सूफी आंदोलन MCQ प्रश्न | UPSC

भारतीय इतिहास मध्यकालीन भारत सूफी आंदोलन MCQ प्रश्न
1. निम्नलिखित सूफी संतों में से कौन एक सर्वप्रथम अजमेर में बस गए थे?
(a) शेख मुइनुद्दीन चिश्ती
(b) शेख कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी
(c) शेख निज़ामुद्दीन औलिया
(d) शेख सलीम चिश्ती
U.P.P.C.S. (Pre) 2011
उत्तर- (a)
ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती फारस के सिस्तान क्षेत्र में जन्मे थे और उन्होंने बगदाद में सूफी शेख ख्वाजा उस्मान हारूनी से दीक्षा ग्रहण की थी। वे लगभग 1192 ई. में मुहम्मद गोरी की विजय के समय भारत आए और राजस्थान के अजमेर में बसने वाले चिश्तिया सिलसिले के प्रथम संत बने। अजमेर में उनकी दरगाह आज भी ‘गरीब नवाज’ के नाम से हिन्दू-मुस्लिम दोनों समुदायों में समान श्रद्धा का केंद्र है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सम्राट अकबर आगरा से अजमेर तक प्रतिवर्ष पैदल यात्रा करके ख्वाजा की दरगाह पर मत्था टेकने जाते थे, और उन्होंने वहाँ एक विशाल मस्जिद तथा अन्नक्षेत्र (लंगर) का निर्माण भी करवाया था।
2. भारत में चिश्तिया सूफी मत को स्थापित किया-
(a) ख्वाजा बदरुद्दीन ने
(b) ख्वाजा मुइनुद्दीन ने
(c) शेख अहमद सरहिंदी ने
(d) शेख बहाउद्दीन जकरिया ने
U.P. P.C.S. (Pre) 2002
उत्तर- (b)
चिश्तिया सिलसिले की उत्पत्ति अफगानिस्तान के ‘चिश्त’ नामक स्थान से हुई, जहाँ ख्वाजा अबू इसहाक शामी चिश्ती ने इसकी नींव रखी थी। भारत में इस सिलसिले को प्रतिष्ठित करने का श्रेय ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती को जाता है, जिनकी मृत्यु 1236 ई. में अजमेर में हुई। उनके प्रमुख शिष्य कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी दिल्ली में चिश्तिया परंपरा के प्रचारक बने।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: चिश्तिया सिलसिले के संत राजकीय सेवा और राज्याश्रय से दूर रहकर सादगीपूर्ण जीवन जीने में विश्वास रखते थे, तथा वे संगीत (समा) को ईश्वर-प्राप्ति का साधन मानते थे, जबकि सुहरावर्दी सिलसिला इसके विपरीत राजसत्ता से घनिष्ठ संबंध बनाए रखता था।
3. निम्नलिखित में से कौन सूफीवाद की चिश्तिया शाखा का संस्थापक था?
(a) शेख मुहीउद्दीन
(b) शेख जियाउद्दीन अबुलजीवा
(c) ख्वाजा अबु अब्दाल
(d) ख्वाजा बहाउद्दीन
U.P.P.S.C. (R.I.) 2014
उत्तर- (c)
चिश्तिया सिलसिले का उद्भव अबू इसहाक शामी चिश्ती से माना जाता है, किंतु इसे संगठित स्वरूप देने का कार्य उनके शिष्य ख्वाजा अबू अहमद अब्दाल ने ‘चिश्त’ नामक कस्बे में किया, जो वर्तमान अफगानिस्तान के हेरात प्रांत में स्थित है। इसी स्थान के नाम पर सिलसिले का नाम ‘चिश्तिया’ पड़ा। भारत में इस परंपरा को आगे बढ़ाने वाले ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती इसी शृंखला की बाद की पीढ़ी में माने जाते हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: चिश्तिया सिलसिले में खानकाह व्यवस्था के अंतर्गत गुरु-शिष्य परंपरा को अत्यधिक महत्व दिया जाता था, और शिष्य को गुरु से ‘खिलाफतनामा’ प्राप्त होने पर ही वह स्वतंत्र रूप से उपदेश देने का अधिकारी माना जाता था।
4. नीचे दो कथन दिए गए हैं। एक को कथन (a) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
कथन(a) : मध्यकाल में संगीत पर संस्कृत में लिखी गई अनेक पुस्तकों का फारसी में अनुवाद किया गया।
कारण (R) : आरंभिक चिश्ती सूफी संत संगीत समाओं, जिन्हें समा कहा जाता था, के शौकीन थे।
नीचे दिए कूटों में से सही उत्तर का चयन कीजिए-
(a) कथन (a) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (a) की सही व्याख्या है।
(b) कथन (a) तथा कारण (R) दोनों सही हैं, किंतु कारण कथन (a) की व्याख्या नहीं है।
(c) कथन (a) सही है, किंतु कारण (R) गलत है।
(d) कथन (a) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
U.P.P.C.S. (Pre) 2018
उत्तर- (b)
यह सत्य है कि मध्यकाल में संस्कृत में रचित संगीत-विषयक अनेक ग्रंथों का फारसी में अनुवाद करवाया गया। फिरोजशाह तुगलक ने संस्कृत ग्रंथों के फारसी अनुवाद में विशेष रुचि ली, और यह परंपरा सिकंदर लोदी तथा बाद में मुगल शासकों के समय भी जारी रही। दूसरी ओर, आरंभिक चिश्ती सूफी संत निश्चित रूप से ‘समा’ अर्थात् संगीत की सभाओं के माध्यम से आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त करने के पक्षधर थे। किंतु यह कारण कथन की प्रत्यक्ष व्याख्या नहीं करता, क्योंकि संस्कृत संगीत-ग्रंथों के अनुवाद का मुख्य कारण शासकों की व्यक्तिगत रुचि व दरबारी संस्कृति थी, न कि चिश्ती संतों की समा-परंपरा। अतः दोनों कथन सत्य हैं, परंतु कारण कथन की सही व्याख्या नहीं करता।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अमीर खुसरो को कव्वाली की शुरुआत करने का श्रेय दिया जाता है, जो चिश्तिया परंपरा की समा-संगीत शैली से ही विकसित हुई एक विशिष्ट काव्य-संगीत विधा है।
5.भारत में चिश्तिया संप्रदाय का प्रथम सूफी संत था-
(a) शेख मुइनुद्दीन चिश्ती
(b) हमीदुद्दीन नागौरी
(c) कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी
(d) निजामुद्दीन औलिया
U.P.P.C.S. (Mains) 2014
उत्तर- (a)
भारत में चिश्तिया संप्रदाय की स्थापना का श्रेय शेख मुइनुद्दीन चिश्ती को दिया जाता है, जिन्हें भारतीय चिश्तिया परंपरा का आद्य-प्रवर्तक माना जाता है। उनके समकालीन एवं शिष्य जैसे हमीदुद्दीन नागौरी और कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी बाद में इस सिलसिले के प्रसार में सक्रिय हुए, जबकि निजामुद्दीन औलिया आगे की पीढ़ी के संत थे जिन्होंने दिल्ली में इस सिलसिले को अपनी चरम ऊँचाई तक पहुँचाया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हमीदुद्दीन नागौरी को ‘सुल्तान-उत्-तारिकीन’ कहा जाता था और वे स्वयं खेती करके तथा हिन्दू-मुस्लिम दोनों संस्कृतियों के साथ सहज जीवन जीकर सूफी सिद्धांतों का पालन करते थे।
7. शेख निजामुद्दीन औलिया शिष्य थे-
(a) शेख अलाउद्दीन साबिर के
(b) ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती के
(c) बाबा फरीद के
(d) शेख अहमद सरहिंदी के
U.P.P.C.S. (Pre) 2006
उत्तर- (c)
शेख निजामुद्दीन औलिया के आध्यात्मिक गुरु हजरत बाबा फरीदुद्दीन मसूद गंजशकर थे, जो पंजाब के अजोधन (वर्तमान पाकपट्टन, पाकिस्तान) में सक्रिय थे। बाबा फरीद, कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी के शिष्य थे और इस प्रकार चिश्तिया सिलसिले की तीसरी कड़ी माने जाते हैं। निजामुद्दीन औलिया ने आगे चलकर दिल्ली को चिश्तिया सूफीवाद का प्रमुख केंद्र बना दिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बाबा फरीद की वाणियाँ बाद में सिख धर्मग्रंथ आदि ग्रंथ साहिब में भी संकलित की गईं, जो हिन्दू-मुस्लिम-सिख समन्वय की भावना को दर्शाती हैं।
8. निम्न में से कौन चिश्ती सिलसिले से संबद्ध नहीं है?
