बहमनी साम्राज्य का विभाजन : दक्कन की पाँच सल्तनतों का उदय

भारतीय इतिहास मध्यकालीन भारत बहमनी साम्राज्य का विभाजन
📚 विषय सूची

दक्कन की पाँच सल्तनतें

राज्यसंस्थापकस्थापनाराजवंशराजधानीविलय
बरार फतहउल्ला इमाद शाह1484 ई. इमादशाहीएलिचपुर, गाविलगढ़1574 ई. को अहमदनगर में
बीजापुरयूसुफ आदिल खाँ 1489 ई. आदिलशाहीनौरसपुर1686 ई. को औरंगजेब द्वारा मुगल साम्राज्य में
अहमदनगर मलिक अहमद 1490 ई. निजामशाहीजुन्नार, अहमदनगर1636 ई. को शाहजहाँ द्वारा मुगल साम्राज्य में
गोलकुंडाकुली कुतुबशाह 1512 ई. कुतुबशाहीगोलकुंडा1687 ई. को औरंगजेब द्वारा मुगल साम्राज्य में
बीदर अमीर अली बरीद 1526 ई. बरीदशाहीबीदर1619 ई. को बीजापुर में

1.बरार के इमादशाही (1484 -1574 ई.)

➣ सबसे पहले बहमनी साम्राज्य से अलग होने वाला क्षेत्र बरार था, जिसे फतहउल्ला इमादशाह (हिन्दु से मुसलमान) ने 1484 ई. स्वतन्त्र घोषित करके इमादशाही वंश की स्थापना की।

➣ फतहउल्ला हिन्दू से मुसलमान बना था। इसकी दो राजधानियाँ थी- एलिचपुर और गाविलगढ़।

1574 ई. में अहमदनगर ने बरार को हड़पकर इसका स्वतंत्र अस्तित्व समाप्त कर दिया

1595-96 ई. में अकबर के साथ हुई संधि के तहत बरार अहमदनगर से मुगलों को दे दिया गया। zबरार ने 1565 ई. में विजयनगर के विरुद्ध तालीकोटा युद्ध में भाग नहीं लिया था।

2.अहमदनगर के निजामशाह (1490-1636)

➣ अहमदनगर राज्य की स्थापना मलिक अहमद ने 1490 ई. में निजामशाही वंश की नींव रखी।

महमूद गवाँ को प्राण दण्ड देने के पश्चात् मलिक अहमद को बहमनी साम्राज्य का वजीर नियुक्त किया गया था। उसने निजामुलमुल्क की उपाधि धारण की।

➣ मालिक अहमद ने ही 1490 ई. में अहमदनगर शहर की स्थापना की तथा अपनी राजधानी जुन्नर से वहां स्थानान्तरित की।

बुरहान निजामशाह (1508-53 ई.)

➣ 1508 ई. में मलिक अहमद की मृत्यु के बाद उसका सात वर्षीय पुत्र बुरहान शासक बना।

➣ अहमदनगर सुल्तानों में वह पहला था जिसने निजामशाह की उपाधि धारण की। मुकम्मल खाँ दक्किनी उसका प्रधानमंत्री था।

हुसैन निजाम शाह (1553-65 ई.)

➣ उसके शासन काल को दक्कन के इतिहास में एक युगान्तरकारी युग के रूप में स्वीकार किया जाता है।

➣ 1562 ई. में बीजापुर के आदिलशाह, गोलकुण्डा के इब्राहीम कुतुबशाह और विजयनगर की संयुक्त सेनाओं ने रामराय के नेतृत्व में अहमद नगर पर आक्रमण किया और उसी बुरी तरह लूटा।

➣ हुसैन निजाम शाह 1565 ई. में विजय नगर के विरुद्ध तालीकोटा के युद्ध में बने मुस्लिम संघ में शामिल था। चाँद बीबी हुसैन निजाम शाह की बेटी तथा बुरहान द्वितीय बेटा था।

मुर्तजा निजाम शाह (1565-1588 ई.)

➣ यह हुसैन निजाम का उत्तराधिकारी था। इसके शासनकाल में मुगलों ने अहमद नगर पर आक्रमण किया।

➣ मुर्तजा निजामशाह ने ही बरार को 1574 ई. में अहमदनगर में मिलाया था।

बुरहान निजाम शाह द्वितीय (बुरहान उल मुल्क) (1591-95 ई.)

