1. कौन-सा सुल्तान नया धर्म चलाना चाहता था, किंतु उलेमा लोगों ने विरोध किया?
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2003
उत्तर-(b)
अलाउद्दीन खिलजी एक महत्वाकांक्षी और स्वेच्छाचारी शासक था। उसने नया धर्म स्थापित करने की योजना बनाई थी, परंतु उसके विश्वस्त मित्र एवं दिल्ली के कोतवाल अलाउल-मुल्क ने उसे सलाह दी कि इस प्रकार का कदम बड़े विद्रोह को जन्म दे सकता है। इस परामर्श को मानते हुए उसने अपना यह विचार त्याग दिया। अलाउद्दीन ने ‘सिकंदर-ए-सानी’ की उपाधि भी धारण की थी जो उसकी विश्व-विजय की महत्वाकांक्षा को दर्शाती है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अलाउद्दीन एकमात्र दिल्ली सुल्तान था जिसने खलीफा की सत्ता को पूरी तरह अनदेखा कर ‘वली-अहद’ (उत्तराधिकारी) की उपाधि अपने पुत्र खिज्र खां को दी, न कि खलीफा से स्वीकृति ली। इसके अतिरिक्त उसने ‘अमीर-ए-मजलिस’ नामक एक नई पदवी बनाई जो दरबार की सभाओं की अध्यक्षता करती थी।
2. कथन (A) : अलाउद्दीन के दक्षिणी अभियान धन-प्राप्ति के अभियान थे।
कारण (R) : यह दक्षिणी राज्यों को कब्जे में करना चाहता था।
कूट :
कारण (R) : यह दक्षिणी राज्यों को कब्जे में करना चाहता था।
कूट :
U.P. P.C.S. (Pre) 1997
उत्तर-(c)
अलाउद्दीन खिलजी के दक्षिण भारत पर किए गए अभियानों का मूल उद्देश्य उन राज्यों को दिल्ली सल्तनत में मिलाना नहीं, बल्कि वहाँ से अधिकतम धन-संपदा और बहुमूल्य उपहार प्राप्त करना था। इसीलिए कथन (A) सही है। परंतु कारण (R) असत्य है क्योंकि अलाउद्दीन ने दक्षिणी राज्यों पर प्रत्यक्ष प्रशासनिक अधिकार नहीं जमाया — वे उसके करद (tribute-paying) राज्य बने रहे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अलाउद्दीन के दक्षिण विजय अभियानों का संचालन उसके दासपुत्र एवं सेनापति मलिक काफूर ने किया, जिसे ‘हजार दीनारी’ भी कहा जाता था क्योंकि उसे 1,000 दीनार में खरीदा गया था। मलिक काफूर 1309-10 ई. में होयसल, पांड्य और तेलंगाना तक पहुँचने वाला पहला दिल्ली सुल्तानत का सेनापति था।
3. किस सुल्तान के काल में खालिसा भूमि अधिक पैमाने में विकसित हुई?
39th B.P.S.C. (Pre) 1994
उत्तर-(b)
अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी भूमि-राजस्व व्यवस्था को केंद्रीकृत करने के लिए बड़े पैमाने पर खालिसा भूमि (राज्य के प्रत्यक्ष नियंत्रण वाली भूमि) का विस्तार किया। उसने मिल्क, वक्फ, इनाम और इद्रार जैसी श्रेणियों में दी गई भूमि वापस लेकर उसे खालिसा में शामिल कर लिया। इससे सुल्तान की प्रत्यक्ष आय में भारी वृद्धि हुई और अमीर-वर्ग की आर्थिक स्वायत्तता कमजोर हुई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अलाउद्दीन ने भूमि की वास्तविक पैमाइश (measurement) कराई और बिस्वा को भूमि माप की मानक इकाई बनाया — यह दिल्ली सल्तनत के इतिहास में पहली बार था। उसने उपज का 50% राजस्व के रूप में वसूल किया, जो तत्कालीन काल में अत्यंत उच्च दर थी।
4. रानी पद्मिनी का नाम अलाउद्दीन की चित्तौड़ विजय से जोड़ा जाता है। उनके पति का नाम है-
43rd B.P.S.C. (Pre) 1999
उत्तर-(d)
रानी पद्मिनी की कथा का आधार 1540 ई. में अवधी कवि मलिक मुहम्मद जायसी द्वारा रचित महाकाव्य ‘पद्मावत’ है। इस काव्य के अनुसार पद्मिनी चित्तौड़ के राजा राणा रतन सिंह की पत्नी थीं। अलाउद्दीन ने 1303 ई. में चित्तौड़ पर आक्रमण किया और राणा रतन सिंह को पराजित किया। इस घटना के बाद रानी पद्मिनी के जौहर की कथा प्रचलित हुई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जायसी की ‘पद्मावत’ हिंदी साहित्य के प्रेमाख्यान काव्यों में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है और यह सूफी परंपरा की प्रतीकात्मक रचना है जिसमें आत्मा (पद्मिनी) और परमात्मा (राघव चेतन) के मिलन का रूपक है। चित्तौड़ विजय के बाद अलाउद्दीन ने इस दुर्ग का नाम बदलकर ‘खिज्राबाद’ रख दिया था।
5. अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय देवगिरि का शासक कौन था?
