विजयनगर साम्राज्य MCQ प्रश्न | UPSC

भारतीय इतिहास मध्यकालीन भारत विजयनगर साम्राज्य MCQ प्रश्न
1. विजयनगर राज्य की स्थापना की थी-
(a) विजय राय ने
(b) हरिहर II ने
(c) हरिहर और बुक्का ने
(d) बुक्का II ने
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2004
उत्तर-(c)
विजयनगर साम्राज्य की नींव 1336 ई. में दो सहोदर भाइयों – हरिहर और बुक्का – ने रखी। इनके पिता का नाम संगम था, इसी कारण इनका राजवंश ‘संगम वंश’ के नाम से विख्यात हुआ। ये दोनों भाई पहले काम्पिली राज्य की सेवा में उच्च पदों पर थे और बाद में दिल्ली सल्तनत के अधीन आ गए। संत विद्यारण्य (माधवाचार्य) की प्रेरणा और आशीर्वाद से इन्होंने तुंगभद्रा नदी के दक्षिणी तट पर एक स्वतंत्र हिंदू राज्य की स्थापना की।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: विजयनगर साम्राज्य की राजधानी ‘हम्पी’ (Hampi) वर्तमान कर्नाटक में स्थित है और इसे यूनेस्को ने 1986 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया। यह साम्राज्य 1336 से 1646 ई. तक लगभग 310 वर्षों तक किसी न किसी रूप में अस्तित्व में रहा और अपने चरम काल में यह दक्षिण एशिया के सबसे समृद्ध राज्यों में से एक था।
2. इनमें से किसे ‘आंध्र भोज’ भी कहा जाता है?
(a) कृष्णदेव राय
(b) राजेंद्र चोल
(c) हरिहर
(d) बुक्का
Jharkhand P.C.S. (Pre) 2013
उत्तर-(a)
कृष्णदेव राय (1509–1529 ई.) को ‘आंध्र भोज’ की उपाधि से विभूषित किया गया था क्योंकि वे मालवा के परमार राजा भोज की तरह साहित्य, कला और विद्वानों के उदार संरक्षक थे। उनके शासनकाल में विजयनगर साम्राज्य राजनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक – तीनों दृष्टियों से अपने उत्कर्ष पर पहुँचा। उन्होंने उड़ीसा के गजपति राजा प्रतापरुद्र को परास्त कर विजयनगर की सीमाओं का उत्तर-पूर्व दिशा में विस्तार किया। पुर्तगाली यात्री डोमिंगो पायस ने उनकी तुलना संसार के सर्वश्रेष्ठ शासकों से की।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कृष्णदेव राय स्वयं एक प्रतिभाशाली कवि थे – उन्होंने तेलुगू भाषा में ‘आमुक्तमाल्यद’ (जिसे विष्णुचित्तीयम भी कहते हैं) और संस्कृत में ‘जाम्बवतीकल्याणम्’ नामक काव्यग्रंथों की रचना की। उन्होंने बहमनी साम्राज्य के विघटन के बाद दक्कन में अपनी शक्ति सुदृढ़ की और ‘यवनराज स्थापनाचार्य’ की उपाधि भी धारण की।
3. इनमें से किसने कृष्णा नदी की सहायक नदी के दक्षिणी तट पर एक नए नगर की स्थापना की और उस देवता के प्रतिनिधि के रूप में अपने इस नए राज्य पर शासन करने का दायित्व लिया जिसके बारे में माना जाता था कि कृष्णा नदी से दक्षिण की समस्त भूमि उस देवता की है?
(a) अमोघवर्ष प्रथम
(b) बल्लाल द्वितीय
(c) हरिहर प्रथम
(d) प्रतापरुद्र द्वितीय
I.A.S. (Pre) 2015
उत्तर-(c)
हरिहर प्रथम ने तुंगभद्रा नदी – जो कृष्णा की प्रमुख सहायक नदी है – के दक्षिणी तट पर विजयनगर नगर की स्थापना की। उन्होंने स्वयं को भगवान विरुपाक्ष (शिव के एक स्वरूप) का सेवक और प्रतिनिधि घोषित किया तथा इसी धार्मिक वैधता के आधार पर शासन किया। इसीलिए विजयनगर के शासक परंपरागत रूप से ‘श्री विरुपाक्ष’ की मुहर का उपयोग करते थे और खुद को उस देवता का प्रतिनिधि बताते थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: विरुपाक्ष मंदिर आज भी हम्पी में स्थित है और यह भारत के सक्रिय रूप से पूजित प्राचीनतम मंदिरों में से एक है। हरिहर प्रथम ने शुरुआत में ‘शैव’ मत को प्रधानता दी, परंतु बाद में विजयनगर के शासक वैष्णव धर्म की ओर झुके – इससे दक्षिण भारत में वैष्णव संस्कृति के प्रसार को नया बल मिला।
4. कृष्णदेव राय के दरबार में ‘अष्ट दिग्गज’ कौन थे?
