1857 का विद्रोह MCQ प्रश्न | UPSC History

भारतीय इतिहास आधुनिक भारत 1857 का विद्रोह MCQ प्रश्न
1.1857 की क्रांति का प्रमुख कारण क्या था?
(a) जन आक्रोश
(b) सैनिक असंतोष
(c) ईसाई मिशनरी का प्रबंध
(d) ब्रिटिश साम्राज्य की नीति
U.P.P.C.S. (Pre) 1990
उत्तर-(d)
1857 का विद्रोह किसी एक घटना का परिणाम नहीं था, बल्कि यह दशकों से चली आ रही ब्रिटिश साम्राज्यवादी नीतियों के संचित असंतोष का विस्फोट था। डलहौजी की हड़प नीति (Doctrine of Lapse) के तहत सतारा, झांसी, नागपुर जैसे राज्यों का विलय, भू-राजस्व की कठोर वसूली व्यवस्था, हस्तशिल्प उद्योगों के पतन और सामाजिक-धार्मिक हस्तक्षेप ने जनता और सैनिकों दोनों में गहरा रोष पैदा किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) इस विद्रोह को अंग्रेज इतिहासकारों ने ‘सिपाही विद्रोह’ (Sepoy Mutiny) कहा, जबकि वी.डी. सावरकर ने इसे सबसे पहले ‘भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम’ की संज्ञा दी। (2) कार्ल मार्क्स ने इस विद्रोह पर विस्तृत लेख लिखे थे, जो उन्होंने ‘न्यूयॉर्क डेली ट्रिब्यून’ के लिए संवाददाता के रूप में रिपोर्ट किए थे।
2.1857 की क्रांति सर्वप्रथम कहां से प्रारंभ हुई ?
(a) लखनऊ
(b) झांसी
(c) मेरठ
(d) कानपुर
U.P.P.C.S. (Pre) 1990 U.P.P.C.S. (Pre) 1994
उत्तर-(c)
1857 के विद्रोह की औपचारिक शुरुआत 10 मई 1857 को मेरठ छावनी से हुई। यहां तैनात तीसरी कैवेलरी रेजीमेंट के 85 सैनिकों ने 9 मई को चर्बीयुक्त कारतूस छूने से इनकार कर दिया था, जिसके कारण उन्हें कोर्ट-मार्शल कर सज़ा दी गई। इसके अगले ही दिन, यानी 10 मई की शाम को मेरठ के सैनिकों ने खुलकर बगावत कर दी, अपने साथियों को जेल से रिहा किया और दिल्ली की ओर कूच कर गए।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) मेरठ से विद्रोही सैनिक 11 मई की सुबह दिल्ली पहुंचे और वहां 82 वर्षीय मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर को भारत का सम्राट घोषित कर विद्रोह को एक राष्ट्रीय स्वरूप दे दिया। (2) मेरठ के विद्रोह से पहले भी 29 मार्च 1857 को बैरकपुर में मंगल पांडे द्वारा असंतोष की चिंगारी भड़की थी, परंतु संगठित सशस्त्र विद्रोह की वास्तविक शुरुआत मेरठ से ही मानी जाती है।
3. 1857 की क्रांति सर्वप्रथम कहां से प्रारंभ हुई?
(a) लखनऊ
(b) इलाहाबाद
(c) झांसी
(d) मेरठ
(e) उपर्युक्त में से कोई नहीं/उपर्युक्त में से एक से अधिक
66th B.P.S.C. (Pre) (Re-Exam) 2020
उत्तर-(d)
मेरठ ही वह स्थान था जहां से 1857 के विद्रोह की चिंगारी संगठित सशस्त्र विद्रोह की लहर में बदली। 9 मई 1857 को नई एनफील्ड राइफल के कारतूसों के प्रयोग से इनकार करने वाले सैनिकों को सार्वजनिक रूप से अपमानित कर बेड़ियों में डाला गया, जिससे शेष सेना में रोष और बढ़ गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) मेरठ में अंग्रेज सैन्य अधिकारियों की लापरवाही उल्लेखनीय रही—उन्हें विद्रोह की आशंका पहले से थी, फिर भी समय पर कोई एहतियाती कदम नहीं उठाया गया, जिसका लाभ विद्रोही सैनिकों को मिला। (2) मेरठ छावनी उस समय ब्रिटिश भारत की सबसे बड़ी सैनिक छावनियों में एक थी, जहां यूरोपीय व देशी दोनों सैनिक बड़ी संख्या में तैनात थे, बावजूद इसके विद्रोह को तुरंत नहीं रोका जा सका।
4. मंगल पांडे कहां के विप्लव से जुड़े हैं?
(a) बैरकपुर
(b) मेरठ
(c) दिल्ली
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
U.P.P.C.S. (Pre) 2010
उत्तर-(a)
मंगल पांडे का नाम बैरकपुर छावनी की घटना से अमर रूप से जुड़ा है। 29 मार्च 1857 को उन्होंने चर्बीयुक्त कारतूसों के विरोध में अपने एडजुटेंट लेफ्टिनेंट बॉघ और सूबेदार-मेजर ह्यूसन पर हथियार से हमला कर दिया था, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर कोर्ट-मार्शल के बाद फांसी दी गई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) घटना के दौरान केवल सिपाही शेख पलटू ही ऐसा सैनिक था जिसने मंगल पांडे को पकड़ने में अंग्रेज अधिकारियों की सहायता करने की कोशिश की, बाद में उसकी अन्य सैनिकों द्वारा हत्या कर दी गई। (2) भारत सरकार ने मंगल पांडे के सम्मान में वर्ष 1984 में एक स्मारक डाक टिकट जारी किया था।
5. मंगल पांडे सिपाही था-
(a) 19वीं नेटिव इंफैंट्री का
(b) 25वीं नेटिव इंफैंट्री का
(d) 94वीं नेटिव इंफैंट्री का
(c) 49वीं नेटिव इंफैंट्री का
U.P.P.S.C. (R.I.) 2014
उत्तर-(*)
मंगल पांडे वास्तव में 34वीं बंगाल नेटिव इंफैंट्री के सिपाही थे, जो दिए गए विकल्पों में शामिल नहीं है, इसी कारण यह प्रश्न रद्द (*) घोषित किया गया। उनका जन्म 19 जुलाई 1827 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगवा गांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था और वे मात्र 22 वर्ष की आयु में 1849 में सेना में भर्ती हुए थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) 34वीं बंगाल नेटिव इंफैंट्री में ब्राह्मण सैनिकों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक थी, जो चर्बीयुक्त कारतूसों के मुद्दे पर इस रेजीमेंट में असंतोष की तीव्रता का एक कारण बना। (2) घटना के बाद सामूहिक दंड के रूप में 34वीं रेजीमेंट को 6 मई 1857 को अपमान सहित भंग कर दिया गया था।
6.मंगल पांडेय की घटना हुई थी-
(a) मेरठ में
(b) बैरकपुर में
(c) अम्बाला में
(d) लखनऊ में
Uttarakhand P.C.S. (Mains) 2002
उत्तर-(b)
बैरकपुर, जो कोलकाता के निकट हुगली नदी के किनारे स्थित एक प्रमुख सैनिक छावनी थी, मंगल पांडे की घटना का स्थल बना। 29 मार्च 1857 को रविवार के दिन, जब अधिकतर अंग्रेज अधिकारी अवकाश पर थे, मंगल पांडे ने भरी हुई बंदूक के साथ परेड मैदान में आकर साथी सैनिकों को विद्रोह के लिए ललकारा था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) रोचक तथ्य यह है कि बैरकपुर इससे पहले भी 1824 में एक सशस्त्र विरोध का गवाह बन चुका था, जिसका नेतृत्व सिपाही बिंदी तिवारी ने 47वीं बंगाल नेटिव इंफैंट्री के साथ किया था। (2) घटना में घायल होने के बावजूद मंगल पांडे की तुरंत मृत्यु नहीं हुई थी; उन्हें बाद में कोर्ट-मार्शल कर 8 अप्रैल 1857 को फांसी दी गई, जो निर्धारित तारीख 18 अप्रैल से दस दिन पहले थी।
7. अंग्रेजी भारतीय सेना में चर्बी वाले कारतूसों से चलने वाली एनफील्ड राइफल कब शामिल की गई?
(a) नवंबर, 1856
(b) दिसंबर, 1856
(c) जनवरी, 1857
(d) फरवरी, 1857
47th B.P.S.C. (Pre) 2005
उत्तर-(b)
दिसंबर 1856 में ब्रिटिश सरकार ने पुरानी ‘ब्राउन बेस’ (Brown Bess) बंदूक के स्थान पर आधुनिक एनफील्ड राइफल को सेना में शामिल करने का निर्णय लिया। इस राइफल का प्रशिक्षण डम-डम, अंबाला और सियालकोट में दिया जाना था, जहां कारतूस के ऊपरी भाग को मुंह से काटना अनिवार्य था। जनवरी 1857 में बंगाल सेना में यह अफवाह फैल गई कि इन कारतूसों में गाय और सुअर की चर्बी का प्रयोग किया गया है, जिससे हिंदू और मुस्लिम दोनों सैनिकों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) एनफील्ड राइफल वास्तव में इंग्लैंड के एनफील्ड शहर में निर्मित होती थी और यह तत्कालीन ब्राउन बेस मस्कट की तुलना में अधिक सटीक व लंबी दूरी तक मारक क्षमता वाली थी। (2) सैनिक अधिकारियों ने अफवाह की उचित जांच किए बिना इसका तुरंत खंडन कर दिया था, जिससे सैनिकों का अविश्वास और गहरा हो गया और यह विद्रोह का तात्कालिक कारण बन गया।
8.भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का मुख्य तात्कालिक कारण था-
(a) लॉर्ड डलहौजी की हड़प नीति
(b) अंग्रेजों का धर्म में हस्तक्षेप का संदेह
(c) सैनिक असंतोष
(d) भारत का आर्थिक शोषण
R.A.S./R.T.S. (Pre) 1993
उत्तर-(b)
चर्बीयुक्त कारतूसों की अफवाह ने भारतीय सैनिकों में यह दृढ़ धारणा बना दी कि अंग्रेज सरकार जानबूझकर उनके धर्म को भ्रष्ट करना चाहती है। यही संदेह विद्रोह का तात्कालिक (immediate) कारण बना, जबकि भूमि-कर नीतियां, आर्थिक शोषण और रियासतों का विलय इसके दूरगामी (long-term) कारण थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) धार्मिक हस्तक्षेप की धारणा को बल देने वाली एक और घटना थी—1850 का धार्मिक निर्योग्यता निवर्तन अधिनियम (Caste Disabilities Removal Act), जिसके कारण धर्मांतरित व्यक्ति भी पैतृक संपत्ति का अधिकार पा सकते थे, जिसे रूढ़िवादी हिंदू समाज ने हस्तक्षेप के रूप में देखा। (2) ईसाई मिशनरियों की बढ़ती सक्रियता और सती प्रथा, बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथाओं पर कानूनी प्रतिबंधों को भी कुछ वर्गों ने धार्मिक हस्तक्षेप के रूप में देखा, जिससे संदेह और प्रबल हुआ।
9.1857 के विद्रोह के दौरान बहादुर शाह ने किसे ‘साहब-ए-आलम बहादुर’ का खिताब दिया था?
(a) अजीमुल्लाह
(b) विरजिस कादिर
(c) बख्त खान,
(d) हसन खान
U.P.R.O/A.R.O. (Pre) 2016
उत्तर-(c)
बहादुर शाह जफर ने बख्त खान को ‘साहब-ए-आलम बहादुर’ (लॉर्ड गवर्नर जनरल) की उपाधि प्रदान की थी। बख्त खान रोहिलखंड के बिजनौर के एक पठान थे, जो ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में सूबेदार के पद तक पहुंचे थे और प्रथम आंग्ल-अफगान युद्ध में चालीस वर्षों का सैन्य अनुभव रखते थे। वे 1 जुलाई 1857 को बड़ी संख्या में रोहिला सैनिकों के साथ दिल्ली पहुंचे, जिससे विद्रोही सेना के नेतृत्व में निर्णायक सुधार हुआ। यद्यपि बादशाह के पुत्र मिर्जा मुगल को नाममात्र का मुख्य सेनापति घोषित किया गया था, वास्तविक सैनिक नेतृत्व बख्त खान के ही हाथों में था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) दिल्ली के पतन के बाद भी बख्त खान ने हार नहीं मानी और लखनऊ तथा शाहजहांपुर में विद्रोही सेनाओं के साथ मिलकर संघर्ष जारी रखा। (2) बख्त खान की मृत्यु 13 मई 1859 को वर्तमान पाकिस्तान के पख्तूनख्वा क्षेत्र में हुई, यानी उन्हें अपनी मातृभूमि से दूर निर्वासन में अंतिम सांस लेनी पड़ी।
10.1857 में लंदन से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र ‘टाइम्स’ के संवाददाता कौन थे, जिन्होंने लिखा था ‘उत्तरी भारत में गोरे आदमी की गाड़ी को कोई भी मित्रतापूर्ण दृष्टि से नहीं देखता था?’
(a) डब्ल्यू.एच. रसेल
(b) रॉबर्ट पील
(c) ग्लेडस्टन
(d) पामर्स्टन
M.P.P.C.S. (Pre) 2020
उत्तर-(a)
1857 के विद्रोह के दौरान लंदन के ‘टाइम्स’ समाचार-पत्र के लिए युद्ध-संवाददाता विलियम हॉवर्ड रसेल (W.H. Russell) ने भारत से रिपोर्टिंग की थी। उन्होंने लिखा था कि उत्तर भारत में अंग्रेज की सवारी को स्थानीय जनता मित्रतापूर्ण दृष्टि से नहीं देखती थी, जो विद्रोह के दौरान आम भारतीयों में व्याप्त गहरे असंतोष और अविश्वास को दर्शाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) डब्ल्यू.एच. रसेल को आधुनिक युद्ध-पत्रकारिता (war correspondent) का प्रवर्तक माना जाता है, इन्होंने इससे पहले क्रीमिया युद्ध (1853-56) की भी रिपोर्टिंग की थी जिससे ब्रिटिश सेना की चिकित्सा व्यवस्था की कमियां उजागर हुई थीं। (2) रसेल की भारत यात्रा-वृत्तांत बाद में ‘माई डायरी इन इंडिया’ (My Diary in India) नामक पुस्तक के रूप में प्रकाशित हुई, जो 1857 के विद्रोह पर एक महत्वपूर्ण समकालीन ऐतिहासिक स्रोत मानी जाती है।
11. 1857 के बरेली विद्रोह का नेता कौन था?
