1.1929 में नागपुर में संपन्न ‘ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता किसने की थी ?
U.P.P.C.S. (Mains) 2013
उत्तर-(a)
वर्ष 1929 के नागपुर अधिवेशन में AITUC की अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू ने की थी। यह अधिवेशन भारतीय श्रमिक आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, क्योंकि यहीं से AITUC का पहला बड़ा विभाजन हुआ। साम्यवादी और सुधारवादी नेताओं के बीच वैचारिक मतभेद इतने गहरे हो गए कि दक्षिणपंथी धड़े ने एन.एम. जोशी और वी.वी. गिरि के नेतृत्व में अलग होकर ‘इंडियन ट्रेड यूनियन फेडरेशन’ (ITUF) की स्थापना की।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस अधिवेशन में नेहरू रिपोर्ट (1928) की आलोचना की गई थी, जिसे लेकर राष्ट्रवादी और कट्टरपंथी गुटों में टकराव हुआ। इसके अलावा, वर्ष 1931 में AITUC से एक और विभाजन हुआ जब कम्युनिस्टों ने अलग होकर ‘रेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस’ बनाई, जो 1935 तक सक्रिय रही।
2.निम्नलिखित में से किसने अहमदाबाद टेक्सटाइल लेबर एसोसिएशन की स्थापना की?
I.A.S. (Pre) 2009
उत्तर-(a)
अहमदाबाद टेक्सटाइल लेबर एसोसिएशन (TLA) की स्थापना महात्मा गांधी ने वर्ष 1918 में की थी। इसे ‘मजूर महाजन संघ’ के नाम से भी जाना जाता है। यह संगठन गांधीजी के ‘ट्रस्टीशिप’ के सिद्धांत पर आधारित था, जिसमें हड़ताल के बजाय संवाद और समझौते को प्राथमिकता दी जाती थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: 1918 में अहमदाबाद के कपड़ा मजदूरों ने महामारी (प्लेग) भत्ते में कटौती के विरोध में हड़ताल की थी, जिसे गांधीजी ने नेतृत्व प्रदान किया और यह उनके भारतीय श्रमिक आंदोलन से पहले सीधे जुड़ाव का उदाहरण है। यह TLA स्वतंत्रता के बाद भी दशकों तक कार्यरत रहा और इसे विश्व के सबसे अनुशासित श्रमिक संगठनों में गिना गया।
3.1920 में आयोजित ‘ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस के सत्र की अध्यक्षता किसने की थी?
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2020
उत्तर-(a)
31 अक्टूबर 1920 को बंबई में आयोजित AITUC के प्रथम अधिवेशन की अध्यक्षता लाला लाजपत राय ने की। वे उस समय के एक प्रमुख राष्ट्रवादी नेता थे, जिन्हें ‘पंजाब केसरी’ के नाम से जाना जाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: AITUC की स्थापना 1919 में स्थापित अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की प्रेरणा से हुई थी, ताकि भारतीय श्रमिकों का प्रतिनिधित्व अंतर्राष्ट्रीय मंच पर हो सके। लाला लाजपत राय का इस आंदोलन में प्रवेश भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन और मजदूर आंदोलन के बीच की कड़ी को मजबूत करने के रूप में देखा जाता है; वे मानते थे कि औपनिवेशिक शोषण से मुक्ति के लिए श्रमिकों का संगठन अनिवार्य है।
4.भारत में 1918 में प्रथम मजदूर संघ की स्थापना की-
U.P.P.C.S. (Mains) 2007
उत्तर-(b)
भारत का पहला आधुनिक मजदूर संघ ‘मद्रास लेबर यूनियन’ था, जिसकी स्थापना बी.पी. वाडिया ने 1918 में की थी। वाडिया एक थियोसॉफिस्ट और समाज सुधारक थे, जिन्होंने मद्रास के बुनाई (textile) मजदूरों को संगठित किया। इस संघ ने हड़तालों एवं सामूहिक सौदेबाजी के माध्यम से श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा का प्रयास किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बी.पी. वाडिया एनी बेसेंट की थियोसॉफिकल सोसायटी से जुड़े थे और उनका मानना था कि आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित समाजवाद ही भारतीय मजदूरों की वास्तविक मुक्ति का मार्ग है। मद्रास लेबर यूनियन की स्थापना ने ब्रिटिश भारत में श्रम कानून निर्माण की दिशा में भी दबाव बनाया, जो आगे चलकर 1926 के ट्रेड यूनियन अधिनियम के रूप में फलित हुआ।
5. बंबई में अखिल भारतीय व्यापार संघ कांग्रेस की स्थापना कब हुई?