(a) आठ मंत्री
(b) आठ तेलुगू कवि
(c) आठ महान सेनापति
(d) आठ परामर्शदाता
U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2001
उत्तर-(b)
कृष्णदेव राय के दरबार में आठ श्रेष्ठ तेलुगू कवियों का एक विशिष्ट समूह था जिसे ‘अष्ट दिग्गज’ कहा जाता था – अर्थात् आठों दिशाओं के हाथी, जो साहित्याकाश को थामे हुए हों। इनमें अल्लसानी पेद्दन सर्वप्रमुख थे, जिन्हें ‘आंध्र कविता पितामह’ की मान्यता प्राप्त है। उनके शासनकाल को तेलुगू साहित्य का स्वर्णयुग माना जाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अष्ट दिग्गजों में नंदि तिम्मन (पारिजातापहरणम के रचयिता), धूर्जटि, माधय्य और रामराजभूषण जैसे प्रतिष्ठित कवि भी सम्मिलित थे। उल्लेखनीय है कि कृष्णदेव राय ने तेलुगू को संस्कृत के समकक्ष सम्मान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई – उन्होंने स्वयं कहा था कि “देशभाषाओं में तेलुगू सर्वश्रेष्ठ है” (देशभाषलन्दु तेलुगु लెస्स)।
5. ‘विजयनगर’ राज्य के संस्थापक थे-
(a) हरिहर और बुक्का
(b) कृष्णदेव राय
(c) पुष्यमित्र
(d) भद्रबाहु
Uttarakhand Lower Sub. (Pre) 2010
उत्तर-(a)
विजयनगर साम्राज्य के संस्थापक हरिहर और बुक्का थे, जो संगम वंश के थे। दोनों भाई दिल्ली सल्तनत की अधीनता से मुक्त होने के पश्चात् संत विद्यारण्य के दिशानिर्देश में दक्कन वापस लौटे और 1336 ई. में तुंगभद्रा नदी के किनारे एक नई राजधानी की आधारशिला रखी। यह स्थान आज कर्नाटक में हम्पी के नाम से जाना जाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: संगम वंश के अलावा विजयनगर में कुल चार राजवंशों ने शासन किया – संगम, सालुव, तुलुव और अरविदु। साम्राज्य का पतन 1565 ई. में तालीकोटा (रक्षसी-तंगड़ी) के युद्ध में हुआ, जब बीजापुर, बीदर, अहमदनगर और गोलकोंडा की संयुक्त सेनाओं ने विजयनगर के राजा रामराय को पराजित कर राजधानी को नष्ट कर दिया।
6. विजयनगर के उस पहले शासक की पहचान करें, जिसने बहमनियों से गोवा को छीना?
(a) हरिहर I
(b) हरिहर II
(c) बुक्का I
(d) देवराय II
40th B.P.S.C. (Pre) 1995
उत्तर-(b)
बुक्का राय प्रथम की मृत्यु के उपरांत उनके पुत्र हरिहर द्वितीय (1377–1404 ई.) ने विजयनगर का सिंहासन संभाला। उन्होंने ‘महाराजाधिराज’ की उपाधि ग्रहण कर अनेक विजय अभियान चलाए – कनारा, मैसूर, त्रिचनापल्ली और कांची को अपने अधीन किया। पश्चिमी मोर्चे पर उन्होंने बहमनी सुल्तान को परास्त कर बेलगांव एवं गोवा पर अधिकार जमाया। गोवा का बंदरगाह अरब देशों से घोड़ों के आयात की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण था, इसलिए यह विजय कूटनीतिक और सैन्य – दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्त्वपूर्ण थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: विजयनगर और बहमनी साम्राज्य के बीच तुंगभद्रा दोआब, रायचूर और गोवा के बंदरगाह को लेकर लंबे समय तक संघर्ष चलता रहा। हरिहर द्वितीय ने श्रीलंका के राजा से भी कर वसूल किया था, जो उनकी समुद्री शक्ति और राजनीतिक प्रभाव का प्रमाण है।
7. निकोलो कोंटी कौन था?
(a) एक प्रसिद्ध चित्रकार
(b) इटली का एक यात्री, जिसने विजयनगर साम्राज्य की यात्रा की
(c) एक पुर्तगाली यात्री
(d) एक ईरानी यात्री
M.P.P.C.S (Pre) 2016
उत्तर-(b)
निकोलो कोंटी इटली का एक व्यापारी एवं अन्वेषक यात्री था जिसने देवराय प्रथम के शासनकाल (1406–1422 ई.) में विजयनगर की यात्रा की। उसने राजधानी नगर की विशालता, घनी जनसंख्या, यहाँ प्रचलित दास प्रथा तथा दीपावली और नवरात्र जैसे पर्वों का विस्तृत विवरण दिया। उसके अनुसार विजयनगर की परिधि 60 मील से भी अधिक थी। उसका यात्रा-वृत्तांत लैटिन में ‘इंडिया रिकग्निटा’ के नाम से प्रकाशित हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: विजयनगर आने वाले विदेशी यात्रियों में फारसी राजदूत अब्दुर्रज्जाक (1443 ई.), पुर्तगाली यात्री डोमिंगो पायस और फर्नाओ नूनिज भी प्रमुख हैं। इन सभी के विवरणों से मिलकर विजयनगर के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जीवन की एक समग्र तस्वीर बनती है – इनके अभाव में इस काल का इतिहास-लेखन अत्यंत कठिन होता।
8. ‘अष्ट दिग्गज’ किस राजा से संबंधित थे?
(a) शिवाजी
(b) कृष्णदेव राय
(c) राजेंद्र प्रथम
(d) यशोवर्मन
R.A.S. / R.T.S (Pre) 2010
उत्तर-(b)
कृष्णदेव राय के दरबार में आठ विद्वान तेलुगू कवियों का एक विशिष्ट समूह था जिसे ‘अष्ट दिग्गज’ – अर्थात् आठों दिशाओं के दिग्गज – कहा जाता था। इनमें अल्लसानी पेद्दन सर्वप्रमुख थे जिन्हें ‘आंध्र कविता पितामह’ माना जाता है। अन्य सदस्यों में नंदि तिम्मन, धूर्जटि और माधय्य आदि उल्लेखनीय हैं। कृष्णदेव राय ने स्वयं तेलुगू में ‘आमुक्तमाल्यद’ तथा संस्कृत में ‘जाम्बवतीकल्याणम्’ की रचना की।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कृष्णदेव राय ने तेलुगू साहित्य को संस्कृत के समकक्ष सम्मान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कहा था – “देशभाषलन्दु तेलुगु लेस्स” अर्थात् देशभाषाओं में तेलुगू सर्वश्रेष्ठ है। यही कारण है कि उनका शासनकाल तेलुगू साहित्य का स्वर्णयुग कहलाता है।
9. निम्नलिखित राज्यों में से दो भाइयों, हरिहर तथा बुक्का ने किसकी स्थापना की थी?
