंगा) राज्य की शासक थीं जिसका केंद्र मंडला था। 1564 ई. में अकबर के सेनापति आसफ खां ने उन पर आक्रमण किया। अपने अल्पवयस्क पुत्र वीरनारायण के संरक्षक के रूप में उन्होंने वीरतापूर्वक मुगल सेना का सामना किया, परंतु गढ़ और मंडला के बीच हुए युद्ध में घायल होने पर उन्होंने आत्मसमर्पण की बजाय स्वयं अपनी जान दे दी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: रानी दुर्गावती चंदेल राजपूत वंश की पुत्री थीं और गोंड राजा दलपत शाह की विधवा थीं। उनकी वीरता के सम्मान में भारत सरकार ने 1988 में उनके नाम पर एक डाक टिकट जारी किया। जबलपुर विश्वविद्यालय का नाम भी उन्हीं के नाम पर “रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय” रखा गया है।
17. अकबर की लोकप्रियता के कारण थे- A. मनसबदारी प्रथा B. धार्मिक नीति C. भू-राजस्व व्यवस्था D. सामाजिक सुधार
(a) A, B सही हैं
(b) B सही है
(c) C सही है
(d) A, B, C, D सही हैं
U.P. P.C.S. (Pre) 1990
उत्तर-(d)
अकबर की लोकप्रियता का आधार बहुआयामी था। मनसबदारी प्रथा ने योग्यता के आधार पर हिंदू-मुस्लिम दोनों को उच्च पद दिलाए। उसकी उदार धार्मिक नीति ने साम्राज्य को एकजुट रखा। टोडरमल द्वारा विकसित भू-राजस्व व्यवस्था (दहसाला बंदोबस्त) ने कृषि को स्थिरता दी। सामाजिक सुधारों में सती प्रथा और बाल विवाह पर रोक तथा 1562 में दास प्रथा और 1564 में जजिया कर की समाप्ति शामिल है। अतः चारों कारण सम्मिलित रूप से उसकी लोकप्रियता के आधार हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अकबर की मनसबदारी व्यवस्था में मनसब दो भागों में विभाजित था – “जात” (व्यक्तिगत पद) और “सवार” (घुड़सवार सैनिकों की संख्या)। इस व्यवस्था में 10 से 10,000 तक के मनसब होते थे और 5000 से ऊपर के मनसब केवल शाही परिवार को दिए जाते थे।
18. निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? 1. अकबर ने लड़कों और लड़कियों के विवाह की आयु निर्धारित करने का प्रयास किया था। 2. अकबर ने लड़कियों को अभिभावकों के दबाव से अलग स्वयं की इच्छा से विवाह करने की स्वतंत्रता दी थी। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए। कूट :
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 एवं 2 दोनों
(d) न तो 1 न ही 2
U.P.P.C.S. (Pre) 2020
उत्तर-(c)
अकबर ने विवाह की न्यूनतम आयु लड़कों के लिए 16 वर्ष और लड़कियों के लिए 14 वर्ष निर्धारित की। साथ ही यह भी आदेश दिया कि लड़कियों को परिवार के दबाव में नहीं बल्कि अपनी इच्छा से विवाह करने का अधिकार हो। ये दोनों कदम 16वीं शताब्दी में महिला अधिकारों की दिशा में अत्यंत प्रगतिशील थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अकबर ने विधवा पुनर्विवाह को भी प्रोत्साहित किया और सती प्रथा को रोकने के लिए शासकीय आदेश जारी किए। हालांकि इन सुधारों को पूरी तरह लागू करना कठिन था, फिर भी ये कदम भारतीय इतिहास में महिला सुधार के शुरुआती प्रयासों में गिने जाते हैं – जो 19वीं सदी के राजा राममोहन राय के प्रयासों से लगभग तीन शताब्दी पहले उठाए गए थे।
19. निम्नलिखित में से किस मुस्लिम शासक ने तीर्थयात्रा कर समाप्त कर दिया था?
(a) बहलोल लोदी
(b) शेरशाह
(c) हुमायूं
(d) अकबर
53rd to 55th B.P.S.C. (Pre) 2011
उत्तर-(d)
1563 ई. में अकबर ने हिंदू तीर्थयात्रियों पर लगाया जाने वाला तीर्थयात्रा कर (pilgrim tax) समाप्त कर दिया। यह कर हिंदुओं को उनके धार्मिक स्थलों की यात्रा पर देना पड़ता था। इसके एक वर्ष बाद 1564 में उसने जजिया कर भी समाप्त किया – जो गैर-मुस्लिमों पर लगाया जाने वाला विशेष धार्मिक कर था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जजिया कर मूलतः उमर काल से चला आ रहा था और यह गैर-मुस्लिमों से इस्लामी राज्य की सुरक्षा के बदले वसूला जाता था। अकबर के बाद औरंगजेब ने 1679 ई. में इसे पुनः लागू किया, जो मुगल साम्राज्य के पतन के कारणों में से एक बना। अकबर की इस उदार नीति को इतिहासकार वी.ए. स्मिथ ने “धार्मिक क्रांति” की संज्ञा दी है।
20. निम्नलिखित बादशाहों में से किसको एक ‘प्रबुद्ध निरंकुश’ कहा जा सकता है?
(a) बाबर
(b) हुमायूं
(c) अकबर
(d) औरंगजेब
U.P.P.C.S. (Mains) 2009
उत्तर-(c)
अकबर को “प्रबुद्ध निरंकुश” इसलिए कहा जाता है क्योंकि उसके हाथों में संपूर्ण सत्ता केंद्रित थी, फिर भी उसने अपनी शक्ति का उपयोग जनकल्याण, धार्मिक सहिष्णुता और प्रशासनिक सुधारों के लिए किया। यूरोप के प्रशा के फ्रेडरिक महान और रूस की कैथरीन द्वितीय की तरह वह एक ऐसा निरंकुश शासक था जो तर्क और बुद्धि पर आधारित शासन करता था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अकबर स्वयं अनपढ़ था – उसने कभी औपचारिक शिक्षा नहीं ली – फिर भी उसके दरबार में अबुल फजल, बीरबल, टोडरमल, तानसेन जैसे नवरत्न थे। वह कला, संगीत और साहित्य का महान पोषक था। इतिहासकार स्टेनली लेन-पूल ने लिखा है कि “अकबर का जन्म शासन करने के लिए हुआ था।”
21. अकबर ने जिस मनसबदारी प्रणाली को लागू किया, वह किस देश में प्रचलित प्रणाली से उधार ली गई थी?
(a) अफगानिस्तान
(b) तुर्की
(c) मंगोलिया
(d) फारस
I.A.S. (Pre) 1994
उत्तर-(c)
अकबर की मनसबदारी प्रणाली की जड़ें मध्य एशिया की मंगोल सैन्य परंपरा में हैं। चंगेज खान ने अपनी सेना को दशमलव प्रणाली पर संगठित किया था – 10, 100, 1000 और 10,000 सैनिकों की इकाइयों में। अकबर ने इसी ढाँचे को भारतीय परिस्थितियों के अनुसार ढालकर मनसबदारी व्यवस्था बनाई, जिसमें प्रत्येक अधिकारी को “मनसब” (पद/श्रेणी) दिया जाता था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मनसबदारी प्रणाली में दो भाग होते थे – “जात” (व्यक्तिगत पद, जो वेतन निर्धारित करता था) और “सवार” (घुड़सवार सैनिकों की संख्या जो रखनी होती थी)। न्यूनतम मनसब 10 और अधिकतम 10,000 था। 5,000 से ऊपर के मनसब केवल शाही परिवार के सदस्यों को दिए जाते थे।
22. टोडरमल ने किस क्षेत्र में ख्याति अर्जित की थी?