➣ यह मुगल सम्राट अकबर के दरबार में बन्धक था। इसे बीजापुर के सुल्तान इब्राहीम आदिलशाह द्वितीय द्वारा पराजित होना पड़ा।

➣ बुरहान की दूसरी सबसे बड़ी विफलता यह थी कि वह पूर्तगालियों से चौल को पुनर्विजित नहीं कर सका।

➣ इसके शासन काल में सैयद अली तबतबा द्वारा बुरहान-ए-मसि नामक ऐतिहासिक ग्रन्थ की रचना हुई।

चाँदबीबी

➣ इसका विवाह बीजापुर के शासक अली आदिलशाह के साथ हुआ था। वह अपने पति की मृत्यु के पश्चात् अहमदनगर वापस लौट आयी और अहमदनगर की राजनीति में बड़ी स्मरणीय भूमिका का निर्वाह किया।

➣ बुरहान की मृत्यु के बाद उसके पुत्र इब्राहीम ने केवल चार माह तक की शासन किया। इस काल में अहमदनगर की स्थिति अत्यन्त विवादग्रस्त थी।

निजामशाही अमीर वर्ग के चार गुटों द्वारा चार दावेदारों ने गद्दी के लिए अपने दावे प्रस्तुत किये, जिसमें एक का समर्थन मियाँ मंझू (दक्कनी) ने किया और दूसरे का पक्ष चाँदबीबी ने लिया।

➣ मियाँ मंझू ने अपने समर्थक की स्थिति संकटग्रस्त देखी तो उसने मुगल सम्राट अकबर के पुत्र मुराद को अपनी सहायता के लिए आमंत्रित किया।

शाहजादा मुरादअर्दुरहीम खान खाना ने 1595 से 1597 ई. के बीच अहमदनगर को जीतने के प्रयास किये। अहमदनगर के अल्प वयस्क सुल्तान बहादुर निजाम शाह की संरक्षिका चाँद बीबी ने कड़ा प्रतिरोध किया किन्तु पराजित हुई।

➣ बहादुर को बंधक बना लिया गया। अन्त में चाँद बीबी ने 1596 ई. में मुगलों से संधि की, जिसके तहत् बरार का प्रदेश मुगलों को प्राप्त हुआ एवं बहादुर निजाम शाह को अहमदनगर का शासक स्वीकार कर लिया गया, परन्तु यह संधि अधिक समय न रह सकी।

➣ चांद बीबी के नेतृत्व में अहमदनगर, बीजापुर एवं गोलकुण्डा की संयुक्त सेना तथा अर्दुरहीम खान-खाना के नेतृत्व में मुगलों की सेना के मध्य 1597 ई. में सूपा (सोमपथ) का युद्ध हुआ, जिसमें चांद बीबी पराजित हुई।

➣ चाँदबीबी ने बरार क्षेत्र मुगलों को समर्पित कर दिया। मुगलों ने बुरहान का पुत्र एंव चाँद बीबी के भतीजे बहादुर (1595-1600 ई.) , जिसका पक्ष चाँद बीबी ने लिया था , को राजगद्दी के दावे को मान्यता दी ।

➣ 1599 ई. में चीताखां नामक व्यक्ति ने चांद बीबी की हत्या कर दी व बहादुर को मुगलों ने बन्धक बनाकर ग्वालियर भेज दिया।

➣ तत्पश्चात मुर्तजा निजामशाह द्वितीय शासक बना। इसने अहमदनगर, बालाघाट और दौलताबाद के कुछ हिस्से मुगलों को सौंप दिये व शेष राज्य का मुगलों के प्रति वफादारी की शर्त पर शासक बना।

मलिक अम्बर

➣ यह अबीसीनियाई दास था। जिसे तीन बार दासता से मुक्त किया जा चुका था और बाद में वह अहमदनगर का एक प्रमुख वजीर बन गया।

➣ उसने मुर्तजा द्वितीय (1600-1610 ई.) को सुल्तान घोषित किया और स्वयं अहमदनगर की कमान संभाली। उसने मुगलों के सम्मुख नतमस्तक न होने का संकल्प लिया था।

