1. निम्नलिखित में से किसने दिल्ली को सल्तनत की राजधानी के रूप में स्थापित किया था ?
U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2004
U.P.P.C.S. (Mains) 2012
U.P.P.C.S. (Mains) 2012
उत्तर-(b)
दिल्ली को सल्तनत की स्थायी राजधानी बनाने का कार्य इल्तुतमिश (1211-1236 ई.) ने किया था, जबकि इससे पहले कुतुबुद्दीन ऐबक का शासन-केंद्र लाहौर ही रहा था। इल्तुतमिश ने मुद्रा-व्यवस्था में भी सुधार करते हुए शुद्ध अरबी ढंग के चांदी के टंका और तांबे के जीतल सिक्के चलाए तथा सिक्कों पर टकसाल का नाम अंकित करने की प्रथा शुरू की।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:इल्तुतमिश ने ही ‘इक्ता व्यवस्था’ को सुव्यवस्थित रूप दिया, जो आगे सल्तनत प्रशासन का आधार बनी। इसके अलावा उसने ‘चालीसा’ या ‘तुर्कान-ए-चहलगानी’ नामक चालीस तुर्क अमीरों का एक शक्तिशाली गुट भी संगठित किया था, जो आगे की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता रहा।
2.गुलाम वंश का प्रथम शासक कौन था?
47th B.P.S.C. (Pre) 2005
53rd to 55th B.P.S.C. (Pre) 2011
53rd to 55th B.P.S.C. (Pre) 2011
उत्तर-(b)
दिल्ली सल्तनत के प्रथम शासक के रूप में कुतुबुद्दीन ऐबक का नाम लिया जाता है, जिसने 1206 ई. में सत्ता संभाली। यद्यपि इतिहासकार इन शुरुआती सुल्तानों को ‘गुलाम वंश’ कहने के बजाय ‘ममलूक वंश’ कहना अधिक उपयुक्त मानते हैं, क्योंकि वे एक ही परिवार के नहीं थे बल्कि अलग-अलग तुर्क सरदार थे जो दास होने के बावजूद स्वतंत्र माता-पिता की संतान थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:‘ममलूक’ शब्द अरबी भाषा का है, जिसका अर्थ होता है ‘स्वामित्व में लिया गया व्यक्ति’; इस्लामी इतिहास में मिस्र की सल्तनत पर भी ममलूकों का शासन रहा था, जो दिल्ली के ममलूक सुल्तानों से अलग था।
3. निम्नलिखित में से किसने प्रसिद्ध कुतुबमीनार के निर्माण में योगदान नहीं दिया?
U.P.P.C.S. (Mains) 2013
उत्तर-(c)
कुतुबमीनार के निर्माण की शुरुआत कुतुबुद्दीन ऐबक ने की थी, परंतु इसे पूर्ण रूप इल्तुतमिश के समय में मिला। बाद में फिरोजशाह तुगलक के काल में बिजली गिरने से इसकी ऊपरी मंजिल क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिसकी मरम्मत करते हुए उसने एक के स्थान पर दो छोटी मंजिलें जोड़ दीं। ग्यासुद्दीन तुगलक का इस स्मारक के निर्माण से कोई संबंध नहीं था, इसलिए विकल्प (c) सही है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:कुतुबमीनार लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर से निर्मित है तथा इसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है; इसकी ऊँचाई लगभग 73 मीटर है, जो इसे ईंटों से बनी विश्व की सबसे ऊँची मीनारों में शामिल करती है।
4.गुलाम वंश का संस्थापक कौन था?