(a) सैन्य अभियान
(b) भू-राजस्व
(c) हास-परिहास
(d) चित्रकला
U.P.P.C.S. (Pre) 1992
उत्तर-(b)
राजा टोडरमल अकबर के नवरत्नों में भू-राजस्व विशेषज्ञ के रूप में प्रसिद्ध थे। 1580 ई. में उन्होंने “आइन-ए-दहसाला” (दस वर्षीय बंदोबस्त) की नींव रखी, जिसमें पिछले 10 वर्षों के उत्पादन और मूल्यों का औसत निकालकर उसका एक-तिहाई भाग राजस्व के रूप में निर्धारित किया जाता था। उनके सहायक ख्वाजा शाह मंसूर थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: टोडरमल ने भूमि को चार श्रेणियों में बाँटा – पोलज (प्रतिवर्ष जुती), परौती (कभी-कभी परती छोड़ी जाने वाली), चाचर (तीन-चार वर्ष परती) और बंजर (पाँच वर्ष से अधिक समय से बंजर)। इस व्यवस्था से किसानों को निश्चित देय-राशि का पहले से पता चल जाता था, जिससे कृषि उत्पादन में स्थिरता आई।
23. अकबर का शासन जाना जाता है- (1) क्षेत्रों को जीतने के लिए (2) अपनी प्रशासनिक व्यवस्था के लिए (3) न्यायिक प्रशासन के लिए (4) उसकी धार्मिक कट्टरता के लिए नीचे दिए गए कूटों से सही उत्तर चुनिए-
(a) (1) और (2)
(b) (1), (2) और (3)
(c) (2), (3) और (4)
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर-(b)
अकबर अपनी धार्मिक उदारता और “सुलह-ए-कुल” (सर्वधर्म समभाव) की नीति के लिए विख्यात है, न कि किसी प्रकार की धार्मिक कट्टरता के लिए। इसलिए कथन (4) असत्य है जबकि क्षेत्र विजय, प्रशासनिक व्यवस्था और न्यायिक सुधार – तीनों के लिए वह इतिहास में सराहा जाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: “सुलह-ए-कुल” का अर्थ है “सबके साथ शांति।” यह नीति अकबर के शासन का केंद्रीय दर्शन थी जिसके तहत सभी धर्मों को राज्य की ओर से समान आदर और संरक्षण मिलता था। इस नीति के कारण ही अकबर के दरबार में राजपूत, हिंदू, जैन, पारसी और ईसाई विद्वान एक साथ उच्च पदों पर आसीन रहे।
24. अकबर द्वारा दीवान का पूर्णरूपेण दर्जा दिया जाने वाला प्रथम व्यक्ति था-
(a) आसफ खां
(b) मुनीम खां
(c) मुजफ्फर खां तुरबती
(d) राजा टोडरमल
U.P. Lower Sub. (Spl.) (Pre) 2002
उत्तर-(c)
मुजफ्फर खां तुरबती वह पहले अधिकारी थे जिन्हें अकबर ने पूर्ण रूप से “दीवान” का दर्जा दिया। दीवान साम्राज्य का सर्वोच्च वित्त और राजस्व अधिकारी होता था। अकबर के 9वें से 30वें शासन वर्ष तक यह पद मुजफ्फर खां तुरबती, टोडरमल और ख्वाजा शाह मंसूर के बीच बारी-बारी आता-जाता रहा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: “दीवान” शब्द मूलतः फारसी भाषा से लिया गया है और इसका प्रयोग खलीफा उमर के काल में खजाना विभाग के लिए किया जाता था। मुगल प्रशासन में दीवान, वजीर, मीर बख्शी, मीर समन और सद्र – ये पाँच प्रमुख केंद्रीय विभागाध्यक्ष थे।
25. इबादत खाने का निर्माण किसने करवाया?
(a) औरंगजेब
(b) अलाउद्दीन खिलजी
(c) अकबर
(d) फिरोज तुगलक
M.P.P.C.S. (Pre) 1991
उत्तर-(c)
अकबर ने 1575 ई. में फतेहपुर सीकरी में “इबादत खाना” (उपासना भवन) का निर्माण करवाया – यह धार्मिक संवाद और विचार-विमर्श का केंद्र था। प्रारंभ में केवल मुस्लिम विद्वान यहाँ आते थे, किंतु 1578 ई. में अकबर ने इसे हिंदू, जैन, पारसी और ईसाई सभी धर्मों के लिए खोल दिया। 1579 ई. में उसने “महजरनामा” जारी किया जिसने उसे धार्मिक मामलों में सर्वोच्च अधिकारी बना दिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इतिहासकार वी.ए. स्मिथ ने महजरनामा को “अचूक आज्ञा-पत्र” (Infallibility Decree) कहा। महजर पर पाँच प्रमुख उलेमाओं के हस्ताक्षर थे। इबादत खाने की धार्मिक चर्चाओं से ही प्रेरित होकर अकबर ने 1582 ई. में “दीन-ए-इलाही” की स्थापना की।
26. अकबर के शासनकाल में पुनर्गठित केंद्रीय प्रशासन तंत्र के अंतर्गत सैनिक विभाग का प्रमुख था-
(a) दीवान
(b) मीर बख्शी
(c) मीर समन
(d) बख्शी
I.A.S. (Pre) 1997
उत्तर-(b)
मुगल प्रशासन में “मीर बख्शी” सैनिक विभाग का प्रमुख होता था। वह सेनापति नहीं बल्कि सैन्य प्रशासक था – मनसबदारों की सूची रखना, सैनिकों का निरीक्षण, वेतन वितरण, सैन्य भर्ती और शस्त्र व्यवस्था उसके कार्यक्षेत्र में आते थे। वह सम्राट के समक्ष मनसबदारों को प्रस्तुत करता था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अकबर के केंद्रीय प्रशासन में पाँच प्रमुख विभाग थे – वकील (प्रधानमंत्री), दीवान (वित्त), मीर बख्शी (सेना), सद्र-उस-सुदूर (धर्म एवं दान) और मीर समन (शाही घराना)। इनमें से दीवान का पद कालांतर में सर्वाधिक शक्तिशाली हो गया।
27. अकबर कालीन सैन्य व्यवस्था आधारित थी-
(a) मनसबदारी
(b) जमींदारी
(c) सामंतवादी
(d) आइन-ए-दहशाला
U.P.P.C.S. (Pre) 1992
उत्तर-(a)
अकबर की सेना का ढाँचा मनसबदारी प्रणाली पर टिका था जिसे 1574–75 ई. में औपचारिक रूप दिया गया। “मनसब” का अर्थ है पद या श्रेणी। 1573 ई. में अकबर ने घोड़ों को दागने (हुलिया नोट करने) की प्रथा पुनः शुरू की ताकि सेनापति घोड़े न बदल सकें या एक घोड़े को दो बार न दिखा सकें। यह व्यवस्था दशमलव प्रणाली पर आधारित थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मनसबदारी प्रणाली में “दाग प्रथा” (घोड़ों पर राजकीय मुहर लगाना) और “चेहरा प्रथा” (सैनिकों का हुलिया दर्ज करना) दो महत्वपूर्ण नियंत्रण उपाय थे। शेरशाह सूरी ने भी इसी तरह की व्यवस्था अपनाई थी – अकबर ने उसे और अधिक परिष्कृत किया।
28. मध्यकालीन भारत में मनसबदारी व्यवस्था क्यों लागू की गई थी?
(a) राजस्व एकत्रित करने हेतु
(b) सैनिकों की सुगमता से भर्ती हेतु
(c) धार्मिक सद्भाव की स्थापना हेतु
(d) स्वच्छ प्रशासन सुनिश्चित करने के लिए
65th B.P.S.C. (Pre) 2019
उत्तर-(d)
मनसबदारी व्यवस्था का मूल उद्देश्य प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना था। इस व्यवस्था के अंतर्गत प्रत्येक अधिकारी को उसके पद के अनुसार निश्चित वेतन और सैनिक दायित्व दोनों मिलते थे – जिससे भ्रष्टाचार और अनियमितता पर अंकुश लगा। अधिकारियों को नकद वेतन या जागीर (जमीन का राजस्व) में से कोई एक विकल्प दिया जाता था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जब किसी मनसबदार को नकद वेतन की जगह जमीन दी जाती थी तो वह “जागीरदार” कहलाता था। औरंगजेब के काल में जागीरों की कमी और मनसबदारों की अधिकता के कारण यह व्यवस्था चरमराने लगी, जो मुगल पतन का एक प्रमुख कारण बनी।
29. जाब्ती प्रणाली किसकी उपज थी?
(a) गयासुद्दीन तुगलक
(b) सिकंदर लोदी
(c) शेरशाह
(d) अकबर
39th B.P.S.C. (Pre) 1994
उत्तर-(d)
जाब्ती प्रणाली अकबर के शासनकाल की भू-राजस्व प्रणाली थी जो भूमि के वास्तविक सर्वेक्षण और माप (गज-ए-इलाही से) पर आधारित थी। इसमें “दस्तूर-उल-अमल” (दर सूची) तैयार की जाती थी और “जाब्ती खसरा” में हर किसान की जमीन का ब्यौरा दर्ज होता था। यह व्यवस्था साम्राज्य के अधिकांश उपजाऊ भागों में लागू थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जाब्ती प्रणाली के अतिरिक्त अकबर के शासन में अन्य राजस्व प्रणालियाँ भी थीं – “नसक” (अनुमान आधारित), “गल्लाबख्शी या बटाई” (फसल बँटवारा) और “कनकूत” (अनुमानित उत्पादन)। जाब्ती और दहसाला को मिलाकर जो व्यवस्था बनी वही “टोडरमल बंदोबस्त” कहलाई।
30. मुगल सम्राट अकबर से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए तथा सही उत्तर चुनिए- कथन I : ‘तानसेन’ रामबली पाण्डेय को मुगल सम्राट अकबर द्वारा प्रदान की गई पदवी थी। कथन II : अकबर का विवाह राजा मान सिंह की बहन के साथ हुआ था। कथन III: अबुल फज़ल ‘आइन-ए-अकबरी’ के लेखक थे। कथन IV: राजा टोडरमल अकबर की सेना के प्रधान सेनापति थे।
(a) केवल कथन I एवं II सही हैं।
(b) केवल कथन III एवं IV सही हैं।
(c) केवल कथन III सही है।
(d) केवल कथन IV सही है।
P.C.S. (Pre) 2020
उत्तर-(c)
तानसेन का मूल नाम रामतनु पाण्डेय था और “तानसेन” उपाधि उन्हें ग्वालियर के राजा ने दी थी – अकबर ने उन्हें “मियां” की उपाधि दी। मानसिंह की बहन मान बाई का विवाह अकबर से नहीं बल्कि शहजादा सलीम (जहाँगीर) से हुआ था। आइन-ए-अकबरी के लेखक अबुल फजल थे – यह कथन सत्य है। टोडरमल सेनापति नहीं बल्कि दीवान (वित्त मंत्री) थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: तानसेन को संगीत सम्राट माना जाता है। उन्होंने “राग दरबारी” की रचना की जो आज भी भारतीय शास्त्रीय संगीत का एक प्रमुख राग है। उनकी मजार ग्वालियर में मोहम्मद गौस की दरगाह के पास स्थित है और वहाँ प्रतिवर्ष “तानसेन संगीत समारोह” आयोजित होता है।
31. इनमें से किस कर-व्यवस्था को बंदोबस्त व्यवस्था के नाम से भी जाना जाता है?