(a) विजयनगर राज्य की
(b) काकतिया राज्य की
(c) होयसल राज्य की
(d) काम्पिली राज्य की
Jharkhand P.C.S. (Pre) 2021
उत्तर-(a)
हरिहर और बुक्का मूलतः काम्पिली राज्य के उच्च अधिकारी थे। दिल्ली सल्तनत की अधीनता से मुक्त होने के बाद संत विद्यारण्य के मार्गदर्शन में इन दोनों भाइयों ने 1336 ई. में तुंगभद्रा नदी के तट पर विजयनगर साम्राज्य की स्थापना की। काकतिया वंश वारंगल-केंद्रित था, होयसल वंश का केंद्र द्वारसमुद्र (हलेबिड) था – इनमें से किसी की भी स्थापना इन दोनों भाइयों ने नहीं की।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: विजयनगर साम्राज्य में संगम, सालुव, तुलुव और अरविदु – कुल चार राजवंशों ने शासन किया। इसकी राजधानी हम्पी (कर्नाटक) को 1986 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल घोषित किया। यह साम्राज्य 310 से अधिक वर्षों तक दक्षिण भारत का सबसे शक्तिशाली हिंदू राज्य बना रहा।
10. अब्दुर्रज्जाक विजयनगर आया था-
(a) देवराय-I के राज्यकाल में
(b) देवराय-II के राज्यकाल में
(c) कृष्णदेव राय के राज्यकाल में
(d) वीर विजय के राज्यकाल में
U.P.U.D.A./L.D.A. (Mains) 2010
उत्तर-(b)
अब्दुर्रज्जाक एक फारसी राजदूत था जिसे ईरान के तैमूरी शासक शाहरुख मिर्जा ने विजयनगर भेजा था। वह 1443 ई. में देवराय द्वितीय (1422–1446 ई.) के शासनकाल में कालीकट और मंगलौर के समुद्री मार्ग से विजयनगर पहुँचा। उसने राजधानी की अतुलनीय भव्यता, बाजारों की समृद्धि, महलों की सुंदरता और राज दरबार की शान का फारसी भाषा में विस्तृत चित्रण किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अब्दुर्रज्जाक का यात्रा-विवरण ‘मतला-उस-सादैन व मजमा-उल-बहरैन’ नामक ग्रंथ में संकलित है। उसने विजयनगर को “ऐसा नगर जो आँखों ने कभी नहीं देखा और कानों ने कभी नहीं सुना” बताया था, जो उस काल में इस साम्राज्य की असाधारण समृद्धि का प्रमाण है।
11. विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय ने गोलकुंडा का युद्ध किस राजा के साथ लड़ा था?
(a) कुली कुतुबशाह
(b) कुतुबुद्दीन ऐबक
(c) इस्माइल आदिल खान
(d) गजपति
43rd B.P.S.C. (Pre) 1999
उत्तर-(a)
गोलकुंडा के कुतुबशाही वंश के संस्थापक कुली कुतुबशाह ने कृष्णदेव राय की उड़ीसा-अभियान में व्यस्तता का लाभ उठाकर विजयनगर की सीमावर्ती पांगल और गुंटूर क्षेत्र पर आक्रमण कर दिया। इसके उत्तर में कृष्णदेव राय ने शीघ्रता से लौटकर उसे निर्णायक रूप से परास्त किया। इस विजय से विजयनगर की पूर्वी सीमाएँ पुनः सुरक्षित हो गईं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कृष्णदेव राय ने एक साथ कई मोर्चों पर सफलतापूर्वक लड़ाई लड़ी – उड़ीसा के गजपति राजा प्रतापरुद्र, बीजापुर के इस्माइल आदिल शाह और गोलकुंडा के कुली कुतुबशाह – तीनों को उन्होंने पराजित किया। कृष्णदेव राय ने पुर्तगालियों से मैत्रीपूर्ण संबंध बनाकर अरब घोड़े के व्यापार को भी नियंत्रित किया, जिससे उनकी सैन्य शक्ति और सुदृढ़ हुई।
12. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-
1. नरसिंह सालुव ने संगम वंश का अंत किया और उसने राजसिंहासन छीन कर सालुव वंश आरंभ किया।
2. वीर नरसिंह ने अंतिम सालुव शासक को गद्दी से उतारकर राजसिंहासन छीना।
3. वीर नरसिंह के उत्तरवर्ती उनके अनुज कृष्णदेव राय थे।
4. कृष्णदेव राय के उत्तरवर्ती उनके अर्द्ध-भाई अच्युतदेव राय थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
(a) 1, 2 और 3
(b) 2, 3 और 4
(c) 1 और 4
(d) 1, 2, 3 और 4
I.A.S. (Pre) 2004
उत्तर-(d)
विजयनगर में चार राजवंशों का क्रमिक उत्थान-पतन हुआ। 1485 ई. में नरसिंह सालुव ने संगम वंश के अंतिम शासक विरुपाक्ष द्वितीय को हटाकर सालुव वंश की स्थापना की। इसके बाद तुलुव सरदार वीर नरसिंह ने सालुव वंश के अंतिम शासक इम्माडि नरसिंह को पदच्युत कर तुलुव वंश की नींव रखी। 1509 ई. में वीर नरसिंह की मृत्यु के बाद उनके अनुज कृष्णदेव राय सिंहासन पर आसीन हुए, और 1529 ई. में कृष्णदेव राय के निधन के बाद उनके अर्ध-भाई अच्युतदेव राय (1529–1542 ई.) शासक बने – इस प्रकार चारों कथन सत्य हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: तुलुव वंश को विजयनगर का सर्वाधिक शक्तिशाली राजवंश माना जाता है क्योंकि कृष्णदेव राय जैसे महान शासक इसी वंश में हुए। चौथे और अंतिम राजवंश – अरविदु वंश – के काल में 1565 ई. में तालीकोटा के युद्ध में साम्राज्य का पतन हुआ।
13. अपनी ‘मदुरा विजय’ कृति में अपने पति के विजय अभियानों का वर्णन करने वाली कवयित्री थी-
(a) भारती
(b) गंगादेव
(c) वरदंबिका
(d) विज्जिका
U.P. P.C.S. (Pre) 2000
उत्तर-(b)
गंगादेवी, बुक्का राय प्रथम के पुत्र कुमार कंपन की पत्नी थीं। जब कुमार कंपन ने मदुरा सल्तनत को परास्त कर उसे विजयनगर में विलीन किया, तब गंगादेवी ने इस विजय-गाथा को ‘मदुरा विजयम्’ (जिसे ‘वीरकम्पराय चरित’ भी कहते हैं) नामक संस्कृत काव्यग्रंथ में जीवंत काव्य-शैली में प्रस्तुत किया। यह ग्रंथ 14वीं शताब्दी के दक्षिण भारत की राजनीतिक परिस्थितियों का एक दुर्लभ ऐतिहासिक साक्ष्य भी है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: गंगादेवी विजयनगर काल की उन विरल महिला साहित्यकारों में से थीं जिन्होंने राजकीय इतिहास को काव्य का स्वरूप दिया। विजयनगर काल में महिलाओं की शिक्षा और कला में सक्रिय भागीदारी थी – पुर्तगाली लेखक नूनिज के अनुसार यहाँ की महिलाएं ज्योतिषशास्त्र, लेखाकरण, कुश्ती और संगीत जैसी विविध विधाओं में दक्ष थीं।
14. पुर्तगाली लेखक नूनिज के अनुसार, विजयनगर साम्राज्य में महिलाएं निम्नलिखित में से किन क्षेत्रों में निपुण थीं?