47th B.P.S.C. (Pre) 2005
उत्तर-(a)
अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) की स्थापना 31 अक्टूबर 1920 को बंबई में एन.एम. जोशी द्वारा की गई। यह भारत का पहला राष्ट्रीय स्तर का श्रमिक संगठन था। इसके पहले अध्यक्ष लाला लाजपत राय, उपाध्यक्ष जोसेफ बैप्टिस्टा और महामंत्री दीवान चमनलाल बजाज थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: AITUC की स्थापना उसी वर्ष हुई जब भारत में असहयोग आंदोलन का आरंभ हुआ, जो दर्शाता है कि श्रमिक चेतना और राष्ट्रीय आंदोलन एक-दूसरे को ऊर्जा दे रहे थे। AITUC आज भी अस्तित्व में है और यह भारत के सबसे पुराने केंद्रीय ट्रेड यूनियन संगठनों में गिना जाता है; वर्तमान में यह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) से संबद्ध है।
6.अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस के 1920 में बंबई में हुए प्रथम अधिवेशन की अध्यक्षता की थी-
U.P. P.C.S. (Mains) 2006
U.P.P.C.S. (Mains) 2011
U.P.P.C.S. (Mains) 2011
उत्तर-(c)
1920 में बंबई में आयोजित AITUC के पहले अधिवेशन की अध्यक्षता प्रसिद्ध राष्ट्रवादी नेता लाला लाजपत राय ने की थी। उनके नेतृत्व ने इस नवगठित श्रमिक संगठन को तत्काल राष्ट्रीय प्रतिष्ठा दिलाई। संगठन की स्थापना में एन.एम. जोशी की केंद्रीय भूमिका थी, जबकि लाला लाजपत राय ने प्रथम अध्यक्ष के रूप में इसे नेतृत्व प्रदान किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: लाला लाजपत राय ने 1928 में साइमन कमीशन के विरोध में प्रदर्शन किया, जिसके दौरान ब्रिटिश पुलिस की लाठियों से घायल होकर उनका निधन हो गया। यह घटना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक बड़ा मोड़ साबित हुई। श्रमिक आंदोलन और राष्ट्रीय आंदोलन दोनों में उनकी सक्रिय भागीदारी ने इन दोनों धाराओं को एकता के सूत्र में पिरोया।
7.भारत ट्रेड यूनियन कांग्रेस के पहले अध्यक्ष कौन थे?
48th to 52nd B.P.S.C. (Pre) 2008
U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2002
U.P.P.C.S. (Pre) 1997
42nd B.P.S.C. (Pre) 1997
U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2002
U.P.P.C.S. (Pre) 1997
42nd B.P.S.C. (Pre) 1997
उत्तर-(c)
AITUC के संस्थापक एन.एम. जोशी थे, परंतु इसके पहले अध्यक्ष लाला लाजपत राय को बनाया गया। AITUC की स्थापना 31 अक्टूबर 1920 को बंबई में हुई और इसका उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) में भारतीय मजदूरों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना था। संगठन के पहले महामंत्री दीवान चमनलाल बजाज थे। वर्ष 1929 के नागपुर अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में ही AITUC का पहला विभाजन हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: एन.एम. जोशी बाद में ‘इंडियन ट्रेड यूनियन फेडरेशन’ (ITUF, 1929) के भी प्रमुख नेता बने। भारत में ट्रेड यूनियनों को कानूनी मान्यता देने वाला ‘भारतीय ट्रेड यूनियन अधिनियम 1926’ पारित करवाने में एन.एम. जोशी की महत्वपूर्ण भूमिका थी, जिसके अंतर्गत पंजीकृत यूनियनों को नागरिक और आपराधिक मामलों में संरक्षण मिला।
8. सौम्येंद्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित दल का क्या नाम है?