U.P.P.C.S. (Pre) 1990
उत्तर-(d)
कुतुबुद्दीन ऐबक को परंपरागत रूप से दिल्ली सल्तनत के गुलाम वंश (1206-1290 ई.) का संस्थापक माना जाता है, हालांकि वास्तव में इस काल के सुल्तान एक वंश से नहीं बल्कि भिन्न-भिन्न तुर्क परिवारों से संबंधित थे। यही कारण है कि आधुनिक इतिहासकार इन्हें ‘प्रारंभिक तुर्क सुल्तान’ या ‘ममलूक सुल्तान’ कहना अधिक उचित मानते हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:कुतुबुद्दीन ऐबक मूल रूप से मध्य एशिया का तुर्क था, जिसे निशापुर के काजी फखरुद्दीन अब्दुल अजीज कूफी ने खरीदा और बाद में मुहम्मद गोरी को बेच दिया था, जहाँ से उसका उत्थान आरंभ हुआ।
5. दिल्ली का वह प्रथम सुल्तान कौन था, जिसने नियमित सिक्के जारी किए तथा दिल्ली को अपने साम्राज्य की राजधानी घोषित किया ?
U.P.P.C.S. (Mains) 2014
उत्तर-(b)
इल्तुतमिश दिल्ली सल्तनत का वह पहला शासक था जिसने व्यवस्थित रूप से चांदी और तांबे के सिक्के जारी किए और दिल्ली को औपचारिक राजधानी का दर्जा दिया। उसके पूर्ववर्ती कुतुबुद्दीन ऐबक ने लाहौर से शासन किया था और स्थायी मुद्रा-व्यवस्था स्थापित नहीं की थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:इल्तुतमिश को बगदाद के अब्बासी खलीफा अल-मुस्तंसिर से 1229 ई. में मान्यता-पत्र (खिलाफत की स्वीकृति) प्राप्त हुआ था, जिससे उसकी सत्ता को धार्मिक वैधता मिली और वह ‘सुल्तान-ए-आजम’ की उपाधि धारण करने का अधिकारी बना।
6.‘ढाई दिन का झोपड़ा’ क्या है?
56th to 59th B.P.S.C. (Pre) 2015
उत्तर-(a)
‘ढाई दिन का झोपड़ा’ अजमेर में स्थित एक मस्जिद है जिसका निर्माण कुतुबुद्दीन ऐबक ने करवाया था। यह नाम इस मान्यता के कारण पड़ा कि इसका निर्माण मात्र ढाई दिनों में पूरा कर लिया गया था, हालांकि वास्तव में यह नामकरण यहाँ आयोजित होने वाले ढाई दिवसीय उर्स या मेले से भी जुड़ा माना जाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:यह मस्जिद एक पूर्ववर्ती संस्कृत पाठशाला (सरस्वती मंदिर) के स्थान पर बनाई गई थी, और इसके स्तंभों तथा अलंकरण में हिंदू-जैन स्थापत्य शैली की स्पष्ट झलक आज भी देखी जा सकती है।
7.कुतुबुद्दीन ऐबक की राजधानी थी-
41st B.P.S.C. (Pre) 1996
U.P.P.C.S. (Pre) 1990
U.P.P.C.S. (Pre) 1990
उत्तर-(a)
मुहम्मद गोरी की मृत्यु (1206 ई.) के पश्चात लाहौर के अमीरों ने कुतुबुद्दीन ऐबक को सत्ता संभालने हेतु आमंत्रित किया, जहाँ उसने शासन की बागडोर थामी। ताजुद्दीन यल्दौज से निरंतर खतरे के कारण ऐबक सदैव लाहौर में ही रहा और कभी दिल्ली नहीं जा सका, इसलिए उसकी राजधानी लाहौर ही बनी रही।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:ऐबक ने अपनी स्थिति मजबूत करने हेतु कूटनीतिक विवाह संबंध भी बनाए — उसने अपनी एक बेटी का विवाह इल्तुतमिश से तथा बहन का विवाह नासिरुद्दीन कुबाचा से करवाया था, जिससे संभावित प्रतिद्वंद्वी शक्तियों को साध लिया गया।
8.दिल्ली सल्तनत का कौन-सा सुल्तान ‘लाख बख्श’ के नाम से जाना जाता है?