1. कुश्ती 2. ज्योतिषशास्त्र 3. लेखाकरण 4. भविष्यवाणी
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए-
(a) केवल 1, 2 और 3
(b) केवल 1, 3 और 4
(c) केवल 2 और 4
(d) 1, 2, 3 और 4
I.A.S. (Pre) 2021
उत्तर-(d)
पुर्तगाली व्यापारी एवं लेखक फर्नाओ नूनिज ने अच्युतदेव राय के शासनकाल (1529–1542 ई.) में विजयनगर की यात्रा की। उसने अपने विवरण में लिखा कि यहाँ की महिलाएं कुश्ती, ज्योतिषशास्त्र, लेखाकरण, भविष्यवाणी, संगीत और नृत्य आदि अनेक क्षेत्रों में निपुण थीं। राज दरबार में भी महिला अंगरक्षकों और प्रशासनिक सहायिकाओं की नियुक्ति का उल्लेख मिलता है, जो उस युग के लिए अत्यंत प्रगतिशील था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: नूनिज के अलावा डोमिंगो पायस – एक अन्य पुर्तगाली यात्री – ने कृष्णदेव राय के शासनकाल में विजयनगर का वर्णन किया और उन्हें ‘संसार के सर्वश्रेष्ठ राजाओं में से एक’ बताया। ये दोनों पुर्तगाली विवरण विजयनगर के सामाजिक इतिहास के अत्यंत महत्त्वपूर्ण प्राथमिक स्रोत माने जाते हैं।
15. फारसी यात्री ‘अब्दुर्रज्जाक’ भारत में किस राजा के शासनकाल में आया था?
(a) देवराय I
(b) कृष्ण देवराय I
(c) देवराय II
(d) कृष्णराय II
(e) उपर्युक्त में से कोई नहीं/ उपर्युक्त में से एक से अधिक
60th to 62nd B.P.S.C. (Pre) 2016
उत्तर-(c)
अब्दुर्रज्जाक एक फारसी राजदूत था जिसे तैमूरी शासक शाहरुख मिर्जा ने 1443 ई. में विजयनगर भेजा था। वह देवराय द्वितीय (1422–1446 ई.) के शासनकाल में कालीकट के समुद्री मार्ग से आया और यहाँ के महोत्सवों, व्यापार, राजमहलों और किलेबंदी का फारसी भाषा में सजीव वर्णन किया। उसका यात्रा-विवरण ‘मतला-उस-सादैन व मजमा-उल-बहरैन’ नामक ग्रंथ में संकलित है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: देवराय द्वितीय को ‘गजबेटकार’ (हाथियों का शिकारी) की उपाधि प्राप्त थी और उनका शासनकाल संगम वंश का सर्वाधिक शक्तिशाली काल माना जाता है। अब्दुर्रज्जाक ने विजयनगर को “ऐसा नगर जो आँखों ने कभी नहीं देखा और कानों ने कभी नहीं सुना” कहकर उसकी तुलना संसार के सर्वाधिक समृद्ध नगरों से की।
16. कृष्णदेव राय ने किस नगर की स्थापना की?
(a) वारंगल
(b) नागलपुर
(c) उदयगिरि
(d) चंद्रगिरि
U.P.P.C.S (Pre) 2016
उत्तर-(b)
कृष्णदेव राय ने अपनी माता नागलादेवी की पुण्य स्मृति में ‘नागलपुर’ नामक नगर की स्थापना की। यह नगर तुंगभद्रा नदी के तट पर विजयनगर की राजधानी हम्पी के निकट बसाया गया था। अपने शासनकाल में उन्होंने उड़ीसा पर विजय के पश्चात् उदयगिरि और कोंडवीडु के दुर्गों पर भी अधिकार किया, परंतु इन नगरों की स्थापना उन्होंने नहीं की थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: विजयनगर शासकों में अपने स्वजनों या देवताओं के नाम पर नगर बसाने की परंपरा प्रचलित थी। कृष्णदेव राय ने नागलपुर के अलावा ‘कृष्णापुर’ नामक उपनगर भी बसाया था और वहाँ एक भव्य कृष्ण मंदिर का निर्माण कराया, जो उड़ीसा विजय की स्मृति में बनवाया गया था।
17. निम्नलिखित में से कौन महाभारत के तेलुगू अनुवादों के लिए विख्यात हैं?
1. कम्बन 2. कुट्टन 3. नन्नय 4. टिक्कन
कूट :
(a) केवल 1, 2
(b) केवल 2, 3
(c) केवल 3, 4
(d) केवल 4, 1
U.P.P.C.S. (Pre) 2012
उत्तर-(c)
महाभारत के तेलुगू रूपांतरण का महान कार्य तीन कवियों ने मिलकर संपन्न किया, जिन्हें सामूहिक रूप से ‘तेलुगू कवित्रय’ कहा जाता है – नन्नय (11वीं शताब्दी), टिक्कन (13वीं शताब्दी) और येर्राप्रगड (14वीं शताब्दी)। नन्नय ने इस कार्य का सूत्रपात किया, टिक्कन ने मध्य भाग पूर्ण किया और येर्राप्रगड ने अंतिम अंश को तेलुगू में उतारा। कम्बन तमिल ‘कम्बरामायणम्’ के रचयिता थे, और कुट्टन मलयालम के कवि थे – दोनों का तेलुगू महाभारत से कोई संबंध नहीं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: नन्नय को ‘आदिकवि’ (तेलुगू का प्रथम कवि) माना जाता है। टिक्कन ने ‘निर्वचनोत्तर रामायण’ की भी रचना की। इन तीनों कवियों के संयुक्त प्रयास से तेलुगू को एक समृद्ध साहित्यिक भाषा के रूप में प्रतिष्ठा मिली, जिसे बाद में कृष्णदेव राय के संरक्षण ने और भी ऊँचाइयों पर पहुँचाया।
18. प्रसिद्ध विजयनगर शासक कृष्णदेव राय के अधीन किस साहित्य का स्वर्णयुग था?