47th B.P.S.C. (Pre) 2005
53rd to 55th B.P.S.C. (Pre) 2011
53rd to 55th B.P.S.C. (Pre) 2011
उत्तर-(a)
1296 ई. में अलाउद्दीन खिलजी ने दिल्ली की गद्दी पर बैठने से पूर्व ही देवगिरि पर आक्रमण किया था। उस समय देवगिरि पर यादव वंश के शासक रामचंद्रदेव का शासन था। पराजित होने के बाद रामचंद्रदेव ने प्रतिवर्ष एलिचपुर की आय दिल्ली भेजने का वचन दिया। 1306-07 ई. में जब उसने यह कर देना बंद किया, तो अलाउद्दीन ने मलिक काफूर को भेजा और रामचंद्रदेव को दिल्ली लाया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: देवगिरि (वर्तमान दौलताबाद, महाराष्ट्र) यादव वंश की राजधानी थी। रामचंद्रदेव के साथ अलाउद्दीन ने बाद में सौहार्दपूर्ण संबंध स्थापित किए और उन्हें ‘राय रायान’ (राजाओं का राजा) की उपाधि दी — यह दिल्ली सल्तनत के इतिहास में किसी हिंदू राजा को दी गई अत्यंत दुर्लभ उपाधि थी।
6. दिए गए मानचित्र पर ध्यान दीजिए- मानचित्र में निर्दिष्ट मार्ग का अनुसरण अपने सैन्य अभियानों में किसने किया था?
I.A.S. (Pre) 1995
उत्तर-(d)
मानचित्र में दर्शाया गया दक्षिण भारत का मार्ग सल्तनतकालीन सेनापति मलिक काफूर के दक्षिण अभियानों (1309-1311 ई.) से संबंधित है। मलिक काफूर ने देवगिरि, वारंगल, होयसल और मदुरई (पांड्य) तक के अभियान इसी मार्ग से संचालित किए और भारी मात्रा में सोना, हाथी, घोड़े व बहुमूल्य रत्न लेकर दिल्ली लौटा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मलिक काफूर के दक्षिण अभियान के दौरान वारंगल के काकतीय शासक प्रताप रुद्रदेव द्वितीय से ‘कोहिनूर हीरा’ (तब ‘माणिक मणि’ के नाम से ज्ञात) प्राप्त हुआ था — यह हीरा बाद में दिल्ली सुल्तानों, मुगलों और अंततः ब्रिटिश राजशाही के पास पहुँचा। मलिक काफूर ने 1311 ई. में रामेश्वरम तक पहुँचकर वहाँ एक मस्जिद बनवाई।
7. दिल्ली के किस सुल्तान ने ‘सिकंदर सानी’ की मानोपाधि धारण की थी?
U.P. Lower Sub. (Pre) 2008
उत्तर-(b)
अलाउद्दीन खिलजी ने ‘सिकंदर-ए-सानी’ (द्वितीय सिकंदर) की उपाधि धारण की और इसे अपने सिक्कों पर भी अंकित कराया। यह उपाधि उसकी विश्व-विजय की महत्वाकांक्षा को प्रकट करती है — वह यूनानी विजेता सिकंदर महान की भाँति संपूर्ण विश्व को जीतना चाहता था। अपने शासनकाल में उसने वास्तव में उत्तर से दक्षिण भारत तक अभूतपूर्व सैन्य सफलताएँ प्राप्त कीं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अलाउद्दीन ने ‘यामीन-उल-खिलाफत नासिरी-अमीर-उल-मुमिनीन’ की उपाधि भी धारण की, जो खलीफा के प्रति औपचारिक निष्ठा को दर्शाती थी। दिल्ली सल्तनत में वह पहला सुल्तान था जिसने स्थायी और नियमित वेतनभोगी सेना (नकद वेतन में) बनाई, जिससे जागीर-व्यवस्था पर निर्भरता घटी।
8. अलाउद्दीन खिलजी के प्रसिद्ध सेनापतियों में किसकी मंगोलों के विरुद्ध लड़ते हुए मृत्यु हुई?