(a) ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी
(b) शेख अब्दुल जिलानी
(c) शेख मुइनुद्दीन
(d) शेख निजामुद्दीन औलिया
R.A.S./R.T.S (Pre) 2016
उत्तर- (b)
शेख अब्दुल कादिर जिलानी बगदाद के निवासी थे और उन्होंने कादिरिया सिलसिले की स्थापना की थी, जो चिश्तिया से भिन्न एक स्वतंत्र सूफी परंपरा है। इसके विपरीत कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी, मुइनुद्दीन चिश्ती के शिष्य तथा निजामुद्दीन औलिया, इसी शृंखला की परवर्ती कड़ी के रूप में चिश्तिया सिलसिले से जुड़े हुए थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: भारत में कादिरिया सिलसिले का प्रसार मुख्यतः मुगल शहजादे दारा शिकोह के समय हुआ, जो सूफी संत मियां मीर से गहराई से प्रभावित थे।
9. ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती किसके शिष्य थे?
(a) ख्वाजा अब्दाल चिश्ती
(b) शाह वली उल्लाह
(c) मीर दर्द
(d) ख्वाजा उस्मान हारुनी
U.P.P.C.S. (Pre) 2014
उत्तर- (d)
ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती का जन्म अफगानिस्तान के सिस्तान प्रांत में लगभग 1141 ई. में हुआ था। युवावस्था में माता-पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने आध्यात्मिक मार्ग अपनाया और खुरासान के निशापुर क्षेत्र में स्थित हारून नामक स्थान पर ख्वाजा उस्मान हारुनी से दीक्षा प्राप्त की। लगभग बीस वर्षों तक गुरु-सेवा करने के बाद उन्हें आध्यात्मिक उत्तराधिकार प्राप्त हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: भारत आने से पूर्व मुइनुद्दीन चिश्ती ने बगदाद, बल्ख, बुखारा जैसे प्रमुख इस्लामी विद्या-केंद्रों की यात्रा कर वहाँ के प्रसिद्ध सूफी संतों से भेंट की थी।
10. निम्नलिखित में से किसे ‘भारत का सादी’ कहा गया है?
(a) अमीर हसन
(b) अमीर खुसरो
(c) अबू तालिब कलीम
(d) चन्द्रभान ब्राह्मण
U.P.P.C.S. (Mains) 2013
उत्तर- (a)
अमीर हसन-ए-सिजजी देहलवी अपनी उत्कृष्ट फारसी गजलों के लिए विख्यात थे, जिस कारण उन्हें ईरानी कवि शेख सादी शिराजी की उपाधि की तर्ज पर ‘भारत का सादी’ कहा गया। वे शेख निजामुद्दीन औलिया के समकालीन तथा उनके निकट शिष्यों में गिने जाते थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अमीर हसन देहलवी ने ही ‘फवाइद-उल-फुआद’ नामक ग्रंथ की रचना की, जिसमें निजामुद्दीन औलिया के मल्फूजात (उपदेशों) का संकलन है, जो चिश्तिया परंपरा को समझने का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
11. नीचे दो वक्तव्य दिए गए हैं, जिनमें एक को कथन (a) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है-
कथन (a) : भारत में सूफियों के चिश्ती धर्मसंघ का प्रवर्तक और सर्वप्रमुख व्यक्ति, ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती है।
कारण (R) : चिश्ती धर्मसंघ ने अपना नाम अजमेर में स्थित ग्राम चिश्त से लिया है।
ऊपर के दोनों वक्तव्यों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?
(a) (a) और (R) दोनों सही हैं और (R), (a) की सही व्याख्या है।
(b) (a) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (a) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (a) सही है, परंतु (R) गलत है।
(d) (a) गलत है, परंतु (R) सही है।
I.A.S. (Pre) 1997
उत्तर- (c)
यह सत्य है कि भारत में चिश्ती सिलसिले के प्रवर्तन का श्रेय ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती को प्राप्त है, जिन्होंने अजमेर को अपनी कर्मस्थली बनाया। किंतु ‘चिश्त’ नामक ग्राम अजमेर में नहीं, बल्कि वर्तमान अफगानिस्तान के हेरात प्रांत में स्थित है, जहाँ इस सिलसिले की उत्पत्ति हुई थी। अतः कारण (R) तथ्यात्मक रूप से गलत है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: चिश्त नामक इस मूल स्थान से भारत में आकर बसने के कारण ही यह सिलसिला उपमहाद्वीप में सबसे अधिक लोकप्रिय और व्यापक रूप से फैला हुआ सूफी संप्रदाय बन गया।
12. जिस सूफी संत की मान्यता थी कि भक्ति संगीत ईश्वर के निकट पहुंचने का एक साधन है, वह है-
(a) मुइनुद्दीन चिश्ती
(b) बाबा फरीद
(c) सैयद मुहम्मद गेसुदराज
(d) शाह आलम बुखारी
I.A.S. (Pre) 1996
उत्तर- (a)
ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती वहदत-उल-वुजूद (अद्वैतवादी दर्शन) के अनुयायी थे और उनका मानना था कि संगीत की सभा ‘समा’ के माध्यम से भक्त की आत्मा परमात्मा के निकट पहुँच सकती है। यही परंपरा आगे चलकर संपूर्ण चिश्तिया सिलसिले की एक पहचान बन गई, जबकि सुहरावर्दी सिलसिला समा को अनावश्यक मानता था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: चिश्तिया दरगाहों पर आयोजित होने वाली कव्वाली परंपरा का विकास इसी समा-संगीत की मान्यता से हुआ, जिसे बाद में अमीर खुसरो ने काव्यात्मक और संगीतमय रूप से समृद्ध किया।
13. अजमेर मे ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर नजर (भेंट) भेजने वाले प्रथम मराठा सरदार कौन थे?