(a) खान बहादुर
(b) कुंवर सिंह
(c) मौलवी अहमदशाह
(d) विरजिस कादिर
U.P.P.C.S. (Pre) 1998
उत्तर-(a)
बरेली में रुहेलखंड के भूतपूर्व शासकों के वंशज खान बहादुर खान ने 1857 के विद्रोह का नेतृत्व किया। प्रारंभ में ब्रिटिश पेंशन पर जीवन-यापन कर रहे खान बहादुर ने शुरुआत में इस आंदोलन में कोई विशेष रुचि नहीं दिखाई थी, परंतु विद्रोह की लहर तेज होते ही उन्होंने स्वयं प्रशासन की बागडोर संभाल ली और लगभग 40 हजार सैनिकों को संगठित कर एक मजबूत सेना तैयार की। मुगल सम्राट बहादुर शाह द्वितीय ने उन्हें रुहेलखंड क्षेत्र का वायसराय नियुक्त किया था, जिस पद पर उन्होंने हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों के साथ समान व्यवहार करते हुए कुशल प्रशासन का परिचय दिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) विद्रोह के दमन के बाद खान बहादुर खान नेपाल भाग गए, परंतु बाद में पकड़े गए और 24 मार्च 1860 को बरेली में ही उन्हें फांसी दी गई। (2) बरेली छावनी 1857 में सूबेदार बख्त खान के विद्रोह का भी केंद्र थी, जिन्होंने यहां से रोहिला सैनिकों को संगठित कर बाद में दिल्ली का रुख किया और वहां सेना का नेतृत्व संभाला।
12. 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित पहली घटना थी-
(a) कानपुर में विद्रोह और नाना साहब का नेतृत्व संभालना
(b) बेगम हजरत महल द्वारा अवध का नेतृत्व
(c) सैनिकों का दिल्ली के लाल किले पर पहुंचना
(d) झांसी की रानी का विद्रोह
U.P.P.C.S. (Mains) 2008
उत्तर-(c)
11 मई 1857 को मेरठ से कूच कर आए सिपाहियों की टुकड़ी दिल्ली पहुंची और वृद्ध मुगल सम्राट बहादुर शाह द्वितीय से विद्रोह का नेतृत्व स्वीकार करने का आग्रह किया। दिल्ली के लाल किले पर सैनिकों के इस पहुंचने की घटना सबसे पहले हुई थी, क्योंकि कानपुर में नाना साहब ने 5 जून 1857 को, बेगम हजरत महल ने अवध (लखनऊ) में 30 मई 1857 को, और रानी लक्ष्मीबाई ने झांसी में जून 1857 में विद्रोह आरंभ किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) मशहूर उर्दू शायर मिर्ज़ा गालिब उस समय दिल्ली में ही रहते थे और उन्होंने अपनी फारसी रचना ‘दस्तंबू’ में इस दिन (11 मई 1857) की दहशत और अफरातफरी का प्रत्यक्षदर्शी वर्णन किया है। (2) सिपाहियों के दबाव में बहादुर शाह जफर के पास नेतृत्व स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था, जिससे विद्रोह को मुगल बादशाह के नाम पर एक राजनीतिक वैधता मिल गई।
13. महारानी लक्ष्मीबाई की समाधि कहां स्थित है?
(a) मंडला
(b) मांडू
(c) जबलपुर
(d) ग्वालियर
M.P.P.C.S. (Pre) 2013
उत्तर-(d)
महारानी लक्ष्मीबाई का जन्म वाराणसी में हुआ था, जबकि उनकी मृत्यु 17 जून 1858 को ग्वालियर के कोटा-की-सराय क्षेत्र में युद्ध करते हुए हुई। उनकी समाधि आज भी ग्वालियर के फूल बाग क्षेत्र के निकट स्थित है, जहां हर वर्ष श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) जनरल ह्यूरोज ने रानी की वीरता से इतना प्रभावित होकर कहा था कि अगर एक प्रतिशत भारतीय महिलाएं भी इस लड़की जैसी जुझारू हो जाएं, तो अंग्रेजों को भारत छोड़ना पड़ेगा। (2) रानी के साथ झांसी की महिला सेना में झलकारी बाई नामक एक वीरांगना भी थी, जो रानी की समरूप होने के कारण कई बार युद्धभूमि में उनकी जगह डट कर लड़ी थीं।
14.1857 के संग्राम के निम्नलिखित केंद्रों में से सबसे पहले अंग्रेजों ने किसे पुनः अधिकृत किया?
(a) झांसी
(b) मेरठ
(c) दिल्ली
(d) कानपुर
U.P.P.C.S. (Mains) 2015
उत्तर-(c)
ब्रिगेडियर जनरल जॉन निकॉल्सन के नेतृत्व में लगभग तीन महीने की लंबी घेराबंदी के बाद अंग्रेजों ने 20 सितंबर 1857 को दिल्ली पर पुनः अधिकार कर लिया। इस घेराबंदी में अंग्रेज सेना को कश्मीरी गेट से शहर में प्रवेश करना पड़ा, जहां भारी संघर्ष हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) दिल्ली की पुनर्प्राप्ति की लड़ाई में निकॉल्सन स्वयं गंभीर रूप से घायल हुए और कुछ ही दिनों बाद उनकी मृत्यु हो गई। (2) दिल्ली के पतन के बाद बहादुर शाह जफर महरौली में मेजर हडसन द्वारा गिरफ्तार किए गए और उन्हें बर्मा (वर्तमान म्यांमार) के रंगून निर्वासित कर दिया गया, जहां 1862 में उनकी मृत्यु हुई।
15. 1857 के स्वाधीनता संघर्ष की वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की जन्मस्थली है-
(a) आगरा
(b) झांसी
(c) वाराणसी
(d) वृन्दावन
U.P.P.C.S. (Spl.) (Pre) 2008
उत्तर-(c)
रानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवंबर 1835 को वाराणसी के अस्सीघाट क्षेत्र में हुआ था। उनका बचपन का नाम मणिकर्णिका था, जिन्हें प्रेम से ‘मनु’ पुकारा जाता था। उनके पिता मोरोपंत तांबे अंतिम पेशवा बाजीराव द्वितीय की सेवा में थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) बाल्यकाल में ही माता का देहांत होने के कारण मनु अपने पिता के साथ बिठूर आ गई थीं, जहां उन्होंने घुड़सवारी और शस्त्रविद्या जैसी सैनिक कलाएं सीखीं, जो आगे चलकर युद्धक्षेत्र में उनके लिए बहुत उपयोगी सिद्ध हुईं। (2) विवाह से पूर्व झांसी के दरबार में बाजीराव द्वितीय उन्हें स्नेहवश ‘छबीली’ कहकर बुलाते थे, और 1842 में झांसी नरेश गंगाधर राव से विवाह के बाद ही उन्हें ‘लक्ष्मीबाई’ नाम मिला।
16. रानी लक्ष्मीबाई को अंतिम युद्ध में सामना करना पड़ा-
(a) ह्यूरोज
(b) गफ
(c) नील
(d) हैवलॉक
M.P.P.C.S. (Pre) 1992
उत्तर-(a)
रानी लक्ष्मीबाई झांसी के अंतिम मराठा शासक गंगाधर राव की विधवा थीं। पुत्र-उत्तराधिकारी के अभाव में गंगाधर राव की मृत्यु के बाद डलहौजी ने 1854 में व्यपगत सिद्धांत के अंतर्गत झांसी को ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया, जिससे रानी क्रोधित हो उठीं। झांसी में जून 1857 में रानी के नेतृत्व में विद्रोह की शुरुआत हुई। झांसी के पतन के बाद वे ग्वालियर की ओर बढ़ गईं, जहां तात्या टोपे के साथ मिलकर अंग्रेजों को कई बार पराजित करने के बावजूद अंततः जनरल ह्यूरोज से युद्ध करते हुए 17 जून 1858 को वीरगति को प्राप्त हुईं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) झांसी के किले की रक्षा के दौरान रानी के पास ‘कड़क बिजली’, ‘भवानी शंकर’ और ‘घनगर्जन’ नाम की प्रमुख तोपें थीं, जो आठ दिनों तक अंग्रेज सेना पर गोले बरसाती रहीं। (2) रानी का अंतिम संस्कार ग्वालियर के निकट ही स्थानीय लोगों ने किया था, क्योंकि उनकी इच्छा थी कि उनका शरीर अंग्रेजों के हाथ न लगे।
17. 1857 का विद्रोह लखनऊ में किसके नेतृत्व में आगे बढ़ा?
(a) बेगम ऑफ अवध
(b) तात्या टोपे
(c) रानी लक्ष्मीबाई
(d) नाना साहब
48th to 52nd B.P.S.C. (Pre) 2008
उत्तर-(a)
लखनऊ (अवध) में विद्रोह की शुरुआत 30 मई 1857 को हुई थी, जिसका नेतृत्व बेगम हजरत महल (बेगम ऑफ अवध) ने किया। बेगम ने अपने नाबालिग पुत्र बिरजिस कादिर को अवध का नवाब घोषित करते हुए स्वयं प्रशासन की कमान संभाली और अंग्रेजों के विरुद्ध संगठित प्रतिरोध खड़ा किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) अवध में 1856 में डलहौजी द्वारा किए गए विलय (annexation) से वहां की जनता और सैनिकों में गहरा असंतोष पहले से ही व्याप्त था, जिसने विद्रोह को और तीव्र बना दिया। (2) अंग्रेजों द्वारा लखनऊ पर पुनः अधिकार किए जाने के बाद बेगम हजरत महल नेपाल भाग गई, जहां उन्होंने शरण ली और वहीं 1879 में उनकी मृत्यु हुई।
18. वह महिला जिन्होंने अवध में 1857 की क्रांति का नेतृत्व किया था-
(a) लक्ष्मीबाई
(b) अहिल्याबाई
(c) अरुणा आसफ अली
(d) बेगम हजरत महल
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2010
उत्तर-(d)
अवध में 1857 की क्रांति का नेतृत्व बेगम हजरत महल ने किया था। वे नवाब वाजिद अली शाह की पत्नी थीं, और 1856 में अंग्रेजों द्वारा अवध के विलय के बाद उन्होंने इस अन्याय के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का बीड़ा उठाया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) बेगम हजरत महल ने विद्रोह के दौरान एक घोषणापत्र (प्रोक्लेमेशन) जारी किया था, जिसमें उन्होंने अंग्रेजी शासन की आर्थिक और धार्मिक नीतियों की कड़ी आलोचना की थी। (2) लखनऊ में रेजीडेंसी की घेराबंदी (Siege of Lucknow) इस विद्रोह की सबसे लंबी और महत्वपूर्ण घेराबंदियों में से एक मानी जाती है, जो कई महीनों तक चली।
19.लखनऊ में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व किसने किया था?
(a) जीनत महल
(b) नाना साहेब
(c) हजरत महल
(d) तात्या टोपे
U.P. P.C.S. (Pre) (Re-Exam) 2015
उत्तर-(c)
लखनऊ में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व बेगम हजरत महल ने किया, जिन्होंने न केवल सैन्य रणनीति बनाई बल्कि स्थानीय जनता को भी संगठित कर अंग्रेजों के विरुद्ध एक सशक्त मोर्चा तैयार किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) जीनत महल, जिनका नाम विकल्पों में दिया गया है, वास्तव में मुगल सम्राट बहादुर शाह द्वितीय की पत्नी थीं, बेगम हजरत महल से उनका कोई सीधा संबंध नहीं था। (2) ब्रिटिश सेना के कमांडर सर कॉलिन कैम्पबेल ने मार्च 1858 में अंततः लखनऊ पर पुनः अधिकार कर लिया, जिसके बाद बेगम हजरत महल को नेपाल की ओर पलायन करना पड़ा।
20. निम्न में से कौन इलाहाबाद में 1857 के संग्राम का नेता था?
(a) नाना साहेब
(b) अजीमुल्ला
(c) तात्या टोपे
(d) मौलवी लियाकत अली
U.P.P.C.S. (Mains) 2015
उत्तर-(d)
इलाहाबाद में 1857 के विद्रोह की कमान मौलवी लियाकत अली के हाथों में थी। उन्होंने स्थानीय सैनिकों और जनता को संगठित कर अंग्रेजी शासन के विरुद्ध विद्रोह की अगुवाई की, परंतु बाद में जनरल नील के नेतृत्व में अंग्रेज सेना ने यहां के विद्रोह को बर्बरतापूर्वक कुचल दिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) जनरल नील ने इलाहाबाद में विद्रोह दबाने के दौरान अत्यंत कठोर दमनकारी कार्रवाई की, जिसमें बड़ी संख्या में निर्दोष नागरिकों को भी सजा दी गई, जिसकी समकालीन इतिहासकारों ने कड़ी आलोचना भी की। (2) इलाहाबाद का किला, जो मुगल काल में निर्मित हुआ था, इस विद्रोह के दौरान अंग्रेजों के लिए एक महत्वपूर्ण सामरिक केंद्र बना रहा।
21.1857 के संघर्ष में भाग लेने वाले सिपाहियों की सर्वाधिक संख्या थी-
(a) बंगाल से
(b) अवध से
(c) बिहार से
(d) राजस्थान से
U.P. Lower Sub. (Pre) 2015
उत्तर-(b)
1857 के विद्रोह में भाग लेने वाले सिपाहियों की सबसे बड़ी संख्या अवध क्षेत्र से थी। उस दौर में अवध के लगभग हर परिवार से कोई न कोई सदस्य बंगाल सेना में सेवारत था, और अकेले अवध से ही करीब 75 हजार सैनिक सेना में भर्ती थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) अवध के विलय (1856) के बाद बड़ी संख्या में पुराने सैनिकों और जमींदारी सेनाओं को बेरोजगार होना पड़ा, जिससे सैनिक असंतोष और भी गहरा हुआ। (2) अवध से जुड़े सैनिकों के पारिवारिक और सामाजिक संबंध होने के कारण यहां विद्रोह केवल सैनिक न रहकर एक जनांदोलन का रूप ले लिया, जिसमें किसान और स्थानीय जमींदार भी शामिल हुए।
22. नाना साहब का “कमांडर-इन-चीफ” कौन था?