मलिक अम्बर ने अहमद नगर को केन्द्र बनाकर छापामार युद्ध प्रणाली के द्वारा मुगल प्रदेशों पर बार-बार आक्रमण किये। वर्गी गिरि (गुरिल्ला) युद्ध नीति का जनक भी मलिक अम्बर था।

➣ मुगलों के विरुद्ध उसका यह प्रतिशोध काफी लम्बे समय तक चलता रहा; किन्तु 1617 ई. तथा 1621 ई. में वह खुर्रम(शाहजहाँ) के हाथों पराजित हुआ।

➣ मलिक अम्बर ने दक्षिण में टोडरमल की भूमि व्यवस्था के आधार पर रैय्यतवाड़ी (जब्ती प्रणाली) व्यवस्था लागू की तथा भूमि को ठेके (इजारा ) पर देने की प्रथा को समाप्त कर दिया।

➣ मलिक अम्बर की 1626 ई. में मृत्यु के बाद मुगल बादशाह शाहजहाँ ने 1633 ई. में अहमदनगर को मुगल साम्राज्य में मिला लिया।

बुरहान तृतीय (1610-1632 ई.) के बाद हुसैन तृतीय (1632- 33 ई.) शासक हुआ। हुसैन तृतीय अहमद नगर का अंतिम शासक था। इसे शाहजहाँ ने ग्वालियर के किले में कैद करवा लिया।

3.बीदर के बरीद शाही (1527-1619 ई.)

अमीर अली बरीद ने 1527 ई. में बीदर को स्वतन्त्र घोषित करके बरीदशाही वंश की स्थापना की। बीदर बहामनी साम्राज्य से स्वतंत्र होने वाला अन्तिम राज्य था।

➣ अमीर अली बरीद को दक्कन की लोमड़ी कहा जाता है। यह बहमनी साम्राज्य का अन्तिम बजीर (प्रधानमंत्री) था।

➣ इनमें इमादशाही (बरार) और निजामशाही (अहमदनगर) राजवंशों के संस्थापक हिन्दू से इस्लाम धर्म स्वीकार करने वाले दक्कनी लोग थे।

1618-19 ई. में बीजापुर ने बीदर को हड़प लिया और 1656 ई. में बीजापुर ने बीदर मुगलों को सौंप दिया गया।

4.बीजापुर के आदिलशाही (1490-1686ई. )

युसूफ आदिल खाँ

➣ बीजापुर के सूबेदार यूसुफ आदिल खाँ ने 1489-90 ई. में बीजापुर को स्वतन्त्र घोषित करके आदिलशाही वंश की स्थापना की।

➣ आदिलशाही सुल्तान स्वयं को तुर्की के आटोमन राजवंश का वंशज मानते हैं।

➣ आदिल खाँ, धार्मिक रूप से सहिष्णु था, परन्तु शिया धर्म को तरजीह दी। वह कला और साहित्य का भी महान संरक्षक था।

1510 ई. में पुर्तगालियों ने युसूफ आदिल खाँ से गोवा छीन लिया।

इब्राहीम आदिलशाह (1534-1558 ई.)

➣ इस्माइल आदिल शाह (1510-34 ई.) युसूफ आदिल शाह का उत्तराधिकारी था।

➣ इब्राहीम बीजापुर का पहला सुल्तान था, जिसने शाह की उपाधि धारणा की और फारसी के स्थान पर हिन्दवी (दक्कनी-उर्दू) को राजभाषा बनाया और हिन्दुओं को अनेक पदों पर नियुक्त किया ।

➣ इस समय असद खाँ बीजापुर का योग्य मंत्री था।

अली आदिलशाह (1558-1580 ई.)

➣ इब्राहीम के बाद उसका पुत्र अली आदिलशाह गद्दी पर बैठा। उसका विवाह अहमदनगर के हुसैन निजाम शाह की पुत्री चाँदबीबी से हुआ था।

➣ इसे सूफी के रूप में भी जाना जाता है। अली आदिलशाह ने अकबर से भी पहले कैथोलिक मिशनरियों को अपने दरबार में बुलाया।

➣ बीजापुर स्थित गोलगुम्बद का निर्माण मुहम्मद आदिलशाह ने करवाया। यह संसार का दूसरा सबसे बड़ा गुम्बद है। इसकी सर्वाधिक विशेषता, इसके अनुपातों में संगति है।

➣ अली आदिलशाह ने अपने पुस्तकालय में संस्कृत के विद्वान वामन पंडित को नियुक्त किया।

➣ अली आदिलशाह विजयनगर के विरुद्ध बनाये गये मुस्लिम राज्यों के संगठन के प्रमुख थे। इसे रामराय अपने पुत्र के समान समझता था।

इब्राहीम आदिलशाह द्वितीय (1580-1627 ई.)