Jharkhand P.C.S. (Pre) 2003
उत्तर-(d)
कुतुबुद्दीन ऐबक अपने उदार स्वभाव और मुक्तहस्त दान देने की प्रवृत्ति के कारण ‘लाख बख्श’ (लाखों का दानदाता) कहा गया। समकालीन इतिहासकार फरिश्ता के अनुसार लोग किसी भी दानवीर व्यक्ति की तुलना ऐबक से करते थे। उसे साहित्य और स्थापत्य कला से विशेष लगाव था, जिसके चलते उसने दिल्ली में कुव्वत-उल-इस्लाम और अजमेर में ढाई दिन का झोपड़ा मस्जिदों का निर्माण करवाया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:विद्वान हसन निजामी ने अपनी प्रसिद्ध रचना ‘ताज-उल-मआसिर’ ऐबक को ही समर्पित की थी, जो इस काल के राजनीतिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण स्रोत मानी जाती है।
9.सुल्तान कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु कैसे हुई?
I.A.S. (Pre) 2003
उत्तर-(d)
सन् 1210 ई. में लाहौर में चौगान (आधुनिक पोलो से मिलता-जुलता घुड़सवारी खेल) खेलते समय घोड़े से गिर जाने के कारण कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु हो गई थी। उसे लाहौर में ही दफनाया गया, जहाँ आज भी उसका मकबरा स्थित है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:ऐबक की मृत्यु के पश्चात उसका पुत्र आरामशाह कुछ समय के लिए दिल्ली की गद्दी पर बैठा, परंतु अमीरों के असंतोष के कारण उसे शीघ्र ही हटाकर इल्तुतमिश को सुल्तान बनाया गया।
10. निम्नलिखित में से कौन-सी इल्तुतमिश के राज्यकाल में सल्तनत की राजधानी थी?
U.P.R.O/A.R.O. (Pre) 2016
उत्तर-(d)
इल्तुतमिश ने सत्ता संभालने के बाद दिल्ली को सुदृढ़ करते हुए उसे ही अपनी स्थायी राजधानी बनाया, जो उसके पूर्ववर्ती ऐबक के समय लाहौर से शासित होती थी। दिल्ली को राजधानी बनाने के साथ ही उसने सल्तनत के प्रशासनिक ढांचे को भी संगठित रूप दिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:इल्तुतमिश ही वह पहला सुल्तान था जिसने मंगोल आक्रमणकारी चंगेज़ खान के समय भारत में शरण लेने आए ख्वारिज्मी शासक के पुत्र जलालुद्दीन मंगबर्नी को शरण देने से इन्कार कर दिया था, जिससे दिल्ली सल्तनत मंगोल आक्रमण के सीधे प्रकोप से बच गई।
11.कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद तथा अढ़ाई दिन का झोपड़ा क्रमशः स्थित हैं-
Jharkhand P.C.S. (Pre) 2021
उत्तर-(d)
कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद दिल्ली में स्थित है और इसे भारत में बनी सबसे प्राचीन मस्जिदों में से एक माना जाता है, जबकि अढ़ाई दिन का झोपड़ा अजमेर में स्थित है। दोनों ही इमारतों का निर्माण कुतुबुद्दीन ऐबक के आदेश पर हुआ था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद का निर्माण एक पूर्ववर्ती हिंदू-जैन मंदिर परिसर की सामग्री से किया गया था, और इसके परिसर में स्थित प्रसिद्ध ‘लौह स्तंभ’ गुप्तकाल का है, जो आज भी अपनी जंगरोधी संरचना के कारण वैज्ञानिकों के लिए शोध का विषय बना हुआ है।
12. सल्तनत के निम्नलिखित सुल्तानों में से किसने सर्वप्रथम अपनी राजधानी दिल्ली स्थानांतरित की थी?