(a) जाब्ती
(b) दहसाला
(c) नसक
(d) कानकुट
Jharkhand P.C.S. (Pre) 2013
उत्तर-(b)
अकबर कालीन भू-राजस्व की “दहसाला” पद्धति को “टोडरमल बंदोबस्त” भी कहा जाता है। इस व्यवस्था में पिछले 10 वर्षों के उत्पादन और मूल्यों का औसत निकालकर उसका एक-तिहाई राजस्व निर्धारित किया जाता था। यह नकद आधारित प्रणाली थी जिसने राजस्व निर्धारण को व्यवस्थित और स्थिर बनाया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: दहसाला व्यवस्था 1580 ई. में लागू हुई और यह मुख्यतः उत्तर भारत के उपजाऊ मैदानी क्षेत्रों में प्रभावी रही। बंगाल, काबुल और कश्मीर जैसे प्रांतों में जहाँ नकदीकरण कम था, वहाँ “गल्लाबख्शी” (फसल बँटवारे) की पुरानी पद्धति चलती रही। ब्रिटिश काल में भी इस व्यवस्था के तत्वों को “स्थायी बंदोबस्त” और “रैयतवारी” प्रणालियों में समाहित किया गया।
32. भू-राजस्व प्रशासन के क्षेत्र में शेरशाह एवं अकबर के मध्य निम्नलिखित में से कौन नैरन्तर्य की कड़ी थी?
(a) बीरबल
(b) टोडरमल
(c) भगवानदास
(d) भारमल
U.P.P.C.S. (Mains) 2007
उत्तर-(b)
टोडरमल ने शेरशाह सूरी के शासनकाल में राजस्व अधिकारी के रूप में अपना प्रशिक्षण प्राप्त किया था और वहाँ की भूमि-माप और राजस्व-निर्धारण की तकनीकों को आत्मसात किया। बाद में अकबर के दरबार में आकर उन्होंने उसी ज्ञान को परिष्कृत करके “आइन-ए-दहसाला” की रचना की। इस प्रकार वे दोनों शासकों के बीच भू-राजस्व की निरंतरता की कड़ी बने।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: शेरशाह ने पट्टा (भूमि-अधिकार पत्र) और कबूलियत (किसान की स्वीकृति) की प्रणाली शुरू की थी। टोडरमल ने इसी आधार को और वैज्ञानिक बनाया। टोडरमल के बाद अकबर के दरबार में उनके पुत्र टोडरचंद ने भी राजस्व विभाग में सेवा की।
33. अकबर काल में भू-राजस्व व्यवस्था की एक प्रसिद्ध नीति “आइन-ए-दहसाला” पद्धति किसके द्वारा निर्मित की गई थी?
(a) शाह नवाज खां
(b) अब्दुल रहीम खानखाना
(c) टोडरमल
(d) मुल्ला दो प्याजा
R.A.S./R.T.S. (Pre) 2010
उत्तर-(c)
आइन-ए-दहसाला पद्धति के जनक राजा टोडरमल थे जो अकबर के वित्त मंत्री (दीवान) थे। यह व्यवस्था 1580 ई. में लागू हुई और इसमें दस वर्षों के औसत उत्पादन और मूल्यों के आधार पर राजस्व तय होता था। इसके सहायक ख्वाजा शाह मंसूर थे। इसी कारण इसे “टोडरमल बंदोबस्त” भी कहते हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: टोडरमल ने भूमि की नाप के लिए “गज-ए-इलाही” (एक मानक माप इकाई) का उपयोग किया जो 41 अंगुल के बराबर थी। उन्होंने नकद राजस्व की व्यवस्था पर जोर दिया जिससे मुद्रा-अर्थव्यवस्था को बल मिला। अकबर ने टोडरमल को “दीवान-ए-अशरफ” की उपाधि दी थी।
34. टोडरमल संबंधित थे-
(a) कानून
(b) मालगुजारी सुधारों से
(c) साहित्य से
(d) संगीत से
U.P.P.C.S. (Mains) 2012
उत्तर-(b)
राजा टोडरमल मुगल काल के सर्वश्रेष्ठ राजस्व विशेषज्ञ थे। अकबर ने 1570–71 ई. में उन्हें और मुजफ्फर खां तुरबती को भू-राजस्व पुनर्गठन का कार्य सौंपा। टोडरमल ने 1571 से 1580 ई. के बीच दस वर्षों के उत्पादन-आंकड़ों का अध्ययन करके “दहसाला बंदोबस्त” तैयार किया, जिसमें औसत का एक-तिहाई राजस्व निर्धारित किया जाता था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अकबर के नवरत्नों में टोडरमल ही एकमात्र हिंदू वित्तमंत्री थे। उन्होंने फारसी भाषा में राजस्व के सरकारी रिकॉर्ड तैयार करवाए जिससे साम्राज्य की राजस्व प्रणाली में पारदर्शिता आई। कहा जाता है कि टोडरमल मूलतः बनारस (वाराणसी) के खत्री परिवार से थे।
35. किस इतिहासकार ने ‘दीन-ए-इलाही’ को एक धर्म कहा?
(a) अबुल फजल
(b) अब्दुल कादिर बदायूंनी
(c) निजामुद्दीन
(d) इनमें से कोई नहीं
U.P.P.C.S. (Pre) 2000
उत्तर-(d)
जहाँगीर के समकालीन लेखक मोहसिन फानी ने अपनी रचना “दबिस्तान-ए-मजाहिब” में पहली बार “दीन-ए-इलाही” को एक स्वतंत्र धर्म के रूप में उल्लिखित किया। वास्तव में यह कोई धर्म नहीं था बल्कि एक सूफी विचार पद्धति थी जिसमें सभी धर्मों के श्रेष्ठ तत्वों का समन्वय था। इसका प्रधान पुरोहित अबुल फजल था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: दीन-ए-इलाही में सदस्यता स्वैच्छिक थी और इसे मानने वाले केवल 18 लोग थे, जिनमें एकमात्र हिंदू बीरबल थे। इतिहासकार वी.ए. स्मिथ ने इसे “अकबर की मूर्खता का स्मारक” कहा, जबकि अबुल फजल इसे सत्य की खोज की यात्रा मानते थे। राजा भगवानदास और मानसिंह ने इसे स्वीकार करने से मना कर दिया था।
36. अकबर ने ‘दीन-ए-इलाही’ किस वर्ष में प्रारंभ किया?
(a) 1570
(b) 1578
(c) 1581
(d) 1582
P.C.S. (Pre) 2011
उत्तर-(d)
अकबर ने 1582 ई. में “तौहीद-ए-इलाही” या “दीन-ए-इलाही” की स्थापना की। यह विचार-पद्धति सूफी सर्वेश्वरवाद पर आधारित थी और इसमें इस्लाम, हिंदू, जैन, पारसी और ईसाई धर्मों के सार-तत्वों को शामिल किया गया था। इसका उद्देश्य साम्राज्य में धार्मिक एकता और सर्वधर्म समभाव स्थापित करना था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: दीन-ए-इलाही की स्थापना के पूर्व अकबर ने 1575 में इबादत खाना, 1578 में उसे सभी धर्मों के लिए खोला और 1579 में महजरनामा जारी किया – इस क्रमिक विकास के बाद 1582 में दीन-ए-इलाही अस्तित्व में आया। अकबर की मृत्यु (1605) के बाद यह विचार-धारा भी समाप्त हो गई।
37. ‘दीन-ए-इलाही’ का प्रचार किस शासक ने किया था?