(a) नवाब अली बहादुर, पेशवा बालाजी राव प्रथम का पौत्र (मस्तानी नामक पत्नी से)
(b) राजा साहू, शिवाजी के पौत्र
(c) पेशवा बालाजी विश्वनाथ
(d) पेशवा बालाजी राव
R.A.S. / R. T. S (Pre) (Re-Exam) 2013
उत्तर- (b)
मराठा शासकों में सबसे पहले शिवाजी के पौत्र राजा साहू ने अजमेर स्थित ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर श्रद्धा-भेंट (नजर) भेजी थी, जो दर्शाता है कि मराठा दरबार में भी इस दरगाह के प्रति गहरा सम्मान था। साहू ने 1707 से 1749 ई. तक शासन किया और उनके शासनकाल में ही पेशवाओं की सत्ता सुदृढ़ हुई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अजमेर दरगाह को मुगल बादशाहों के अतिरिक्त राजपूत शासकों से भी संरक्षण प्राप्त था, जिसमें जोधपुर के महाराजाओं द्वारा दिए गए अनुदान उल्लेखनीय हैं।
14. शेख निजामुद्दीन औलिया की दरगाह स्थित है –
(a) आगरा में
(b) अजमेर में
(c) दिल्ली में
(d) फतेहपुर सीकरी में
U. P. P.S.C. (GIC) 2010
उत्तर- (c)
शेख निजामुद्दीन औलिया का देहांत 1325 ई. में हुआ और उन्हें दिल्ली के गियासपुर क्षेत्र में दफनाया गया, जहाँ आज भी उनकी दरगाह स्थित है और यह क्षेत्र ‘निजामुद्दीन’ के नाम से जाना जाता है। उनके निकट ही प्रसिद्ध कवि अमीर खुसरो की भी समाधि स्थित है, जो अपने गुरु के प्रति अगाध श्रद्धा रखते थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: दिल्ली के सात ऐतिहासिक नगरों में से कई सुल्तानों ने इस दरगाह के निकट बसना अशुभ माना, क्योंकि निजामुद्दीन औलिया और तुगलक शासक गयासुद्दीन तुगलक के बीच प्रसिद्ध वैचारिक टकराव की कथा प्रचलित है।
15. ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती शिष्य थे-
(a) अब्दुल कादिर जीलानी के
(b) ख्वाजा अबू यूसुफ के
(c) ख्वाजा उस्मान हारुनी के
(d) ख्वाजा मौदूद के
U.P.R.O./A.R.O. (Mains) 2014
उत्तर- (c)
ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती अपने गुरु ख्वाजा उस्मान हारुनी की दीर्घकालीन सेवा और साधना के पश्चात आध्यात्मिक सिद्धि को प्राप्त हुए। गुरु की मृत्यु के बाद उन्होंने विभिन्न इस्लामी केंद्रों की तीर्थयात्रा की और अंततः भारत की ओर प्रस्थान किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कहा जाता है कि मुइनुद्दीन चिश्ती को स्वप्न में पैगंबर मुहम्मद द्वारा भारत जाकर धर्म-प्रचार करने का आदेश प्राप्त हुआ था, जिसके पश्चात उन्होंने लाहौर होते हुए अजमेर की ओर यात्रा की।
16. निम्न में से किस सूफी संत के विचारों को सिक्खों के धर्म ग्रंथ ‘आदि ग्रंथ’ में संकलित किया गया है?
(a) शेख मुइनुद्दीन चिश्ती
(b) कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी
(c) फरीदुद्दीन-गंज-ए-शकर
(d) शेख निजामुद्दीन औलिया
U.P. P.C.S. (Pre) 1994
उत्तर- (c)
बाबा फरीद के नाम से विख्यात शेख फरीदुद्दीन-गंज-ए-शकर चिश्ती सिलसिले की तीसरी महत्वपूर्ण कड़ी थे और उन्होंने पंजाब क्षेत्र में इस परंपरा को व्यापक जनाधार दिया। उनकी वाणियों में सूफी दर्शन के साथ-साथ आम जनजीवन से जुड़े प्रतीकों का प्रयोग मिलता है, जिस कारण गुरु नानक देव जी ने उनकी रचनाओं को आदि ग्रंथ (गुरु ग्रंथ साहिब) में स्थान दिया। बाबा फरीद, दिल्ली सल्तनत के शासक बलबन के समधी भी थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: गुरु ग्रंथ साहिब में बाबा फरीद के लगभग 130 श्लोक और 4 शब्द संकलित हैं, जो इसे किसी गैर-सिख संत की सर्वाधिक रचनाओं वाला संकलन बनाते हैं।
17. निम्नलिखित में से किस सुल्तान से निजामुद्दीन औलिया ने भेंट करने से इंकार कर दिया था ?
(a) जलालुद्दीन खिलजी
(b) अलाउद्दीन खिलजी
(c) गयासुद्दीन तुगलक
(d) मुहम्मद बिन तुगलक
44th B.P.S.C. (Pre) 2000
उत्तर- (b)
शेख निजामुद्दीन औलिया अपने जीवनकाल में दिल्ली की गद्दी पर बैठने वाले सात सुल्तानों के समकालीन रहे, किंतु उन्होंने राजसत्ता से दूरी बनाए रखने की चिश्तिया परंपरा का पालन करते हुए किसी भी दरबार में उपस्थित होना स्वीकार नहीं किया। जब अलाउद्दीन खिलजी ने उनसे भेंट की अनुमति मांगी, तो उन्होंने स्पष्ट उत्तर दिया कि उनके निवास के दो द्वार हैं, और सुल्तान के एक द्वार से प्रवेश करने पर वे दूसरे द्वार से बाहर निकल जाएंगे। इसी सिद्धांत के आधार पर सुल्तान जलालुद्दीन खिलजी से भी उन्होंने भेंट टाल दी थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: निजामुद्दीन औलिया और गयासुद्दीन तुगलक के मध्य भी तनावपूर्ण संबंध रहे, और तुगलक की रहस्यमय मृत्यु को लेकर तत्कालीन जनश्रुतियों में इस विवाद का उल्लेख मिलता है।
18. निम्नलिखित में से कौन-सा सही सुमेलित नहीं है?