41st B.P.S.C. (Pre) 1996
उत्तर-(a)
अलाउद्दीन के सबसे साहसी सेनापतियों में से एक जफर खां मंगोल आक्रमणकारियों से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। 1298 ई. में उन्होंने सिवी (सिंध) के युद्ध में मंगोलों को भारी पराजय दी थी, परंतु बाद में एक युद्ध में उनकी मृत्यु हो गई। जफर खां की वीरता और अदम्य साहस से मंगोल इतने भयभीत थे कि उनके नाम से ही मंगोल सेनाएँ भयग्रस्त हो जाती थीं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अलाउद्दीन के शासनकाल में मंगोलों ने कुल पाँच बार भारत पर आक्रमण किया, जिनमें सबसे भयंकर आक्रमण 1303 ई. में था जब मंगोल सेना दिल्ली के निकट सीरी तक पहुँच गई थी। इसी आक्रमण से बचाव के लिए अलाउद्दीन ने सीरी का किला बनवाया, जो दिल्ली का दूसरा शहर बना।
9. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए-
सूची-I सूची-II
A. रणथम्भौर 1. कर्णदेव
B. चित्तौड़ 2. राजा राय रामचंद्र
C. देवगिरि 3. हमीरदेव
D. गुजरात 4. राणा रतन सिंह
कूट :
A B C D
(a) 4 3 2 1
(b) 1 4 3 2
(c) 2 4 1 3
(d) 3 4 2 1
सूची-I सूची-II
A. रणथम्भौर 1. कर्णदेव
B. चित्तौड़ 2. राजा राय रामचंद्र
C. देवगिरि 3. हमीरदेव
D. गुजरात 4. राणा रतन सिंह
कूट :
A B C D
(a) 4 3 2 1
(b) 1 4 3 2
(c) 2 4 1 3
(d) 3 4 2 1
U.P.R.O./A.R.O. (Pre) 2017
उत्तर-(d)
अलाउद्दीन खिलजी के विभिन्न अभियानों में पराजित राज्यों और उनके शासकों का सही सुमेलन इस प्रकार है — रणथम्भौर का शासक हमीरदेव था (1301 ई. में विजित), चित्तौड़ का राणा रतन सिंह (1303 ई.), देवगिरि का राजा राय रामचंद्र (1296 व 1307 ई.), और गुजरात का कर्णदेव (1297 ई.)। इस प्रकार सही उत्तर विकल्प (d) है: A-3, B-4, C-2, D-1।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: रणथम्भौर विजय (1301 ई.) दिल्ली सल्तनत की राजस्थान में पहली बड़ी सफलता थी — हमीरदेव चाहमान (चौहान) वंश का वीर शासक था जो युद्धभूमि में लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुआ। गुजरात विजय के दौरान अलाउद्दीन के सेनापति उलूग खाँ ने वहाँ से मलिक काफूर को खरीदकर अलाउद्दीन के पास भेजा था।
10. निम्न में से किस सुल्तान ने ‘बाजार सुधार’ लागू किए थे?
M.P.P.C.S. (Pre) 2014
उत्तर-(b)
दिल्ली सल्तनत के इतिहास में ‘बाजार सुधार’ या ‘मूल्य नियंत्रण’ की अभूतपूर्व व्यवस्था अलाउद्दीन खिलजी (1296–1316) ने लागू की थी। उसने चार अलग-अलग बाजार स्थापित किए — अनाज बाजार (मंडी), कपड़े का बाजार (सराय-ए-अदल), पशु बाजार और सामान्य वस्तुओं का बाजार। प्रत्येक बाजार की निगरानी के लिए एक शाहना (अधीक्षक) और दो गुप्तचर नियुक्त किए जाते थे जो सीधे सुल्तान को रिपोर्ट करते थे। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य अपनी विशाल स्थायी सेना को कम वेतन पर भी संतुष्ट रखना था — सस्ती वस्तुएँ मिलने से सैनिकों का जीवन-स्तर बना रहता था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अलाउद्दीन ने बाजार नियंत्रण हेतु ‘दीवान-ए-रियासत’ नामक एक पृथक विभाग की स्थापना की थी, जो मूल्य-सूची तैयार करता था। यदि कोई व्यापारी निर्धारित मूल्य से अधिक वसूल करता था, तो उसके शरीर से उतने ही माँस का टुकड़ा काट लिया जाता था — यह अत्यंत कठोर दंड व्यवस्था का उल्लेख इतिहासकार जियाउद्दीन बरनी ने अपनी पुस्तक ‘तारीख-ए-फिरोजशाही’ में किया है।
11. किस सुल्तान के बारे में कहा जाता है कि उसने भूमि-कर को उत्पादन के 50% तक कर दिया था?