(a) बाबर
(b) अकबर
(c) औरंगजेब
(d) शाहजहां
M.P. P.C.S. (Pre) 1998
उत्तर-(b)
दीन-ए-इलाही का प्रवर्तन और प्रचार अकबर ने 1582 ई. में किया। इसके केंद्र में “सुलह-ए-कुल” (सबके साथ शांति) का सिद्धांत था। अकबर स्वयं इसका प्रमुख था और अबुल फजल इसके मुख्य प्रचारक और व्याख्याता थे। यह कोई संगठित धर्म नहीं था बल्कि एक नैतिक एवं आध्यात्मिक विचार-पद्धति थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: औरंगजेब ने अकबर की नीतियों के एकदम विपरीत मार्ग अपनाया – उसने 1679 में जजिया कर पुनः लागू किया, हिंदू मंदिर तुड़वाए और इस्लामी कट्टरता को बढ़ावा दिया। यही नीतिगत विरोधाभास मुगल साम्राज्य के पतन का एक प्रमुख कारण बना।
38. दीन-ए-इलाही किसके द्वारा प्रारंभ किया गया था?
(a) बाबर
(b) अकबर
(c) जहांगीर
(d) शाहजहां
66th B.P.S.C. (Re-Exam) 2020
उत्तर-(b)
दीन-ए-इलाही की स्थापना 1582 ई. में अकबर ने की। यह सभी प्रमुख धर्मों – इस्लाम, हिंदू धर्म, जैन धर्म, पारसी धर्म और ईसाई धर्म – के श्रेष्ठ तत्वों का संकलन था। इसे स्वीकार करने वाले व्यक्ति को अपना जन्मदिन सम्राट को अर्पित करना होता था और मांसाहार त्यागना होता था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: दीन-ए-इलाही में दीक्षा लेने की एक विशेष प्रक्रिया थी – शिष्य अपनी पगड़ी सम्राट के चरणों में रखता था और अकबर उसे उसके सिर पर वापस रखते थे। इस पंथ में किसी प्रकार का धर्मग्रंथ, पूजा-विधि या मंदिर नहीं था, जो इसे एक दार्शनिक विचारधारा के रूप में स्थापित करता है।
39. सुलह-ए-कुल का सिद्धांत किसके द्वारा प्रतिपादित किया गया था?
(a) निजामुद्दीन औलिया
(b) अकबर
(c) जैनुल आबेदीन
(d) शेख नासिरुद्दीन चिराग
Jharkhand P.C.S. (Pre) 2003
उत्तर-(b)
मुगल बादशाह अकबर ने अपनी शासन-व्यवस्था का आधार ‘सुलह-ए-कुल’ अर्थात सार्वभौमिक शांति एवं सहिष्णुता के सिद्धांत को बनाया, जिसके तहत धर्म, जाति या संप्रदाय के भेदभाव के बिना सभी प्रजाजनों के साथ समान न्यायपूर्ण व्यवहार किया जाना था। यह नीति अकबर के सूफी संतों, विशेषकर चिश्ती सिलसिले के विचारों से प्रभावित मानी जाती है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी नीति के अंतर्गत अकबर ने 1564 ई. में गैर-मुस्लिमों पर लगने वाला तीर्थयात्रा कर तथा 1564 ई. में ही जजिया कर को समाप्त कर दिया था, जो उसकी धार्मिक उदारता का ठोस प्रमाण है।
40. किस इतिहासकार ने ‘दीने-इलाही’ को एक धर्म कहा?
(a) अबुल फजल
(b) अब्दुल कादिर बदायूंनी
(c) निजामुद्दीन
(d) इनमें से कोई नहीं
U.P.P.C.S. (Pre) 2000
उत्तर-(d)
दीन-ए-इलाही, जिसे तौहीद-ए-इलाही भी कहा जाता है, वास्तव में कोई स्वतंत्र धर्म नहीं अपितु एक आचार-संहिता या सूफी मत था, जो विभिन्न धर्मों के श्रेष्ठ तत्वों के समन्वय पर आधारित था। जहांगीर के समकालीन विद्वान मोहसिन फानी ने अपनी कृति ‘दबिस्तान-ए-मजाहिब’ में सबसे पहले इसे एक पृथक धर्म के रूप में वर्णित किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस मत को अपनाने वाले अनुयायियों की संख्या अत्यंत सीमित थी, मुख्यतः अकबर के दरबारी वर्ग तक ही यह सीमित रहा, और बीरबल इसे अपनाने वाले एकमात्र हिंदू दरबारी थे।
41. किस मुगल बादशाह के विरुद्ध जौनपुर से ‘फतवा’ जारी हुआ था?
(a) हुमायूं
(b) अकबर
(c) शाहजहां
(d) औरंगजेब
U.P.P.C.S. (Mains) 2011
उत्तर-(b)
वर्ष 1580 ई. में जौनपुर के काजी मुल्ला मुहम्मद यजदी ने अकबर की धार्मिक नीतियों, विशेषकर महजरनामा और दीन-ए-इलाही, से असंतुष्ट होकर मुसलमानों को बादशाह के विरुद्ध विद्रोह हेतु उकसाते हुए फतवा जारी किया था। यह घटना बंगाल और बिहार में हुए विद्रोह से भी जुड़ी मानी जाती है, जिसका नेतृत्व मिर्जा हकीम (अकबर के सौतेले भाई) के समर्थकों ने किया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अकबर ने इस असंतोष का सामना अत्यंत दृढ़ता से करते हुए अपने धार्मिक अधिकारों को महजरनामा (1579 ई.) के माध्यम से पहले ही सुदृढ़ कर लिया था।
42. निम्नलिखित इमारतों में से कौन-सी इमारत ‘शाने फतेहपुर’ कही जाती है?
(a) बुलंद दरवाजा
(b) तुर्की सुल्ताना का महल
(c) जामा मस्जिद
(d) शहजादी अम्बर का महल
P.C.S. (Pre) 2016
उत्तर-(c)
फतेहपुर सीकरी की जामा मस्जिद को उसकी भव्यता एवं स्थापत्य सौंदर्य के कारण ‘शान-ए-फतेहपुर’ या ‘शान-ए-सीकरी’ कहा जाता है। यह मस्जिद 1571-72 ई. में बनकर तैयार हुई थी और इसी परिसर में प्रसिद्ध सूफी संत शेख सलीम चिश्ती की दरगाह भी स्थित है, जिसे संगमरमर से निर्मित किया गया है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: फतेहपुर सीकरी नगर को सन् 1986 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया, जो मुगल वास्तुकला के नियोजित नगर-निर्माण का उत्कृष्ट उदाहरण है।
43. निम्न में से किस मुगल सम्राट ने शिक्षा संबंधी सुधार किए थे?
(a) जहांगीर
(b) शाहजहां
(c) हुमायूं
(d) अकबर
M.P.P.C.S. (Pre) 2014
उत्तर-(d)
मुगल शासकों में अकबर ने ही शिक्षा-व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण सुधार किए, अजमेर, दिल्ली, आगरा, सियालकोट, मुल्तान जैसे केंद्रों में निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था करवाई तथा फारसी को दरबार व प्रशासन की भाषा बनाया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: स्वयं अकबर औपचारिक रूप से निरक्षर था, फिर भी उसने अपने दरबार में फैजी जैसे विद्वानों को संरक्षण देकर शिक्षा एवं साहित्य को प्रोत्साहित किया। इसके अतिरिक्त, अकबर के समय पाठ्यक्रम में गणित, कृषिशास्त्र, तर्कशास्त्र जैसे व्यावहारिक विषयों को भी सम्मिलित करने पर बल दिया गया।
44. इबादत खाने का निर्माण किसने करवाया?
(a) औरंगजेब
(b) अलाउद्दीन खिलजी
(c) अकबर
(d) फिरोज तुगलक
M.P.P.C.S. (Pre) 1991
उत्तर-(c)
अकबर ने धार्मिक विषयों पर विचार-विमर्श हेतु 1575 ई. में फतेहपुर सीकरी में इबादतखाने का निर्माण करवाया, जहां प्रारंभ में केवल मुस्लिम धर्मगुरु आपस में चर्चा करते थे, परंतु 1578 ई. से इसके द्वार सभी धर्मों के अनुयायियों के लिए खोल दिए गए।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:इसी क्रम में 1579 ई. में महजरनामा जारी कर अकबर ने स्वयं को धार्मिक विवादों में सर्वोच्च निर्णायक घोषित किया, जिसे इतिहासकार विंसेंट स्मिथ ने अचूक आज्ञा-पत्र की संज्ञा दी। महजर पर पांच प्रमुख उलेमाओं के हस्ताक्षर थे, और इसके पश्चात अकबर ने ‘सुल्तान-ए-आदिल’ की उपाधि धारण की।
45. दिल्ली में कौन-सा ऐतिहासिक स्मारक भारतीय तथा फारसी वास्तुकला शैली का उदाहरण है?