(a) शेख मुइनुद्दीन चिश्ती- अजमेर
(b) शेख बुरहानुद्दीन गरीब- दौलताबाद
(c) शेख मोहम्मद हुसैनी- गुलबर्गा
(d) शेख निजामुद्दीन औलिया- मुल्तान
U.P.P.C.S. (Pre) 2020
उत्तर- (d)
शेख निजामुद्दीन औलिया का जन्म बदायूं (उत्तर प्रदेश) में हुआ था तथा उन्होंने अपने प्रारंभिक जीवन में बाबा फरीद के सान्निध्य में अजोधन में साधना की, किंतु उनका मुख्य कर्मक्षेत्र दिल्ली रहा, न कि मुल्तान। दिल्ली में उनकी दरगाह आज भी चिश्तिया सिलसिले के महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों में गिनी जाती है। इसके विपरीत शेख बुरहानुद्दीन गरीब ने दौलताबाद (देवगिरि) में तथा शेख मोहम्मद हुसैनी गेसूदराज ने गुलबर्गा में चिश्तिया शिक्षाओं का प्रसार किया, जिससे यह सिलसिला दक्षिण भारत तक पहुँचा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: शेख बुरहानुद्दीन गरीब को दक्खिन (दक्षिण भारत) में चिश्तिया सिलसिला ले जाने का प्रमुख श्रेय दिया जाता है, जब मुहम्मद बिन तुगलक ने राजधानी दिल्ली से दौलताबाद स्थानांतरित की थी।
19. कौन सूफी संत ‘महबूब-ए-इलाही’ कहलाता था?
(a) ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती
(b) बाबा फरीद
(c) कुतुबुद्दीन बख़्तियार काकी
(d) शेख निजामुद्दीन औलिया
U.P.P.C.S. (Pre) 2014
उत्तर- (d)
शेख निजामुद्दीन औलिया को उनकी उदारता, सहिष्णुता तथा आध्यात्मिक प्रभाव के कारण ‘महबूब-ए-इलाही’ अर्थात ‘ईश्वर का प्रिय’ तथा ‘सुल्तान-उल-औलिया’ अर्थात ‘संतों का राजा’ जैसी उपाधियों से विभूषित किया गया। उनकी शिक्षाओं में हिन्दू-मुस्लिम दोनों समुदायों के प्रति समान स्नेह और सामाजिक समरसता का संदेश प्रमुख था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: निजामुद्दीन औलिया के प्रमुख शिष्यों में कवि अमीर खुसरो, इतिहासकार जियाउद्दीन बरनी तथा संत नासिरुद्दीन चिराग-ए-देहलवी सम्मिलित थे, जिन्होंने उनकी शिक्षाओं को आगे बढ़ाया।
20. निम्नलिखित में से कौन-से सूफी संत महबूब-ए-इलाही के नाम से जाने जाते हैं?
(a) शेख मुइनुद्दीन चिश्ती
(b) शेख निजामुद्दीन औलिया
(c) बाबा फरीद
(d) शेख नसीरुद्दीन चिराग-ए-देहलवी
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2016
उत्तर- (b)
‘महबूब-ए-इलाही’ की उपाधि विशेष रूप से शेख निजामुद्दीन औलिया के साथ जुड़ी हुई है, जो चिश्तिया सिलसिले की चौथी प्रमुख कड़ी माने जाते हैं। उनका निधन 1325 ई. में हुआ, जो संयोगवश उसी वर्ष हुआ जिस वर्ष मुहम्मद बिन तुगलक दिल्ली की गद्दी पर बैठा। उनकी दरगाह आज भी दिल्ली के निजामुद्दीन क्षेत्र में स्थित है और वहाँ प्रतिवर्ष उर्स का आयोजन होता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: निजामुद्दीन औलिया के जीवनकाल में ही अमीर खुसरो ने कई भाषाओं में काव्य-रचना की, जिसमें हिन्दवी (प्रारंभिक हिन्दी-उर्दू मिश्रित भाषा) में की गई पहेलियाँ और मुकरियाँ विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।
21. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कर नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए –
सूची-I सूची-II
A. ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती 1. सुहरावर्दिया
B. शेख अहमद सरहिंदी 2. कादिरिया
C. दारा शिकोह 3. चिश्तिया
D. शेख शहाबुद्दीन 4. नक्शबंदिया
(a) 2 3 1 4
(b) 1 4 2 3
(c) 3 4 2 1
(d) 4 2 3 1
U.P.P.C.S. (Mains) 2013
उत्तर- (c)
मध्यकालीन भारत में सक्रिय विभिन्न सूफी सिलसिलों के संस्थापक/प्रमुख प्रतिनिधि इस प्रकार थे- ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती चिश्तिया सिलसिले से, शेख अहमद सरहिंदी नक्शबंदिया सिलसिले से (जिन्हें ‘मुजद्दिद-ए-अल्फ-सानी’ भी कहा जाता है), मुगल शहजादे दारा शिकोह कादिरिया सिलसिले से (जो मियां मीर से प्रभावित थे), तथा शेख शहाबुद्दीन सुहरावर्दी सिलसिले से संबद्ध थे। इस प्रकार सही सुमेलन क्रमशः 3, 4, 2, 1 है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: शेख अहमद सरहिंदी ने अकबर के ‘दीन-ए-इलाही’ तथा उदार धार्मिक नीतियों का कड़ा विरोध करते हुए इस्लामी रूढ़िवाद की पुनर्स्थापना का प्रयास किया, जिस कारण उन्हें जहाँगीर के शासनकाल में कारावास भी भोगना पड़ा।
22. निम्नलिखित में से किसे ‘शेख-उल-हिंद’ की पदवी प्रदान की गई थी?
(a) बाबा फरीदुद्दीन
(b) ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी
(c) ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती
(d) शेख सलीम चिश्ती
U.P. Lower Sub. (Pre) 2004
U.P. Lower Sub. (Pre) 2008
उत्तर- (d)
शेख सलीम चिश्ती को अरब प्रवास के दौरान उनकी विद्वता और आध्यात्मिक साधना के कारण ‘शेख-उल-हिंद’ की सम्मानजनक उपाधि प्राप्त हुई थी। भारत लौटने पर वे आगरा के निकट सीकरी में बस गए, जहाँ उनकी दुआ से अकबर को पुत्र-प्राप्ति की मान्यता प्रचलित हुई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अकबर ने अपने पुत्र का नाम शेख सलीम चिश्ती के सम्मान में ‘सलीम’ (आगे चलकर जहाँगीर) रखा, और सीकरी को फतेहपुर सीकरी के रूप में नई राजधानी बनाकर विकसित किया।
23. प्रसिद्ध संत सलीम चिश्ती रहते थे?