Jharkhand P.C.S. (Pre) 2013
उत्तर-(b & c)
भू-राजस्व को उपज के 50% तक बढ़ाने का श्रेय दो सुल्तानों को दिया जाता है — अलाउद्दीन खिलजी और मुहम्मद बिन तुगलक। अलाउद्दीन खिलजी ने भूमि की वास्तविक पैमाइश (बिस्वा के आधार पर) करवाकर उपज का आधा भाग (खराज) सरकारी राजस्व के रूप में वसूल किया। वह दिल्ली सल्तनत का पहला सुल्तान था जिसने भूमि को नपवाकर लगान तय किया। इसके अतिरिक्त उसने ‘घरी कर’ (मकान कर) और ‘चराई कर’ (पशु चराने पर कर) जैसे नए कर भी लगाए। मुहम्मद बिन तुगलक ने दोआब क्षेत्र में अनुमान के आधार पर (न कि पैमाइश के आधार पर) उपज का 50% कर लगाया, जिससे किसानों में भारी असंतोष फैला और विद्रोह हुए — अंततः उसे यह वृद्धि वापस लेनी पड़ी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अलाउद्दीन ने अपनी राजस्व व्यवस्था को लागू करने हेतु ‘दीवान-ए-मुस्तखराज’ नामक एक विशेष विभाग स्थापित किया था, जो बकाया राजस्व की वसूली का काम करता था।
12. कथन (A) : अलाउद्दीन खिलजी ने दिल्ली में मूल्य नियंत्रण लागू किया था।
कारण (R) : वह दिल्ली में अपने राज भवन के निर्माण में लगे हुए कारीगरों को कम वेतन देना चाहता था।
निम्न कूट से सही उत्तर चुनिए-
कूट :
(a) (A) तथा (R) दोनों सही हैं तथा (R), (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) तथा (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
(d) (A) गलत है, परंतु (R) सही है।
कारण (R) : वह दिल्ली में अपने राज भवन के निर्माण में लगे हुए कारीगरों को कम वेतन देना चाहता था।
निम्न कूट से सही उत्तर चुनिए-
कूट :
(a) (A) तथा (R) दोनों सही हैं तथा (R), (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) तथा (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
(d) (A) गलत है, परंतु (R) सही है।
U.P.P.C.S. (Mains) 2005
उत्तर-(c)
कथन (A) पूर्णतः सही है — अलाउद्दीन खिलजी ने दिल्ली में मूल्य नियंत्रण की व्यापक नीति लागू की थी। परंतु कारण (R) गलत है। इतिहासकार जियाउद्दीन बरनी के अनुसार इस नीति के दो प्रमुख उद्देश्य थे: पहला, मंगोल आक्रमणों से सल्तनत की रक्षा के लिए एक बड़ी एवं स्थायी सेना बनाए रखना और उसे कम वेतन पर भी संतुष्ट रखना; दूसरा, हिंदू जमींदारों और व्यापारियों को आर्थिक रूप से दुर्बल कर विद्रोह की संभावना को समाप्त करना। कारीगरों को कम वेतन देने से इस नीति का कोई संबंध नहीं था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अलाउद्दीन ने मूल्य नियंत्रण की निगरानी के लिए ‘मलिक कबूल’ को शहना-ए-मंडी (बाजार का मुख्य अधीक्षक) नियुक्त किया था और बाजारों में व्यापारियों की रोजाना की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए गुप्तचर (बरीद और मुनहियान) तैनात किए जाते थे।
13. निम्न मुस्लिम बादशाहों में से किस एक ने मूल्य नियंत्रण पद्धति को पहली बार लागू किया?