(a) कुतुबमीनार
(b) लोदी का मकबरा
(c) हुमायूं का मकबरा
(d) लाल किला
R.A.S. / R.T.S. (Pre) 2003
उत्तर-(c)
हुमायूं का मकबरा, जिसे उसकी पत्नी हाजी बेगम (बेगा बेगम) के संरक्षण में फारसी वास्तुकार मीरक मिर्जा गियास ने डिजाइन किया था, भारतीय और फारसी स्थापत्य शैलियों के मिश्रण का प्रारंभिक एवं उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। इसका निर्माण लगभग 1565-72 ई. के मध्य हुआ और यह चारबाग शैली में निर्मित भारत का पहला बड़ा मुगल मकबरा था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस मकबरे को 1993 ई. में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया तथा इसे आगे चलकर ताजमहल के स्थापत्य का अग्रदूत माना जाता है।
46. निम्न कथनों पर विचार कीजिए- कथन (A) : अकबर ने 1602 ई. में फतेहपुर सीकरी में ‘बुलंद दरवाजा’ बनवाया। कारण (R) : यह निर्माण अकबर ने अपने पुत्र जहांगीर के जन्म की खुशी में बनवाया। उपर्युक्त के संदर्भ में निम्न में से कौन-सा एक सही उत्तर है? कूट :
(a) दोनों (A) और (R) सही हैं और (R), (A) का सही स्पष्टीकरण है।
(b) दोनों (A) और (R) सही हैं, परंतु (R), (A) का स्पष्टीकरण नहीं है।
(c) (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
(d) (A) गलत है, परंतु (R) सही है।
U.P. Lower Sub. (Pre) 1998
उत्तर-(c)
सीकरी नगर का निर्माण अकबर ने 1568-69 ई. में आरंभ करवाया था और गुजरात विजय (1572-73 ई.) के उपलक्ष्य में इसका नाम बदलकर फतेहपुर सीकरी कर दिया गया। एक मत के अनुसार बुलंद दरवाजे का निर्माण भी इसी गुजरात विजय की स्मृति में करवाया गया, जबकि प्रसिद्ध कला इतिहासकार पर्सी ब्राउन का मानना है कि यह दरवाजा वस्तुतः 1601 ई. की दक्षिण भारत विजय (विशेषकर असीरगढ़ विजय) के उपलक्ष्य में बनवाया गया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बुलंद दरवाजा विश्व का सबसे ऊंचा प्रवेश द्वार माना जाता है, जिसकी ऊंचाई लगभग 54 मीटर है।
47. फतेहपुर सीकरी का इबादतखाना क्या था?
(a) राज परिवार के इस्तेमाल के लिए मस्जिद
(b) अकबर का निजी प्रार्थना कक्ष
(c) वह भवन जिसमें विभिन्न धर्मों के विद्वानों के साथ अकबर चर्चा करता था
(d) वह कमरा जिसमें विभिन्न धर्म वाले कुलीन-जन धार्मिक बातों के विचारार्थ जमा होते थे
I.A.S. (Pre) 2014
उत्तर-(c)
इबादतखाना मूलतः एक ऐसा भवन था जहां अकबर विभिन्न मजहबों के विद्वानों, जैसे उलेमा, सूफी संत, ब्राह्मण, जैन मुनि, पारसी पुरोहित और जेसुइट पादरियों, को आमंत्रित कर धार्मिक एवं दार्शनिक विषयों पर खुली चर्चा करवाता था। यह संस्था अकबर की धार्मिक जिज्ञासा और सर्वधर्म समभाव की नीति का प्रत्यक्ष प्रमाण मानी जाती है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: गोवा से आए पुर्तगाली जेसुइट पादरी, जैसे फादर रुडोल्फ एक्वाविवा, भी इन चर्चाओं में सम्मिलित होते थे, जिससे ईसाई धर्म पर भी यहां विमर्श हुआ करता था।
48. अकबर द्वारा अपनाई गई ‘सुलह-ए-कुल’ (सार्वभौम शांति तथा भाईचारा) की अवधारणा निम्नांकित में से किस पर आधारित थी?
(a) राजनीतिक उदारता
(b) धार्मिक सहनशीलता
(c) उदारवादी सांस्कृतिक दृष्टिकोण
(d) उपर्युक्त सभी
U.P. P.C.S. (Pre) 1998
उत्तर-(d)
सुलह-ए-कुल की अवधारणा मूलतः धार्मिक सहनशीलता पर केंद्रित थी, जिसके अंतर्गत अकबर ने राज्य के सभी धर्मावलंबियों को समान दृष्टि से देखने का प्रयास किया और प्रशासनिक नीतियों में किसी विशेष मजहब को वरीयता नहीं दी। यह नीति आगे चलकर 1582 ई. में स्थापित ‘दीन-ए-इलाही’ पंथ के माध्यम से संस्थागत रूप में सामने आई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इतिहासकार अबुल फजल ने अपनी कृति ‘आइन-ए-अकबरी’ में इस नीति को अकबर के शासन की आधारशिला के रूप में वर्णित किया है।
49. कौन-सा स्मारक फतेहपुर सीकरी में नहीं है?
(a) स्वर्ण महल
(b) पंच महल
(c) जोधाबाई का महल
(d) अकबरी महल
P.C.S. (Pre) 2012
उत्तर-(d)
आगरा से लगभग 36 किमी. दूर अकबर ने 1568-69 ई. में फतेहपुर सीकरी में एक विशाल राजमहल-सह-दुर्ग का निर्माण आरंभ करवाया था, जिसमें जोधाबाई महल, पंच महल, मरियम महल (स्वर्ण महल), दीवाने आम, दीवाने खास और बीरबल की कोठी जैसी इमारतें सम्मिलित हैं। ‘अकबरी महल’ नामक संरचना फतेहपुर सीकरी में नहीं अपितु आगरा के किले में स्थित है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: पंच महल पांच मंजिला एक स्तंभयुक्त भवन है, जिसका प्रत्येक तल नीचे वाले तल से छोटा है, और इसका निर्माण बौद्ध विहार शैली से प्रेरित माना जाता है।
50. निम्न में से किसका निर्माण अकबर ने करवाया था?
(a) बुलंद दरवाजा
(b) जामा मस्जिद
(d) ताजमहल
(c) कुतुबमीनार
U.P. P.C.S. (Pre) 1993
उत्तर-(a)
बुलंद दरवाजा अकबर द्वारा निर्मित करवाया गया एक भव्य प्रवेश द्वार है, जो फतेहपुर सीकरी की जामा मस्जिद के दक्षिणी प्रवेश पर स्थित है, जबकि ताजमहल का निर्माण बाद में शाहजहां द्वारा अपनी पत्नी मुमताज महल की स्मृति में करवाया गया था, अतः इसका अकबर से कोई संबंध नहीं है। बुलंद दरवाजे पर अरबी और फारसी भाषा में कुरान की आयतें तथा सूफी संत शेख सलीम चिश्ती से संबंधित एक प्रसिद्ध शिलालेख भी अंकित है, जिसमें संसार की नश्वरता का संदेश दिया गया है। यह द्वार लाल बलुआ पत्थर तथा संगमरमर से निर्मित है।
51. अकबर के काल में महाभारत का फारसी अनुवाद जिसके निर्देशन में हुआ, वह है-
(a) उत्बी
(b) नाजिरी
(c) अबुल फजल
(d) फैजी
R.A.S./R.T.S. (Pre) 1999
उत्तर-(d)
महाभारत के फारसी अनुवाद की पूरी परियोजना अकबर के दरबारी कवि फैजी की देखरेख में संपन्न हुई थी, जिसमें नकीब खां और बदायूंनी जैसे विद्वानों ने भी सहयोग दिया। यह अनुवाद कार्य अकबर के मकतबखाना (अनुवाद विभाग) के अंतर्गत हुआ, जिसकी स्थापना उसने हिंदू-मुस्लिम सांस्कृतिक समन्वय की नीति के तहत की थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: फैजी, अबुल फजल का बड़ा भाई था और दोनों भाई अकबर के नवरत्नों में शामिल थे। इसके अलावा, अकबर ने पंचतंत्र का फारसी अनुवाद ‘अनवार-ए-सुहेली’ तथा ‘इयार-ए-दानिश’ नाम से भी करवाया था।
52. “रज्मनामा” किस हिंदू ग्रंथ का फारसी अनुवाद है?