(a) कोंकणी
(b) मलयालम
(c) तमिल
(d) तेलुगू
U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2006
उत्तर-(d)
कृष्णदेव राय के शासनकाल (1509–1529 ई.) को तेलुगू साहित्य का स्वर्णयुग माना जाता है क्योंकि उनके दरबार में ‘अष्ट दिग्गज’ नाम से विख्यात आठ श्रेष्ठ तेलुगू कवियों को उदार राजकीय संरक्षण प्राप्त था। स्वयं कृष्णदेव राय ने तेलुगू महाकाव्य ‘आमुक्तमाल्यद’ की रचना की, जो आंडाल की भक्ति-कथा पर आधारित है और तेलुगू के पाँच महाकाव्यों में गिनी जाती है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कृष्णदेव राय ने तेलुगू को स्पष्ट रूप से सर्वश्रेष्ठ देशभाषा घोषित किया था। उन्होंने संस्कृत में ‘जाम्बवतीकल्याणम्’ नाटक की भी रचना की, जो उनकी बहुभाषिक प्रतिभा का प्रमाण है। यद्यपि उन्होंने तमिल और कन्नड़ साहित्यकारों को भी आश्रय दिया, तथापि तेलुगू उनके हृदय की भाषा थी।
19. निम्न कथनों पर विचार कीजिए और दिए गए कूट का प्रयोग करते हुए सही उत्तर का चयन कीजिए-
कथन : 1. विजयनगर के शासक कृष्णदेव राय ने अमुक्तामाल्यद ग्रंथ की रचना की।
2. कृष्णदेव राय को आंध्र भोज के नाम से भी जाना जाता है।
3. उनके दरबार को अल्लसानी पेड्डुना नामक राजकवि सुशोभित करता था, जो संस्कृत एवं तमिल दोनों भाषाओं का ज्ञाता था।
कूट :
(a) कथन 1 सही है।
(b) कथन 2 सही है।
(c) कथन 1 और 2 दोनों सही हैं।
(d) सभी तीनों कथन सही हैं।
R.A.S./ R.T.S (Pre) 2021
उत्तर-(c)
कथन 1 सत्य है – कृष्णदेव राय ने तेलुगू में ‘आमुक्तमाल्यद’ की रचना की जो तेलुगू के पाँच प्रमुख महाकाव्यों में गिनी जाती है। कथन 2 भी सत्य है – उन्हें मालवा के राजा भोज की भाँति साहित्य-संरक्षण के कारण ‘आंध्र भोज’ कहा जाता था। परंतु कथन 3 असत्य है – अल्लसानी पेड्डुना संस्कृत एवं तमिल के नहीं, बल्कि संस्कृत एवं तेलुगू के विद्वान थे। उन्होंने तेलुगू में ‘मनुचरित्र’ नामक महाकाव्य की रचना की।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अल्लसानी पेड्डुना को ‘आंध्र कविता पितामह’ की उपाधि प्राप्त थी और वे अष्ट दिग्गजों में सर्वोच्च स्थान रखते थे। कृष्णदेव राय ने संस्कृत में ‘जाम्बवतीकल्याणम्’ नाटक भी लिखा, जो उनकी बहुभाषिक साहित्यिक प्रतिभा का प्रमाण है।
21. तालीकोटा का युद्ध लड़ा गया था-
(a) अकबर और मालवा के सुल्तान के बीच
(b) विजयनगर और बहमनी राज्य के बीच
(c) विजयनगर और बीजापुर, अहमदनगर तथा गोलकुंडा की संयुक्त सेनाओं के बीच
(d) शेरशाह और हुमायूं के बीच
U.P.P.C.S. (Mains) 2014
उत्तर-(c)
1565 ई. में हुए तालीकोटा के युद्ध में बीजापुर, अहमदनगर, गोलकुंडा और बीदर की संयुक्त सुल्तान सेनाओं ने विजयनगर साम्राज्य को निर्णायक रूप से पराजित किया। उस समय विजयनगर का नाममात्र का शासक सदाशिव राय था, परंतु वास्तविक सत्ता रामराय के हाथों में केंद्रित थी। इस युद्ध में हुसैन निजामशाह ने स्वयं अपने हाथों से रामराय का वध किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस युद्ध को ‘राक्षसी-तंगड़ी का युद्ध’ भी कहा जाता है, क्योंकि यह कृष्णा नदी के तट पर राक्षसी और तंगड़ी नामक दो गाँवों के बीच लड़ा गया था। तालीकोटा की पराजय के बाद विजयनगर नगर को दक्कन सुल्तानों ने लूटकर नष्ट कर दिया, जिससे यह विशाल साम्राज्य कभी उबर नहीं सका।
22. जब राजा वोडियार ने मैसूर राज्य की स्थापना की तब विजयनगर साम्राज्य का शासक कौन था?