U.P. Lower Sub. (Pre) 1998
U.P.P.S.C. (GIC) 2010
U.P. Lower Sub. (Pre) 2004
U.P.P.S.C. (GIC) 2010
U.P. Lower Sub. (Pre) 2004
उत्तर-(a)
दिल्ली सल्तनत में सर्वप्रथम मूल्य नियंत्रण की व्यवस्था अलाउद्दीन खिलजी ने लागू की। उसने एक बड़ी स्थायी सेना खड़ी की जिसे नकद वेतन (नकद तनख्वाह) दिया जाता था — ऐसा करने वाला वह दिल्ली का पहला सुल्तान था। इस सेना के विशाल व्यय को संतुलित करने के लिए उसने सैनिकों का वेतन कम किया, किंतु बाजार में आवश्यक वस्तुओं के दाम नियंत्रित कर जीवनयापन सस्ता बनाया। इस व्यवस्था के तहत अनाज, कपड़े, मवेशी और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं के लिए सरकारी दरें निर्धारित की गईं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अलाउद्दीन की सेना में लगभग 4,75,000 घुड़सवार सैनिक थे (बरनी के अनुसार), जो उस युग में असाधारण रूप से बड़ी संख्या थी — इसी विशाल सैन्य व्यय को वहन करने के लिए मूल्य नियंत्रण नीति अपरिहार्य बन गई थी।
14. सुल्तान जिसने बढ़ाकर भू-राजस्व उपज का 50% कर दिया, वह था-
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2016
उत्तर-(a & b)
भू-राजस्व को उपज के 50% तक करने का संदर्भ दो सुल्तानों से जुड़ा है। अलाउद्दीन खिलजी ने भूमि की वास्तविक पैमाइश करवाकर उपज का आधा भाग (खराज) राजस्व के रूप में वसूल किया। उसके बाद मुहम्मद बिन तुगलक ने दोआब क्षेत्र (गंगा-यमुना के बीच की भूमि) में अनुमान के आधार पर उपज का 50% कर बढ़ाया, जो अलाउद्दीन की पैमाइश-आधारित व्यवस्था से भिन्न था। तुगलक की इस मनमानी और अनुचित वृद्धि के कारण किसानों ने खेती छोड़ दी, भुखमरी फैली और विद्रोह हुए — अंततः उसे यह आदेश वापस लेना पड़ा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मुहम्मद बिन तुगलक के दोआब राजस्व प्रयोग की विफलता का एक बड़ा कारण यह था कि उसी समय क्षेत्र में भीषण अकाल पड़ा था, जिसकी उसने पहले से कोई व्यवस्था नहीं की थी — इस नीतिगत विफलता का उल्लेख बदायूँनी और बरनी दोनों ने किया है।
15. किस सुल्तान ने जमीन में फसल की नपाई का आधा राजस्व के रूप में दावा किया?
64th B.P.S.C. (Pre) 2018
उत्तर-(c)
अलाउद्दीन खिलजी ने भू-राजस्व प्रणाली में क्रांतिकारी परिवर्तन किए। उसने प्रत्येक खेत की माप (पैमाइश) करवाकर प्रति बिस्वा उपज के आधार पर राजस्व निर्धारित किया और उपज का 1/2 भाग (50%) राजस्व के रूप में वसूल किया। वह दिल्ली सल्तनत का पहला सुल्तान था जिसने व्यक्तिगत किसान (रैयत) से सीधे लगान वसूलने की नीति अपनाई, बजाय पुराने जमींदारों (खुत्त, मुकद्दम, चौधरी) के माध्यम से। मुहम्मद बिन तुगलक ने केवल दोआब में अनुमानित उपज के आधार पर 50% कर लगाया था, और बाद में किसान विद्रोह के कारण उसे यह आदेश वापस लेना पड़ा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अलाउद्दीन ने खुत्त (उप-जमींदार), मुकद्दम (ग्राम प्रधान) और चौधरी (स्थानीय राजस्व अधिकारी) जैसे परंपरागत मध्यवर्ती वर्गों पर भी कर लगाए और उनकी विशेषाधिकार प्राप्त स्थिति समाप्त कर दी, जिससे राज्य की सीधी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
16. निम्न कथनों पर विचार कीजिए जो अलाउद्दीन खिलजी से संबंधित है-
i. उसने कृष्य जमीनों की पैमाइश के बाद जमीन की मालगुजारी वसूल की।