U.P.P.C.S (Mains) 2016
उत्तर-(c)
दिल्ली सल्तनत की राजधानी को सबसे पहले दिल्ली स्थानांतरित करने का कार्य इल्तुतमिश ने किया, जबकि उससे पहले कुतुबुद्दीन ऐबक का शासन-केंद्र लाहौर में था। यह कदम सल्तनत की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ, क्योंकि दिल्ली भौगोलिक रूप से अधिक सुरक्षित और केंद्रीय स्थिति में थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:इल्तुतमिश के काल में ही दिल्ली में ‘हौज-ए-शम्सी’ नामक एक विशाल जलाशय का निर्माण कराया गया था, जो नगर की जल-आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु बनाया गया था और आज भी महरौली क्षेत्र में स्थित है।
13. किसके शासनकाल में मंगोल प्रथम बार सिंधु के तट पर देखे गए?
U.P.P.S.C. (GIC) 2010
उत्तर-(c)
मंगोल आक्रमणकारियों का सिंधु नदी के किनारे प्रथम बार आगमन मध्यकालीन भारत के इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है। चंगेज खां के प्रकोप से बचने हेतु ख्वारिज्म साम्राज्य का राजकुमार जलालुद्दीन मंगबरनी भागकर सिंधु नदी के तट तक पहुंचा था, जिसका पीछा करते हुए मंगोल सैनिक भी यहाँ आ पहुंचे थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:मंगबरनी ने सिंधु नदी पार करते समय अपने परिवार को नदी में डूबने से बचाने के लिए अद्भुत साहस दिखाया था, जिसकी प्रशंसा स्वयं चंगेज खां ने भी की थी।
14. चंगेज खान का मूल नाम
U.P. P.C.S. (Pre) 2015
उत्तर-(c)
मंगोल साम्राज्य के संस्थापक चंगेज खान का बचपन का या वास्तविक नाम तेमुजिन (तेमुचिन) था, जिसे बाद में मंगोल कबीलों को एकजुट करने पर 1206 ई. में ‘चंगेज खान’ (विश्व का स्वामी) की उपाधि दी गई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:चंगेज खान के नेतृत्व में स्थापित मंगोल साम्राज्य इतिहास का सबसे बड़ा भू-सीमावर्ती (contiguous) साम्राज्य बना, जो चीन से लेकर पूर्वी यूरोप तक फैला हुआ था।
15. दिल्ली का प्रथम मुस्लिम शासक कौन था?
U.P.P.C.S. (Pre) 2002
उत्तर-(b)
कानूनी और व्यावहारिक दोनों दृष्टियों से दिल्ली का प्रथम वास्तविक सुल्तान इल्तुतमिश ही था, क्योंकि उसने अपने पद की पुष्टि बगदाद के खलीफा से प्राप्त की और ‘सुल्तान-ए-आजम’ की उपाधि धारण की। उसने ताजुद्दीन यल्दौज एवं नासिरुद्दीन कुबाचा जैसे प्रतिद्वंद्वियों को समाप्त कर तुर्की राज्य को संगठित रूप दिया तथा सुल्तान पद को वंशानुगत आधार प्रदान किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:इल्तुतमिश को इतिहास में दिल्ली सल्तनत का वास्तविक संस्थापक भी कहा जाता है, क्योंकि उसने ही प्रशासनिक, आर्थिक और सैनिक दृष्टि से सल्तनत की स्थायी नींव रखी।
16. मंगोल आक्रमणकारी चंगेज खां भारत की उत्तर-पश्चिम सीमा पर निम्न में से किसके काल में आया था?