(a) सदाशिव
(b) तिरुमल
(c) रंगा II
(d) वेंकट II
I.A.S. (Pre) 2006
उत्तर-(d)
तालीकोटा की पराजय (1565 ई.) के पश्चात विजयनगर साम्राज्य में अरावीडु वंश सत्ता में आया। इस वंश के शासक वेंकट द्वितीय (1586–1614 ई.) ने चंद्रगिरि को अपनी राजधानी बनाया। वे उस समय के विजयनगर के शासक थे जब राजा वोडियार ने 1612 ई. में मैसूर राज्य की नींव रखी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: वेंकट द्वितीय के शासनकाल में 1612 ई. में अंग्रेजों को मछलीपट्टनम में व्यापार करने की अनुमति दी गई थी, जो दक्षिण भारत में ब्रिटिश व्यापारिक उपस्थिति की शुरुआत का संकेत थी। अरावीडु वंश विजयनगर साम्राज्य का चौथा और अंतिम राजवंश था।
23. वैदिक ग्रंथों के भाष्यकार सायण को आश्रय प्राप्त था-
(a) परमार राजाओं का
(b) सातवाहन राजाओं का
(c) विजयनगर राजाओं का
(d) वाकाटक राजाओं का
U.P.P.C.S. (Mains) 2008
उत्तर-(c)
सायणाचार्य वेदों के सर्वाधिक प्रतिष्ठित भाष्यकार थे, जिन्हें विजयनगर साम्राज्य के शासकों का राजाश्रय प्राप्त था। वे प्रसिद्ध विद्वान माधव विद्यारण्य के अनुज थे। हरिहर और बुक्का ने तुंगभद्रा के दक्षिणी तट पर विजयनगर राज्य की स्थापना की थी, और इस कार्य में माधव विद्यारण्य तथा सायण की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सायण ने चारों वेदों-ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद-के भाष्य लिखे, जो आज भी वैदिक साहित्य की व्याख्या के लिए प्राथमिक संदर्भ ग्रंथ माने जाते हैं। उनके भाष्यों के बिना अनेक वैदिक ऋचाओं का अर्थ समझना अत्यंत कठिन होता।
24. वैदिक ग्रंथों के प्रसिद्ध भाष्यकार सायण, निम्न में से किस एक काल में सक्रिय थे?
(a) चोल राज्यकाल
(b) गुप्त राज्यकाल
(c) सातवाहन राज्यकाल
(d) विजयनगर राज्यकाल
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2002
उत्तर-(d)
सायणाचार्य 14वीं शताब्दी ई. में विजयनगर राज्यकाल के दौरान सक्रिय थे। वे विजयनगर के शासक बुक्का प्रथम और हरिहर द्वितीय के दरबार में उच्च पद पर आसीन थे तथा एक समय विजयनगर के प्रधानमंत्री भी रहे। उनके भाई माधव विद्यारण्य विजयनगर साम्राज्य की स्थापना के प्रमुख आध्यात्मिक प्रेरणास्रोत थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सायण ने लगभग 1400 ईस्वी में अपना ऋग्वेद भाष्य पूर्ण किया। पश्चिमी विद्वान मैक्समूलर ने सायण के भाष्य के आधार पर ही 19वीं शताब्दी में ऋग्वेद का प्रथम मुद्रित संस्करण प्रकाशित किया था।
25. निम्नांकित में से किसके राज्यारोहण को अब 500 वर्ष गुजर गए हैं?
(a) हरिहर प्रथम
(b) कृष्णदेव राय
(c) कुलोत्तुंग प्रथम
(d) राजराय प्रथम
U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2008
उत्तर-(b)
कृष्णदेव राय विजयनगर साम्राज्य के तुलुव वंश के सर्वाधिक प्रतापी शासक थे, जिन्होंने 1509 ई. में राज्यारोहण किया और 1529 ई. तक शासन किया। प्रश्न वर्ष 2008 में पूछे जाने के संदर्भ में उनके राज्यारोहण के 500 वर्ष पूरे हुए थे। वे विद्वान, कवि और योद्धा तीनों रूपों में विख्यात थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कृष्णदेव राय ने तेलुगु में प्रसिद्ध काव्य ‘अमुक्तमाल्यदा’ की रचना की और संस्कृत में ‘जाम्बवती कल्याणम्’ नाटक लिखा। उनके दरबार में तेलुगु साहित्य के ‘अष्टदिग्गज’ नामक आठ महान कवि थे। पुर्तगाली यात्री डोमिंगो पेस ने उन्हें अपने समय का सर्वश्रेष्ठ राजा बताया था।
26. 1565 में कौन-सा प्रसिद्ध युद्ध हुआ?
(a) पानीपत का प्रथम युद्ध
(b) खनुआ या खानवा युद्ध
(c) पानीपत का दूसरा युद्ध
(d) तालीकोटा का युद्ध
M.P.P.C.S. (Pre) 1997
उत्तर-(d)
सन् 1565 ई. में तालीकोटा का ऐतिहासिक युद्ध हुआ, जिसमें बीजापुर, अहमदनगर, गोलकुंडा और बीदर की सम्मिलित मुस्लिम सल्तनतों ने विजयनगर साम्राज्य को पराजित किया। इस युद्ध के समय विजयनगर का नाममात्र का शासक सदाशिव राय था, जबकि वास्तविक नियंत्रण उसके शक्तिशाली मंत्री रामराय के पास था। युद्ध में रामराय मारा गया और विजयनगर नगर को बर्बाद कर दिया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस युद्ध में दक्कन सुल्तानों ने पहली बार आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होकर विजयनगर के विरुद्ध मोर्चा बनाया था, जो दक्षिण भारत के राजनीतिक इतिहास की एक अनूठी घटना थी। पराजय के बाद विजयनगर की राजधानी को 6 महीनों तक लूटा गया।
27. सन् 1565 में कौन-सा प्रसिद्ध युद्ध हुआ था?