U.P.P.C.S. (Pre) (Re-Exam) 2015
उत्तर-(b)
सौम्येंद्रनाथ टैगोर रवींद्रनाथ टैगोर के परिवार से जुड़े थे और मार्क्सवादी विचारधारा के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने 1934 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) से अलग होकर रिवोल्यूशनरी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (क्रांतिकारी साम्यवादी दल) की नींव रखी, क्योंकि वे पार्टी की कार्यशैली और सोवियत प्रभाव से असहमत थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सौम्येंद्रनाथ टैगोर 1920 के दशक में यूरोप में रहकर अंतरराष्ट्रीय कम्युनिस्ट आंदोलन से जुड़े थे और भारत लौटने पर उन्होंने मजदूर वर्ग को संगठित करने का कार्य किया। यह भी उल्लेखनीय है कि भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन इस दौर में बार-बार विभाजन और पुनर्गठन से गुजरा, जिसमें वैचारिक मतभेद प्रमुख कारण रहे।
9. कानपुर षड्यंत्र मुकदमा किस आंदोलन के नेताओं के विरुद्ध था?
U.P.P.C.S. (Pre) 2001
U.P.P.S.C. (GIC) 2010
U.P.P.S.C. (GIC) 2010
उत्तर-(c)
ब्रिटिश सरकार भारत में बढ़ते कम्युनिस्ट प्रभाव से चिंतित थी और उसने 1924 में कानपुर में एक मुकदमा दर्ज कराया, जिसे ‘कानपुर बोल्शेविक षड्यंत्र मामला’ भी कहा जाता है। इसमें एम.एन. राय, श्रीपाद अमृत डांगे, मुजफ्फर अहमद, शौकत उस्मानी, गुलाम हुसैन, रामचरण लाल शर्मा और सिंगारवेलु चेट्टियार पर भारत में क्रांतिकारी संगठन खड़ा करने की साजिश का आरोप लगाया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस मुकदमे का एक बड़ा प्रभाव यह हुआ कि भारतीय जनमानस में कम्युनिस्ट विचारधारा और इसके नेताओं के प्रति सहानुभूति बढ़ी, जिससे आगे चलकर 1925 में कानपुर में ही अखिल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का औपचारिक गठन हुआ। इसके बाद के वर्षों में पेशावर षड्यंत्र मामले (1922-27) और मेरठ षड्यंत्र मामले (1929) में भी सरकार ने इसी तरह कम्युनिस्ट नेताओं को निशाना बनाया।
10. 1940 में रेडिकल डेमोक्रेटिक पार्टी का गठन किसने किया?
U.P.P.C.S. (Mains) 2007
उत्तर-(b)
एम.एन. राय ने 1940 में रेडिकल डेमोक्रेटिक पार्टी की स्थापना की। यह कदम उनके वैचारिक सफर का एक नया मोड़ था—वे कम्युनिज्म से होते हुए अब एक नई “क्रांतिकारी मानवतावाद” (Radical Humanism) की दिशा में बढ़ रहे थे, जिसमें व्यक्ति की स्वतंत्रता और तार्किक चिंतन पर बल दिया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: एम.एन. राय का मूल नाम नरेंद्रनाथ भट्टाचार्य था और वे मेक्सिको में कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना करने वाले पहले गैर-रूसी व्यक्तियों में से एक थे। आगे चलकर उन्होंने कम्युनिस्ट इंटरनेशनल (कॉमिन्टर्न) से भी नाता तोड़ लिया और अपने जीवन के अंतिम वर्षों में मानवतावादी दर्शन पर आधारित लेखन कार्य पर ध्यान केंद्रित किया। शचींद्रनाथ सान्याल, जिनका उल्लेख विकल्पों में है, हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के संस्थापकों में से थे और उन्होंने आत्मकथा ‘बंदी जीवन’ लिखी थी।
11. कम्युनिस्ट इंटरनेशनल का सदस्य बनने वाला पहला भारतीय कौन था ?