U.P.P.C.S. (Pre) 1993
उत्तर-(b)
इल्तुतमिश के शासनकाल में ही मंगोल नेता चंगेज खां भारत की उत्तर-पश्चिम सीमा के निकट पहुंचा था, जब वह ख्वारिज्म शाह के पुत्र जलालुद्दीन मंगबरनी का पीछा कर रहा था। इल्तुतमिश ने सूझबूझ दिखाते हुए मंगबरनी को शरण देने से इन्कार कर दिया, जिससे चंगेज खां का प्रत्यक्ष आक्रमण भारत पर नहीं हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:यह इल्तुतमिश की कूटनीतिक दूरदर्शिता का परिणाम था कि भारत उस भीषण मंगोल विनाश से बच गया, जिसने मध्य एशिया तथा फारस के बड़े भाग को उजाड़ दिया था।
17. चंगेज खां के अधीन मंगोलों ने भारत पर आक्रमण किया था-
I.A.S. (Pre) 2001
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2013
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2013
उत्तर-(b)
चंगेज खां के नेतृत्व में मंगोलों का भारत की सीमा पर आगमन इल्तुतमिश के काल में हुआ था, जो जलालुद्दीन मंगबरनी का पीछा करते हुए सिंधु तक पहुंचे थे, परंतु इल्तुतमिश की सतर्क नीति के कारण यह केवल सीमावर्ती घटना बनकर रह गई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:इसके पश्चात भी दिल्ली सल्तनत को मंगोल आक्रमणों का सामना बार-बार करना पड़ा, जिसमें बलबन और अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में हुए आक्रमण विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं, जिन्हें खिलजी ने कठोरता से दबाया था।
18. ‘गुलाम का गुलाम’ किसे कहा गया था?
U.P.P.C.S (Pre) 2016
उत्तर-(d)
इल्तुतमिश को ‘गुलाम का गुलाम’ कहा जाता है, क्योंकि उसे मुहम्मद गोरी के दास कुतुबुद्दीन ऐबक ने खरीदा था। ऐबक ने उसकी योग्यता को पहचानते हुए उसे ‘सर-ए-जहांदार’ (अंगरक्षकों का प्रधान) जैसा महत्वपूर्ण पद सौंपा और बाद में अपनी पुत्री का विवाह भी उससे कर दिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:इल्तुतमिश मूल रूप से इल्बारी तुर्क जनजाति से संबंधित था, और दास होते हुए भी अपनी प्रशासनिक क्षमता तथा सैनिक कुशलता के बल पर वह दिल्ली सल्तनत के सबसे शक्तिशाली सुल्तानों में से एक बना।
19. निम्नलिखित में से कौन मध्यकालीन भारत की प्रथम महिला शासिका थी ?
U.P.P.C.S. (Mains) 2004
U.P.P.S.C. (GIC) 2010
U.P.P.S.C. (GIC) 2010
उत्तर-(a)
रजिया सुल्तान (1236-1240 ई.) मध्यकालीन भारत की प्रथम महिला शासिका मानी जाती है, जिसने स्त्रियों के संबंध में प्रचलित इस्लामी परंपराओं को तोड़ते हुए सत्ता संभाली। उसने सत्ता को सरदारों या सूबेदारों में बांटने के बजाय सुल्तान के हाथों में केंद्रित रखने की नीति अपनाई, जो उसके पिता इल्तुतमिश के प्रभुत्वसंपन्न राजतंत्र के सिद्धांत के अनुरूप थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:रजिया ने स्वयं को ‘सुल्ताना’ के स्थान पर ‘सुल्तान’ कहलाना पसंद किया तथा पुरुषों की भांति दरबार में उपस्थित होती थी; तुर्क अमीरों के विरोध और विद्रोह के कारण अंततः उसकी हत्या कर दी गई।
20. दिल्ली का कौन सुल्तान मंगोल नेता चंगेज खां का समकालीन था ?
U.P.P.C.S. (Mains) 2007
उत्तर-(a)
दिल्ली का सुल्तान इल्तुतमिश मंगोल नेता चंगेज खां का समकालीन था, क्योंकि दोनों का सक्रिय शासन-काल लगभग एक ही समयावधि (13वीं शताब्दी के प्रारंभिक दशकों) में रहा। इस दौरान चंगेज खां की सेनाएं मंगबरनी का पीछा करते हुए भारत की सीमा तक पहुंची थीं, परंतु इल्तुतमिश की सतर्क कूटनीति के कारण कोई सीधा संघर्ष नहीं हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:चंगेज खां की मृत्यु 1227 ई. में हुई, जो इल्तुतमिश के शासनकाल (1211-1236 ई.) के भीतर ही आती है, जिससे यह समकालीनता ऐतिहासिक रूप से पूर्णतः पुष्ट होती है।
21. वह प्रथम मुस्लिम शासक कौन था, जिसने शासन के द्विति (Theory of Kingship) को राजाओं के ईश्वरीय अधिकार सिद्धांत (Theory of Divine Right) के समान प्रतिपादित किया था ?