(a) दिल्ली में
(b) अजमेर में
(c) फतेहपुर सीकरी में
(d) लाहौर में
R.A.S./R.T.S. (Pre) 1999
उत्तर- (c)
चिश्तिया सिलसिले के परवर्ती संतों में शेख सलीम चिश्ती का विशिष्ट स्थान है। उनके पिता शेख बहाउद्दीन भी एक सूफी संत थे। दीर्घकालीन अरब प्रवास के पश्चात स्वदेश लौटकर वे आगरा से लगभग 36 किमी. दूर स्थित सीकरी नामक ग्राम में बस गए, जो कालांतर में अकबर द्वारा नवनिर्मित राजधानी फतेहपुर सीकरी के रूप में विकसित हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: फतेहपुर सीकरी में स्थित शेख सलीम चिश्ती की सफेद संगमरमर की दरगाह अपनी नाजुक जालीदार (जाली) वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है और आज भी संतानहीन दंपत्तियों द्वारा मन्नत का धागा बाँधने की परंपरा वहाँ प्रचलित है।
24. शेख फरीद का सर्वाधिक ख्यातिलब्ध शिष्य, जिसने दिल्ली के सात सुल्तानों का शासन देखा था, कौन था?
(a) निजामुद्दीन औलिया
(b) शेख नासिरुद्दीन चिराग
(c) शेख सलीम चिश्ती
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
U.P.P.C.S. (Mains) 2014
उत्तर- (a)
बाबा फरीद के शिष्यों में शेख निजामुद्दीन औलिया सर्वाधिक प्रभावशाली सिद्ध हुए और उन्होंने दिल्ली सल्तनत के सात से अधिक सुल्तानों- बलबन से लेकर मुहम्मद बिन तुगलक तक- का शासनकाल देखा, फिर भी राजसत्ता से पूर्ण दूरी बनाए रखी। यही सिद्धांत आगे चलकर चिश्तिया सिलसिले की एक विशिष्ट पहचान बन गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: निजामुद्दीन औलिया के उपदेशों का संकलन उनके शिष्य अमीर हसन देहलवी द्वारा ‘फवाइद-उल-फुआद’ नामक ग्रंथ में किया गया, जो मल्फूजात साहित्य की सबसे प्रामाणिक कृतियों में गिना जाता है।
25. निम्नलिखित में से किस चिश्ती संत को ‘चिराग-ए-दिल्ली’ कहा जाता है ?
(a) मुईउद्दीन
(b) फरीदुद्दीन
(c) निजामुद्दीन औलिया
(d) नासिरुद्दीन
U.P.R.O./A.R.O. (Pre) 2017
उत्तर- (d)
शेख नासिरुद्दीन महमूद, शेख निजामुद्दीन औलिया के सबसे निकटस्थ तथा अंतिम प्रमुख शिष्यों में से थे और उन्हें ‘चिराग-ए-दिल्ली’ अर्थात ‘दिल्ली का दीपक’ कहा गया, क्योंकि उन्होंने अपने गुरु की मृत्यु के बाद दिल्ली में चिश्तिया परंपरा की ज्योति को प्रज्वलित रखा। उनके पश्चात चिश्तिया सिलसिला दिल्ली से बाहर गुलबर्गा, दौलताबाद जैसे दक्षिणी केंद्रों की ओर स्थानांतरित होने लगा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: नासिरुद्दीन चिराग-ए-देहलवी के बाद दिल्ली में किसी प्रमुख चिश्ती खानकाह की स्थापना नहीं हुई, जिस कारण इतिहासकार उनके कालखंड को दिल्ली में चिश्तिया सिलसिले के पतन का प्रारंभ बिंदु मानते हैं।
26.अति कट्टरपंथी सूफी संप्रदाय था-
(a) चिश्ती
(b) सुहरावर्दी
(c) नक्शबंदी
(d) कादिरी
Jharkhand P.C.S. (Pre) 2016
उत्तर- (c)
14वीं शताब्दी में ख्वाजा बहाउद्दीन नक्शबंद द्वारा स्थापित नक्शबंदी सिलसिला अपने कट्टर एवं रूढ़िवादी दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। भारत में इस शाखा को लोकप्रिय बनाने का श्रेय बाबर को जाता है, जो अपने पिता की भांति नक्शबंदी संत ख्वाजा उबैदुल्ला अहरार के प्रति गहरी श्रद्धा रखता था। इस सिलसिले में समा (संगीत सभा) का पूर्णतः निषेध था तथा उच्च स्वर में संस्मरण (जिक्र जली) के स्थान पर निम्न स्वर में संस्मरण (जिक्र खफी) को प्राथमिकता दी जाती थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: झारखंड लोक सेवा आयोग ने इस प्रश्न का आधिकारिक उत्तर विकल्प
(b) सुहरावर्दी माना है, जो सामान्यतः स्वीकृत उत्तर नक्शबंदी से भिन्न है, अतः यह प्रश्न विवादास्पद माना जाता है।
27. भारतीय इतिहास में सूफीवाद के संदर्भ में; निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-
(a) 1 और 2
(b) 1 और 3
(c) 2 और 3
(d) 2 और 4
I.A.S. (Pre) 2002
उत्तर- (d)
‘मुजद्दिद अलिफ सानी’ की उपाधि से प्रसिद्ध शेख अहमद सरहिंदी नक्शबंदी सिलसिले के प्रमुख संत थे तथा अकबर एवं जहाँगीर के समकालीन रहे। उन्होंने इब्न-उल-अरबी के ‘वहदत-उल-वुजूद’ (अद्वैतवादी सूफी दर्शन) के विरुद्ध ‘वहदत-उल-शुहूद’ (द्वैतवादी/प्रत्यक्षवादी दर्शन) का प्रतिपादन किया। दूसरी ओर शेख नासिरुद्दीन चिराग-ए-दिल्ली, निजामुद्दीन औलिया के प्रमुख शिष्य होते हुए भी अपने गुरु जितनी उदारता प्रदर्शित नहीं कर सके। भारत में कादिरिया सिलसिले का प्रसार शाह नियामतुल्ला तथा मखदूम जिलानी द्वारा 15वीं सदी में हुआ, जिन्होंने उच्छ (मुल्तान क्षेत्र) को अपना केंद्र बनाया। अतः कथन (2) और (4) सही हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: शेख अहमद सरहिंदी को उनके कट्टर विचारों के कारण जहाँगीर के शासनकाल में ग्वालियर के किले में कारावास में भी रहना पड़ा था।
28. शेख बहाउद्दीन जकारिया किस संप्रदाय के थे?