➣ वह एक महान विद्या प्रेमी और विद्या का संरक्षक था। उसकी प्रजा उसे उदार दृष्टिकोण के कारण जगत गुरु की उपाधि से सम्बोधित करती थी।

➣ गरीबों की सहायता करने के कारण उसे अबला बाबा अथवा निर्धनों का मित्र कहा जाता था।

➣ इब्राहीम आदिल शाह द्वितीय ने हिन्दी गीत संग्रह किताब-ए-नौरस की रचना की। उसने पंढारपुर के विठोबा मन्दिर को भी दान दिया।

➣ इब्राहीम ने नौरसपुर नगर की स्थापना कर उसे अपनी राजधानी बनाई एंव उर्दू को राजकीय भाषा बनाया।

➣ इब्राहीम ने अपने गीतों में विद्या व संगीत की देवी सरस्वती का आह्वान किया है।

➣ इब्राहीम के शासन काल में मोहम्मद कासिम हिन्दू शाह उर्फ फरिश्ता (1560-1620 ई.) ने तारीख-ए-फरिश्ता (गुलशन-ए- इब्राहीम) नाम ऐतिहासिक ग्रन्थ की रचना की। यह पुस्तक मुगल बादशाह जहांगीर के समय 1612 ई. में पूरी हुई।

एलेक्जेण्डर डोव ने 1768 ई. में तारीख-ए-फरिश्ता का अंग्रेजी अनुवाद किया।

➣ इब्राहीम के काल में शुरू के वर्षों में उसकी चाची चाँदी बीबी बीजापुर की वास्तविक शासिका रही, क्योंकि इब्राहिम नौ वर्ष की आयु में ही शासक बना।

➣ इब्राहीम आदिल शाह द्वितीय का मकबरा इब्राहीम रोजा है जिसका निर्माण उसने स्वयं करवाया। उसकी बेगम ताज सुल्ताना भी इसी मकबरे में दफन है।

मुहम्मद अली आदिलशाह द्वितीय (1627-1672 ई.)

➣ इब्राहीम का पुत्र मुहम्मद आदिलशाह उसका उत्तराधिकारी हुआ। वह इब्राहीम का पुत्र व उत्तराधिकारी था। इसने शाहजहाँ से 1636 ई. में सन्धि कर मुगल अधीनता स्वीकार की।

➣ इसके समय मुरारी पंडित ने बीजापुर की राजनीति में काफी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। शिवाजी के पिता शाहजी भी बीजापुर में महत्त्वपूर्ण अधिकारी थे। शाहजी पहले अहमदनगर की सेवा में थे।

मुहम्मद आदिलशाह गोलगुम्बद के नाम से विश्व प्रसिद्ध मकबरे में दफन है, जो विश्व का एक स्थापत्यीय आश्चर्य माना जाता है।

सिकन्दर शाहआदिल

➣ मुहम्मद अली आदिलशाह का उत्तराधिकारी सिकन्दर शाह बीजापुर के आदिलशाही वंश का अन्तिम शासक था।

➣ उसके शासनकाल में 1674 ई. में शिवाजी ने रायगढ़ में छत्रपति के रूप में अपना राज्याभिषेक करवाया था।

1686 ई. में बीजापुर का एक स्वतन्त्र राज्य के रूप में अस्तित्व समाप्त हो गया जब उसे मुगल बादशाह औरंगजेब ने जीतकर अपने साम्राज्य में मिला लिया।

➣ सिकन्दर शाह को मृत्यु के बाद धार्मिक गुरु शेख फहीमुल्ला की कब्र के पास दफना दिया गया।

5.गोलकुण्डा के कुतुबशाही (1518-1687 ई. )

➣ गोलकुण्डा का मुस्लिम राज्य वारंगल के पुराने हिन्दू राज्य के खण्डहरों पर स्थापित हुआ था।

➣ गोलकुण्डा के कुतुबशाही वंश का संस्थापक कुली कुतुबशाह था। उसने 1512 ई. या 1518 ई. में अपनी स्वतन्त्रता की घोषणा की। वह एक तुर्की दास था।

इब्राहीम कुली कुतुबशाह (1550-1580 ई.)