63rd B.P.S.C. (Pre) 2017
उत्तर-(c)
बलबन वह पहला मुस्लिम शासक था, जिसने राजत्व के सिद्धांत को ईश्वरीय अधिकार सिद्धांत के समान प्रस्तुत किया। उसके अनुसार सुल्तान को सत्ता सीधे ईश्वर से प्राप्त होती है, अतः वह ‘नियामत-ए-खुदाई’ (ईश्वर की देन) है और उसके कार्यों की आलोचना का अधिकार किसी को नहीं है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:बलबन ने अपने इस सिद्धांत को व्यावहारिक रूप देने के लिए दरबार में सिजदा और पैबोस जैसी कठोर शिष्टाचार प्रथाएं भी लागू की थीं, जिससे सुल्तान की दैवीय गरिमा स्थापित हो सके।
22. रजिया बेगम को सत्ताच्युत करने में किसका हाथ था?
U. P. Lower Sub. (Pre) 2004
उत्तर-(c)
रजिया को सत्ता से हटाने में तुर्क सरदारों की भूमिका प्रमुख रही, जिन्होंने भटिंडा के गवर्नर मलिक अल्तूनिया के नेतृत्व में उसके विरुद्ध विद्रोह किया। यह विद्रोह तुर्क अमीरों के इस असंतोष का परिणाम था कि एक स्त्री उन पर शासन कर रही थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:विद्रोह के बाद रजिया ने राजनीतिक चातुर्य दिखाते हुए मलिक अल्तूनिया से विवाह कर सत्ता पुनः प्राप्त करने का प्रयास किया, परंतु अंततः 1240 ई. में उसकी हत्या कर दी गई।
23. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-
I.A.S. (Pre) 2021
उत्तर-(a)
इल्तुतमिश के काल में मंगोल नेता चंगेज खान जलालुद्दीन मांगबर्नी का पीछा करते हुए सिंधु नदी तक पहुंचा था, जिससे तुर्की राज्य पर संकट के बादल मंडराए, इस कारण यह कथन सत्य है। दूसरी ओर, तैमूर का आक्रमण 1398 ई. में नासिरुद्दीन महमूद के शासनकाल में हुआ था, न कि मुहम्मद बिन तुगलक के समय, इसलिए वह कथन असत्य है। वास्को द गामा के 1498 ई. में केरल पहुंचने के समय विजयनगर पर नरसा नायक के पुत्र तिम्मा का शासन था, अब्दुर्रज्जाक का आगमन तो देवराय द्वितीय के काल में पूर्व में ही हो चुका था, इसलिए तीसरा कथन भी असत्य है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:तैमूर के आक्रमण के समय दिल्ली में भीषण नरसंहार और लूट हुई थी, जिसके कारण तुगलक वंश की शक्ति और अधिक क्षीण हो गई तथा सैय्यद वंश के उदय का मार्ग प्रशस्त हुआ।
24. किस दिल्ली सुल्तान ने ‘रक्त एवं लौह’ की नीति अपनाई?
66th B.P.S.C. (Pre) 2020
उत्तर-(b)
गयासुद्दीन बलबन को ‘रक्त और लौह’ की नीति अपनाने वाला सुल्तान माना जाता है, क्योंकि उसने विद्रोहियों और प्रतिद्वंद्वी अमीरों के प्रति कठोरतम दंड-व्यवस्था लागू की तथा सत्ता को पूर्णतः केंद्रीकृत कर लिया। उसका मानना था कि सुल्तान का पद ईश्वर-प्रदत्त है, अतः उसका निरंकुश होना आवश्यक है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:बलबन ने इस नीति का सबसे कठोर प्रयोग मेवाती तथा दोआब क्षेत्र के डाकुओं एवं विद्रोही हिन्दू जमींदारों के दमन में किया, जिन्हें कुचलने के लिए उसने विशेष सैनिक अभियान चलाए थे।
25. दिल्ली के सुल्तान बलबन का पूरा नाम________बलबन था?