(a) सुहरावर्दी संप्रदाय
(b) ऋषि संप्रदाय
(c) चिश्ती संप्रदाय
(d) फिरदौसी संप्रदाय (e) उपर्युक्त में से कोई नहीं/उपर्युक्त में से एक से अधिक
64th B.P.S.C. (Pre) 2018
उत्तर- (a)
भारत में सुहरावर्दी सिलसिले की स्थापना का श्रेय शेख बहाउद्दीन जकारिया को जाता है, जिन्होंने मुल्तान को अपनी गतिविधियों का केंद्र बनाया। इस सिलसिले के अन्य उल्लेखनीय संतों में शेख सद्रुद्दीन आरिफ, शेख रुक्नुद्दीन अबुल फतह तथा शेख जलालुद्दीन सुर्ख शामिल थे। चिश्तिया संतों के विपरीत, सुहरावर्दी संत राजसत्ता से घनिष्ठ संबंध रखने तथा सुखमय व भौतिक रूप से समृद्ध जीवन जीने में कोई बाधा नहीं मानते थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: शेख बहाउद्दीन जकारिया दिल्ली सल्तनत के शासक इल्तुतमिश के समकालीन थे और उन्हें खलीफा द्वारा ‘शेख-उल-इस्लाम’ की उपाधि भी प्रदान की गई थी।
29. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-
1. संत निम्बार्क, अकबर के समकालीन थे।
2. संत कबीर, शेख अहमद सरहिंदी से अत्यधिक प्रभावित थे।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1, न ही 2
I.A.S. (Pre) 2019
उत्तर- (d)
निम्बार्काचार्य को सामान्यतः रामानुजाचार्य के समकालीन 11वीं-12वीं शताब्दी का आचार्य माना जाता है, जबकि अकबर का शासनकाल 1556 से 1605 ई. तक रहा, अतः दोनों में सैकड़ों वर्षों का अंतर है। इसी प्रकार संत कबीर का समय (लगभग 1440-1518 ई. या मत-भिन्नता अनुसार 1398-1448 ई.) शेख अहमद सरहिंदी (1564-1624 ई.) से कहीं पहले का है, इसलिए कबीर का सरहिंदी से प्रभावित होना कालानुक्रमिक रूप से असंभव है। अतः दोनों कथन असत्य हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: संत कबीर पर वास्तव में रामानंद जैसे भक्ति संतों तथा नाथपंथी व सूफी विचारधाराओं का समन्वित प्रभाव माना जाता है, न कि नक्शबंदी सिलसिले का।
30. निम्नलिखित युग्मों में से गलत युग्म को पहचानिए-
(a) चिश्ती-दिल्ली और दोआब
(b) सुहरावर्दी-सिंध
(c) औलिया-मध्य प्रदेश
(d) फिरदौसी-बिहार
Jharkhand P.C.S. (Pre) 2011
उत्तर- (c)
चिश्ती सिलसिले का मुख्य प्रभाव क्षेत्र दिल्ली एवं गंगा-यमुना दोआब का क्षेत्र था, जबकि सुहरावर्दी सिलसिला मुख्यतः सिंध व मुल्तान क्षेत्र में सक्रिय रहा। फिरदौसी सिलसिला, जो मूलतः सुहरावर्दिया की ही एक शाखा मानी जाती है, बिहार क्षेत्र में विशेष रूप से फला-फूला। ‘औलिया’ कोई स्वतंत्र सिलसिला नहीं था, बल्कि यह दिल्ली के प्रसिद्ध चिश्ती संत निजामुद्दीन को प्रदत्त एक उपाधि मात्र थी, और उनका कार्यक्षेत्र मध्य प्रदेश नहीं अपितु दिल्ली था। अतः विकल्प (c) गलत युग्म है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: फिरदौसी सिलसिले के प्रमुख संत शेख शरफुद्दीन याह्या मनेरी थे, जिन्होंने बिहार के मनेर क्षेत्र को अपनी साधना का केंद्र बनाया और फारसी में सूफी पत्र-साहित्य की रचना की।
31. हठ योग के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है/है?
1. हठयोग नाथपंथियों द्वारा अपनाया जाता था।
2. हठयोग क्रिया को सूफी संतों ने भी अपनाया था।
नीचे दिए हुए कूट में से सही उत्तर चुनिए –
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
U.P.P.C.S. (Pre) 2019
उत्तर- (c)
हठयोग की परंपरा मुख्यतः नाथपंथी योगियों से जुड़ी है, जिसके प्रवर्तक गुरु मत्स्येंद्रनाथ तथा उनके शिष्य गुरु गोरखनाथ माने जाते हैं। रोचक बात यह है कि यह योग-परंपरा सूफी संतों के मध्य भी लोकप्रिय हुई। शत्तारी सिलसिले के संत मुहम्मद गौस ग्वालियरी ने अपनी फारसी रचना ‘बहर अल-हयात’ में हठयोग की विभिन्न क्रियाओं तथा प्राणायाम पद्धतियों का विस्तृत वर्णन किया। अतः दोनों कथन सही हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: ‘बहर अल-हयात’ मूलतः संस्कृत ग्रंथ ‘अमृतकुंड’ पर आधारित थी, जिसका फारसी अनुवाद हिन्दू योग-परंपरा तथा इस्लामी सूफी साधना के बीच सेतु का कार्य करता है।
32. निम्नलिखित में से किसका संबंध सूफीवाद से नहीं है?
(a) उलेमा
(b) खानकाह
(c) शेख
(d) समा
U.P.P.S.C. (R.I.) 2014
उत्तर- (a)
सूफी संतों के निवास एवं साधना-स्थल को ‘खानकाह’ कहा जाता था, जहाँ शिष्यगण अपने गुरु (शेख/पीर) के सान्निध्य में रहकर आध्यात्मिक शिक्षा प्राप्त करते थे। ‘समा’ संगीत के माध्यम से ईश्वर-प्राप्ति की सूफी पद्धति थी। इसके विपरीत ‘उलेमा’ शब्द इस्लामी धर्मशास्त्र (शरीयत) के विद्वानों के लिए प्रयुक्त होता था, जो प्रायः सूफी मत के रहस्यवादी दृष्टिकोण के आलोचक और कट्टर शरीयत-पालन के समर्थक होते थे। अतः उलेमा का सीधा संबंध सूफीवाद से नहीं है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: उलेमा वर्ग तथा सूफी संतों के बीच वैचारिक टकराव मध्यकालीन भारत के इस्लामी समाज की एक स्थायी विशेषता रही, विशेषतः सूफियों की उदार व सर्वसमावेशी शिक्षाओं को लेकर।
33. निम्नलिखित संतों में से कौन सूफी थे-
(a) 1 और 3
(b) 1, 2 और 3
(c) 2 और 3
(d) 2 और 4
U.P. Lower Sub. (Pre) 1998
उत्तर- (c)
ख्वाजा निजामुद्दीन औलिया और ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती दोनों ही चिश्तिया सिलसिले के प्रसिद्ध सूफी संत थे, जिनमें मुइनुद्दीन चिश्ती ने भारत में इस सिलसिले का प्रथम प्रचार अजमेर को केंद्र बनाकर किया था। निजामुद्दीन औलिया अपनी उदारता के कारण ‘महबूब-ए-इलाही’ कहलाए और उन्होंने प्राणायाम जैसी योग-क्रियाओं को इस सीमा तक अपनाया कि उन्हें ‘योगसिद्ध’ तक कहा जाने लगा। इसके विपरीत रहीम तथा रसखान सूफी संत नहीं, अपितु मध्यकालीन भक्ति-धारा से जुड़े हिन्दी कवि थे, जिनमें रसखान ने कृष्ण-भक्ति पर आधारित ‘प्रेमवाटिका’ नामक ग्रंथ रचा। अतः कथन (2) और (3) सही हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: रहीम, अकबर के नवरत्नों में से एक थे और उन्होंने दोहा-शैली में अनेक नीति व भक्तिपरक रचनाएँ लिखीं, जबकि रसखान मूलतः एक मुस्लिम कवि थे जो कृष्ण-भक्ति के प्रति समर्पित हो गए थे।
34. निम्नलिखित सूफीवाद के सिलसिलों में कौन संगीत के विरुद्ध था?