ii. उसने लगान व्यवस्था को अपनी पूरी सल्तनत में लागू किया।
iii. उसने प्रांतों के गवर्नरों के अधिकारों को समाप्त किया।
निम्न कोडिंग स्कीम में से सही उत्तर चुनिए-
i. उसने कृष्य जमीनों की पैमाइश के बाद जमीन की मालगुजारी वसूल की।
ii. उसने लगान व्यवस्था को अपनी पूरी सल्तनत में लागू किया।
iii. उसने प्रांतों के गवर्नरों के अधिकारों को समाप्त किया।
निम्न कोडिंग स्कीम में से सही उत्तर चुनिए-
U.P.P.C.S. (Pre) 1994
उत्तर-(c)
कथन (i) सही है — अलाउद्दीन ने भूमि की पैमाइश करवाकर लगान वसूला; वह ऐसा करने वाला दिल्ली का पहला सुल्तान था। कथन (ii) गलत है — उसकी पैमाइश-आधारित लगान व्यवस्था केवल दिल्ली और उसके आसपास के क्षेत्रों तक सीमित रही, संपूर्ण साम्राज्य में इसे समान रूप से लागू नहीं किया जा सका। कथन (iii) सही है — अलाउद्दीन ने राजस्व वसूली का अधिकार परंपरागत अधिकारियों (खुत्त, मुकद्दम, चौधरी) से छीनकर अपने केंद्रीय कर्मचारियों को दिया और प्रांतीय गवर्नरों की स्वायत्त शक्तियाँ सीमित कर दीं। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए उसने ‘दीवान-ए-मुस्तखराज’ नामक विशेष विभाग बनाया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अलाउद्दीन ने राजस्व अधिकारियों की निगरानी के लिए एक गुप्तचर-तंत्र विकसित किया था — बरीद (संदेशवाहक गुप्तचर) और मुनहियान (गुप्त जासूस) — जो सीधे सुल्तान को रिपोर्ट करते थे और किसी भी भ्रष्टाचार की सूचना तुरंत पहुँचाते थे।
17. दिल्ली सल्तनत के किस शासक ने अपने आप को ‘खलीफा’ घोषित कर दिया था?
U.P.R.O./A.R.O. (Re. Exam) (Pre) 2016
उत्तर-(c)
अलाउद्दीन खिलजी की मृत्यु (1316 ई.) के बाद उसके सेनापति मलिक काफूर ने शासन की बागडोर अपने हाथ में ले ली और मुबारक खिलजी को कारागार में डाल दिया। परंतु कुछ ही समय बाद मलिक काफूर की हत्या हो गई और मुबारक खिलजी 1316 ई. में सुल्तान बना। उसने स्वयं को ‘खलीफा’ घोषित करते हुए ‘अल-इमाम’ और ‘खिलाफत-उल-लह’ की उपाधियाँ धारण कीं — वह दिल्ली सल्तनत का एकमात्र शासक था जिसने ऐसा दावा किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मुबारक खिलजी ने अपने प्रिय दास खुसरो खाँ को ‘खान-ए-खाना’ की उपाधि दी थी, जिसने बाद में 1320 ई. में उसी की हत्या करके सत्ता हथिया ली। मुबारक खिलजी ने अपने शासनकाल में अलाउद्दीन द्वारा लगाए गए कठोर बाजार नियंत्रण कानूनों को समाप्त कर दिया था।
18. ‘घरी’ अथवा गृहकर लगाने वाला दिल्ली का प्रथम सुल्तान कौन था?
U.P.P.C.S. (Mains) 2011
उत्तर-(b)
अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी विशाल सेना के व्यय की भरपाई के लिए दो नए कर लागू किए — ‘घरी कर’ जो घरों और झोपड़ियों पर लगाया जाता था, तथा ‘चराई कर’ जो दुधारू पशुओं पर लगाया जाता था। ये कर मुख्यतः हिंदू कृषकों पर लागू होते थे और इनसे राज्य के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अलाउद्दीन ने भूमि की प्रत्यक्ष पैमाइश (मसाहत) के आधार पर भूराजस्व निर्धारित किया और उपज का 50% भूराजस्व के रूप में वसूला, जो दिल्ली सल्तनत के इतिहास में सर्वाधिक था। उसके राजस्व सुधारों का विवरण इतिहासकार जियाउद्दीन बरनी ने अपनी पुस्तक ‘तारीख-ए-फिरोजशाही’ में विस्तार से दिया है।
19. निम्नलिखित युग्मों में कौन सही सुमेलित नहीं है?