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2004
उत्तर-(c)
बलबन का पूरा नाम गयासुद्दीन बलबन था और उसने 1266 से 1286 ई. तक शासन किया। वह इल्तुतमिश की तरह ही इल्बारी तुर्क जनजाति से संबंधित था तथा सत्ता प्राप्ति से पूर्व उसे ‘उलुग खां’ की उपाधि से जाना जाता था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:बलबन मूल रूप से नासिरुद्दीन महमूद के काल में उसका वज़ीर (प्रधानमंत्री) रहा था, और इस पद पर रहते हुए उसने वास्तविक सत्ता पहले से ही अपने हाथों में संगठित कर ली थी।
26. निम्नलिखित में से किसने भारत में प्रसिद्ध फारसी त्यौहार ‘नौरोज’ को आरंभ करवाया ?
I.A.S. (Pre) 1993
उत्तर-(a)
बलबन ने अपने दरबार को ईरानी राजसत्ता के आदर्शों के अनुरूप संगठित किया और इसी क्रम में उसने फारसी त्यौहार ‘नौरोज’ को बड़ी धूमधाम से मनाने की प्रथा भारत में आरंभ की। साथ ही उसने सिजदा (भूमि पर झुककर अभिवादन) और पैबोस (सुल्तान के चरण चूमना) जैसी परंपराएं भी अपने दरबार में लागू की।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:‘नौरोज’ मूलतः पारसी नववर्ष का त्यौहार है, जो वसंत संपात के दिन मनाया जाता है और आज भी ईरान तथा मध्य एशिया के कई देशों में राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाता है।
27. अपनी शक्ति को समेकित करने के बाद बलबन ने भव्य उपाधि धारण की-
I.A.S. (Pre) 1997
उत्तर-(c)
सत्ता को मजबूती से स्थापित करने के पश्चात बलबन ने फारसी राजतंत्र की परंपराओं से प्रेरित होकर ‘जिल्ले-इलाही’ (ईश्वर का प्रतिबिंब) की भव्य उपाधि धारण की। उसका मानना था कि राजा की प्रतिष्ठा पैगंबर के बाद सर्वोच्च होनी चाहिए, इसी विचार के अनुरूप उसने अपने राजत्व को दैवीय स्वरूप प्रदान किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:‘दीन-ए-इलाही’ नामक एक भिन्न धार्मिक पंथ बहुत बाद में मुगल सम्राट अकबर द्वारा 1582 ई. में स्थापित किया गया था, जिसे बलबन की ‘जिल्ले-इलाही’ उपाधि से भ्रमित नहीं करना चाहिए।
28. इल्तुतमिश ने बिहार में अपना प्रथम सूबेदार नियुक्त किया था?