(a) अजीम-उल्लाह
(b) विरजिस कादिर
(c) तात्या टोपे
(d) उक्त में से कोई नहीं
U.P. Lower Sub). (Spl.) (Pre) 2008
उत्तर-(c)
कानपुर में 5 जून 1857 को नाना साहब को पेशवा मानकर स्वतंत्रता की घोषणा की गई थी, और उन्हें इस संघर्ष में अपने सेनापति (कमांडर-इन-चीफ) तात्या टोपे से बड़ी सहायता मिली। तात्या टोपे का वास्तविक नाम रामचंद्र पांडुरंग था, और वे बचपन से ही नाना साहब के घनिष्ठ मित्र थे, क्योंकि उनके पिता पांडुरंग राव टोपे भी बिठूर के पेशवा परिवार से जुड़े थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) नाना साहब और तात्या टोपे ने मिलकर कानपुर में ईस्ट इंडिया कंपनी की भारतीय टुकड़ियों को अपने पक्ष में किया, जिससे नाना साहब की सत्ता कानपुर में स्थापित हुई। (2) कानपुर के पतन के बाद नाना साहब का कोई निश्चित अंत इतिहास में दर्ज नहीं है—माना जाता है कि वे नेपाल की तराई में भाग गए, परंतु उनकी मृत्यु का सही समय और स्थान आज भी अनिश्चित है।
23.अजीमुल्ला खां सलाहकार थे-
(a) नाना साहब के
(b) तात्या टोपे के
(c) रानी लक्ष्मीबाई के
(d) कुंवर सिंह के
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2012
उत्तर-(a)
अजीमुल्ला खां नाना साहब के प्रमुख सलाहकार और कूटनीतिक सहयोगी थे। वे शिक्षित और तेज-तर्रार व्यक्ति थे, जो विदेशी भाषाओं के भी जानकार थे, जिसके कारण नाना साहब उनकी सलाह पर बहुत भरोसा करते थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) अजीमुल्ला खां ने 1854 से 1856 के बीच यूरोप की यात्रा की थी, जिस दौरान उन्होंने इंग्लैंड के विरोधी देशों जैसे रूस और ईरान से संपर्क स्थापित कर भारतीय विद्रोह के लिए समर्थन जुटाने का प्रयास किया था। (2) नाना साहब के पिता की पेंशन बंद करने के डलहौजी के फैसले (1851) के विरुद्ध अजीमुल्ला खां ने इंग्लैंड जाकर ईस्ट इंडिया कंपनी के निदेशक मंडल के समक्ष भी अपील की थी, परंतु उसे सफलता नहीं मिली।
24. 1857 के निम्नलिखित क्रांतिकारियों में से किसका वास्तविक नाम ‘रामचंद्र पांडुरंग’ था?
(a) कुंवर सिंह
(b) तात्या टोपे
(c) नाना साहेब
(d) मंगल पांडेय
U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2010 U.P.P.C.S. (Pre) 2011
उत्तर-(b)
तात्या टोपे का वास्तविक नाम रामचंद्र पांडुरंग था। उनका जन्म महाराष्ट्र के येओला गांव में हुआ था, और वे अपने पिता पांडुरंग राव टोपे के साथ बिठूर आ गए, जहां वे पेशवा के दत्तक पुत्र नाना साहब के घनिष्ठ मित्र बने। झांसी के पतन के बाद उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर बुंदेलखंड में विद्रोह का नेतृत्व किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) ग्वालियर में पराजय के बाद तात्या टोपे ने लगभग एक वर्ष तक सागर, नर्मदा, खानदेश और राजस्थान के क्षेत्रों में सफल गुरिल्ला युद्ध (छापामार युद्धनीति) चलाया, जिससे अंग्रेज सेनाएं उन्हें लंबे समय तक पकड़ नहीं पाईं। (2) अंततः उनके विश्वस्त मित्र मान सिंह के विश्वासघात के कारण वे पारो के जंगलों में सोते समय पकड़े गए और 18 अप्रैल 1859 को शिवपुरी में उन्हें फांसी दी गई।
25. वर्ष 1857 के विद्रोह के संदर्भ में निम्नलिखित में से किसे उसके मित्र ने धोखा दिया तथा जिसे अंग्रेजों द्वारा बंदी बनाकर मार दिया गया ?
(a) नाना साहब
(b) कुंवर सिंह
(c) खान बहादुर खान
(d) तात्या टोपे
I.A.S. (Pre) 2006
उत्तर-(d)
तात्या टोपे को उनके मित्र मान सिंह ने धोखा दिया, जिसके कारण अंग्रेजों ने उन्हें बंदी बनाकर फांसी दे दी। नाना साहब से अलग होने के बाद तात्या टोपे ने अपना मुख्यालय काल्पी ले गए और रानी लक्ष्मीबाई से हाथ मिलाकर बुंदेलखंड में संघर्ष जारी रखा। जनरल ह्यूरोज ने ग्वालियर के ऐतिहासिक युद्ध में उन्हें हराया, जिसमें रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) ग्वालियर खोने के बाद भी तात्या टोपे ने हार नहीं मानी और लगभग एक वर्ष तक सागर-नर्मदा क्षेत्र तथा राजस्थान में अंग्रेजों के लिए सिरदर्द बने रहे, जिससे वे 1857 के विद्रोह के सबसे कुशल गुरिल्ला रणनीतिकार माने जाते हैं। (2) उनकी फांसी 18 अप्रैल 1859 को शिवपुरी (वर्तमान मध्य प्रदेश) में दी गई थी, जो विद्रोह के औपचारिक दमन के बाद भी लंबे समय तक चले प्रतिरोध का प्रमाण है।
26. 1857 के स्वाधीनता संग्राम का प्रतीक था-
(a) कमल और रोटी
(b) बाज
(c) रूमाल
(d) दो तलवारें
M.P.P.C.S. (Pre) 1990
उत्तर-(a)
1857 के विद्रोह के दौरान ‘कमल और रोटी’ को संगठित प्रतिरोध और एकता के प्रतीक के रूप में एक छावनी से दूसरी छावनी तक भेजा जाता था। यह एक प्रकार का गुप्त संकेत था, जो सैनिकों के बीच विद्रोह की तैयारी और एकजुटता को दर्शाता था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) इसी तरह विद्रोह से पहले के महीनों में चपातियों (रोटियों) का गांव-गांव वितरण भी एक रहस्यमय परंपरा के रूप में हुआ था, जिसका सटीक अर्थ इतिहासकार आज तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं कर पाए हैं, परंतु इसे आसन्न उपद्रव के संकेत के रूप में देखा जाता है। (2) विभिन्न छावनियों के सिपाहियों के बीच गुप्त पत्राचार और संदेशवाहकों के माध्यम से सूचनाओं का आदान-प्रदान यह दर्शाता है कि विद्रोह पूर्णतः अनायास नहीं था, बल्कि इसमें एक हद तक समन्वय और योजना भी शामिल थी।
27. जगदीशपुर के राजा थे-
(a) नाना साहब
(b) तात्या टोपे
(c) लक्ष्मी बाई
(d) कुंवर सिंह
43rd B.P.S.C. (Pre) 1999
उत्तर-(d)
जगदीशपुर (वर्तमान बिहार के भोजपुर जिले में स्थित) के राजा कुंवर सिंह थे, जो उज्जैनिया राजपूत वंश से संबंधित एक जमींदार परिवार से थे। 1826 में अपने पिता बाबू साहबजादा सिंह की मृत्यु के बाद उन्होंने जगदीशपुर रियासत की बागडोर संभाली थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) कुंवर सिंह का जन्म 13 नवंबर 1777 को हुआ था, और जब उन्होंने 1857 के विद्रोह का नेतृत्व किया, तब उनकी आयु लगभग 80 वर्ष की थी, जिससे ब्रिटिश इतिहासकारों ने भी उनकी असाधारण वीरता की प्रशंसा की। (2) भारत सरकार ने उनके सम्मान में 23 अप्रैल 1966 को एक स्मारक डाक टिकट जारी किया था, और आरा में उनके नाम पर ‘वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय’ की स्थापना 1992 में की गई।
28. 1857 के विद्रोह का नेतृत्व बिहार में किसने किया?
(a) खान बहादुर खान
(b) कुंवर सिंह
(c) तात्या टोपे
(d) रानी राम कुंआरी
42nd B.P.S.C. (Pre) 1997 48th to 52nd B.P.S.C. (Pre) 2008
उत्तर-(b)
बिहार में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व कुंवर सिंह ने किया था। 25 जुलाई 1857 को जब दानापुर की तीन बटालियनों ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध विद्रोह कर दिया और जगदीशपुर पहुंचीं, तो वृद्ध कुंवर सिंह ने इन सैनिकों के साथ मिलकर हथियार उठा लिए और नेतृत्व अपने हाथों में ले लिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) खान बहादुर खान, जिनका नाम विकल्पों में है, वास्तव में बरेली (रुहेलखंड) के विद्रोह के नेता थे, बिहार से उनका कोई संबंध नहीं था। (2) कुंवर सिंह की रणनीति मुख्यतः छापामार युद्ध पर आधारित थी, जिससे सीमित संसाधनों के बावजूद वे लंबे समय तक अंग्रेजी सेना को छकाते रहे।
29. कुंवर सिंह ने 1857 के विद्रोह का नेतृत्व किस प्रांत से किया?
(a) पंजाब
(b) बंगाल
(c) बिहार
(d) महाराष्ट्र
45th B.P.S.C. (Pre) 2001
उत्तर-(c)
कुंवर सिंह ने बिहार प्रांत से 1857 के विद्रोह का नेतृत्व किया, जिसका केंद्र उनका पैतृक गांव जगदीशपुर (शाहाबाद/भोजपुर जिला) था। 27 जुलाई 1857 को उन्होंने अपनी सेना के साथ आरा नगर पर अधिकार कर लिया और एक स्वतंत्र शासन की घोषणा कर दी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) आरा पर पुनः अधिकार करने के लिए ब्रिटिश मेजर विंसेंट आयर के नेतृत्व में एक बड़ी सेना भेजी गई, जिसने अंततः कुंवर सिंह को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया, परंतु वे जगदीशपुर लौट गए। (2) इसके बाद कुंवर सिंह ने रोहतास, रीवा, बांदा, कालपी, कानपुर और आजमगढ़ तक छापामार युद्ध चलाया, जिससे उनकी सैनिक यात्रा का दायरा कई राज्यों तक फैल गया।
30. कुंवर सिंह, 1857 के विद्रोह के एक प्रमुख नायक थे। वह निम्नलिखित में से किससे संबद्ध थे?
(a) बिहार
(b) मध्य प्रदेश
(c) राजस्थान
(d)
I.A.S. (Pre) 2005
उत्तर-प्रदेश
कुंवर सिंह बिहार के तत्कालीन शाहाबाद जिले (वर्तमान भोजपुर जिले) के जगदीशपुर गांव से संबंधित थे। प्रकृति ने उन्हें अद्भुत शौर्य और सेनानायक के गुणों से संपन्न किया था, इसी कारण उन्हें ‘बिहार का सिंह’ कहा जाता है। उन्होंने शाहाबाद और आरा क्षेत्र में अंग्रेजी सत्ता का तख्तापलट कर अपनी स्वतंत्र सरकार स्थापित की और नाना साहब की सहायता के लिए कानपुर की ओर कालपी से आगे बढ़े। उन्होंने विद्रोह की मशाल रोहतास, मिर्जापुर, बांदा और लखनऊ तक ले जाई, जहां उनका भव्य स्वागत हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) गंगा नदी पार करते समय अंग्रेजों की गोली उनकी कलाई में लगी, जिसे उन्होंने स्वयं तलवार से काटकर नदी में प्रवाहित कर दिया और घायल अवस्था में भी जगदीशपुर पहुंचकर अंतिम जीत हासिल की। इस घटना के कारण ही संक्रमण फैलने से 26 अप्रैल 1858 को उनकी मृत्यु हो गई। (2) उनकी मृत्यु के बाद उनके छोटे भाई अमर सिंह ने नेतृत्व संभाला और दिसंबर 1858 तक अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष जारी रखा।
31. कुंवर सिंह अंग्रेजों के खिलाफ 1857 के विद्रोह में किस जगह शामिल हुए ?
(a) आरा
(b) पटना
(c) बेतिया
(d) वाराणसी
(e) उपर्युक्त में से कोई नहीं/उपर्युक्त में से एक से अधिक
64th B.P.S.C. (Pre) 2018
उत्तर-(a)
कुंवर सिंह आरा में 1857 के विद्रोह में शामिल हुए थे। 25 जुलाई 1857 को दानापुर के विद्रोही सैनिक जगदीशपुर पहुंचे और कुंवर सिंह से जा मिले, जिसके बाद उन्होंने सीधे आरा जिला मुख्यालय पर आक्रमण कर दिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) 27 जुलाई 1857 को कुंवर सिंह की सेना ने आरा नगर पर अधिकार कर लिया और वहां की जेल में बंद आंदोलनकारियों को मुक्त कराया। (2) ब्रिटिश सेना ने आरा पर पुनः अधिकार करने का प्रयास किया, परंतु कुंवर सिंह ने बीबीगंज और बिहिया के जंगलों में अंग्रेजी सेना को कड़ी चुनौती दी, जिससे भोजपुर क्षेत्र लंबे समय तक स्वतंत्र बना रहा।
32. 1857 की क्रांति के दौरान बिहार में क्रांतिकारियों का नेता कौन था?