(a) चिश्तिया
(b) सुहरावदिया
(b) कादरिया
(d) नक्शबंदिया
U.P.P.C.S. (Pre) 2003
U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2002
U.P. P.C.S. (Mains) 2013
उत्तर- (d)
14वीं सदी में ख्वाजा बहाउद्दीन नक्शबंद द्वारा स्थापित नक्शबंदी सिलसिला सूफी परंपराओं में सबसे अधिक रूढ़िवादी माना जाता है, जो समा (संगीत सभा) का घोर विरोधी था। इस सिलसिले के प्रमुख संत शेख अहमद सरहिंदी, जो ख्वाजा बकी बिल्लाह के शिष्य तथा ‘मुजद्दिद’ (धर्म-सुधारक) की उपाधि से प्रसिद्ध थे, ने ‘वहदत-उल-शुहूद’ (प्रत्यक्षवादी दर्शन) का प्रतिपादन कर अकबर की उदार धार्मिक नीतियों का विरोध किया। बादशाह औरंगजेब इसी कट्टर सिलसिले का अनुयायी माना जाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: नक्शबंदी सिलसिला भारत में सर्वप्रथम मुगल बादशाह बाबर के समय लोकप्रिय हुआ, जो स्वयं मध्य एशिया के नक्शबंदी संतों से गहरा जुड़ाव रखता था।
35. निम्नलिखित सूफियों में से किसने कृष्ण को औलिया के रूप में माना-
(a) शाह मोहम्मद गौस
(b) शाह अब्दुल अजीज
(c) शाह वलीउल्ला
(d) ख्वाजा मीर दर्द
U.P.P.C.S. (Pre) 2003
>U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2002
U.P. P.C.S. (Mains) 2012
उत्तर- (a)
शत्तारी सिलसिले के सर्वाधिक प्रसिद्ध संत शाह मोहम्मद गौस ग्वालियरी ने अपनी उदार दृष्टि के चलते भगवान कृष्ण को भी एक ‘औलिया’ (ईश्वर-भक्त संत) के रूप में स्वीकार किया, जो हिन्दू-मुस्लिम समन्वयवादी सोच का उल्लेखनीय उदाहरण है। उनके मुगल बादशाह हुमायूं तथा प्रसिद्ध संगीतज्ञ तानसेन से घनिष्ठ संबंध थे। शत्तारी संतों ने हिन्दू व इस्लामी धार्मिक विचारों की समानताओं को उजागर कर दोनों समुदायों को निकट लाने का सार्थक प्रयास किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: शाह मोहम्मद गौस की दरगाह ग्वालियर में स्थित है, जिसकी वास्तुकला मुगलकालीन इंडो-इस्लामिक शैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण मानी जाती है और इसने आगे चलकर हुमायूं के मकबरे के निर्माण को भी प्रभावित किया।
36. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए और नीचे दिए गए कूटों से सही उत्तर चुनिए –
सूची-I सूची-II
A. मुल्ला दाउद 1. चांदायन
B. दामोदर कवि 2. आशिका
C. सोमनाथ 3. पद्मावती कथा
D. अमीर खुसरो 4. राग विबोध
(a) 1 3 2 4
(b) 1 3 4 2
(c) 2 4 1 3
(d) 1 3 2 4
U.P.P.C.S. (Pre) 2019
उत्तर- (b)
सूफी परंपरा से प्रभावित मध्यकालीन प्रेमाख्यानक (सूफी) काव्यधारा के अंतर्गत रचित इन कृतियों का सही सुमेलन इस प्रकार है- मुल्ला दाउद ने अवधी भाषा में ‘चांदायन’ की रचना की, जिसे इस शैली की आरंभिक कृतियों में गिना जाता है; दामोदर कवि ने ‘पद्मावती कथा’ लिखी; सोमनाथ ने संगीत-विषयक ग्रंथ ‘राग विबोध’ की रचना की; तथा अमीर खुसरो ने ऐतिहासिक विषयों पर ‘आशिका’ नामक काव्य रचा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मुल्ला दाउद की ‘चांदायन’ को हिन्दी की सूफी प्रेमाख्यानक परंपरा की प्रथम रचना माना जाता है, जिसने बाद में जायसी के ‘पद्मावत’ जैसी कृतियों को प्रेरित किया।
37. निम्न में से कौन एक भक्ति आंदोलन से जुड़ा नहीं है?
(a) वल्लभाचार्य
(b) चैतन्य
(c) गुरुनानक
(d) अमीर खुसरो
Uttarakhand P. C. S. (Mains) 2006
उत्तर- (d)
अमीर खुसरो, जिनका मूल नाम अबुल हसन यमीनुद्दीन खुसरो था, मूलतः दरबारी कवि, संगीतज्ञ तथा सूफी संत निजामुद्दीन औलिया के शिष्य थे, न कि भक्ति आंदोलन के प्रवर्तक। इसके विपरीत चैतन्य महाप्रभु ने बंगाल में गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय की स्थापना की, वल्लभाचार्य कृष्णभक्ति की पुष्टिमार्गीय शाखा के प्रवर्तक थे, तथा गुरु नानक ने निर्गुण भक्तिधारा के अंतर्गत निराकार ‘अकाल पुरुष’ की उपासना पर बल दिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अमीर खुसरो को भारतीय शास्त्रीय संगीत में सितार तथा तबले के आविष्कार का श्रेय भी परंपरागत रूप से दिया जाता है, यद्यपि इस विषय पर इतिहासकारों में मतभेद है।
38. कृष्ण जीवनपरक ‘प्रेम वाटिका’ काव्य की रचना की थी-
(a) बिहारी ने
(b) सूरदास ने
(c) रसखान ने
(d) कबीर ने
I.A.S. (Pre) 1996
उत्तर- (c)
मुस्लिम कृष्णभक्त कवि रसखान ने ‘प्रेमवाटिका’ नामक काव्यग्रंथ की रचना की, जिसमें भगवान कृष्ण के जीवन-प्रसंगों को दोहा-शैली में पिरोया गया है। उनकी एक अन्य प्रसिद्ध रचना ‘सुजान रसखान’ है, जो सवैया छंद में रचित है। रसखान की काव्य-भाषा विशुद्ध ब्रजभाषा है, जो उनकी कृष्णभक्ति की गहनता को दर्शाती है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: रसखान मूलतः एक पठान (मुस्लिम) कुल में जन्मे थे, किंतु वृंदावन के कृष्ण-भक्तों के संपर्क में आने के बाद उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन कृष्णभक्ति को समर्पित कर दिया, जो मध्यकालीन भारत की सांप्रदायिक सद्भाव-परंपरा का उत्कृष्ट उदाहरण है।
39. ‘बारहमासा’ की रचना किसने की थी ?