रियासत — शासक
रियासत — शासक
U.P.P.C.S. (Pre) 2018
उत्तर-(b)
अलाउद्दीन खिलजी के दक्षिण भारत अभियान के समय देवगिरि का शासक रामचंद्रदेव था, न कि शंकरदेव। शंकरदेव रामचंद्रदेव का पुत्र था जो उसकी मृत्यु के बाद शासक बना। वारंगल में काकतीय वंश का शासन था और उसका शासक प्रतापरुद्रदेव द्वितीय था — इसलिए ‘वारंगल — रामचंद्रदेव’ युग्म असुमेलित है। होयसल का शासक वीर बल्लाल तृतीय तथा मदुरा (पांड्य राज्य) का शासक वीर पाण्ड्या था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अलाउद्दीन के दक्षिण अभियान का नेतृत्व उसके सेनापति मलिक काफूर ने किया था, जिसे ‘हजार दीनारी’ (एक हजार दीनार में खरीदा गया दास) भी कहा जाता है। 1310-11 ई. के अभियान में मलिक काफूर ने होयसल, पांड्य और देवगिरि से अपार धन-संपदा लूटकर दिल्ली भेजी थी।
20. बाजार नियंत्रण प्रथा लागू की थी-
U.P. P.C.S. (Pre) 1992
उत्तर-(c)
अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी विशाल स्थायी सेना को कम वेतन पर बनाए रखने के लिए बाजार नियंत्रण प्रणाली लागू की। उसने चार बाजार स्थापित किए — अनाज बाजार (मंडी), कपड़ा बाजार (सराय-ए-अदल), पशु बाजार तथा सामान्य वस्तुओं का बाजार। प्रत्येक बाजार की निगरानी के लिए ‘शहना’ (अधीक्षक) नियुक्त किया गया और एक गुप्तचर विभाग (बरीद) भी बाजारों पर नजर रखता था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अलाउद्दीन ने ‘मलिक कबूल’ को बाजार का प्रमुख शहना नियुक्त किया था। मूल्य नियंत्रण में किसी भी व्यापारी द्वारा धोखाधड़ी पकड़े जाने पर उसके शरीर से उतने मांस का टुकड़ा काट लिया जाता था जितने के बराबर उसने कम तौला हो — इस तरह की कठोर दंड-व्यवस्था ने बाजार को अत्यंत अनुशासित बनाया।
21. बाजार कीमतों को नियंत्रित करने के अलाउद्दीन खिलजी के प्रयास ने-
U.P.P.C.S. (Mains) 2017
उत्तर-(c)
अलाउद्दीन की बाजार नियंत्रण नीति अपने उद्देश्यों में बड़ी हद तक सफल रही। इस नीति का मुख्य लक्ष्य कम वेतन पर भी बड़ी सेना बनाए रखना, मुनाफाखोरी एवं कालाबाजारी को समाप्त करना तथा साम्राज्य में आर्थिक स्थिरता लाना था। मलिक कबूल को शहना (बाजार अधीक्षक) के रूप में व्यापक अधिकार दिए गए और गुप्तचरों के माध्यम से बाजार में निरंतर निगरानी रखी गई। इन कठोर उपायों के चलते बाजार में वस्तुओं की कीमतें नियंत्रित रहीं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इतिहासकार बरनी के अनुसार अलाउद्दीन के बाजार नियंत्रण से दिल्ली के बाजार में घोड़े की कीमत 100-120 टंके से घटकर मात्र 10-25 टंके रह गई थी। अलाउद्दीन के बाद यह व्यवस्था चरमरा गई, क्योंकि इसे बनाए रखने के लिए उसी जैसी मजबूत केंद्रीय इच्छाशक्ति की आवश्यकता थी।
22. निम्नलिखित में से किस मध्यकालीन शासक ने ‘सार्वजनिक वितरण प्रणाली’ प्रारंभ की थी?