(a) नामदार खां
(b) बाबू कुंवर सिंह
(c) बिरसा मुंडा
(d) शंकर शाह
(e) उपर्युक्त में से कोई नहीं/ उपर्युक्त में से एक से अधिक
B.P.C.S. (Pre.) 2016
उत्तर-(b)
बिहार में 1857 की क्रांति के दौरान क्रांतिकारियों के नेता बाबू कुंवर सिंह थे। उनका विवाह गया के जमींदार राजा फतेह नारायण सिंह की बेटी से हुआ था, और प्रशासन व युद्धकला की शिक्षा प्राप्त करने के कारण वे अपने क्षेत्र में एक सम्मानित नेता के रूप में जाने जाते थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) बिरसा मुंडा, जिनका नाम विकल्पों में है, वास्तव में 1899-1900 के मुंडा विद्रोह (उलगुलान) के नेता थे, जो 1857 के विद्रोह से लगभग चार दशक बाद हुआ था, इस कारण वे इस प्रश्न के संदर्भ में असंगत हैं। (2) कुंवर सिंह को उनके सैन्य कौशल के लिए ब्रिटिश इतिहासकार होम्स ने भी सराहा था, जिनके अनुसार यदि कुंवर सिंह युवा होते तो अंग्रेजों को 1857 में ही भारत छोड़ना पड़ता।
33. पटना के 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के नेता थे-
(a) हैदर अली खान
(b) राजपूत कुंवर सिंह
(c) जुझार सिंह
(d) कुशल सिंह
43rd B.P.S.C. (Pre) 1999
उत्तर-(b)
पटना के निकट जगदीशपुर के जमींदार राजपूत कुंवर सिंह ने 1857 के विद्रोह का नेतृत्व किया। ब्रिटिश नीतियों के कारण उनकी जमींदारी छिन गई थी, जिससे उनके मन में गहरा रोष था और उन्होंने इस असंतोष को विद्रोह के माध्यम से व्यक्त किया। पटना में पीर अली के नेतृत्व में भी विद्रोह हुआ था, परंतु अंग्रेजों द्वारा इसके दमन के बाद विद्रोही जगदीशपुर पहुंच गए, जहां कुंवर सिंह ने उनका नेतृत्व संभाला।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) हैदर अली खान का नाम विकल्पों में दिया गया है, परंतु ऐतिहासिक रूप से हैदर अली खान और जियोधर सिंह ने वास्तव में गया क्षेत्र में विद्रोहियों को संगठित किया था, न कि पटना में। (2) कुंवर सिंह को उज्जैनिया राजपूत वंश का वंशज माना जाता है, और उनके पूर्वज मालवा के प्रसिद्ध शासक राजा भोज के वंशजों से जुड़े बताए जाते हैं।
34. जगदीशपुर के किस व्यक्ति ने 1857 ई. के विप्लव में क्रांतिकारियों का नेतृत्व किया?
(a) कुंवर सिंह
(b) चंद्रशेखर
(c) तीरत सिंह
(d) राम सिंह
48th to 52nd B.P.S.C. (Pre) 2008
उत्तर-(a)
जगदीशपुर के कुंवर सिंह ने 1857 के विप्लव में क्रांतिकारियों का नेतृत्व किया। आजमगढ़ की विजय के बाद वे जगदीशपुर लौटते समय गंगा नदी पार करते हुए ब्रिटिश सेना की गोली से घायल हुए, जिसके बावजूद उन्होंने अदम्य साहस का परिचय देते हुए संघर्ष जारी रखा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) तीरत सिंह, जिनका नाम विकल्पों में है, वास्तव में खासी विद्रोह (1829-1833) के नेता थे, जो मेघालय क्षेत्र से जुड़ा था और 1857 के विद्रोह से पूर्व की घटना है। (2) जगदीशपुर पहुंचकर कुंवर सिंह को स्थानीय लोगों ने सिंहासन पर बैठाकर राजा के रूप में सम्मानित किया, परंतु घाव में संक्रमण के कारण कुछ ही दिनों बाद उनकी मृत्यु हो गई।
35. बिहार में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व किसने किया था?
(a) बाबू अमर सिंह
(b) हरे कृष्ण सिंह
(c) कुंवर सिंह
(d) राजा शहजादा सिंह
(e) उपर्युक्त में से कोई नहीं/ उपर्युक्त में से एक से अधिक
65th B.P.S.C. (Pre) 2019
उत्तर-(c)
बिहार में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व कुंवर सिंह ने किया था, जो लगभग 80 वर्ष की आयु में भी अदम्य साहस के साथ अंग्रेजी सेना से जूझते रहे। उन्होंने आरा से लेकर रोहतास, कानपुर, लखनऊ, रीवां, बांदा और आजमगढ़ तक निर्णायक युद्ध लड़े और कई स्थानों पर सफलता हासिल की।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) बाबू अमर सिंह, जिनका नाम विकल्पों में है, वास्तव में कुंवर सिंह के छोटे भाई थे, जिन्होंने उनकी मृत्यु के बाद नेतृत्व संभाला और दिसंबर 1858 तक संघर्ष जारी रखा, परंतु मूल नेतृत्व कुंवर सिंह का ही था। (2) राजा शहजादा सिंह कुंवर सिंह के पिता थे, जिनसे उन्हें जगदीशपुर की जमींदारी विरासत में मिली थी।
36. बिहार में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व किसने किया?
(a) नाना साहब
(b) तांत्या टोपे
(c) कुंवर सिंह
(d) मौलवी अहमदुल्लाह
(e) उपर्युक्त में से कोई नहीं/उपर्युक्त में से एक से अधिक
66th B.P.S.C (Pre) 2020
उत्तर-(c)
बिहार में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व कुंवर सिंह ने किया, जिन्होंने आजमगढ़ में सरकारी खजाने पर अधिकार कर छापामार पद्धति से युद्ध जारी रखा, जिसके कारण अंग्रेजी सेना को कई बार पीछे हटना पड़ा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) मौलवी अहमदुल्लाह, जिनका नाम विकल्पों में है, वास्तव में अवध क्षेत्र (फैजाबाद) के विद्रोह के एक प्रमुख नेता थे, बिहार से उनका सीधा संबंध नहीं था। (2) 2018 में बिहार सरकार ने आरा के हार्डिंग पार्क में कुंवर सिंह की प्रतिमा स्थापित करवाई और उस पार्क का नाम ‘वीर कुंवर सिंह आजादी पार्क’ रखा, जो उनकी स्मृति को आज भी जीवित रखता है।
37. आजादी की पहली लड़ाई 1857 में किसने भाग नहीं लिया?
(a) तात्या टोपे
(b) रानी लक्ष्मीबाई
(c) बहादुरशाह जफर
(d) भगत सिंह
M.P.P.C.S. (Pre) 2000
उत्तर-(d)
भगत सिंह ने 1857 की आजादी की पहली लड़ाई में भाग नहीं लिया, क्योंकि उनका जन्म ही 28 सितंबर 1907 को हुआ था, यानी विद्रोह के लगभग पांच दशक बाद। इसके विपरीत रानी लक्ष्मीबाई, बहादुरशाह जफर और तात्या टोपे 1857 के इस संग्राम के प्रत्यक्ष सहभागी और नेतृत्वकर्ता थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) भगत सिंह बीसवीं सदी के क्रांतिकारी आंदोलन से जुड़े थे और उन्हें 23 मार्च 1931 को लाहौर में फांसी दी गई थी, जो 1857 के विद्रोह से पूर्णतः भिन्न कालखंड की घटना है। (2) इस प्रश्न से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम कई चरणों में चला—1857 का सशस्त्र विद्रोह पहला चरण था, जबकि भगत सिंह जैसे क्रांतिकारी बीसवीं सदी के प्रारंभ के क्रांतिकारी आंदोलन के प्रतिनिधि थे।
38. निम्नलिखित में से कौन-सा स्थल राजस्थान में 1857 की क्रांति का केंद्र नहीं था ?
(a) अजमेर
(b) जयपुर
(c) नीमच
(d) आऊवा
R.A.S./ R.T.S. (Pre) 2012
उत्तर-(b)
दिए गए विकल्पों में जयपुर 1857 की क्रांति का केंद्र नहीं था, क्योंकि वहां के शासक ने अंग्रेजों के प्रति सहयोगात्मक रुख अपनाया था। इसके विपरीत अजमेर (नसीराबाद छावनी), नीमच और आऊवा राजस्थान में विद्रोह के सक्रिय केंद्र रहे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) राजस्थान में 1857 की क्रांति सबसे पहले 28 मई 1857 को नसीराबाद छावनी (अजमेर) में भड़की थी, जबकि खेरवाड़ा और ब्यावर की छावनियों के सैनिकों ने इस विद्रोह में भाग नहीं लिया। (2) आऊवा (पाली जिला) में ठाकुर कुशाल सिंह के नेतृत्व में हुआ विद्रोह राजस्थान के सबसे प्रबल और संगठित प्रतिरोधों में गिना जाता है, जिसमें अंग्रेजों को कड़ी चुनौती मिली थी।
39.1857 ई. की क्रांति में अंग्रेजों व जोधपुर की संयुक्त सेना को पराजित करने वाला था-
(a) तात्या टोपे
(b) टोंक के नवाब वजीर खां
(c) महाराज रामसिंह
(d) आरवा के ठाकुर कुशल सिंह
R.A.S. / R.T.S. (Pre) 1993
उत्तर-(d)
आऊवा के ठाकुर कुशाल सिंह चंपावत ने 1857 की क्रांति में अंग्रेजों और जोधपुर की संयुक्त सेना को 8 सितंबर 1857 को बिथौड़ा नामक स्थान पर निर्णायक रूप से पराजित किया था। जोधपुर महाराजा तख्त सिंह ने अंग्रेजों का साथ दिया था, जिससे जागीरदारों में पहले से ही गहरा असंतोष व्याप्त था और कुशाल सिंह ने इसी असंतोष का नेतृत्व किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) इस संघर्ष के दौरान क्रांतिकारियों ने जोधपुर के पॉलिटिकल एजेंट मोकमैसन (Mock Mason) का सिर काटकर आऊवा किले के दरवाजे पर लटका दिया था, जो इस विद्रोह की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक है। (2) अंततः 1858 में ब्रिगेडियर होम्स के नेतृत्व में अंग्रेजी सेना ने आऊवा पर अधिकार कर लिया, और किलेदार को रिश्वत देकर अपने पक्ष में मिला लिया; कुशाल सिंह ने अगस्त 1860 में आत्मसमर्पण किया, परंतु साक्ष्यों के अभाव में उन्हें बाद में रिहा कर दिया गया।
40. निम्नलिखित में से कौन असम में 1857 की क्रांति का नेता था?
(a) दीवान मनिराम दत्त
(b) कंदपेश्वर सिंह
(c) पुरंदर सिंह
(d) पियाली बरुआ
U.P. P.C.S. (Mains) 2007
उत्तर-(a)
असम में 1857 की क्रांति के समय वहां के दीवान मनिराम दत्त (मनिराम देवान) ने अंतिम राजा के पौत्र कंदपेश्वर सिंह को राजा घोषित करते हुए विद्रोह की शुरुआत की, परंतु अंग्रेजों ने शीघ्र ही इस विद्रोह को कुचल कर मनिराम को फांसी दे दी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) मनिराम दत्त को ‘कलिता राजा’ के नाम से भी जाना जाता था, और वे असम में सबसे पहले चाय बागान स्थापित करने वाले व्यक्तियों में से एक थे, जिन्होंने पहले अंग्रेजों के सहयोगी के रूप में कार्य किया था, परंतु बाद में जनहित में उनके विरुद्ध खड़े हो गए। (2) उन्हें 26 फरवरी 1858 को फांसी दी गई, और इस प्रकार असम का यह विद्रोह 1857 के व्यापक राष्ट्रीय आंदोलन का एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय विस्तार माना जाता है।
41. 1857 के विद्रोह का बिहार में 15 जुलाई, 1857 से 20 जनवरी, 1858 तक केंद्र था-
(a) रामपुर
(b) हमीरपुर
(c) धीरपुर
(d) जगदीशपुर
43rd B.P.S.C. (Pre) 1999
उत्तर-(d)
बिहार में 1857 के विद्रोह का केंद्र जगदीशपुर था, जहां जमींदार कुंवर सिंह ने नेतृत्व संभालते हुए शाहाबाद जिले में अंग्रेजी सत्ता को उखाड़कर अपनी स्वतंत्र सरकार स्थापित की थी। अप्रैल 1858 में कुंवर सिंह की मृत्यु के बाद उनके भाई अमर सिंह ने दिसंबर 1858 तक संघर्ष जारी रखा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) अंततः बिहार के इस विद्रोह को पटना डिवीजन (कमिश्नरी) के कमिश्नर विलियम टेलर और बंगाल गोलंदाज फौज के मेजर विंसेंट आयर (Vincent Eyre) के संयुक्त सैनिक अभियान द्वारा दबाया गया। (2) कुंवर सिंह ने अपनी अंतिम विजय जगदीशपुर के निकट हासिल की थी, जहां गंगा नदी पार करते समय गोली लगने पर उन्होंने स्वयं अपनी कलाई काटकर नदी में प्रवाहित कर दी थी, जो उनकी अदम्य इच्छाशक्ति का प्रतीक बन गई।
42.निम्नलिखित में से किसने 1857 में अंग्रेजों से संघर्ष किया?
(a) चंद्रशेखर आजाद
(b) रामप्रसाद बिस्मिल
(c) शहादत खान
(d) माखनलाल चतुर्वेदी
M.P.P.C.S. (Pre) 2000
उत्तर-(c)
1857 के विद्रोह में शहादत खान ने इंदौर क्षेत्र में अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व किया था, जबकि बाकी तीन नाम बीसवीं सदी के क्रांतिकारी आंदोलन और साहित्य से संबंधित हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) चंद्रशेखर आजाद और रामप्रसाद बिस्मिल दोनों ही 1920 के दशक के क्रांतिकारी आंदोलन (जैसे काकोरी कांड) से जुड़े थे, जो 1857 से लगभग सात दशक बाद की घटना है। (2) माखनलाल चतुर्वेदी एक प्रसिद्ध हिंदी कवि और स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने बीसवीं सदी में अपनी रचनाओं के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना जगाने का कार्य किया, परंतु वे 1857 के विद्रोह के समकालीन नहीं थे।
43. निम्नलिखित में से कौन 1857 के विद्रोह में अंग्रेजों का सबसे कट्टर दुश्मन था ?