➣ इब्राहीम गोलकुण्डा का पहला सुल्तान था, जिसने कुतुबशाह की उपाधि धारण की। इसका शासनकाल गोलकुण्डा के इतिहास का एक अविस्मरणीय युग था।

➣ वह एक बड़ा सुसंस्कृत व्यक्ति, प्रसिद्ध भाषाविद् और अपने साम्राज्य के हिन्दुओं और मुसलमानों दोनों में बड़ा लोकप्रिय था।

➣ वह दक्कनी राज्यों द्वारा विजयनगर के विरुद्ध गठित संयुक्त सैनिक मोर्चे में शामिल था। 1580 ई. में उसकी मृत्यु हो गई।

मुहम्मद कुली कुतुबशाह (1580-1612 ई.)

➣ इसकी साहित्य व स्थापत्य में रूचि थी। यह हैदराबाद नगर का संस्थापक था। हैदराबाद को साहित्यकारों का बौद्धिक क्रीड़ा स्थल कहा जाता है।

➣ उसने दक्कनी उर्दू में लिखित प्रथम काव्य संग्रह दीवान का लेखक था। उसने उर्दू और तेलुगू को समान रूप से संरक्षण प्रदान किया।

➣ मुहम्मद कुली कुतुबशाह ने 1591 ई. में हैदराबाद की चार मीनार का निर्माण कराया, जिसकी गणना भारत में निर्मित सबसे भव्य इमारतों में की जाती है।

➣ मुहम्मद कुली को दक्किनी उर्दू या हिन्दवी, जो आधुनिक उर्दू है, का जन्मदाता माना जाता था। 1612 ई. में उसकी मृत्यु हो गयी।

➣ सुल्तान मुहम्मद कुली कुतुबशाह साहित्य एवं स्थापत्य कला में विशेष रुचि रखता था। वह पहला व्यक्ति था, जिसने काव्य में धर्मनिरपेक्ष विषयों पर लेखनी चलाई।

अब्दुल्ला कुतुबशाह (1626-1672 ई.)

➣ अब्दुल्ला- सुल्तान के अल्पायु होने के कारण उसकी सुयोग्य माता हयात बख्श बेगम ने शासन का संचालन किया। उसने अपने नाम पर अनेक ग्रामों, सरायों आदि का निर्माण कराया।

➣ अब्दुल्ला कुतुबशाह ने 1636 ई. में मुगलों से सन्धि कर ली तथा मुगल बादशाह शाहजहाँ का नाम खुतबागोलकुण्डा के सिक्कों में सम्मिलित किया।

➣ मिर्जा निजामुद्दीन अहमद के हकीकत-उस-सलातीन से हमें अब्दुल्ला कुतुबशाह के शासन के इतिहास का वर्णन मिलता है।

➣ अब्दुल्ला के काल में मीर मुहम्मद सैयद (मीर जुमला) नामक फारसी उसका वजीर था, जो बाद में मुगलों की सेवा में चला गया।

➣ गोलकुण्डा के अन्तिम सुल्तान अबुल हसन के काल में 1672 ई. से 1687 ई. तक मदन्नाअखन्ना दो भाइयों ने गोलकुण्डा के प्रशासन व सेना पर नियंत्रण कर रखा था।

1687 ई. में औरंगजेब ने गोलकुण्डा को मुगल साम्राज्य में मिला लिया व सुल्तान अबुल हसन कुतुबशाह को बन्दी बनाकर दौलताबाद के किले में भेज दिया।

वजबीफैज नामक विद्वान भी गोलकुण्डा के दरबार में थे। वजबी ने कुतुब मुशतरीसबरस नामक किताबें लिखी।

➣ मुहम्मद नुसरत नामक विद्वान ने दक्षिण में उर्दू में गुलशन-ए-इश्क, अलीनामातारीखे सिकन्दरी लिखी।

➣ कुतुबशाही साम्राज्य की प्रारम्भिक राजधानी गोलकुण्डा हीरों का विश्व प्रसिद्ध बाजार तथा मछलीपट्टनम एक प्रसिद्ध बन्दरगाह था।

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