दिल्ली सल्तनत के समय का कश्मीर : शाह मीर एवं चक वंश (1339–1586 ई.)

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कश्मीर : मध्यकालीन भारत का प्रमुख हिमालयी राज्य

➣ कश्मीर में मध्य युग का आरम्भ 1320 ई. में मंगोल आक्रमणों के साथ होता है। इससे पूर्व मीरकासिम व महमूद गजनवी ने दो बार 1015 ई. और 1021 ई. में कश्मीर को विजित करने का प्रयास किया।

➣ 1286 ई. में सिंह देव ने कश्मीर में एक नए हिन्दू राजवंश की स्थापना की थी उसने 1301 ई. तक शासन किया।

➣ इसके बाद उसका भाई सुहादेव (1301-1320 ई.) गद्दी पर बैठा। सुहादेव के शासनकाल में 1320 ई. में दलूचा के नेतृत्व में मंगोलों का आक्रमण हुआ।

➣ सुहादेव के शासनकाल में तीन शरणार्थी कश्मीर आये (1) रिचन लद्दाख के शासक राजवंश से सम्बन्धित था। (ii) दरिस्तान से लंगर चक तथा (iii) स्वात से शाहमीर।

➣ मंगोल आक्रमण के बाद फैली अव्यवस्था का लाभ उठाकर रिंचन ने सत्ता अधिग्रहण कर लिया।

शासकशासनकालप्रमुख जानकारी / महत्वपूर्ण घटनाएँ
शम्सुद्दीन शाह मीर1339–1342 ई.शाह मीर वंश का संस्थापक। रिंचन एवं उदयनदेव के बाद कश्मीर का प्रथम मुस्लिम शासक बना तथा कश्मीर सल्तनत की स्थापना की।
जमशेद शाह1342–1343 ई.शाह मीर का पुत्र। उसका शासन अल्पकालीन रहा तथा शीघ्र ही उसके भाई ने सत्ता पर अधिकार कर लिया।
अलाउद्दीन शाह1343–1354 ई.राज्य में शांति एवं प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ किया तथा शाह मीर वंश को स्थिरता प्रदान की।
शहाबुद्दीन1354–1373 ई.कश्मीर सल्तनत का विस्तार किया। गिलगित, लद्दाख तथा आसपास के क्षेत्रों पर प्रभाव स्थापित किया।
कुतुबुद्दीन1373–1389 ई.सूफी संत मीर सैयद अली हमदानी के प्रभाव में रहा। इस्लामी संस्कृति के प्रसार को बढ़ावा मिला।
सिकंदर शाह (बुतशिकन)1389–1413 ई.‘बुतशिकन’ (मूर्तिभंजक) के नाम से प्रसिद्ध। अनेक मंदिरों को ध्वस्त कराया तथा धार्मिक कट्टरता की नीति अपनाई।
अली शाह1413–1420 ई.कमजोर शासक। उसके शासनकाल में आंतरिक संघर्ष बढ़े।
जैनुल आबिदीन (बदशाह)1420–1470 ई.कश्मीर का सबसे महान शासक। ‘कश्मीर का अकबर’ कहा जाता है। धार्मिक सहिष्णुता अपनाई, जज़िया हटाया, संस्कृत विद्वानों को संरक्षण दिया तथा शॉल, कागज़ एवं हस्तशिल्प उद्योगों को प्रोत्साहन दिया।
हैदर शाह1470–1472 ई.जैनुल आबिदीन का उत्तराधिकारी। उसका शासन कमजोर रहा और राज्य में अस्थिरता बढ़ी।
हसन शाह1472–1484 ई.साहित्य एवं कला का संरक्षण किया, किन्तु केंद्रीय सत्ता लगातार कमजोर होती गई।
मुहम्मद शाह1484–1526 ई. (विभिन्न अवधियों में)कई बार गद्दी पर बैठा और हटाया गया। इस काल में अमीरों के आपसी संघर्ष तथा चक सरदारों का प्रभाव बढ़ गया।
इब्राहीम शाह1526–1527 ई.अल्पकालीन शासक। उसके शासनकाल में राजनीतिक अस्थिरता बनी रही।
नाज़ुक शाह1527–1529 एवं 1533–1534 ई.दो बार गद्दी पर बैठा, परन्तु अमीरों के संघर्ष के कारण शासन स्थिर नहीं रह सका।
चक वंश1561–1586 ई.चक सरदारों ने सत्ता पर अधिकार कर चक वंश की स्थापना की। इस वंश का अंतिम प्रमुख शासक यूसुफ शाह चक तथा उसके बाद याकूब शाह चक था।
यूसुफ शाह चक1579–1586 ई.चक वंश का प्रसिद्ध शासक। हब्बा खातून उसका समकालीन थीं। अकबर ने उसे दरबार में बुलाकर बंदी बना लिया।
याकूब शाह चक1586 ई.चक वंश का अंतिम शासक। 1586 ई. में अकबर ने कश्मीर पर अधिकार कर उसे मुगल साम्राज्य में मिला लिया।

रिंचन (1320-23 ई.)