40th B.P.S.C. (Pre) 1995
उत्तर-(a)
कम्युनिस्ट इंटरनेशनल (कॉमिन्टर्न) की स्थापना मार्च 1919 में लेनिन के नेतृत्व में रूसी बोल्शेविक पार्टी द्वारा की गई थी, जिसका उद्देश्य विश्वभर में सर्वहारा क्रांति को बढ़ावा देना था। एम.एन. राय लेनिन के व्यक्तिगत निमंत्रण पर मॉस्को गए और कॉमिन्टर्न की सदस्यता ग्रहण करने वाले पहले भारतीय बने।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कॉमिन्टर्न के द्वितीय कांग्रेस (1920) में एम.एन. राय ने राष्ट्रीय-औपनिवेशिक प्रश्न पर लेनिन के साथ सैद्धांतिक बहस में हिस्सा लिया और अपना अलग ‘पूरक थीसिस’ प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने उपनिवेशों में मजदूर वर्ग के स्वतंत्र संगठन पर अधिक जोर दिया। यह बहस अंतरराष्ट्रीय कम्युनिस्ट आंदोलन में औपनिवेशिक देशों की भूमिका को लेकर एक महत्वपूर्ण वैचारिक मोड़ मानी जाती है।
12. ट्रेड यूनियन आंदोलन के क्रांतिकारी चरण का समय था-
48th to 52nd B.P.S.C. (Pre) 2008
उत्तर-(b)
भारतीय ट्रेड यूनियन आंदोलन के इतिहास में 1926 से 1939 तक के चरण को ‘क्रांतिकारी चरण’ कहा जाता है, क्योंकि इस दौरान कम्युनिस्ट विचारधारा से प्रभावित नेताओं का मजदूर संगठनों पर गहरा प्रभाव रहा। एम.एन. राय, मुजफ्फर अहमद, श्रीपाद अमृत डांगे और शौकत उस्मानी जैसे नेताओं ने इस दौर में मजदूर आंदोलन को वर्ग-संघर्ष की दिशा में मोड़ने का प्रयास किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी दौर में 1920 में अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) की स्थापना हुई थी, जिसके पहले अध्यक्ष लाला लाजपत राय थे। 1929 में मेरठ षड्यंत्र मामले के तहत बड़ी संख्या में ट्रेड यूनियन और कम्युनिस्ट नेताओं की गिरफ्तारी के बाद इस क्रांतिकारी चरण को गहरा झटका लगा।
13. निम्नलिखित में से किस केस की समस्त संसार में चर्चा हुई और
अभियुक्तों के समर्थन में अल्बर्ट आइंसटीन, एच.जी.वेल्स, हैराल्ड
लास्की तथा रूजवेल्ट ने सहानुभूतिपूर्ण टिप्पणियां की ?
U.P. P.C.S. (Pre) 2017
उत्तर-(c)
मेरठ षड्यंत्र मामला (1929-33) ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत में कम्युनिस्ट और मजदूर आंदोलन को कुचलने के लिए चलाया गया अब तक का सबसे बड़ा और लंबा मुकदमा था, जिसमें 33 मजदूर एवं ट्रेड यूनियन नेताओं पर राजद्रोह का आरोप लगाया गया। इस मुकदमे की गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दी और अल्बर्ट आइंस्टीन, एच.जी. वेल्स, हेरॉल्ड लास्की, रोमां रोलां तथा फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट जैसी अंतरराष्ट्रीय हस्तियों ने अभियुक्तों के समर्थन में आवाज़ उठाई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस मुकदमे ने ब्रिटेन में भी हलचल मचाई, जहां मजदूर दल (लेबर पार्टी) के कई सांसदों ने इसकी आलोचना की। इस घटना ने भारतीय रंगमंच को भी प्रभावित किया—प्रसिद्ध नाटककार उत्पल दत्त के नाटकों और बाद में बनी फिल्मों में मेरठ षड्यंत्र मामले की पृष्ठभूमि का उपयोग हुआ। यह मुकदमा भारत में मजदूर आंदोलन के इतिहास में एक मील का पत्थर माना जाता है।
14. अक्टूबर, 1920 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना के लिए
ताशकंद में एकत्र हुए भारतीयों के समूह के मुखिया निम्नलिखित में से कौन थे?
I.A.S.(Pre) 2005
उत्तर-(d)
17 अक्टूबर 1920 को एम.एन. राय के नेतृत्व में ताशकंद में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना हुई। इस ऐतिहासिक बैठक में उनके साथ अवनी मुखर्जी (और उनकी पत्नी रोज़ा फिटिंगोफ), मोहम्मद अली तथा मोहम्मद शफीक जैसे साथी शामिल थे, जो उस समय अफगानिस्तान के रास्ते सोवियत रूस पहुंचे मुहाजिरीन क्रांतिकारियों में से थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: ताशकंद में स्थापित यह पार्टी भारत से बाहर विदेशी धरती पर बनी थी, जबकि भारत के भीतर औपचारिक रूप से अखिल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का गठन बाद में दिसंबर 1925 में कानपुर में हुआ। एम.एन. राय ने ताशकंद में ही एक सैन्य-राजनीतिक स्कूल भी स्थापित किया था, जहां भारतीय क्रांतिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाता था।
Leave a Reply