(a) रामायण
(b) महाभाष्य
(c) महाभारत
(d) अष्टाध्यायी
U.P.R.O./A.R.O. (Re. Exam) (Pre) 2016
उत्तर-(c)
‘रज्मनामा’ महाभारत का फारसी रूपांतरण है, जिसका शाब्दिक अर्थ है ‘युद्ध की गाथा’। इसे अकबर के आदेश पर 1582 ई. के आसपास तैयार करवाया गया था और इसमें सुंदर लघुचित्र (मिनिएचर पेंटिंग्स) भी सम्मिलित किए गए थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: रज्मनामा की मूल हस्तलिखित प्रति वर्तमान में जयपुर के सिटी पैलेस संग्रहालय में सुरक्षित है। साथ ही, इस अनुवाद कार्य में संस्कृत पंडितों की सहायता से मूल कथा को फारसी भाषा के अनुकूल बनाया गया था।
53. अकबर द्वारा बनवाई गई श्रेष्ठतम इमारते पाई जाती हैं-
(a) आगरा के किले में
(b) लाहौर के किले में
(c) इलाहाबाद के किले में
(d) फतेहपुर सीकरी में
R.A.S./R.T.S. (Pre) 1994
उत्तर-(d)
अकबर की स्थापत्य कला का सर्वश्रेष्ठ नमूना उसकी नवनिर्मित राजधानी फतेहपुर सीकरी में देखने को मिलता है, जहां दीवाने-आम, दीवाने-खास, पंच महल, जोधाबाई महल और बुलंद दरवाजा जैसी इमारतें स्थित हैं। तुर्की सुल्ताना की कोठी की नक्काशी इतनी उत्कृष्ट थी कि इतिहासकार पर्सी ब्राउन ने इसे ‘स्थापत्य कला का मोती’ कहा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बुलंद दरवाजा अकबर ने गुजरात विजय (1573 ई.) की स्मृति में बनवाया था, जो विश्व के सबसे ऊंचे प्रवेश द्वारों में गिना जाता है। फतेहपुर सीकरी को जल संकट के कारण अकबर ने बाद में त्याग दिया था।
54. सम्राट अकबर द्वारा निम्न में से किसको ‘जरी कलम’ की उपाधि प्रदान की गई थी?
(a) मुहम्मद हुसैन
(b) मुकम्मल खां
(c) अब्दुस्समद
(d) मीर सैयद अली
U.P.P.C.S. (Pre) 1995
उत्तर-(a)
कश्मीर के सुलेखक मुहम्मद हुसैन को उसकी उत्कृष्ट खुशनवीसी (सुलेख कला) के लिए अकबर ने ‘जरी कलम’ अर्थात ‘सोने की कलम’ की उपाधि प्रदान की थी। आइने-अकबरी में अकबर के दरबार के प्रमुख सुलेखकों की सूची दी गई है, जिसमें मुहम्मद हुसैन सर्वोपरि माने जाते थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मुगल चित्रकला विद्यालय की स्थापना भी अकबर के समय में हुई थी, जिसमें अब्दुस्समद और मीर सैयद अली जैसे ईरानी कलाकारों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया था। आइने-अकबरी की रचना स्वयं अबुल फजल ने की थी।
55. जहांगीर महल स्थित है-
(a) दिल्ली
(b) औरंगाबाद
(c) आगरा
(d) लाहौर
M.P.P.C.S. (Pre) 1990
उत्तर-(c)
जहांगीर महल आगरा के किले के भीतर स्थित है, जिसे अकबर ने अपने पुत्र सलीम (बाद में जहांगीर) के निवास हेतु बनवाया था। इस महल की स्थापत्य शैली मुख्यतः हिंदू वास्तुकला से प्रभावित है और इसकी प्रेरणा ग्वालियर के मानसिंह महल से ली गई मानी जाती है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: आगरा किले का निर्माण कार्य अकबर के प्रधान वास्तुकार कासिम खां की देखरेख में हुआ था, और इसके भीतर मूलतः पांच सौ से अधिक लाल बलुआ पत्थर के भवन बनाए गए थे, जिनमें से अधिकांश को बाद में शाहजहां ने सफेद संगमरमर के भवनों में परिवर्तित करवा दिया।
56. निम्नलिखित में से किसने महाभारत का फारसी में अनुवाद किया था ?
(a) अब्दुल कादिर बदायूंनी
(b) अबुल फजल
(c) निजामुद्दीन अहमद
(d) शेख मुबारक
U.P.R.O./A.R.O. (Pre) 2016
उत्तर-(a)
अब्दुल कादिर बदायूंनी ने अकबर के निर्देश पर महाभारत के फारसी अनुवाद ‘रज्मनामा’ की परियोजना में अन्य विद्वानों के साथ सहयोग दिया था, हालांकि इसकी मुख्य देखरेख फैजी के अधीन हुई। बदायूंनी एक रूढ़िवादी इतिहासकार था जिसने अकबर की धार्मिक नीतियों की गुप्त रूप से अपनी पुस्तक ‘मुंतखब-उत-तवारीख’ में आलोचना भी की थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बदायूंनी ने ही रामायण का फारसी अनुवाद भी किया था, और उसकी पुस्तक अकबर के निधन के पश्चात ही सार्वजनिक रूप से प्रकाश में आई, क्योंकि उसमें अकबर की दीन-ए-इलाही नीति की कटु आलोचना थी।
57. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए- सूची-I (सम्राट) सूची-II(मकबरा ) A. बाबर 1. लाहौर B. अकबर 2. आगरा C. जहांगीर 3. काबुल D. शाहजहां 4. सिकंदरा कूट : A B C D
(a) 1 2 3 4
(b) 4 3 2 1
(c) 3 4 1 2
(d) 2 1 3 4
U.P.P.C.S. (Mains) 2005
उत्तर-(c)
सही सुमेल इस प्रकार है- बाबर का मकबरा काबुल में, अकबर का सिकंदरा में, जहांगीर का लाहौर में तथा शाहजहां का आगरा (ताजमहल) में स्थित है। प्रत्येक मुगल बादशाह का मकबरा उसके शासनकाल की राजनीतिक व सांस्कृतिक प्राथमिकताओं को दर्शाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बाबर ने स्वयं काबुल के बाग-ए-बाबर में दफन होने की इच्छा व्यक्त की थी, जबकि जहांगीर का मकबरा लाहौर के शाहदरा बाग में उसकी पत्नी नूरजहां की देखरेख में बनवाया गया था। ताजमहल को 1983 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया।
58. अकबर द्वारा बनाई गई कौन-सी इमारत का नक्शा बौद्ध विहार की तरह है?
(a) पंच महल
(b) दीवान-ए-खास
(c) जोधाबाई का महल
(d) बुलंद दरवाजा
Jharkhand P.C.S. (Pre) 2003
उत्तर-(a)
फतेहपुर सीकरी में स्थित पंच महल का पिरामिडाकार पांच मंजिला ढांचा प्राचीन भारतीय बौद्ध विहारों, विशेषकर नालंदा के बहुमंजिला विहारों, से प्रेरित माना जाता है। इसकी प्रत्येक ऊपरी मंजिल नीचे की मंजिल से छोटी होती गई है, जो इसे एक विशिष्ट सीढ़ीनुमा रूप प्रदान करती है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: पंच महल मूलतः शाही जनानखाने की महिलाओं के मनोरंजन और हवा खाने के लिए बनवाया गया था, तथा इसके खंभों की बनावट हिंदू, जैन व इस्लामी स्थापत्य शैलियों के मिश्रण को दर्शाती है, जो अकबर की समन्वयवादी सोच का प्रतीक है।
59. अकबर की इच्छानुसार किसने रामायण का फारसी में अनुवाद किया था?