➣ रिंचन ने 6 अक्टूबर, 1320 ई. में सुहादेव के वजीर तथा सेनापति रामचन्द्र की हत्या करके स्वयं को राजा घोषित किया।

➣ रिचन ने रामचन्द्र की पुत्री कोटा रानी से विवाह किया। उसने शाहमीर को अपना वजीर बनाया। 1323 ई. में उसकी मृत्यु हो गयी।

➣ शाहमीर (1339-1356 ई.) में शाहमीर अथवा शाहमिर्जाने कश्मीर के सिंहासन पर अधिकार कर लिया और वहाँ मुस्लिम वंश (शाहमीर वंश) की स्थापना की। वह कश्मीर का प्रथम मुस्लिम शासक था।

➣ शाहमीर या सुल्तान शमसुद्दीन ने न्याय तथा निष्पक्षता के आधार पर शासन करना आरम्भ किया।

➣ उसने कश्मीर में सामन्तवादी व्यवस्था को समाप्त करके अपने निष्ठावान हिन्दू और मुसलमान सेनायकों को इक्ताएं आवंटित की और इस प्रकार तुर्की शासन व्यवस्था को प्रचलित किया।

➣ उसके चार पुत्रों जमशेद, अलाउद्दीन, शिहाबुद्दीन व कुतुबुद्दीन ने एक के बाद एक 46 वर्षों तक शासन किया।

➣ अलाउद्दीन ने राजधानी इन्दुकोट से अलाउद्दीनपुर (श्रीनगर) बनाई।

➣ शिहाबुद्दीन (1356-1374 ई.) ने संपूर्ण कश्मीर पर प्रभुत्व स्थापित किया। शिहाबुद्दीन को कश्मीर में मुस्लिम शासन का वास्तविक संस्थापक माना जाता है।

➣ शाहमीर वंश का अगला महत्त्वपूर्ण शासक सिकन्दर (1389-1413 ई.) था। उसी के शासनकाल में तैमूर ने भारत पर आक्रमण किया।

➣ सिकन्दर के शासनकाल में प्रमुख ईरानी अप्रवासी सूफी सन्त सैय्यद अली महदानी का पुत्र सैय्यद मुहम्मद हमदानी कश्मीर आया था। सुल्तान ने उसका सम्मानपूर्वक स्वागत किया और उनके लिए खानकाह का निर्माण कराया।

➣ सिकन्दर ने सती प्रथा पर रोक लगाई।

➣ सिकन्दर एक धर्मान्ध शासक था। उसके समय में मन्दिर नष्ट किये गये और सोने-चांदी की मूर्तियाँ शाही टकसाल में गलाकर सिक्कों में परिवर्तित कर दी गई। अतः उसे बुतशिकन कहा जाता है।

➣ सुहाभट्ट के सुझाव पर सिकन्दर ने कश्मीर के हिन्दुओं (ब्राह्मणों) पर अत्याचार किये एवं उन पर जजिया लगाया।

➣ उसने सुहाभट्ट नामक एक ब्राह्मण को अपना प्रधान सेनापति एवं मुख्य परामर्शदाता नियुक्त किया। बाद में सुहाभट्ट ने इस्लाम धर्म अंगीकार कर लिया।

➣ उसके अत्याचारों का उल्लेख करते हुए फरिश्ता ने लिखा है कि “सुहाभट्ट के सुझाव पर सुल्तान ने आज्ञा दी कि सभी ब्राह्मण तथा विद्वान हिन्दू मुसलमान बन जाय और जो इस्लाम धर्म स्वीकार न करें, वे घाटी (कश्मीर) से निकल जायें।”

➣ सिकन्दर के बाद उसके पुत्र अली शाह (1416-1420 ई.) को गद्दी से अपदस्थ कर अली शाह का छोटा भाई शाह खान सुल्तान बना।

➣ अलीशाह ने वजीर साहू भट्ट के साथ मिलकर सिकन्दरशाह की धर्मान्धता नीति का विस्तार किया।

सुल्तान जैनुल आबिदीन (1420-1470 ई.)