(a) पानीपत का प्रथम युद्ध
(b) पानीपत का द्वितीय युद्ध
(c) खानवा का युद्ध
(d) तालीकोटा का युद्ध
(e) उपर्युक्त में से कोई नहीं / उपर्युक्त में से एक से अधिक
66th B.P.S.C. (Re-Exam) 2020
उत्तर-(d)
1565 ई. में तालीकोटा का युद्ध दक्षिण भारत के इतिहास का सबसे निर्णायक युद्ध था। इस युद्ध में दक्कन की चार सल्तनतों की संयुक्त सेना ने विजयनगर को परास्त किया। विजयनगर साम्राज्य लगभग दो शताब्दियों तक दक्षिण भारत की प्रमुख शक्ति रहा था, किंतु इस एकमात्र पराजय ने उसकी सत्ता को चिरकाल के लिए समाप्त कर दिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: तालीकोटा युद्ध में विजयनगर की सेना संख्या में बड़ी थी, फिर भी पराजित हुई, क्योंकि दक्कन सुल्तानों की तोपखाने की शक्ति विजयनगर से कहीं अधिक उन्नत थी। युद्ध के पश्चात विजयनगर राजधानी को इतनी बुरी तरह नष्ट किया गया कि यह आज हम्पी के खंडहरों के रूप में जानी जाती है, जो अब UNESCO विश्व धरोहर स्थल है।
28. तालीकोटा का युद्ध हुआ था-
(a) सन् 1526 में
(b) सन् 1565 में
(c) सन् 1576 में
(d) सन् 1586 में
U.P. P.C.S. (Pre) 1993
उत्तर-(b)
तालीकोटा का युद्ध 23 जनवरी, 1565 ई. को हुआ था। यह युद्ध कृष्णा नदी के तट के निकट तालीकोटा के पास राक्षसी और तंगड़ी गाँवों के बीच लड़ा गया, इसलिए इसे ‘राक्षसी-तंगड़ी का युद्ध’ भी कहते हैं। इस युद्ध में बीजापुर के अली आदिल शाह, अहमदनगर के हुसैन निजामशाह, गोलकुंडा के इब्राहिम कुतुबशाह और बीदर के अली बरीदशाह ने मिलकर विजयनगर को पराजित किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस युद्ध में विजयनगर की सेना में दो मुस्लिम सेनापति थे-गिलानी बंधु-जो युद्ध के बीच में ही दुश्मन से मिल गए, जिससे विजयनगर की सेना में अफरा-तफरी मच गई और परिणाम पलट गया। यह विश्वासघात विजयनगर की पराजय का एक प्रमुख कारण माना जाता है।
29. विजयनगर के शासक कृष्णदेव की कराधान व्यवस्था से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-
1. भूमि की गुणवत्ता के आधार पर भू-राजस्व की दर नियत होती थी।
2. कारखानों के निजी स्वामी एक औद्योगिक कर देते थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1, न ही 2
I.A.S. (Pre) 2016
उत्तर-(c)
कृष्णदेव राय की कराधान व्यवस्था अत्यंत सुव्यवस्थित थी। भूमि को उसकी गुणवत्ता और सिंचाई की स्थिति के आधार पर चार वर्गों में बाँटा गया था-सिंचित, शुष्क, उद्यान और वन भूमि-और उसी के अनुसार भू-राजस्व (जिसे ‘सीस्त’ या ‘शिष्ट’ कहते थे) निर्धारित होता था। इसके अतिरिक्त, कारखानों के निजी स्वामियों से औद्योगिक कर, विवाह कर और बागवानी शुल्क भी वसूले जाते थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कृष्णदेव राय की कराधान प्रणाली में ‘कट्टनम’ नामक एक विशेष व्यापार कर भी था जो बंदरगाहों और बाज़ारों पर लगाया जाता था। पुर्तगाली यात्री बार्बोसा ने लिखा है कि कृष्णदेव राय के शासनकाल में व्यापार इतना फला-फूला कि विजयनगर की गणना तत्कालीन विश्व के सबसे समृद्ध नगरों में होती थी।
30. विजयनगर साम्राज्य की ‘वित्तीय व्यवस्था’ की मुख्य विशेषता क्या थी?
(a) अधिशेष लगान
(b) भू-राजस्व
(c) बंदरगाहों से आमदनी
(d) मुद्रा प्रणाली
39th B.P.S.C. (Pre) 1994
उत्तर-(b)
विजयनगर साम्राज्य की वित्तीय व्यवस्था में भू-राजस्व सबसे महत्त्वपूर्ण और प्रमुख आय का स्रोत था, जिसे ‘सीस्त’ या ‘शिष्ट’ अथवा ‘राय-रेखा’ के नाम से जाना जाता था। इसके अलावा व्यापारिक कर, व्यावसायिक कर, उद्योग कर, विवाह कर, सामुदायिक कर तथा अर्थदंड भी राजकोष की पूर्ति करते थे। सामान्यतः भू-राजस्व उपज के छठे से एक-तिहाई भाग तक लिया जाता था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: विजयनगर साम्राज्य में ‘पण’ और ‘वराह’ (सोने के सिक्के) प्रमुख मुद्राएँ थीं। ‘वराह’ को पुर्तगाली ‘पार्डो’ के नाम से जानते थे। साम्राज्य में भूमि सर्वेक्षण की एक सुव्यवस्थित प्रणाली थी, जिसके तहत कृषि भूमि का विस्तृत अभिलेख रखा जाता था।
31. प्रसिद्ध विजय विट्ठल मंदिर जिसके 56 तक्षित स्तंभ संगीतमय स्वर निकालते हैं, कहां अवस्थित है?
(a) बेलूर
(b) भद्राचलम
(c) हम्पी
(d) श्रीरंगम
I.A.S. (Pre) 2007
उत्तर-(c)
विट्ठल मंदिर हम्पी (वर्तमान कर्नाटक) में स्थित है, जो विजयनगर साम्राज्य की राजधानी थी। इसका निर्माण तुलुव वंश के शक्तिशाली सम्राट कृष्णदेव राय (1509–1529 ई.) के शासनकाल में हुआ। मंदिर के 56 संगीतमय स्तंभ (Musical Pillars) विभिन्न वाद्य-यंत्रों की ध्वनि उत्पन्न करते हैं, जो उस युग की अद्वितीय शिल्पकला का प्रमाण हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस मंदिर के प्रांगण में प्रसिद्ध ‘पत्थर का रथ’ (Stone Chariot) स्थित है, जो विजयनगर स्थापत्य कला का प्रतीक बन चुका है और भारतीय 100 रुपये के पुराने नोट पर भी अंकित रहा है। कृष्णदेव राय स्वयं एक विद्वान थे और उन्होंने तेलुगू में ‘अमुक्तमाल्यद’ नामक महाकाव्य की रचना की थी।
32. विजयनगर के किस शासक ने चीन के सम्राट के पास अपना राजदूत भेजा?