(a) अबुल फजल
(b) अब्दुल कादिर बदायूंनी
(c) फैजी
(d) अब्दुर रहीम खां-इ-खाना
U.P. P.C.S. (Pre) 2013
उत्तर-(b)
अकबर के आदेश पर अब्दुल कादिर बदायूंनी ने रामायण का फारसी भाषा में अनुवाद किया, जो अकबर की धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक समन्वय की नीति का परिचायक है। बदायूंनी एक कट्टर सुन्नी मुसलमान होते हुए भी अकबर के आदेश से इस कार्य को करने के लिए बाध्य था, जिसके प्रति वह आंतरिक रूप से असंतुष्ट था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अकबर ने अनुवाद कार्यों के लिए ‘मकतबखाना’ नामक एक विशेष विभाग स्थापित किया था, जिसमें फैजी, बदायूंनी और अबुल फजल सहित अनेक विद्वान कार्यरत थे, और इसी विभाग के अंतर्गत महाभारत व पंचतंत्र के अनुवाद भी संपन्न हुए।
60. सूची-I (मुगल शासक) को सूची-II (मकबरे का स्थान) से कूट के आधार पर मिलाइए- सूची-I सूची-II 1. बाबर अ. दिल्ली 2. हुमायूं ब. काबुल 3. अकबर स. लाहौर 4. जहांगीर द. सिंकदरा कूट :
(a) 1-अ, 2-ब, 3-स, 4-द
(b) 1-ब, 2-अ, 3-द, 4-स
(c) 1-स, 2-द, 3-अ, 4-ब
(d) 1-द, 2-स, 3-ब, 4-अ
P.C.S. (Pre) 2008
उत्तर-(b)
सही सुमेल है- बाबर का मकबरा काबुल में, हुमायूं का मकबरा दिल्ली में, अकबर का मकबरा सिकंदरा में और जहांगीर का मकबरा लाहौर में स्थित है। हुमायूं का मकबरा भारत में चारबाग शैली की पहली बड़ी इमारत मानी जाती है, जिसे उसकी पत्नी हाजी बेगम ने बनवाया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हुमायूं के मकबरे का वास्तुकार मिराक मिर्जा गियास था, और इसी मकबरे की स्थापत्य शैली ने आगे चलकर ताजमहल के निर्माण को प्रेरित किया। यह मकबरा भी यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल है।
61. फतेहपुर सीकरी में बादशाह अकबर ने निर्मित कराया था-
(a) मोती महल
(b) पंच महल
(c) रंग महल
(d) हीरा महल
U.P.P.C.S. (Spl.) (Pre) 2004
उत्तर-(b)
अकबर ने अपनी नवीन राजधानी फतेहपुर सीकरी में पंच महल का निर्माण करवाया था, जो पिरामिड आकार की पांच मंजिला इमारत है और भारतीय बौद्ध विहारों की वास्तुकला से प्रेरित मानी जाती है। यह महल मूलतः खुले स्तंभों पर आधारित है, जिसमें कोई दीवारें नहीं हैं, जिससे यह हवादार बना रहता था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: फतेहपुर सीकरी का निर्माण अकबर ने सूफी संत शेख सलीम चिश्ती के सम्मान में करवाया था, जिनके आशीर्वाद से उसे पुत्र सलीम (जहांगीर) की प्राप्ति हुई थी, और यही कारण है कि इस नगर का नाम ‘फतेहपुर’ (विजय का नगर) रखा गया।
62. महाभारत के फारसी अनुवाद का शीर्षक है-
(a) अनवार-ए-सुहेली
(b) रज्मनामा
(c) हश्त बहिश्त
(d) अयार दानिश
U.P.P.C.S. (Pre) 2001
उत्तर-(b)
महाभारत के फारसी अनुवाद को ‘रज्मनामा’ कहा जाता है, जिसका अर्थ है ‘युद्धों की पुस्तक’, और इसे अकबर के मकतबखाना विभाग में फैजी की देखरेख में तैयार किया गया था। इसके विपरीत ‘अनवार-ए-सुहेली’ पंचतंत्र की कथाओं का फारसी रूपांतरण है, जिसे हुसैन वाएज़ काशिफी ने मूलतः लिखा था और बाद में अकबर के दरबार में भी इसका प्रचलन रहा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: रज्मनामा की रचना में लगभग चार वर्ष का समय लगा था, और इसकी पांडुलिपि में लगभग 176 चित्रित पृष्ठ शामिल थे, जो मुगल लघुचित्र शैली के प्रारंभिक उत्कृष्ट उदाहरण माने जाते हैं।
63. निम्न में से किस किले का निर्माण अकबर के राज्य काल में नहीं कराया गया था ?
(a) दिल्ली का लाल किला
(b) आगरा का किला
(c) इलाहाबाद का किला
(d) लाहौर का किला
U.P.P.C.S. (Pre) (Re-Exam) 2015
उत्तर-(a)
दिल्ली का लाल किला अकबर के काल में नहीं, बल्कि उसके पौत्र शाहजहां के शासनकाल में बनवाया गया था, जबकि आगरा, इलाहाबाद और लाहौर के किलों का निर्माण अकबर के समय में हुआ। लाल बलुआ पत्थर से निर्मित होने के कारण इसे ‘लाल किला’ कहा जाता है, और यह मुगल स्थापत्य कला के चरम विकास का प्रतीक है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: लाल किले का निर्माण 1638 ई. में शुरू होकर 1648 ई. में पूर्ण हुआ था, जब शाहजहां ने अपनी राजधानी आगरा से दिल्ली (शाहजहानाबाद) स्थानांतरित की थी, और इसी किले में स्थित दीवाने-खास में प्रसिद्ध मयूर सिंहासन रखा गया था।
64. निम्नलिखित में से किसने रामायण का फारसी भाषा में अनुवाद किया था ?
(a) मुल्ला शेरी
(b) अबुल फजल
(c) फैजी
(d) अब्दुल कादिर बदायूंनी
U.P.P.C.S. (Mains) 2015
उत्तर-(d)
रामायण का फारसी अनुवाद अब्दुल कादिर बदायूंनी ने अकबर के आदेश पर किया था, जबकि फैजी और अबुल फजल जैसे विद्वान अनुवाद विभाग के अन्य कार्यों में संलग्न थे। यह अनुवाद कार्य अकबर की उस व्यापक सांस्कृतिक नीति का हिस्सा था, जिसके तहत हिंदू और मुस्लिम परंपराओं के बीच समझ को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बदायूंनी ने अपनी आत्मकथात्मक रचना ‘मुंतखब-उत-तवारीख’ में स्वीकार किया था कि उसने यह अनुवाद कार्य अनिच्छा से, केवल बादशाह की आज्ञा के कारण किया था, क्योंकि वह धार्मिक रूप से रूढ़िवादी विचारों का व्यक्ति था।
65. अकबर का मकबरा कहां पर स्थित है?
(a) सिकंदरा
(b) आगरा
(c) औरंगाबाद
(d) फतेहपुर सीकरी
U.P.P.C.S. (Pre) 1992
उत्तर-(a)
अकबर का मकबरा आगरा के निकट सिकंदरा गांव में स्थित है, जिसकी निर्माण योजना स्वयं अकबर ने बनाई थी, परंतु इसका वास्तविक निर्माण उसके पुत्र जहांगीर ने 1613 ई. में पूरा करवाया। यह पांच मंजिला मकबरा गुंबद-विहीन होने के लिए विशेष रूप से जाना जाता है, जो अन्य मुगल मकबरों से इसे अलग बनाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सिकंदरा गांव का नामकरण सुल्तान सिकंदर लोदी के नाम पर हुआ था, और अकबर ने इस स्थान को ‘बहिश्ताबाद’ (स्वर्ग का निवास) नाम दिया था, जो उसकी मृत्यु के पश्चात उसके मकबरे की भव्यता को दर्शाने हेतु उपयुक्त माना गया।
66. 16वीं शताब्दी में संपन्न महाभारत का फारसी अनुवाद कहलाता है –
(a) आलमगीरनामा
(b) रज्मनामा
(c) हमजानामा
(d) बादशाहनामा
R.A.S./R.T.S. (Pre) 2016
उत्तर-(b)
16वीं शताब्दी में अकबर के आदेश पर तैयार महाभारत का फारसी अनुवाद ‘रज्मनामा’ कहलाता है, जबकि ‘हमजानामा’ अमीर हमजा की वीरगाथाओं पर आधारित एक अलग सचित्र ग्रंथ है, जिस पर भी अकबर के समय कार्य हुआ था। ‘आलमगीरनामा’ औरंगजेब (आलमगीर) के शासनकाल का आधिकारिक इतिहास है, जिसकी रचना मिर्जा मुहम्मद काजिम ने की थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हमजानामा परियोजना पर लगभग 1400 बड़े आकार के चित्र बनाए गए थे और इसे पूर्ण होने में लगभग 15 वर्ष लगे थे, जो इसे मुगल कालीन सबसे विशाल सचित्र पांडुलिपि परियोजनाओं में से एक बनाता है।
67. अकबर के शासनकाल की निम्नलिखित घटनाओं को कालक्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए- 1. जजिया की समाप्ति 2. इबादतखाना का निर्माण 3. महजर पर हस्ताक्षर 4. दीने इलाही की स्थापना नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए-
(a) 1, 2, 3, 4
(b) 2, 3, 4, 1
(c) 1, 3, 2, 4
(d) 3, 4, 1, 2
U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2006
उत्तर-(a)
अकबर ने सर्वप्रथम 1564 ई. में जजिया कर को समाप्त किया, इसके पश्चात 1575 ई. में फतेहपुर सीकरी में इबादतखाने का निर्माण कराया, जहां विभिन्न धर्मों के विद्वान धार्मिक विषयों पर वाद-विवाद करते थे। इसके बाद 1579 ई. में शेख मुबारक द्वारा तैयार ‘महजरनामा’ पर हस्ताक्षर हुए, जिससे अकबर को धार्मिक मामलों में सर्वोच्च निर्णायक की शक्ति प्राप्त हुई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इबादतखाने में प्रारंभ में केवल मुस्लिम विद्वानों को प्रवेश था, परंतु बाद में हिंदू, जैन, पारसी और ईसाई धर्मगुरुओं को भी आमंत्रित किया जाने लगा। 1582 ई. में अकबर ने ‘दीन-ए-इलाही’ (तौहीद-ए-इलाही) की स्थापना की, जो धार्मिक सिद्धांतों का सम्मिश्रण मात्र था, न कि कोई नया संगठित धर्म।
68. अकबर ने बंगाल तथा बिहार को मुगल साम्राज्य में मिलाया-
(a) 1590 ई.
(b) 1575 ई.
(c) 1576 ई.
(d) 1572 ई.