(a) मौलवी अहमदुल्लाह शाह
(b) मौलवी इंदादुल्लाह
(c) मौलाना फज्लेहक खैराबादी
(d) नवाब लियाकत अली
45th B.P.S.C. (Pre) 2001
उत्तर-(a)
मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने फैजाबाद में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व किया और उन्हें अंग्रेजों का सबसे कट्टर दुश्मन माना जाता है। मूलतः वे तमिलनाडु के अर्काट क्षेत्र के निवासी थे, परंतु फैजाबाद आकर बस गए थे। उन्होंने सभी धर्मों के अनुयायियों से अंग्रेजों के विरुद्ध एकजुट होने का आह्वान किया था। ब्रिटिश अधिकारी थॉमस सीटन ने उनके बारे में लिखा था कि वे अद्भुत साहस और दृढ़ संकल्प वाले व्यक्ति तथा विद्रोहियों में सबसे उत्तम सैनिक थे, और उनकी गिरफ्तारी के लिए अंग्रेजी सरकार ने 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) मौलवी अहमदुल्लाह शाह को चिनहट के युद्ध (30 जून 1857) में उनकी निर्णायक भूमिका के लिए विशेष रूप से याद किया जाता है, जिसमें उन्होंने अंग्रेजी सेना को भारी क्षति पहुंचाई थी। (2) अंततः उन्हें ब्रिटिश सेना कभी जिंदा नहीं पकड़ सकी—बल्कि पुवायां (शाहजहांपुर) के राजा जगन्नाथ सिंह के विश्वासघात के कारण उनकी मृत्यु हुई, जिसके बाद उनका सिर काटकर इनाम के रूप में अंग्रेजों को सौंपा गया।
44. 1857 के विद्रोह को किस उर्दू कवि ने देखा था?
(a) मीर तकी मीर
(b) जोक
(c) गालिब
(d) इकबाल
45th B.P.S.C. (Pre) 2001
उत्तर-(c)
दिए गए विकल्पों में से 1857 के विद्रोह को मिर्जा गालिब ने स्वयं अपनी आंखों से देखा था, क्योंकि वे उस समय दिल्ली में ही निवास कर रहे थे। उन्होंने अपनी फारसी रचना ‘दस्तंबू’ में इस विद्रोह की दहशत, अव्यवस्था और दिल्ली शहर की तत्कालीन स्थिति का प्रत्यक्षदर्शी वर्णन किया है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) मीर तकी मीर और इकबाल दोनों ही गालिब के समकालीन नहीं थे—मीर का निधन 1810 में ही हो गया था, जबकि इकबाल का जन्म 1877 में हुआ, यानी विद्रोह के बीस वर्ष बाद। (2) गालिब ने अपनी डायरी में 11 मई 1857 के दिन दिल्ली में फैली अफरातफरी, सूचनाओं के अभाव और अंग्रेज अधिकारियों की हत्याओं का बहुत संवेदनशील ढंग से चित्रण किया, जो आज भी विद्रोह के एक महत्वपूर्ण समकालीन साहित्यिक स्रोत के रूप में प्रयुक्त होता है।
45. सुप्रसिद्ध उर्दू शायर मिर्जा गालिब का मूल निवास था-
(a) आगरा
(b) दिल्ली
(c) लाहौर
(d) लखनऊ
U.P. Lower Sub. (Pre) 2002
उत्तर-(a)
उर्दू शायर मिर्जा गालिब का जन्म 27 दिसंबर 1797 को आगरा में हुआ था, जबकि उनकी मृत्यु 15 फरवरी 1869 को दिल्ली में हुई, जहां वे बाद में स्थायी रूप से रहने लगे थे और जहां उन्होंने 1857 के विद्रोह की घटनाओं को भी प्रत्यक्ष रूप से देखा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) गालिब का मूल नाम मिर्ज़ा असदुल्लाह बेग़ ख़ान था, और उन्हें उर्दू व फारसी काव्य में अपनी गहन दार्शनिक और भावनात्मक अभिव्यक्ति के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। (2) गालिब की रचनाओं में सूफी विचारधारा, मानवीय पीड़ा और प्रेम के साथ-साथ 1857 के विद्रोह के बाद दिल्ली के पतन की वेदना भी झलकती है, जिसे उन्होंने अपनी पुस्तक ‘दस्तंबू’ में विस्तार से दर्ज किया।
46. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट का उपयोग करते हुए सही चुनिए- सूची-I सूची-2
A. झांसी 1. मौलवी अहमद शाह
B. लखनऊ 2. अज़ीमुल्लाह खां
C. कानपुर 3. बेगम हजरत महल
D. फैजाबाद 4. रानी लक्ष्मीबाई
कूट :
A B C D
(a) 4 3 2 1
(b) 4 2 3 1
(c) 3 4 2 1
(d) 1 2 3 4
U.P.P.C.S. (Pre) 2010
उत्तर-(a)
इस सुमेलन के अनुसार झांसी में रानी लक्ष्मीबाई, लखनऊ में बेगम हजरत महल, कानपुर एवं फतेहपुर क्षेत्र में अज़ीमुल्लाह खां तथा फैजाबाद में मौलवी अहमद शाह (मौलवी अहमदुल्लाह शाह) ने 1857 के विद्रोह का नेतृत्व किया था। ये सभी अपने-अपने क्षेत्रों में अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संगठित प्रतिरोध के प्रमुख चेहरे बने।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) अज़ीमुल्लाह खां वास्तव में नाना साहब के सलाहकार के रूप में प्रसिद्ध हैं, और कानपुर में नाना साहब के साथ मिलकर उन्होंने विद्रोह की रणनीति तैयार की थी, जिनमें यूरोप यात्रा के दौरान विदेशी समर्थन जुटाने का प्रयास भी शामिल था। (2) मौलवी अहमदुल्लाह शाह को ब्रिटिश इतिहासकारों ने भी विद्रोहियों में सबसे कुशल सैनिक माना था, और उनकी गिरफ्तारी के लिए 50,000 रुपये के इनाम की घोषणा की गई थी।
47. सूची-1 (1857 के विप्लव के नायक) को सूची-2 (उनके कार्यक्षेत्र) से सुमलित कीजिए- सूची-1 सूची-2
(a) बख्त खां i. अवध
(b) मौलवी अहमदुल्ला ii. कानपुर
(c) कुंवर सिंह iii. आरा
(d) नाना साहब iv. दिल्ली
कूट :
A B C D
(a) iii i ii iv
(b) iii ii iv i
(c) iv i ii ii
(d) iv iii i ii
(e) ii iv i iii
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2014
उत्तर-(c)
सही सुमेलन के अनुसार बख्त खां का कार्यक्षेत्र दिल्ली, मौलवी अहमदुल्ला का अवध, कुंवर सिंह का आरा (बिहार) तथा नाना साहब का कार्यक्षेत्र कानपुर था। ये सभी 1857 के विद्रोह के अलग-अलग क्षेत्रीय केंद्रों के प्रमुख नेतृत्वकर्ता थे, जिन्होंने स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अंग्रेजी सत्ता के विरुद्ध संघर्ष का संचालन किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) बख्त खां 1 जुलाई 1857 को बड़ी संख्या में रोहिला सैनिकों के साथ दिल्ली पहुंचे थे और बहादुर शाह जफर ने उन्हें ‘साहब-ए-आलम बहादुर’ की उपाधि देकर सेना का वास्तविक नेतृत्व सौंपा था। (2) नाना साहब को कानपुर में 5 जून 1857 को पेशवा मानकर स्वतंत्रता की घोषणा की गई थी, और उन्हें इस संघर्ष में सेनापति तात्या टोपे से प्रमुख सहायता मिली थी।
48. 1857 के विद्रोह से बिहार का कौन-सा भाग अप्रभावित रहा? (i) दानापुर (ii) पटना (iii)आरा (iv)मुजफ्फरपुर (v) मुंगेर निम्नलिखित कूटों से अपना
41st B.P.S.C. (Pre) 1996
उत्तर-चुनें-
1857 के विद्रोह के दौरान बिहार में आरा, दानापुर, गया, पटना, मुजफ्फरपुर तथा शाहाबाद जिला विद्रोह के सक्रिय और प्रमुख केंद्र थे, जहां सैनिक विद्रोह और जनसंघर्ष दोनों देखे गए। इसके विपरीत मुंगेर का क्षेत्र इस विद्रोह की लहर से अपेक्षाकृत अप्रभावित रहा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) दानापुर छावनी में 25 जुलाई 1857 को तीन बटालियनों के सैनिकों ने विद्रोह कर दिया था, जो बाद में जगदीशपुर पहुंचकर कुंवर सिंह के नेतृत्व में संगठित हो गए। (2) पटना में पीर अली के नेतृत्व में भी एक स्वतंत्र विद्रोह हुआ था, जिसे अंग्रेजों ने शीघ्र ही दबा दिया, परंतु इससे प्रभावित कई विद्रोही बाद में जगदीशपुर की ओर चले गए।
49. निम्न में से कौन-सा एक क्षेत्र 1857 के विद्रोह से प्रभावित नहीं था?
(a) झांसी
(b) चित्तौड़
(c) जगदीशपुर
(d) लखनऊ
I.A.S. (Pre) 2005 Uttarakhand P.C.S. (Mains) 2006
उत्तर-(b)
1857 के विद्रोह से चित्तौड़ प्रभावित नहीं था, जबकि झांसी, जगदीशपुर और लखनऊ इस विद्रोह के महत्वपूर्ण केंद्र थे। इन तीन केंद्रों का नेतृत्व क्रमशः रानी लक्ष्मीबाई, कुंवर सिंह एवं बेगम हजरत महल ने किया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) राजस्थान में 1857 के विद्रोह के प्रमुख केंद्र अजमेर (नसीराबाद छावनी), नीमच और आऊवा रहे, जबकि चित्तौड़ और जयपुर जैसे क्षेत्र इस संग्राम से अधिकांशतः अप्रभावित रहे। (2) झांसी, जगदीशपुर और लखनऊ तीनों ही क्षेत्रों में विद्रोह का तात्कालिक कारण स्थानीय शासकों और जमींदारों के विरुद्ध अंग्रेजी हड़प नीति या जागीर छीनने जैसी नीतियां थीं, जिससे स्थानीय जनसमर्थन भी इन नेताओं को आसानी से मिल गया।
50. 1857 के विद्रोह से निम्नांकित में कौन संबद्ध नहीं था ?
(a) बेगम हजरत महल
(b) कुंवर सिंह
(c) ऊधम सिंह
(d) मौलवी अहमदुल्लाह
U.P.P.C..S. (Pre) 1996
उत्तर-(c)
ऊधम सिंह 1857 के विद्रोह से संबद्ध नहीं हैं, क्योंकि वे बीसवीं सदी के पंजाब के क्रांतिकारी थे। जलियांवाला बाग हत्याकांड (1919) का बदला लेने के लिए उन्होंने पंजाब के पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल ओ डायर की लंदन में 13 मार्च 1940 को हत्या कर दी थी, जिसके लिए उन्हें गिरफ्तार कर मृत्युदंड दिया गया। इसके विपरीत बेगम हजरत महल ने लखनऊ में, कुंवर सिंह ने बिहार में तथा मौलवी अहमदुल्लाह ने फैजाबाद में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व किया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) ऊधम सिंह का जन्म 26 दिसंबर 1899 को पंजाब के संगरूर जिले के सुनाम गांव में हुआ था, और जलियांवाला बाग नरसंहार (1919) के वे प्रत्यक्षदर्शी रहे थे, जिसने उन्हें बदले की प्रतिज्ञा लेने के लिए प्रेरित किया। (2) माइकल ओ डायर की हत्या के बाद ऊधम सिंह ने भागने का कोई प्रयास नहीं किया और स्वयं गिरफ्तारी दी; उन्हें 4 जून 1940 को दोषी ठहराया गया और 31 जुलाई 1940 को लंदन की पेंटनविले जेल में फांसी दी गई।
51. 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में किस राजवंश ने अंग्रेजों की सर्वाधिक सहायता की ?
(a) ग्वालियर के सिंधिया
(b) इंदौर के होल्कर
(c) नागपुर के भोंसले
(d) रामगढ़ के लोधी
M.P.P.C.S. (Pre) 2010
उत्तर-(a)
1857 के स्वतंत्रता संघर्ष में ग्वालियर के सिंधिया (महाराजा जयाजीराव सिंधिया) ने अंग्रेजों की सर्वाधिक सहायता की। उनके मंत्री सर दिनकर राव की राजभक्ति की यूरोपीय इतिहासकारों ने भी, हैदराबाद के मंत्री सालारजंग के साथ-साथ, खूब प्रशंसा की है। संकट के क्षणों में गवर्नर-जनरल कैनिंग ने कहा था कि यदि सिंधिया भी विद्रोह में शामिल हो जाएं तो उन्हें कल ही बिस्तर गोल करना होगा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) जून 1858 में जब रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे की सेना ग्वालियर पहुंची, तो सिंधिया की सेना के एक बड़े हिस्से ने विद्रोहियों का साथ दे दिया, जिससे डरकर जयाजीराव सिंधिया स्वयं आगरा में अंग्रेजों की शरण में चले गए। (2) विनायक दामोदर सावरकर ने अपनी पुस्तक ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ में लिखा है कि यदि सिंधिया की सेना और संसाधन पूर्णतः क्रांतिकारियों के साथ आ जाते, तो संभवतः भारत 1857 में ही स्वतंत्र हो जाता।
52. भारत में शिक्षित मध्य वर्ग ने-
(a) 1857 के विद्रोह का विरोध किया था।
(b) 1857 के विद्रोह का समर्थन किया था।
(c) 1857 के विद्रोह से तटस्थता बनाए रखी थी।
(d) देशी शासकों के विरुद्ध युद्ध किया था।
U.P.P.C.S. (Pre) 1998
उत्तर-(c)
1857 के विद्रोह में शिक्षित मध्य वर्ग ने कोई सक्रिय रुचि नहीं ली और तटस्थता बनाए रखी, जो इस महासमर की असफलता के प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है। विद्रोही जिस प्रकार पुरानी मान्यताओं और अंधविश्वासों का सहारा लेते या प्रगतिशील सामाजिक सुधारों का विरोध करते थे, उससे शिक्षित भारतीय उनसे दूर हो गए।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) शिक्षित भारतीयों के मन में यह गलत विश्वास था कि अंग्रेज देश के आधुनिकीकरण में सहायक होंगे, जबकि जमींदारों, पुराने शासकों और सामंती तत्वों के नेतृत्व में लड़ने वाले विद्रोही देश को पीछे ले जाएंगे। (2) कालांतर में शिक्षित भारतीयों ने अपने अनुभवों से यह सीखा कि औपनिवेशिक शासन देश का आधुनिकीकरण करने में असमर्थ साबित हुआ और उसने भारत को गरीब व पिछड़ा बनाए रखा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि 1857 के क्रांतिकारी कहीं अधिक दूरदर्शी सिद्ध हुए।
53. निम्नलिखित वर्गों में किसने 1857 के विद्रोह में भाग नहीं लिया?