48th to 52nd B.P.S.C. (Pre) 2008
उत्तर-(d)
इल्तुतमिश ने बिहार तथा राजमहल की पहाड़ियों के निकट हिसामुद्दीन ऐवाज को पराजित कर उसकी अधीनता स्वीकार करवाई और इसके पश्चात बिहार के प्रथम सूबेदार के रूप में मलिक जानी की नियुक्ति की। यह नियुक्ति इल्तुतमिश की पूर्वी क्षेत्रों पर नियंत्रण स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:इल्तुतमिश के समय बंगाल और बिहार जैसे दूरस्थ प्रांतों पर केंद्रीय नियंत्रण बनाए रखना सदैव एक चुनौती रहा, और आगे चलकर यही क्षेत्र सल्तनत-काल में बार-बार विद्रोह का केंद्र बने।
29. नीचे दो वक्तव्य दिए गए हैं, एक को कथन (a) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है-
कथन (a) : बलबन ने अपने शासन को शक्तिशाली बनाया और सारी सत्ता अपने हाथ में केंद्रित कर ली।
कारण (R) : वह उत्तर-पश्चिम सीमा को मंगोल आक्रमण से सुरक्षित करना चाहता था।
कथन (a) : बलबन ने अपने शासन को शक्तिशाली बनाया और सारी सत्ता अपने हाथ में केंद्रित कर ली।
कारण (R) : वह उत्तर-पश्चिम सीमा को मंगोल आक्रमण से सुरक्षित करना चाहता था।
U.P.P.C.S. (Mains) 2013
उत्तर-(b)
बलबन ने सुल्तान के पद को दैवीय घोषित करते हुए संपूर्ण सत्ता अपने हाथों में केंद्रित कर ली, साथ ही ‘सिजदा’ और ‘पैबोस’ जैसी प्रथाएं भी आरंभ कीं, इस तरह कथन (a) सत्य है। उसने मंगोल आक्रमण की रोकथाम हेतु उत्तर-पश्चिम सीमा पर सुदृढ़ दुर्ग भी बनवाए, जिससे कारण (R) भी सत्य है, परंतु यह सत्ता-केंद्रीकरण की वास्तविक व्याख्या नहीं करता, क्योंकि सत्ता-केंद्रीकरण का मूल कारण आंतरिक तुर्क अमीरों के विरोध को नियंत्रित करना था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:बलबन ने सीमा सुरक्षा के लिए भटिंडा, सुनाम तथा समाना जैसे स्थानों पर सैनिक छावनियां स्थापित की थीं और इन क्षेत्रों में योग्य व अनुभवी सैनिक अधिकारियों को नियुक्त किया था।
30. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन बलबन के संबंध में सही नहीं है ?
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2008
उत्तर-(b)
बलबन ने राजा को ‘नियामत-ए-खुदाई’ घोषित किया, इल्तुतमिश द्वारा स्थापित शक्तिशाली अमीर-गुट ‘तुर्कान-ए-चहलगानी’ का प्रभाव समाप्त किया, तथा 1279 ई. में बंगाल के विद्रोही सूबेदार तुगरिल खां के विद्रोह को कठोरता से कुचला। परंतु इक्तादारी व्यवस्था का प्रारंभ बलबन ने नहीं, बल्कि उससे पहले इल्तुतमिश ने किया था, इसलिए विकल्प (b) सही उत्तर है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:तुगरिल खां के विद्रोह को दबाने के लिए बलबन स्वयं वृद्धावस्था में भी बंगाल अभियान पर गया था, जो उसकी प्रशासनिक दृढ़ता और अनुशासन-प्रियता को दर्शाता है।
31.निम्नलिखित सुल्तानों में से किसने गढ़मुक्तेश्वर की मस्जिद की दीवारों पर अपने शिलालेख में स्वयं को ‘खलीफा का सहायक’ कहा है ?
U.P.R.O./A.R.O. (Mains) 2014
उत्तर-(a)
बलबन ने गढ़मुक्तेश्वर की मस्जिद की दीवार पर उत्कीर्ण अपने शिलालेख में स्वयं को ‘खलीफा का सहायक’ कहा, जो यह दर्शाता है कि अपने निरंकुश राजत्व-सिद्धांत के बावजूद वह खलीफा की धार्मिक-राजनीतिक प्रतिष्ठा को औपचारिक रूप से स्वीकार करता था। यह उस काल की एक सामान्य प्रवृत्ति थी, जिसमें सुल्तान अपनी सत्ता को धार्मिक वैधता प्रदान करने के लिए खलीफा से संबंध दर्शाते थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:यद्यपि बगदाद पर 1258 ई. में मंगोलों के आक्रमण से अब्बासी खलीफा-तंत्र का वास्तविक पतन हो चुका था, फिर भी दिल्ली के सुल्तान औपचारिक रूप से खलीफा के नाम का उल्लेख अपने सिक्कों और शिलालेखों में करते रहे।
Leave a Reply