48th to 52nd B.P.S.C. (Pre) 2008
उत्तर-(c)
सुलेमान करारानी की मृत्यु के बाद उसके पुत्र दाऊद खां ने स्वतंत्रता की घोषणा करते हुए पटना के मुगल किले पर आक्रमण किया, जिसके उत्तर में अकबर ने मुनीम खां को बिहार विजय हेतु भेजा। अंततः 1576 ई. में टोडरमल, मुजफ्फर खां और हुसैन कुली खां की संयुक्त सेना ने दाऊद खां को निर्णायक रूप से पराजित कर बंगाल तथा बिहार को मुगल साम्राज्य में सम्मिलित कर लिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: राजा टोडरमल, जो बाद में अकबर के राजस्व प्रशासन का प्रमुख स्तंभ बना, इसी बंगाल अभियान के दौरान अपनी सैन्य और प्रशासनिक क्षमता के लिए विशेष रूप से चर्चित हुआ। दाऊद खां को बाद में पकड़कर मार दिया गया, जिससे बंगाल में करारानी वंश का अंत हो गया।
69. इंग्लैंड की रानी एलिजाबेथ प्रथम का समकालीन भारतीय राजा था-
(a) अकबर
(b) शाहजहां
(c) औरंगजेब
(d) बहादुरशाह
U.P.P.C.S. (Mains) 2002
उत्तर-(a)
इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ प्रथम (शासनकाल 1558-1603 ई.) की समकालीन भारतीय शासक अकबर (1556-1605 ई.) था, और दोनों के शासनकाल में पर्याप्त समानांतरता रही। इसी कालखंड में, दिसंबर 1600 ई. में एलिजाबेथ प्रथम के शाही अधिपत्र (चार्टर) से इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना हुई थी, जो आगे चलकर भारत में ब्रिटिश शासन की नींव बनी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: एलिजाबेथ प्रथम ने अकबर के दरबार में व्यापारिक संबंध स्थापित करने हेतु एक पत्र भी भिजवाया था, यद्यपि उस समय कंपनी का प्रत्यक्ष व्यापार भारत में प्रारंभ नहीं हो सका था। कंपनी का वास्तविक व्यापारिक आगमन भारत में जहांगीर के शासनकाल में हुआ।
70. भारत में किसके शासनकाल में इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी का गठन हुआ ?
(a) औरंगजेब
(b) अकबर
(c) जहांगीर
(d) हुमायूं
63rd B.P.S.C. (Pre) 2017
उत्तर-(b)
इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी का गठन 31 दिसंबर 1600 ई. को रानी एलिजाबेथ प्रथम के शाही अधिपत्र (चार्टर) से हुआ था, और उस समय भारत में अकबर का शासन चल रहा था। प्रारंभ में इस कंपनी को ‘गवर्नर एंड कंपनी ऑफ मर्चेंट्स ऑफ लंदन ट्रेडिंग इनटू द ईस्ट इंडीज’ के नाम से जाना जाता था और इसे पूर्व के साथ व्यापार का 15 वर्षों का एकाधिकार प्राप्त हुआ था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कंपनी ने भारत में अपनी प्रथम व्यापारिक कोठी 1613 ई. में सूरत में स्थापित की, जो जहांगीर के शासनकाल में संभव हो सकी, जब सर थॉमस रो ने मुगल दरबार से व्यापारिक अनुमति प्राप्त की थी।
71. अकबर के दरबार में आने वाला पहला अंग्रेज व्यक्ति था-
(a) रॉल्फ फिंच
(b) सर थॉमस रो
(c) जॉन हॉकिंस
(d) पीटर मुंडी
Jharkhand P.C.S. (Pre) 2003
उत्तर-(a)
रॉल्फ फिंच नामक अंग्रेज व्यापारी अकबर के शासनकाल में फतेहपुर सीकरी और आगरा पहुंचने वाला पहला अंग्रेज व्यक्ति था, जिसने भारत के विभिन्न नगरों की यात्रा कर तत्कालीन व्यापारिक केंद्रों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उसका यह विवरण 16वीं सदी के भारतीय आर्थिक जीवन को समझने का एक महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसके विपरीत सर थॉमस रो जहांगीर के दरबार में इंग्लैंड के राजा जेम्स प्रथम के राजदूत के रूप में 1615 ई. में आया था, जिसने मुगल दरबार से व्यापारिक रियायतें प्राप्त करने में सफलता पाई और अंग्रेजों के भारतीय व्यापार के विस्तार की औपचारिक नींव रखी।
72. जैन साधु, जो अकबर के दरबार में कुछ वर्ष रहा और जिसे जगद्गुरु की उपाधि से सम्मानित किया गया, वह था-
(a) हेमचंद्र
(b) हरिविजय सूर
(c) जिनसेन
(d) उमास्वाति
U.P.P.C.S. (Mains) 2002
उत्तर-(b)
जैन आचार्य हरिविजय सूरि को 1582 ई. में अकबर ने जैन सिद्धांतों को समझने की उत्सुकता से अपने दरबार में आमंत्रित किया था, और उनकी विद्वता तथा सादगी से प्रभावित होकर ही उन्हें ‘जगद्गुरु’ की उपाधि प्रदान की गई। इस संत के प्रभाव से अकबर ने कुछ समय के लिए मांस-भक्षण त्याग दिया तथा पशु-पक्षियों के वध पर भी प्रतिबंध लगा दिया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हरिविजय सूरि के पश्चात उनके शिष्य जिनचंद्र सूरि को भी मुगल दरबार में ‘युगप्रधान’ की उपाधि से सम्मानित किया गया, जो अकबर की व्यापक धार्मिक सहिष्णुता तथा विभिन्न संप्रदायों के प्रति आदर भाव को दर्शाता है।
73. वह प्रसिद्ध जैन आचार्य कौन थे, जिनको अकबर ने बहुत सम्मानित किया था ?
(a) चंद्रप्रभ सूरि
(b) हरिविजय सू
(c) पुष्पदंत
(d) यशोभद्र
U.P.P.C.S. (Pre) 2012
उत्तर-(b)
हरिविजय सूरि वह प्रसिद्ध जैन आचार्य थे, जिन्हें अकबर ने अत्यधिक सम्मान दिया और अपने दरबार में आमंत्रित कर उनसे जैन धर्म के सिद्धांतों पर चर्चा की। इनके सान्निध्य के प्रभावस्वरूप अकबर ने कुछ निश्चित दिनों में जीव-हत्या निषेध की घोषणा भी की थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अकबर की धार्मिक नीति में जैन धर्म का प्रभाव इतना गहरा था कि उसने गुजरात क्षेत्र में जैन तीर्थस्थलों पर लगने वाले कुछ करों को भी समाप्त कर दिया था, जो उसकी सर्वधर्म समभाव की नीति का प्रत्यक्ष उदाहरण है।
74. मुगल सम्राट अकबर के समय का प्रसिद्ध चित्रकार था-
(a) अबुल हसन
(b) दसवंत
(c) किशन दास
(d) उस्ताद मंसूर
R.A.S./R.T.S. (Pre) 1992
उत्तर-(b)
अबुल फजल द्वारा ‘आइने-अकबरी’ में उल्लिखित अकबर कालीन प्रमुख चित्रकारों में दसवंत का नाम सर्वोपरि है, जो मूलतः एक कहार का पुत्र था परंतु अपनी असाधारण प्रतिभा के बल पर अकबर का प्रिय चित्रकार बन गया। अकबर ने स्वयं उसे अपने समय का अग्रणी कलाकार बनने में सहयोग दिया, किंतु दुर्भाग्यवश दसवंत मानसिक रूप से अस्वस्थ हो गया और 1584 ई. में आत्महत्या कर ली।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: दसवंत के साथ बसावन भी उस युग का अत्यंत प्रतिभाशाली चित्रकार माना जाता था, जो विशेष रूप से व्यक्ति-चित्रण और प्राकृतिक दृश्यों के अंकन में निपुण था, जबकि अबुल हसन और किशनदास बाद में जहांगीर के शासनकाल में अधिक प्रसिद्ध हुए।
75. जिस मध्यकालीन भारतीय लेखक ने अमेरिका की खोज का उल्लेख किया है, वह है-
(a) मलिक मोहम्मद जायसी
(b) अमीर खुसरो
(c) रसखान
(d) अबुल फजल
I.A.S. (Pre) 1997
उत्तर-(d)
अकबर के दरबारी विद्वान अबुल फजल ने अपनी रचनाओं में अमेरिका महाद्वीप की खोज का उल्लेख किया है, जो यह दर्शाता है कि मुगल दरबार के विद्वान वर्ग को यूरोपीय भौगोलिक खोजों की जानकारी प्राप्त थी। यह तथ्य अकबरकालीन बौद्धिक वातावरण की व्यापकता और विश्व ज्ञान के प्रति खुलेपन को प्रदर्शित करता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अबुल फजल ने ‘आइने-अकबरी’ में न केवल भारत के भूगोल, प्रशासन और संस्कृति का विस्तृत वर्णन किया, बल्कि विश्व के विभिन्न भागों की भौगोलिक स्थिति का भी उल्लेख किया, जो उस समय के सीमित संचार साधनों को देखते हुए एक उल्लेखनीय बौद्धिक उपलब्धि मानी जाती है।

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