(i) खेतिहर मजदूर (ii) साहूकार
(iii) कृषक (iv)जमींदार
निम्नलिखित कूटों से अपना उत्तर चुनें-
(a) केवल (i)
(b) (i) एवं (ii)
(c) केवल (ii)
(d) (ii) एवं (iv)
40th B.P.S.C. (Pre) 1995
उत्तर-(d)
1857 का विद्रोह यद्यपि बहुत बड़े क्षेत्र में फैला और जनता का व्यापक समर्थन उसे मिला, फिर भी समाज के सभी वर्ग इसकी लपेट में नहीं आए। ग्रामीण जनता के आक्रोश का मुख्य निशाना सूदखोर साहूकार बने, इसलिए वे स्वाभाविक रूप से विद्रोह के विरोधी हो गए। इसके विपरीत खेतिहर मजदूर, कृषक और जमींदार वर्ग के बड़े हिस्से ने इस संघर्ष में भाग लिया, विशेष रूप से अवध जैसे क्षेत्रों में।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:(1) ग्वालियर के सिंधिया, इंदौर के होल्कर, हैदराबाद के निजाम, जोधपुर के राजा, भोपाल के नवाब तथा पंजाब के अनेक सिख सरदारों ने विद्रोह को कुचलने में अंग्रेजों की सक्रिय सहायता की, जिसे गवर्नर-जनरल कैनिंग ने ‘तूफान के आगे तरंग-रोधक बांध’ की उपमा दी थी। (2) अवध के बहुत से तालुकदारों (बड़े जमींदारों) ने अंग्रेजों से अपनी जागीरें वापस मिलने का आश्वासन पाकर विद्रोह से किनारा कर लिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वर्ग-हित अक्सर राष्ट्रीय भावना पर हावी रहा।
54. 1857 विद्रोह के समय बैरकपुर में कौन ब्रिटिश कमाण्डिंग ऑफिसर था?
(a) हेनरी लॉरेन्स
(b) कर्नल फिनिस
(c) हैरसे
(d) सर ह्यू व्हीलर
U.P.P.S.C. (R.I.) 2014
उत्तर-(c)
मार्च 1857 में जब 34वीं बंगाल नेटिव इंफैंट्री के सिपाही मंगल पांडेय ने बैरकपुर छावनी में विद्रोह किया, उस समय वहाँ के ब्रिटिश कमाण्डिंग ऑफिसर लेफ्टिनेंट जनरल सर जॉन बेनेट हैरसे (John Bennet Hearsey) थे। उन्होंने ही मंगल पांडेय को गिरफ्तार करने का आदेश दिया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:मंगल पांडेय को 8 अप्रैल, 1857 को फाँसी दी गई थी। उनके इस विद्रोह को 1857 के महासंग्राम की पहली चिंगारी माना जाता है। बाद में अंग्रेजों ने 34वीं बंगाल नेटिव इंफैंट्री रेजिमेंट को भंग कर दिया था।
55. 1857 में किसने इलाहाबाद को आपातकालीन मुख्यालय बनाया था?
(a) लॉर्ड कैनिंग
(b) लॉर्ड कार्नवालिस
(c) लॉर्ड वेलेजली
(d) लॉर्ड विलियम बैंटिक
U.P.P.C.S. (Pre) 2005
उत्तर-(a)
1857 के विद्रोह के दौरान जब कलकत्ता में प्रशासनिक संकट गहरा गया, तब तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड कैनिंग ने इलाहाबाद को आपातकालीन मुख्यालय बनाया। इलाहाबाद उस समय उत्तर भारत में ब्रिटिश सैन्य कार्रवाई के लिए एक रणनीतिक केंद्र था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:लॉर्ड कैनिंग ने ही 1857 के विद्रोह के बाद “गदर अधिनियम” (Act for the Better Government of India, 1858) के अंतर्गत ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त करते हुए भारत का शासन सीधे ब्रिटिश क्राउन को सौंपा। इसी कारण उन्हें भारत का प्रथम वायसराय भी कहा जाता है।
56. इनमें से किसने 1857 के विद्रोह में सक्रिय भाग लिया था?
(a) नाना साहेब (कानपुर)
(b) बेगम हजरत महल (लखनऊ)
(c) मौलवी अहमदुल्लाह (फैजाबाद)
(d) बेगम जीनत महल (दिल्ली)
(e) उपर्युक्त में से कोई नहीं/उपर्युक्त में से एक से अधिक
66th B.P.S.C (Pre) 2020
उत्तर-(e)
1857 के विद्रोह में उपर्युक्त सभी नेताओं ने भाग लिया — नाना साहेब ने कानपुर में, बेगम हजरत महल ने लखनऊ में (जून 1857 से), और मौलवी अहमदुल्लाह ने फैजाबाद में विद्रोह का नेतृत्व किया। बेगम जीनत महल, जो अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर की पत्नी थीं, ने अप्रत्यक्ष रूप से विद्रोहियों की सहायता की। चूँकि सभी विकल्प (a से d) सही हैं, अतः उत्तर (e) — “एक से अधिक” — सही है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस कद्र को अवध का नवाब घोषित किया था। नाना साहेब मराठा पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र थे, जिनकी पेंशन डलहौजी ने “हड़प नीति” के अंतर्गत बंद कर दी थी — यही उनके विद्रोह का प्रमुख कारण बना।
57. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के अंत में दिए कूट से सही उत्तर चुनिए सूची-I (क्रांतिकारियों के नाम) सूची-II (स्थान)
A. नाना साहेब 1. दिल्ली
B. नवाब हामिद अली खान 2. कानपुर
C. मौलवी अहमूद उल्लाह 3. लखनऊ
D. मनी राम दीवान 4. असम
कूट :
A B C D
(a) 1 2 4 3
(b) 1 2 3 4
(c) 2 1 4 3
(d) 2 1 3 4
U.P.R.O/A.R.O. (Pre) 2016
उत्तर-(d)
सही सुमेलन इस प्रकार है — नाना साहेब: कानपुर, नवाब हामिद अली खान: दिल्ली, मौलवी अहमूद उल्लाह (अहमदुल्ला शाह): लखनऊ, मनी राम दीवान: असम। इस आधार पर सही कूट (d) अर्थात् A-2, B-1, C-3, D-4 है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:मनी राम दीवान असम के अहोम राजवंश के एक प्रमुख अधिकारी थे जिन्होंने 1857 के विद्रोह की प्रेरणा से असम में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध षड्यंत्र रचा। उन्हें बाद में पकड़कर फाँसी दे दी गई। मौलवी अहमदुल्ला शाह को “नक्कारशाह” भी कहा जाता था और उनकी वीरता के कारण अंग्रेज उन्हें “लाइट ऑफ इंडिया” कहते थे।
58. सिपाही विद्रोह के समय भारत का गवर्नर जनरल कौन था?
(a) लॉर्ड कैनिंग
(b) लॉर्ड डलहौजी
(c) लॉर्ड हार्डिंग
(d) लॉर्ड लिटन
I.A.S. (Pre) 2006
उत्तर-(a)
1857 के सिपाही विद्रोह के समय भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड कैनिंग (कार्यकाल: 1856–62 ई.) थे। वे ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा नियुक्त भारत के अंतिम गवर्नर जनरल और ब्रिटिश क्राउन के अधीन भारत के प्रथम वायसराय बने।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:लॉर्ड कैनिंग को उनकी उदार क्षमादान नीति के कारण “क्लेमेंसी कैनिंग” (Clemency Canning) की उपाधि दी गई थी। लॉर्ड डलहौजी, जो कैनिंग के पूर्ववर्ती थे, की “हड़प नीति” (Doctrine of Lapse) 1857 के विद्रोह के प्रमुख कारणों में से एक मानी जाती है।
59. 1857 के विद्रोह के समय भारत का गवर्नर जनरल कौन था?
(a) लॉर्ड डलहौजी
(b) लॉर्ड मिंटो
(c) लॉर्ड कैनिंग
(d) लॉर्ड बेंटिक
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2005
U.P.P.C.S. (Pre) 1990
U.P.P.C.S. (Pre) 2012
U.P.R.O./A.R.O. (Mains) 2013
उत्तर-(c)
1857 के विद्रोह के समय भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड कैनिंग थे। यह विद्रोह 10 मई, 1857 को मेरठ में आरंभ हुआ और शीघ्र ही उत्तर एवं मध्य भारत के विस्तृत क्षेत्रों में फैल गया। कैनिंग ने इस विद्रोह को दबाने के लिए सैनिक एवं प्रशासनिक दोनों मोर्चों पर सक्रिय कदम उठाए।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:लॉर्ड कैनिंग के शासनकाल में ही 1858 ई. में भारत सरकार अधिनियम (Government of India Act) पारित हुआ, जिसके द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त कर भारत का प्रशासन सीधे ब्रिटिश संसद को सौंप दिया गया। साथ ही, 1 नवंबर 1858 को महारानी विक्टोरिया का घोषणापत्र (Queen’s Proclamation) जारी किया गया।
60. 1857 ई. के विद्रोह के समय भारत का गवर्नर जनरल कौन था?
(a) लॉर्ड हेस्टिग्ज
(b) लॉर्ड कैनिंग
(c) लॉर्ड एमहर्स्ट
(d) लॉर्ड ऑकलैंड
Uttarakhand P.C.S. (Pre.) 2016
उत्तर-(b)
1857 के विद्रोह के दौरान भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड कैनिंग (1856–62 ई.) थे। वे कंपनी के अंतिम गवर्नर जनरल तथा ब्रिटिश सम्राट के अधीन नियुक्त भारत के प्रथम वायसराय बने। अन्य विकल्पों में लॉर्ड हेस्टिग्ज (1813–23), लॉर्ड एमहर्स्ट (1823–28) और लॉर्ड ऑकलैंड (1836–42) — ये सभी 1857 से पहले गवर्नर जनरल रह चुके थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:लॉर्ड कैनिंग के कार्यकाल में भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code, 1860) लागू की गई, जो मैकाले की अध्यक्षता में बनाई गई थी। यह संहिता आज भी (कुछ संशोधनों के साथ) भारतीय न्याय व्यवस्था की आधारशिला मानी जाती है।
61. 1857 में भारत का गवर्नर जनरल कौन था?
(a) वेलेस्ली
(b) डलहौजी
(c) कैनिंग
(d) मिंटो
56th to 59th B.P.S.C. (Pre) 2015
उत्तर-(c)
1857 में भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड कैनिंग थे। वेलेस्ली (1798–1805) और डलहौजी (1848–56) कैनिंग से पहले इस पद पर रह चुके थे, जबकि मिंटो (1807–13) उनसे भी पहले। कैनिंग ने ही विद्रोह के दौरान ब्रिटिश सेना को पुनर्संगठित किया और जून 1858 तक विद्रोह को पूरी तरह दबा दिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:लॉर्ड डलहौजी की “व्यपगत सिद्धांत” (Doctrine of Lapse) नीति के अंतर्गत झाँसी, सतारा, नागपुर जैसी कई रियासतें अंग्रेजी साम्राज्य में मिला ली गई थीं, जो 1857 के विद्रोह के प्रमुख राजनीतिक कारणों में से एक बनी। लॉर्ड कैनिंग ने 1859 में इस नीति को औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया।
62. आधुनिक इतिहासकार जिसने 1857 के विद्रोह को स्वतंत्रता की पहली लड़ाई कहा, था-
(a) डॉ. आर. सी. मजूमदार
(b) डॉ. एस. एन. सेन
(d) अशोक मेहता
(c) वी. डी. सावरकर
M.P.P.C.S. (Pre) 2008
उत्तर-(c)
वीर विनायक दामोदर सावरकर ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक “The Indian War of Independence 1857” में 1857 के विद्रोह को महज सैनिक विद्रोह नहीं, बल्कि एक सुनियोजित राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम बताया और इसे “प्रथम स्वतंत्रता संग्राम” की संज्ञा दी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:सावरकर की यह पुस्तक 1909 में लिखी गई थी, किंतु ब्रिटिश सरकार ने इसे प्रकाशन से पहले ही प्रतिबंधित कर दिया — यह भारत में प्रतिबंधित होने वाली पहली पुस्तकों में से एक है। इसके विपरीत, डॉ. आर. सी. मजूमदार ने इसे “न तो प्रथम, न राष्ट्रीय, न स्वतंत्रता संग्राम” कहकर सावरकर की व्याख्या को चुनौती दी थी।
63. निम्नलिखित में किसने 1857 के विद्रोह को एक ‘षड्यंत्र’ की संज्ञा दी?
(a) सर जेम्स आउट्रम एवं डब्ल्यू. टेलर
(b) सर जॉन के.