(a) अमीर खुसरो
(b) इसामी
(c) मलिक मोहम्मद जायसी
(d) रसखान
39th B.P.S.C. (Pre) 1994
उत्तर- (c)
सूफी कवि मलिक मोहम्मद जायसी की सर्वाधिक प्रसिद्ध रचना ‘पद्मावत’ है, जिसका ‘बारहमासा’ खंड एक अभिन्न अंग है और जिसमें बारह महीनों के प्राकृतिक परिवर्तनों के माध्यम से नायिका के विरह-वर्णन को चित्रित किया गया है। इसके अतिरिक्त जायसी ने ‘अखरावट’ तथा ‘आखिरी कलाम’ जैसी रचनाएँ भी लिखीं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: ‘पद्मावत’ अवधी भाषा में रचित है और इसमें चित्तौड़ की रानी पद्मावती तथा अलाउद्दीन खिलजी से जुड़ी लोककथा को काव्यात्मक रूप दिया गया है, जिसे इतिहासकार ऐतिहासिक तथ्य के बजाय काल्पनिक आख्यान मानते हैं।
40. क्राइस्ट का जन्म स्थान-
(a) जेरूशलम
(b) बेथलेहम
(c) लंदन
(d) बेबीलॉन
M.P.P.C.S. (Pre) 1995
उत्तर- (b)
ईसाई मान्यताओं के अनुसार ईसा मसीह का जन्म बेथलेहम नामक नगर में हुआ था, जो वर्तमान में फिलिस्तीनी क्षेत्र में स्थित है। बाइबिल के अनुसार उनकी माता मरियम तथा पिता योसेफ को जनगणना के लिए बेथलेहम जाना पड़ा था, जहाँ एक अस्तबल में ईसा का जन्म हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बेथलेहम में स्थित ‘चर्च ऑफ द नेटिविटी’ को दुनिया के सबसे पुराने निरंतर उपयोग में रहने वाले ईसाई गिरजाघरों में गिना जाता है और यह यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल सूची में शामिल है।
41. ईस्टर हार के पीछे ईसाइयों की भावना है-
(a) इस दिन ईसा ने उपदेश दिया
(b) ईसा ने संसार से विदा ली
(c) ईसा नाजरथ में गए
(d) इस दिन ईसा पुनर्जीवित हुए
R.A.S./R.T.S. (Pre) 1992
उत्तर- (d)
ईसाई धर्म-विश्वास के अनुसार सूली पर चढ़ाए जाने के तीसरे दिन ईसा मसीह पुनर्जीवित हुए थे, और इसी पुनरुत्थान की स्मृति में प्रतिवर्ष ईस्टर पर्व मनाया जाता है, जो ईसाई धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में गिना जाता है। इससे पूर्व का सप्ताह ‘पवित्र सप्ताह’ (होली वीक) कहलाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: ईस्टर की तिथि प्रतिवर्ष बदलती रहती है, क्योंकि इसे वसंत विषुव के पश्चात आने वाली पहली पूर्णिमा के बाद के रविवार को मनाने की परंपरा है, जिस कारण यह मार्च या अप्रैल माह में पड़ता है।
42. प्रति वर्ष प्रसिद्ध सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की मजार पर मेला लगता है-
(a) फतेहपुर सीकरी में
(b) कलियर में
(c) देवा शरीफ में
(d) गढ़मुक्तेश्वर में
U.P.P.C.S. (Pre) 2008
उत्तर- (c)
19वीं शताब्दी के प्रसिद्ध सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की मजार उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में स्थित देवा शरीफ नामक कस्बे में है, जो बाराबंकी शहर से लगभग 12 किमी. की दूरी पर स्थित है। यहाँ प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला उर्स-मेला हिन्दू-मुस्लिम दोनों समुदायों की सहभागिता के लिए प्रसिद्ध है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हाजी वारिस अली शाह को ‘वारिस पाक’ के नाम से भी जाना जाता था और उनके अनुयायियों में हिन्दू धर्मावलंबियों की भी बड़ी संख्या रही है, जो उत्तर भारत की सर्वसमावेशी सूफी परंपरा का परिचायक है।
43. ईसाइयों का गुड फ्राइड़े क्यों मनाया जाता है ?
(a) ईसा मसीह की मृत्यु हुई थी
(b) ईसा मसीह का जन्म हुआ था
(c) ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था
(d) ईस्वी सन का प्रारंभ हुआ था
U.P.P.C.S. (Pre) 1990
उत्तर- (c)
गुड फ्राइडे को ईसाई समुदाय ईसा मसीह के बलिदान-दिवस के रूप में मनाता है, क्योंकि बाइबिल के अनुसार इसी दिन (शुक्रवार) उन्हें सूली पर चढ़ाया गया था। यह दिन ईस्टर से ठीक पहले आता है और ‘पवित्र सप्ताह’ का अत्यंत महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन गिरजाघरों में शोक और उपवास के साथ विशेष प्रार्थना-सभाएँ आयोजित की जाती हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: ‘गुड फ्राइडे’ नाम के बावजूद यह दिन शोक का दिन होता है; कुछ विद्वानों के अनुसार ‘गुड’ शब्द यहाँ पुराने अंग्रेज़ी अर्थ में ‘पवित्र’ या ‘धार्मिक’ के भाव में प्रयुक्त हुआ है।
44. कौन-सा ईसाई संत पशु-पक्षियों से प्रेम के लिए विख्यात है?
(a) संत पॉल
(b) संत थामस
(c) असीसी के संत फ्रांसिस
(d) संत पीटर
M.P.P.C.S. (Pre) 1997
उत्तर- (c)
इटली के असीसी नगर में जन्मे संत फ्रांसिस (1181-1226 ई.) प्रकृति तथा पशु-पक्षियों के प्रति अपने असीम प्रेम के लिए विश्वप्रसिद्ध हैं, और उन्हें पर्यावरण तथा पशुओं का संरक्षक संत भी माना जाता है। उन्होंने त्याग और सादगी का जीवन अपनाते हुए ‘फ्रांसिस्कन आर्डर’ नामक धार्मिक संघ की स्थापना की।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: वर्तमान पोप फ्रांसिस ने अपने पोप-नाम के रूप में संत फ्रांसिस असीसी के नाम को चुना, जो सादगी, गरीबों की सेवा तथा पर्यावरण-संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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