(a) हरिहर प्रथम
(b) बुक्का प्रथम
(c) कृष्णदेव राय
(d) सालुव नरसिंह
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2008
उत्तर-(b)
विजयनगर साम्राज्य की स्थापना 1336 ई. में हरिहर एवं बुक्का नामक दो भाइयों ने की थी, जो संगम वंश के संस्थापक माने जाते हैं। संगम वंशी शासक बुक्का प्रथम (1356–1377 ई.) ने 1374 ई. में चीन के मिंग राजवंश के सम्राट के दरबार में अपना दूतमंडल भेजा था, जो भारत और चीन के बीच कूटनीतिक संबंधों की दृष्टि से महत्वपूर्ण घटना थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: चीनी यात्री मा हुआन ने इस काल के भारत-चीन संबंधों का विस्तृत विवरण अपनी पुस्तक ‘यिंग-याई शेंग-लान’ में दिया है। बुक्का प्रथम ने अपने शासनकाल में श्रृंगेरी के शंकराचार्य को संरक्षण देकर हिंदू धर्म के पुनरुद्धार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
33. निम्नलिखित में से किस स्थान के खंडहर विजयनगर की प्राचीन राजधानी का प्रतिनिधित्व करते हैं?
(a) अहमदनगर
(b) बीजापुर
(c) गोलकुंडा
(d) हम्पी
U.P.P.C.S. (Mains) 2007 & U.P.P.C.S. (Mains) 2008
उत्तर-(d)
हम्पी के खंडहर वर्तमान उत्तरी कर्नाटक के बेल्लारी जिले में तुंगभद्रा नदी के तट पर स्थित हैं और ये विजयनगर साम्राज्य की भव्य राजधानी के अवशेष हैं। यहाँ स्थित विरुपाक्ष मंदिर विजयनगर काल की स्थापत्य कला का जीवंत उदाहरण है। हम्पी को 1986 में यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की सूची में सम्मिलित किया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: पुर्तगाली यात्री डोमिंगो पेस ने 16वीं शताब्दी में हम्पी की यात्रा की थी और उसने इसे रोम से भी बड़ा और समृद्ध नगर बताया था। 1565 ई. में तालीकोटा (राक्षसतंगड़ी) के युद्ध के पश्चात् बहमनी उत्तराधिकारी सल्तनतों ने हम्पी को पूरी तरह नष्ट कर दिया था।
34. किसके राज्य में ‘कल्याण मंडप’ की रचना मंदिर निर्माण का एक विशिष्ट अभिलक्षण था?
(a) चालुक्य
(b) चंदेल
(c) राष्ट्रकूट
(d) विजयनगर
I.A.S (Pre) 2019
उत्तर-(d)
विजयनगर स्थापत्य शैली की सबसे विशिष्ट पहचान ‘कल्याण मंडप’ है। यह एक विशाल स्तंभयुक्त हॉल होता था, जिसमें धार्मिक उत्सवों के अवसर पर देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का विवाह-उत्सव (कल्याणोत्सव) आयोजित किया जाता था। विजयनगर के मंदिरों में ऊँचे गोपुरम (प्रवेश द्वार) भी इसी शैली की पहचान हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: विजयनगर स्थापत्य में ‘रायगोपुरम’ नामक विशाल मीनारें बनाई जाती थीं, जो द्रविड़ शैली का विकसित रूप थीं। इस साम्राज्य के मंदिरों में ‘हजार स्तंभ मंडप’ भी एक प्रमुख विशेषता थी, जिसका उत्कृष्ट उदाहरण हम्पी का विट्ठल मंदिर परिसर है।
35. विजयनगर साम्राज्य का अवशेष कहां मिलता है?
(a) बीजापुर
(b) गोलकुंडा
(c) हम्पी
(d) बड़ौदा
(e) उपर्युक्त में से कोई नहीं/उपर्युक्त में से एक से अधिक
63rd B.P.S.C. (Pre) 2017
उत्तर-(c)
विजयनगर साम्राज्य के अवशेष हम्पी में मिलते हैं, जो कर्नाटक राज्य के बेल्लारी जिले में तुंगभद्रा नदी के तट पर स्थित है। यहाँ विट्ठल मंदिर, विरुपाक्ष मंदिर, हजार स्तंभ मंडप, राजमहल के खंडहर और ‘लोटस महल’ जैसी संरचनाएँ इस साम्राज्य की समृद्धि की साक्षी हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हम्पी में स्थित ‘उग्रनरसिंह’ की एकाश्म प्रतिमा (Monolithic Statue) और ‘बड़ा शिवलिंग’ विजयनगर कालीन मूर्तिकला के श्रेष्ठ उदाहरण हैं। इतालवी यात्री निकोलो कोंटी (15वीं शताब्दी) ने विजयनगर को भारत के महानतम नगरों में से एक बताया था।
36. प्रमुख तेलुगू कवि ‘श्रीनाथ’ किसके दरबार में थे?
(a) हरिहर द्वितीय
(b) देवराय प्रथम
(c) देवराय द्वितीय
(d) कृष्णदेव द्वितीय
Chhattisgarh P.C.S. (Pre), 2019
उत्तर-(c)
मध्यकालीन तेलुगू साहित्य के महान कवि ‘श्रीनाथ’ विजयनगर साम्राज्य के संगम वंशी शासक देवराय द्वितीय (1422–1446 ई.) के दरबार की शोभा थे। देवराय द्वितीय को ‘गजबेटकर’ (हाथी का शिकारी) की उपाधि से भी जाना जाता था। श्रीनाथ कोंडाविड के रेड्डी शासकों के आश्रय में भी रहे और ‘शृंगार नैषधम्’ उनकी सर्वाधिक प्रसिद्ध रचना है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: देवराय द्वितीय के दरबार में फारसी राजदूत अब्दुर रज्जाक (1443 ई.) भी आया था, जिसने विजयनगर की भव्यता और वैभव का विस्तृत वर्णन किया। श्रीनाथ ने ‘पलनाटि वीर चरित्र’ और ‘काशी खंडम्’ जैसी अन्य उल्लेखनीय तेलुगू कृतियाँ भी लिखीं।

📚 Chapters

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    Swipe left/right to change content

    Share This Page

    WhatsApp Telegram