(c) सर जॉन लॉरेंस
(d) टी.आर. होल्म्स
40th B.P.S.C. (Pre) 1995
उत्तर-(a)
सर जेम्स आउट्रम और डब्ल्यू. टेलर ने 1857 के विद्रोह को एक हिंदू-मुस्लिम षड्यंत्र का परिणाम बताया। आउट्रम का मानना था कि यह मुख्यतः मुस्लिम षड्यंत्र था जिसमें हिंदुओं की शिकायतों का उपयोग किया गया। अन्य इतिहासकारों के दृष्टिकोण भिन्न रहे — सर जॉन लॉरेंस ने इसे केवल “सैनिक विद्रोह” कहा, जबकि टी.आर. होल्म्स ने इसे बर्बरता और सभ्यता के बीच संघर्ष बताया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:सर जॉन के. (John Kaye) ने इसे “राष्ट्रीय विद्रोह” की संज्ञा दी थी। बेंजामिन डिज़रायली ने ब्रिटिश संसद में इसे “राष्ट्रीय विद्रोह” कहा, जबकि तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री पामर्स्टन ने इसे केवल “सैनिक असंतोष” माना था।
64. 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम असफल हुआ, क्योंकि-
(a) भारतीय सिपाहियों में उद्देश्य की एकता की कमी थी
(b) प्रायः भारतीय राजाओं ने ब्रिटिश सरकार का साथ दिया
(c) ब्रिटिश सिपाही कहीं अच्छे सज्जित तथा संगठित थे
(d) उपर्युक्त सभी
U.P. Lower Sub. (Pre) 1998
उत्तर-(d)
1857 के विद्रोह की असफलता के लिए उपर्युक्त सभी कारण जिम्मेदार थे। भारतीय सिपाहियों में वीरता तो थी, परंतु अनुशासन और उद्देश्य की एकता का अभाव था। बंबई और मद्रास की सेनाएं ब्रिटिश-समर्थक बनी रहीं। पटियाला, जींद, ग्वालियर और हैदराबाद जैसी प्रमुख रियासतों ने विद्रोह दमन में अंग्रेजों की सहायता की। रणनीति और अस्त्र-शस्त्र की दृष्टि से भी ब्रिटिश सेनाएं कहीं बेहतर थीं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:ग्वालियर के दीवान सर दिनकर राव और हैदराबाद के मंत्री सालारजंग की ब्रिटिश-निष्ठा की यूरोपीय इतिहासकारों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की। इसके अतिरिक्त, विद्रोह का भौगोलिक विस्तार मुख्यतः उत्तर-पश्चिमी प्रांतों तक सीमित रहा — दक्षिण भारत और पंजाब के अधिकांश क्षेत्र इससे अप्रभावित रहे।
65. 1857 के विद्रोह के समय ब्रिटिश प्रधानमंत्री कौन था?
(a) चर्चिल
(b) पामर्स्टन
(c) एटली
(d) ग्लेडस्टोन
U.P.P.C.S. (Pre) 1991
उत्तर-(b)
1857 की क्रांति के समय ब्रिटेन के प्रधानमंत्री विस्कॉन्ट पामर्स्टन (हेनरी जॉन टेंपल, तृतीय विस्कॉन्ट पामर्स्टन) थे, जिनका कार्यकाल 1855–1858 और पुनः 1859–1865 तक रहा। अन्य विकल्पों में चर्चिल (1940–45, 1951–55), एटली (1945–51) और ग्लेडस्टोन (1868–74 आदि) — ये सभी 1857 के बाद के प्रधानमंत्री थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:पामर्स्टन ने 1857 के विद्रोह के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन को समाप्त करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। 1858 में उनकी ही सरकार के दौरान “भारत सरकार अधिनियम” (Government of India Act, 1858) पारित हुआ, जिसने भारत का नियंत्रण ब्रिटिश क्राउन को सौंपा।
66. विचार कीजिए-
कथन (क) : 1857 में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम ब्रिटिश सरकार स्वतंत्रता प्राप्त करने में असफल रहा।
कारण (का) : बहादुरशाह जफर के नेतृत्व को जनसहयोग नहीं मिला था और अधिकांश महत्वपूर्ण रियासतों के शासक उनका साथ देने में कतरा गए।
नीचे दिए गए कोड में सही उत्तर चुनिए-
(a) (क) और (का) दोनों सत्य हैं और (का), (क) का सही स्पष्टीकरण है।
(b) (क) और (का) दोनों सत्य हैं, परंतु (का), (क) का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
(c) (क) सत्य है और (का) असत्य है।
(d) (क) असत्य है, परंतु (का) सत्य है।
39th B.P.S.C. (Pre) 1994
उत्तर-(a)
प्रश्नगत कथन और कारण दोनों सत्य हैं और कारण, कथन का सही स्पष्टीकरण भी है, अतः सही उत्तर (a) है। 1857 के विद्रोह की असफलता में सर्वाधिक निर्णायक भूमिका अधिकांश प्रमुख रियासतों के शासकों द्वारा अंग्रेजों का साथ देने की रही। 82 वर्षीय बहादुरशाह जफर एक कमजोर और अनिच्छुक नेता थे, जिनके आह्वान पर विद्रोहियों में वांछित एकजुटता नहीं आ सकी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:बहादुरशाह जफर को विद्रोह के बाद 1858 में रंगून (म्यांमार) निर्वासित कर दिया गया, जहाँ 1862 में उनकी मृत्यु हुई। वे एक कवि भी थे और “जफर” उनका उर्दू तखल्लुस (उपनाम) था।
67. निम्नलिखित में से किन ब्रिटिश अधिकारियों ने लखनऊ में अपना जीवन खोया था?
1. जनरल जॉन निकलसन 2, जनरल नील
3. मेजर जनरल हैवलॉक 4. सर हेनरी लॉरेंस
निम्नलिखित कूट की सहायता से सही उत्तर चुनिए-
कूट :
(a) 1, 2 और 3
(b) 1, 3 और 4
(c) 2, 3 और 4
(d) उपर्युक्त सभी
U.P.P.C.S. (Pre) 2008
उत्तर-(c)
जनरल जॉन निकलसन का निधन लखनऊ में नहीं, बल्कि दिल्ली में हुआ था — वे 14 सितंबर, 1857 को दिल्ली पर अधिकार के दौरान घायल हुए और 23 सितंबर को उनकी मृत्यु हुई। लखनऊ में ब्रिटिश रेजीडेंसी की रक्षा करते हुए सर हेनरी लॉरेंस, मेजर जनरल हैवलॉक और जनरल नील ने अपने प्राण गंवाए। इस प्रकार विकल्प 2, 3 और 4 सही हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:लखनऊ की ब्रिटिश रेजीडेंसी जुलाई से नवंबर 1857 तक घिरी रही — यह ब्रिटिश इतिहास की सबसे लंबी घेराबंदियों में से एक थी। सर हेनरी लॉरेंस के अंतिम शब्द थे — “यहाँ किसी ऐसे व्यक्ति को मत दफनाना जो मुझसे बेहतर था।” लखनऊ की रेजीडेंसी आज भी एक संरक्षित स्मारक है।
68. अंग्रेज राजपूत राज्यों में 1857 के विद्रोह को दबाने में सफल रहे, क्योंकि-
(a) स्थानीय शासकों ने क्रांतिकारियों का साथ नहीं दिया
(b) शिक्षित मध्य वर्ग अंग्रेजों का समर्थन कर रहा था
(c) छावनियों के सैनिक राजपूताना से बाहर के क्रांतिकारियों का नेतृत्व स्वीकारने को तैयार नहीं थे
(d) समाचार-पत्र क्रांतिकारियों के सही उद्देश्यों को नहीं दर्शा पाए
R.A.S./R.T.S. (Pre) 1996
उत्तर-(a)
राजपूताना (राजस्थान) में 1857 के विद्रोह के दमन का प्रमुख कारण यह रहा कि वहाँ के स्थानीय देशी शासकों ने विद्रोहियों का साथ देने से परहेज किया और अंग्रेजों के प्रति वफादार बने रहे। राजपूताना में जो भी विद्रोह की चिंगारियाँ उठीं — जैसे नसीराबाद, नीमच, और एरिनपुरा की छावनियों में — वे स्थानीय राजाओं के सहयोग के अभाव में दब गईं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:राजपूताना में एकमात्र उल्लेखनीय विद्रोह कोटा में हुआ, जहाँ जनरल रॉबर्ट्स को विद्रोहियों से लड़ना पड़ा। तात्या टोपे ने राजस्थान में विद्रोह की लौ जगाने की कोशिश की, किंतु स्थानीय राजाओं के सक्रिय सहयोग के बिना यह प्रयास सफल नहीं हो सका।
69. 1857 का विद्रोह मुख्यतः किस कारण से असफल रहा?
(a) हिंदू-मुस्लिम एकता की कमी
(b) किसी सामान्य योजना और केंद्रीय संगठन की कमी
(c) इसके प्रभाव का सीमित क्षेत्र
(d) जमींदारों की सहभागिता
41st B.P.S.C. (Pre) 1996
उत्तर-(b)
1857 के विद्रोह की असफलता का सबसे मूलभूत कारण केंद्रीय नेतृत्व और समन्वित योजना का अभाव था। विभिन्न क्षेत्रों के नेता — नाना साहेब, बेगम हजरत महल, तात्या टोपे, झाँसी की रानी — अपने-अपने क्षेत्र में लड़ते रहे, लेकिन उनके बीच कोई संगठित राष्ट्रीय रणनीति नहीं थी। किसी क्षेत्र से अंग्रेजी सत्ता उखाड़ने के बाद वहाँ क्या स्थापित किया जाए, इसका कोई स्पष्ट विकल्प उनके पास नहीं था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:मूलतः विद्रोह 31 मई, 1857 को एक साथ आरंभ होने की योजना थी, किंतु 10 मई को मेरठ में यह समय से पहले ही फूट पड़ा। इस असमय विस्फोट ने विद्रोहियों की समन्वय योजना को पहले ही ध्वस्त कर दिया।
70. निम्नलिखित में से किसका नाम 1857 के विद्रोह से नहीं जुड़ा है?
(a) कर्नल सेंट लेगर
(b) लेफ्टिनेंट कर्नल गिब्स
(c) कर्नल वैलेस
(d) उपर्युक्त सभी
U.P.P.C.S. (Mains) 2017
उत्तर-(d)
प्रश्न में दिए गए तीनों नाम — कर्नल सेंट लेगर, लेफ्टिनेंट कर्नल गिब्स और कर्नल वैलेस — में से कोई भी 1857 के विद्रोह से प्रत्यक्ष रूप से संबद्ध नहीं है। अतः सही उत्तर (d) “उपर्युक्त सभी” है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:1857 के विद्रोह से जुड़े प्रमुख ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों में जनरल जॉन निकलसन (दिल्ली), सर हेनरी लॉरेंस (लखनऊ), सर ह्यू रोज (झाँसी) और जनरल नील (कानपुर-लखनऊ) प्रमुख थे। विद्रोह को कुचलने में सर कॉलिन कैंपबेल की भूमिका सर्वाधिक निर्णायक रही, जिन्होंने लखनऊ को अंततः पुनः जीता।
71. 1857 के संग्राम को प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का नाम किसने दिया?
(a) वी.ए. स्मिथ
(b) पी.ई. रॉबर्ट्स
(c) वी. डी. सावरकर
(d) उपर्युक्त सभी
U.P.P.C.S. (Mains) 2015
उत्तर-(c)
वी. डी. सावरकर ने ही 1857 के संग्राम को “प्रथम स्वतंत्रता संग्राम” की संज्ञा दी। उनकी पुस्तक “The Indian War of Independence 1857” (1909) इस विषय पर एक क्रांतिकारी दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। वी. ए. स्मिथ और पी. ई. रॉबर्ट्स ब्रिटिश इतिहासकार थे जो इसे केवल “सैनिक विद्रोह” मानते थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:सावरकर ने यह पुस्तक लंदन में रहते हुए इंडिया हाउस में लिखी थी। ब्रिटिश सरकार ने इसे भारत और ब्रिटेन दोनों में प्रतिबंधित कर दिया, फिर भी यह पुस्तक गुप्त रूप से भारत में पहुँची और क्रांतिकारियों को प्रेरित करती रही। स्वतंत्र भारत में यह पुस्तक 1947 के बाद ही खुलकर प्रकाशित हो सकी।
72. महारानी विक्टोरिया ने भारतीय प्रशासन को ब्रिटिश ताज के नियंत्रण में लेने की घोषणा कब की थी?
(a) 1 नवंबर, 1858
(b) 31 दिसंबर, 1857
(c) 6 जनवरी, 1958
(d) 17 नवंबर, 1859
48th to 52nd B.P.S.C. (Pre) 2008
उत्तर-(a)
1857 की क्रांति के दमन के पश्चात 1 नवंबर, 1858 को महारानी विक्टोरिया ने इलाहाबाद दरबार में लॉर्ड कैनिंग के माध्यम से घोषणापत्र पढ़कर भारतीय प्रशासन को ब्रिटिश क्राउन के अधीन लेने की औपचारिक घोषणा की। इसके साथ ही ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन स्थायी रूप से समाप्त हो गया। एक भारत सचिव (Secretary of State for India) और 15 सदस्यीय इंडिया काउंसिल की स्थापना की गई तथा लॉर्ड कैनिंग को भारत का प्रथम वायसराय नियुक्त किया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:इस घोषणापत्र को “भारतीयों का मैग्नाकार्टा” भी कहा जाता है। इसमें धर्म के आधार पर कोई भेदभाव न करने, रियासतों को हड़पने की नीति छोड़ने और भारतीयों को योग्यता के आधार पर सरकारी सेवाओं में लेने का आश्वासन दिया गया था — हालाँकि इनमें से अधिकांश वादे व्यवहार में पूरे नहीं हुए।
73. निम्नलिखित में कौन-सा आयोग 1857 के विद्रोह के दमन के बाद भारतीय फौज के नव संगठन से संबंधित है?
(a) पब्लिक सर्विस आयोग
(b) पील आयोग.