U.P.P.C.S. (Mains) 2010
उत्तर-(a)
दिल्ली सल्तनत के शासक अलाउद्दीन खिलजी ने मध्यकाल में पहली बार ‘सार्वजनिक वितरण प्रणाली’ की स्थापना की। उसने दिल्ली में राजकीय अनाज भंडार (सरकारी गोदाम) बनवाए जहाँ से आम जनता को निर्धारित मूल्य पर अनाज उपलब्ध कराया जाता था। यह व्यवस्था विशेष रूप से अकाल और संकट के समय राहत देने में सहायक थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अलाउद्दीन ने यह भी सुनिश्चित किया कि अनाज के गोदाम हमेशा भरे रहें — इसके लिए उसने ‘खुत’, ‘मुकद्दम’ और ‘चौधरी’ जैसे ग्राम अधिकारियों से सीधे अनाज वसूल कर राजकीय भंडारण में जमा करने का नियम बनाया। यह प्रणाली आधुनिक भारत की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि मानी जाती है।
23. सल्तनकाल में ‘सार्वजनिक वितरण प्रणाली’ किसने प्रारंभ की थी?
66th B.P.S.C. (Re-Exam) 2020
उत्तर-(a)
सल्तनत काल में ‘सार्वजनिक वितरण प्रणाली’ अलाउद्दीन खिलजी ने आरंभ की थी। उसने दिल्ली में सरकारी अनाज की दुकानें (मंडी) खुलवाईं जहाँ नियंत्रित मूल्य पर अनाज बेचा जाता था। इस व्यवस्था की देखरेख के लिए ‘शहना-ए-मंडी’ नामक अधिकारी नियुक्त किया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अलाउद्दीन की इस प्रणाली के तहत अनाज के व्यापार में बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त कर दी गई थी — किसानों को अपना अनाज सीधे सरकारी गोदामों में जमा करना होता था। उसने व्यापारियों के लिए यह भी अनिवार्य किया कि वे दिल्ली से बाहर अनाज न ले जाएँ, जिससे राजधानी में सदैव अनाज की पर्याप्त आपूर्ति बनी रहती थी।
24. 1306 ई. के बाद अलाउद्दीन खिलजी के समय में दिल्ली के सुल्तान तथा मंगोलों के बीच सीमा क्या थी?
U.P.P.C.S. (Pre) 2014
उत्तर-(b)
1306 ई. में कबक के नेतृत्व में हुए मंगोल आक्रमण को मलिक काफूर और गाजी मलिक (गियासुद्दीन तुगलक) ने रावी नदी के तट पर परास्त किया। इस विजय के बाद रावी नदी दिल्ली सल्तनत और मंगोल साम्राज्य के बीच की स्थायी सीमा रेखा बन गई। अलाउद्दीन के काल में मंगोलों के कुल 6-7 बड़े आक्रमण हुए जिन सभी को उसने सफलतापूर्वक विफल किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अलाउद्दीन ने मंगोल आक्रमणों से सुरक्षा के लिए सीरी (दिल्ली) में एक नया किला बनवाया और उत्तर-पश्चिमी सीमा पर सीमावर्ती किलों की व्यापक मरम्मत करवाई। 1303 ई. में मंगोल नेता तार्गी ने दिल्ली को इतनी तेजी से घेर लिया था कि अलाउद्दीन को स्वयं सीरी किले में शरण लेनी पड़ी थी — यह मंगोलों का दिल्ली सल्तनत पर सबसे खतरनाक आक्रमण माना जाता है।
25. निम्नलिखित में से किस सुल्तान ने साम्राज्य की सीमाओं की सुरक्षा हेतु एक विशेष सेना को नियुक्त किया?
U.P.R.O./A.R.O. (Pre) 2021
उत्तर-(d)
अलाउद्दीन खिलजी ने उत्तर-पश्चिमी सीमाओं पर मंगोल आक्रमणों से सुरक्षा के लिए एक विशेष सीमा-रक्षक सेना तैनात की। उसने सीमावर्ती किलों की मरम्मत करवाई, अनुभवी सैन्य सरदारों को सीमावर्ती इक्ताओं में नियुक्त किया और मंगोल मार्गों पर सैनिक टुकड़ियाँ स्थापित कीं। इस सुव्यवस्थित सीमा-सुरक्षा प्रणाली के कारण ही वह मंगोल आक्रमणों को बारंबार विफल करने में सफल रहा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अलाउद्दीन ने दिल्ली सल्तनत की सबसे बड़ी स्थायी सेना गठित की थी जिसमें लगभग 4,75,000 घुड़सवार सैनिक थे। उसने ‘दाग’ (घोड़े पर राजकीय निशान लगाने की प्रथा) और ‘हुलिया’ (सैनिक का शारीरिक विवरण दर्ज करने की प्रणाली) नामक सैन्य सुधार लागू किए ताकि सेना में भ्रष्टाचार और फर्जी सैनिकों की समस्या समाप्त हो सके।
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