➣ यह अपने पिता सिकन्दर शाह की नीतियों के विरुद्ध उदार व सहिष्णु शासक था। उसकी उदार नीतियों के कारण उसे कश्मीर का अकबर कहा जाता है।

➣ उसने अपने पिता द्वारा विनष्ट किये गये हिन्दू मन्दिरों का पुनर्निर्माण कराया, जिन ब्राह्मणों को कश्मीर से निकल जाने के लिए बाध्य किया गया, उन्हें स्वदेश आने के लिए प्रेरित किया गया।

➣ जैनुल अबीदीन ने गोहत्या पर प्रतिबन्ध लगा दिया, जजिया हटा दिया, हिन्दू भावनाओं का आदर करते हुये सती प्रथा पर प्रतिबन्ध हटा दिया एवं अन्त्येष्टि कर भी हटा लिया।

जैनुल आबिदीन जजिया को समाप्त करने वाला पहला शासक था।

➣ जैनुल अबीदीन विद्वान व विभिन्न भाषाओं का ज्ञाता था। वह कुतुब उपनाम से फारसी में कवितायें लिखता था। उसने शिकायतनामा नामक ग्रन्थ की रचना की।

➣ उसने अपने शिक्षक मौलाना कबीर को हेरात से बुलाकर शेख उल इस्लाम के पद पर नियुक्त किया।

➣ जैनुल अबीदीन के समय हबीब के नेतृत्व में आतिशबाजी कला एवं तफंग (बंदूक) का विकास हुआ।

➣ जैनुल ने अनुवाद विभाग की भी स्थापना की। उसने मुल्ला अहमद द्वारा महाभारत का अनुवाद करवाया एवं राजतरंगिनी का फारसी अनुवाद कराया।

➣ इसी के शासनकाल में जोनराज और श्रीवर ने राजतरंगिणी के क्रमशः दूसरे और तीसरे भाग को लिखा था।

➣ वह संगीत प्रेमी था। ग्वालियर के राजा ने उसके संगीत प्रेम के विषय में सुनकर उसे दो दुर्लभ संस्कृत संगीत- ग्रन्थ भेजे थे।

➣ कश्मीरी लोगों ने उसे वुडशाह ( महान नरेश) की उपाधि से सम्मानित किया। उसकी उदार नीतियों के कारण उसे कश्मीर का अकबर और मूल्य नियंत्रण व्यवस्था के कराण कश्मीर का अलाउद्दीन खिलजी कहा जाता है।

➣ हिन्दू श्रेय भट्ट जैनुल अबीदीन का न्यायमंत्री व राजवैद्य था।

➣ जैनुल अवीदीन ने कश्मीर में काँच की बोतल बनाने, कागज बनाने, पुस्तकों पर जिल्द चढ़ाने, बन्दूक व पटाखे बनाने, शाल बनाने, बहुमूल्य पत्थर काटने व पॉलिश करने की कलाओं को प्रोत्साहित किया।

➣ जैनुल अबीदीन यद्यपि महान् योद्धा नहीं था, किन्तु उसने लद्दाख में मंगोल आक्रमणकारियों को पराजित किया।

➣ यदु भट्ट ने जैन प्रकाश की रचना की जो जैनुल अबीदीन की जीवनी है।

➣ भट्टावतार ने फिरदौसी की शाहनामा एवं अन्य फारसी पुस्तकों के प्रभाव में जैन विलास नामक कश्मीर का इतिहास लिखा।

➣ नोत्तोसोम (उत्तोसोम) ने जैन चरित नामक जैनुल अवीदीन की जीवनी लिखी थी।

➣ आबिदीन के बाद हाजी खाँ (1470-72 ई.) हैदरशाह की उपाधि से सिंहासन पर आसीन हुआ।

➣ कालान्तर में 1540 ई. में मिर्जा हैदर दोगलत जो बाबर का सम्बन्धी था, उसने सिंहासन पर कब्जा कर लिया। वह नाजुकशाह की उपाधि धारण की थी।

➣ 1586 ई. में अन्तिम चक शासक नासीरुद्दीन मोहम्मद याकूब शाह को पराजित करके मुगल शासक अकबर ने कश्मीर को अपने साम्राज्य का अंग बना लिया।

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