(c) हंटर आयोग
(d) साइमन कमीशन
45th B.P.S.C. (Pre) 2001
उत्तर-(b)
1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश सरकार ने भारतीय सेना के पुनर्गठन के लिए जुलाई 1858 में मेजर जनरल जोनाथन पील की अध्यक्षता में एक रॉयल कमीशन (पील आयोग) गठित किया। इस आयोग की सिफारिशों के आधार पर सेना को जाति, धर्म और क्षेत्र के आधार पर विभाजित किया गया। यूरोपीय सैनिकों की संख्या 45,000 से बढ़ाकर 65,000 कर दी गई, जबकि भारतीय सैनिकों की संख्या 2,38,000 से घटाकर 1,40,000 कर दी गई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:पील आयोग ने यह भी सिफारिश की कि तोपखाना (Artillery) विभाग पूरी तरह यूरोपीय सैनिकों के नियंत्रण में रहे, क्योंकि 1857 के विद्रोह में तोपों के भारतीय सैनिकों के हाथ लगने से अंग्रेजों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। बंगाल में यूरोपीय और भारतीय सैनिकों का अनुपात 1:2, जबकि मद्रास और बंबई में 1:3 रखा गया।
74. “तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम न प्रथम, न राष्ट्रीय और न ही स्वतंत्रता संग्राम था।” यह कथन संबद्ध है-
(a) आर.सी. मजूमदार से
(b) एस.एन. सेन से
(c) ताराचंद से
(d) वी.डी. सावरकर से
U.P.P.C.S. (Mains) 2010
उत्तर-(a)
प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. आर.सी. मजूमदार ने अपनी पुस्तक “The Sepoy Mutiny and the Rebellion of 1857” (1957) में यह विवादास्पद मत व्यक्त किया कि 1857 का विद्रोह न तो प्रथम था, न राष्ट्रीय था और न ही स्वतंत्रता संग्राम था। उनके अनुसार इसमें राष्ट्रव्यापी चेतना या संगठित राष्ट्रवाद का अभाव था और यह मुख्यतः सैनिक असंतोष और स्थानीय हितों से प्रेरित था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:मजूमदार के इस मत के विपरीत वी.डी. सावरकर इसे “प्रथम स्वतंत्रता संग्राम” मानते थे, जबकि एस.एन. सेन ने मध्यमार्गी दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा कि “जो धर्म के लिए शुरू हुआ, वह स्वतंत्रता के लिए समाप्त हुआ।” ये तीनों पुस्तकें 1857 की शताब्दी (1957) में प्रकाशित हुईं।
75. भारतीय स्वाधीनता आंदोलन का सरकारी इतिहासकार था-
(a) आर.सी. मजूमदार
(b) ताराचंद्र
(c) वी.डी. सावरकर
(d) एस.एन. सेन
U.P.P.C.S. (Pre) 2010
उत्तर-(d)
सुरेंद्रनाथ सेन (एस.एन. सेन) को भारत सरकार ने 1857 के विद्रोह का आधिकारिक इतिहास लिखने का कार्य सौंपा था। उनकी पुस्तक “Eighteen Fifty-Seven” (अट्ठारह सौ सत्तावन) 1957 में — विद्रोह की शताब्दी पर — प्रकाशित हुई। उन्होंने इसे एक सैनिक विद्रोह से बढ़कर जनांदोलन की दिशा में बढ़ता हुआ संघर्ष बताया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:एस.एन. सेन ने लिखा — “जो धर्म के नाम पर शुरू हुआ, वह स्वतंत्रता की माँग पर समाप्त हुआ।” वे आर.सी. मजूमदार के विपरीत 1857 में एक प्रकार के राष्ट्रीय भाव की उपस्थिति स्वीकार करते थे, भले ही वह पूर्णतः विकसित राष्ट्रवाद न हो।
76. साम्राज्ञी विक्टोरिया ने 1858 की घोषणा में भारतीयों को बहुत सी चीजें दिए जाने का आश्वासन दिया था। निम्न आश्वासनों में से कौन-सा ब्रिटिश शासन ने पूरा किया था?
(a) रियासतों को हड़पने की नीति समाप्त कर दी जाएगी
(b) देशी रजवाड़ों की यथास्थिति बनाए रखी जाएगी
(c) भारतीय एवं यूरोपियन सभी प्रजा को समान व्यवहार मिलेगा
(d) भारतीयों के सामाजिक एवं धार्मिक विश्वासों में कोई हस्तक्षेप नहीं होगा
U.P.P.C.S. (Pre) 1994
उत्तर-(a)
1858 की महारानी विक्टोरिया की घोषणा में कई आश्वासन दिए गए थे, जिनमें से केवल “रियासतों को हड़पने की नीति समाप्त करने” का वादा व्यवहार में पूरा हुआ। लॉर्ड डलहौजी की “व्यपगत सिद्धांत” (Doctrine of Lapse) नीति को औपचारिक रूप से 1859 में लॉर्ड कैनिंग ने समाप्त किया और राजाओं को पुनः गोद लेने की अनुमति दी गई। शेष आश्वासन — भारतीय-यूरोपीय समानता, धर्म में हस्तक्षेप न करना — व्यवहार में लागू नहीं हो सके।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:इस घोषणा के बाद भारत में देशी रियासतों की संख्या लगभग 562 थी, जिन्हें ब्रिटिश “Paramountcy” (सर्वोच्चता) के अधीन रखा गया। इन रियासतों का भारत में विलय 1947–1948 में सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में पूर्ण हुआ।
77. किसने लिखा था, “इस निर्णय से इनकार करना कठिन है कि तथाकथित 1857 का प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम न तो प्रथम था, न राष्ट्रीय था और न ही स्वतंत्रता संग्राम था?”
(a) आर.सी. मजूमदार
(b) सैयद अहमद
(c) रॉबर्ट्स
(d) कूपलैंड
U.P.P.C.S. (Mains) 2017
उत्तर-(a)
यह प्रसिद्ध उद्धरण डॉ. आर.सी. मजूमदार की पुस्तक “The Sepoy Mutiny and the Rebellion of 1857” से है। उनका तर्क था कि 1857 से पहले भी भारत में अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह हुए थे (जैसे संन्यासी विद्रोह, वेलु थम्पी विद्रोह), इसलिए यह “प्रथम” नहीं था; यह “राष्ट्रीय” नहीं था क्योंकि बड़े भूभाग और वर्ग इससे अलग रहे; और “स्वतंत्रता संग्राम” नहीं था क्योंकि इसके पीछे एक सुस्पष्ट राजनीतिक दर्शन नहीं था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:आर.सी. मजूमदार को भारत सरकार ने भी 1857 का इतिहास लिखने को कहा था, किंतु उनके निष्कर्ष सरकारी दृष्टिकोण से भिन्न होने के कारण वह कार्य एस.एन. सेन को सौंपा गया। मजूमदार ने इसे स्वतंत्र रूप से प्रकाशित किया।
78. 1857 की क्रांति के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सी एक अवधारणा सही है?
(a) भारतीय इतिहासकारों ने इसे भारतीय विद्रोह के रूप में वर्णित किया है।
(b) ब्रिटिश इतिहासकारों ने इसे स्वाधीनता का संग्राम कहा है।
(c) इसने भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी की शासन प्रणाली को मृतप्राय बना दिया।
(d) यह क्रांति भारत में प्रशासनिक तंत्र को सुधारने हेतु की गई।
U.P.P.C.S: (Mains) 2010
उत्तर-(c)
1857 की क्रांति का सबसे दूरगामी परिणाम यह रहा कि इसने ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन को पूरी तरह समाप्त कर दिया। 1858 के “भारत शासन अधिनियम” के तहत भारत का नियंत्रण सीधे ब्रिटिश क्राउन को सौंप दिया गया। अन्य विकल्प तथ्यतः गलत हैं — अधिकांश ब्रिटिश इतिहासकारों ने इसे “सैनिक विद्रोह” कहा, न कि स्वतंत्रता संग्राम; और यह प्रशासनिक सुधार के लिए नहीं, बल्कि शोषण के विरुद्ध था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:1857 के बाद ब्रिटिश सरकार ने भारतीय प्रशासन में कई संरचनात्मक बदलाव किए — भारतीय सिविल सेवा (ICS) को अधिक व्यवस्थित रूप दिया गया और 1861 में भारतीय परिषद अधिनियम (Indian Councils Act) पारित हुआ, जिसने विधान परिषदों में भारतीयों को सीमित भागीदारी दी।
79. भारतीय भाषा में 1857 के विप्लव के कारणों पर लिखने वाला प्रथम भारतीय था-
(a) सैयद अहमद खां
(b) वी. डी. सावरकर
(c) बंकिमचंद्र चटर्जी
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
U.P. Lower Sub. (Pre) 2009
उत्तर-(a)
सर सैयद अहमद खाँ ने 1859 में उर्दू में “असबाब-ए-बगावत-ए-हिंद” (भारत में विद्रोह के कारण) नामक पुस्तक लिखी, जो किसी भारतीय द्वारा भारतीय भाषा में 1857 के विद्रोह के कारणों का पहला विश्लेषण था। इस पुस्तक में उन्होंने ब्रिटिश नीतियों की आलोचना करते हुए बताया कि भारतीयों को प्रशासन में भागीदारी न देना विद्रोह का प्रमुख कारण था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:सर सैयद अहमद खाँ ने बाद में इस पुस्तक का अंग्रेजी अनुवाद भी कराया, जो “Causes of the Indian Revolt” के नाम से प्रकाशित हुआ। हालाँकि ब्रिटिश सरकार इस पुस्तक से नाराज हुई, फिर भी सर सैयद अहमद खाँ मुसलमानों को पश्चिमी शिक्षा और ब्रिटिश सहयोग की ओर प्रेरित करते रहे और 1875 में मुहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज (अलीगढ़) की स्थापना की।
80. ’19वीं शताब्दी के मध्य में भारतीय राष्ट्रवाद भ्रूणावस्था में थी।’ इस तथ्य को मानने वाले इतिहासकार-
(a) डॉ. आर.सी. मजूमदार और डॉ. एस.एन. सेन
(b) सर जेम्स आउट्रम और डब्ल्यू. टेलर
(c) टी.आर. होम्स और एल.ई. आर. रीज
(d) सर जान लारेंस और सीले
M.P.P.C.S. (Pre) 2020
उत्तर-(a)
डॉ. आर.सी. मजूमदार और डॉ. एस.एन. सेन दोनों का मानना था कि 19वीं शताब्दी के मध्य में भारत में राष्ट्रवाद की भावना अभी अपने प्रारंभिक यानी भ्रूण अवस्था में थी — पूर्णतः विकसित राष्ट्रीय चेतना का उदय अभी नहीं हुआ था। इसी कारण दोनों 1857 को पूर्ण अर्थों में “राष्ट्रीय” आंदोलन नहीं मानते थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:इसके विपरीत, सर जेम्स आउट्रम इसे मुस्लिम षड्यंत्र मानते थे, टी.आर. होम्स इसे बर्बरता बनाम सभ्यता का संघर्ष कहते थे, और सर जॉन लॉरेंस इसे केवल सैनिक असंतोष का परिणाम बताते थे। इन सभी इतिहासकारों के परस्पर विरोधी दृष्टिकोण यह दर्शाते हैं कि 1857 आज भी इतिहासकारों के लिए एक बहस का विषय बना हुआ है।
81. महारानी विक्टोरिया की उद्घोषणा (1858) का उद्देश्य क्या था?
1. भारतीय राज्यों को ब्रिटिश साम्राज्य में मिलाने के किसी भी विचार का परित्याग करना
2.भारतीय प्रशासन को ब्रिटिश क्राउन के अंतर्गत रखना
3. भारत के साथ ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापार का नियमन करना
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
I.A.S. (Pre) 2014
उत्तर-चुनिए।
1858 की महारानी विक्टोरिया की उद्घोषणा के दो प्रमुख उद्देश्य थे — (1) भारतीय राज्यों को ब्रिटिश साम्राज्य में जबरन मिलाने की नीति (Doctrine of Lapse) का परित्याग करना, और (2) भारतीय प्रशासन को सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन लाना। तीसरा कथन — “ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापार का नियमन” — इस घोषणा का उद्देश्य नहीं था, क्योंकि 1813 और 1833 के चार्टर अधिनियमों से ही कंपनी का व्यापारिक एकाधिकार समाप्त हो चुका था। अतः केवल कथन 1 और 2 सही हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:Britannica की “The History of India” पुस्तक के अनुसार इस घोषणा ने लॉर्ड डलहौजी की युद्ध-पूर्व रियासत विलय नीति को उलट दिया। इस घोषणा के बाद गवर्नर जनरल का पद “वायसराय” (Viceroy) में परिवर्तित हो गया, जो ब्रिटिश राजा का सीधा प्रतिनिधि होता था।
82. 1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश सरकार ने सिपाहियों का इन प्रांतों से चयन किया-
(a) उत्तर प्रदेश एवं बिहार के ब्राह्मण
(b) पूर्व में बंगाली एवं उड़िया
(c) गोरखा, सिख एवं पंजाबी उत्तर प्रांत से
(d) मद्रास प्रेसीडेंसी एवं मराठा
48th to 52nd B.P.S.C. (Pre) 2008
उत्तर-(c)
1857 के विद्रोह में बंगाल सेना के लगभग 60 प्रतिशत सैनिक अवध और उत्तर-पश्चिमी प्रांत (वर्तमान उत्तर प्रदेश) से थे। विद्रोह में उनकी केंद्रीय भूमिका को देखते हुए ब्रिटिश सरकार ने इन क्षेत्रों पर अविश्वास करते हुए भविष्य में भर्ती के लिए गोरखा, सिख और पंजाबी सैनिकों को प्राथमिकता दी — जो विद्रोह के दौरान ब्रिटिश-समर्थक रहे थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:इसी नीति के तहत ब्रिटिशों ने मार्शल रेस थ्योरी विकसित की, जिसके अनुसार गोरखा, सिख, राजपूत और जाट जैसी जातियों को “युद्धप्रिय” और “विश्वसनीय” घोषित किया गया। यह सिद्धांत वैज्ञानिक रूप से निराधार था, किंतु इसने दशकों तक भारतीय सेना की भर्ती नीति को प्रभावित किया।

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